पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय के गूलरभोज स्थित निर्माण पर अतिक्रमण नोटिस, 15 दिन में हटाने के निर्देश

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नवीन समाचार, देहरादून, 20 जनवरी 2026 (Encroachment Notice-Minister)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से राज्य स्तर पर चल रही अतिक्रमण विरोधी मुहिम के बीच भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party—BJP) के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय के गूलरभोज स्थित निर्माण को लेकर राजस्व विभाग ने नोटिस जारी किया है। तहसील प्रशासन ने विधायक की अनुपस्थिति में उनके पुत्र अतुल पांडेय को 15 दिवस का नोटिस तामील कराया, जिसमें कहा गया कि राजकीय भूमि पर अवैध अतिक्रमण चिन्हित हुआ है और तय अवधि में स्वयं हटाना होगा, अन्यथा नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन का उल्लेख करते हुए कार्रवाई की गई है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया, न्यायालयीय निर्देशों और राजकीय भूमि संरक्षण के विषय पर चर्चा तेज हुई है।

गूलरभोज प्रकरण: नोटिस, न्यायालयीय आदेश और आगे की प्रक्रिया

तहसील प्रशासन की कार्रवाई कब और किस तरह हुई

(Encroachment Notice-Minister उत्तराखंड:कैबिनेट मंत्री पांडेय ने खोला मोर्चा, कहा- सरकार को बदनाम कर रहे  अधिकारी, केंद्र से करूंगा शिकायत - Uttarakhand Cabinet Minister Arvind  Pandey Statement ...प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम तहसील के कानूनगो भगत सिंह और हल्का लेखपाल जितेंद्र कुमार गूलरभोज स्थित आवास पर पहुंचे। विधायक अरविंद पांडेय की गैरमौजूदगी में उनके पुत्र अतुल पांडेय को नोटिस तामील किया गया। नोटिस तामील होने की सूचना मिलते ही विधायक समर्थकों का आवास पर जमावड़ा भी हुआ।

नोटिस में किस भूमि पर अतिक्रमण का उल्लेख है

नोटिस में उच्च न्यायालय नैनीताल (High Court of Uttarakhand, Nainital) में दायर याचिका 192/2024 (एमएस) सुनील यादव बनाम उत्तराखंड सरकार (Sunil Yadav vs State of Uttarakhand) में पारित आदेश दिनांक 26.12.2024 के अनुपालन का उल्लेख है। जांच के आधार पर ग्राम गूलरभोज के खाता संख्या 64, खसरा संख्या 12ग, रकबा 0.158 हेक्टेयर, श्रेणी 5-1 नई परती में अवैध अतिक्रमण चिन्हित किए जाने की बात कही गई है।

किन न्यायालयीय आदेशों का दिया गया हवाला

नोटिस में यह भी उल्लेख है कि—

  • सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) की सिविल याचिका संख्या 295/2022 में दिनांक 13.11.2024 को पारित आदेश,

  • सिविल याचिका संख्या 1294/2020 में दिनांक 06.11.2024 को पारित आदेश,

  • तथा उच्च न्यायालय नैनीताल में दायर याचिका संख्या 192/2024 में दिनांक 26.12.2024 को पारित आदेश
    के अनुपालन में यह कार्रवाई की जा रही है।

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15 दिवस में क्या करना होगा, नहीं करने पर क्या होगा

नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि 15 दिवस के भीतर उक्त अतिक्रमण को स्वयं हटाया जाए। यदि तय अवधि में अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण ध्वस्त किया जाएगा।
यह प्रश्न भी सामने आ रहा है कि क्या संबंधित पक्ष निर्धारित अवधि में अपना पक्ष/दस्तावेज प्रस्तुत कर प्रशासन के समक्ष प्रक्रिया के तहत राहत मांग सकता है।

अतुल पांडेय का बयान और विधायक का पक्ष

इस संबंध में अतुल पांडेय ने 11 साल बाद अतिक्रमण का संज्ञान लेने पर तहसील प्रशासन को साधुवाद दिया। वहीं, विधायक अरविंद पांडेय से पक्ष जानने के लिए संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

उल्लेखनीय है कि अरविंद पांडेय कई बार सरकार और मुख्यमंत्री पर कटाक्षों के जरिए टिप्पणी करते रहे हैं, जिससे यह विषय राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है।

यह मामला क्यों अहम है: राजकीय भूमि, न्यायालयीय निर्देश और समान कार्रवाई का संदेश

राजकीय भूमि पर अतिक्रमण का विषय प्रशासन, कानून व्यवस्था, भूमि अभिलेख, नगर-ग्राम नियोजन और सार्वजनिक संसाधनों से सीधे जुड़ा है। जब कार्रवाई न्यायालयीय आदेशों के अनुपालन के रूप में होती है, तो उससे यह संदेश भी जाता है कि प्रक्रिया के तहत कार्रवाई प्रत्येक प्रकरण में समान रूप से होनी चाहिए।
अब देखना होगा कि 15 दिवस की समयसीमा में क्या कदम उठाए जाते हैं और राजस्व विभाग आगे क्या कार्रवाई करता है।

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