नवीन समाचार, हरिद्वार, 28 दिसंबर 2025 (Doctor Caught Taking Bribe)। उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद के रुड़की स्थित राजकीय चिकित्सालय में शनिवार रात विजिलेंस विभाग ने एक सरकारी चिकित्सक को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। आरोप है कि चिकित्सक ने मारपीट के एक प्रकरण में विधिक अनुपूरक चिकित्सीय प्रतिवेदन तैयार करने के नाम पर धन की मांग की थी। यह कार्रवाई न केवल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता के प्रश्न को सामने लाती है, बल्कि आम नागरिकों के भरोसे और न्याय प्रक्रिया की विश्वसनीयता से भी सीधे जुड़ी हुई है।
शिकायत से शुरू हुई कार्रवाई का पूरा घटनाक्रम
हरिद्वार जनपद के रुड़की नगर में स्थित राजकीय चिकित्सालय की आपातकालीन सेवा में तैनात चिकित्सक आभास सिंह पर एक घायल व्यक्ति से धन मांगने का आरोप सामने आया। पुलिस व संबंधितों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मारपीट की घटना में घायल व्यक्ति को विधिक प्रक्रिया के अंतर्गत अनुपूरक चिकित्सीय प्रतिवेदन की आवश्यकता थी। इसी प्रक्रिया को पूरा करने के नाम पर चिकित्सक द्वारा तीस हजार रुपये की मांग की गई। इस मांग से आहत होकर पीड़ित ने देहरादून स्थित विजिलेंस विभाग में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पूरे प्रकरण की गोपनीय जांच शुरू की गई।
रंगे हाथ गिरफ्तारी और तलाशी की प्रक्रिया
योजना के अनुसार, शनिवार देर सायं विजिलेंस टीम शिकायतकर्ता के साथ रुड़की राजकीय चिकित्सालय पहुंची। चिकित्सक उस समय आपातकालीन सेवा में ड्यूटी पर थे। तय स्थान पर जैसे ही शिकायतकर्ता ने रासायनिक पदार्थ लगे हुए बीस हजार रुपये चिकित्सक को सौंपे, उसी क्षण विजिलेंस टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद टीम चिकित्सक को उनके सरकारी आवास पर ले गई, जहां विधिक प्रक्रिया के तहत तलाशी ली गई। तलाशी और प्रारंभिक पूछताछ के उपरांत चिकित्सक को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर देहरादून ले जाया गया।
आम लोगों पर क्या असर पड़ता है ऐसे मामलों का
सरकारी चिकित्सालय आम नागरिकों के लिए अंतिम सहारा माने जाते हैं, विशेषकर उन लोगों के लिए जो निजी स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च वहन नहीं कर सकते। ऐसे में जब स्वास्थ्य तंत्र से जुड़े व्यक्ति पर रिश्वत लेने जैसे आरोप सामने आते हैं, तो इसका सीधा प्रभाव जनता के विश्वास पर पड़ता है। क्या गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को न्याय और उपचार के लिए अतिरिक्त धन देना पड़ेगा। यह प्रश्न इस घटना के साथ फिर से उभरकर सामने आया है।
नियम-कानून और आगे की संभावित कार्रवाई
विजिलेंस विभाग के अनुसार, आरोपित चिकित्सक के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत अभियोग दर्ज करने की प्रक्रिया की जा रही है। विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो सेवा नियमों के तहत कठोर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ दंडात्मक प्रावधान भी लागू हो सकते हैं। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग स्तर पर भी आंतरिक समीक्षा की संभावना है, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सरकारी सेवाओं में जवाबदेही, पारदर्शिता और नागरिकों के अधिकारों से सीधे जुड़ा हुआ है। क्या इस कार्रवाई से स्वास्थ्य तंत्र में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। क्या आम लोगों का भरोसा फिर से मजबूत हो पाएगा। इन प्रश्नों के उत्तर आने वाले समय में प्रशासनिक निर्णयों और न्यायिक प्रक्रिया से तय होंगे।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















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