पहली बार पूर्ण डिजिटल व आत्म-गणना के विकल्प के साथ होगी ‘जनगणना-2027’, पहले चरण की समय-सीमा घोषित; पूछे जाएंगे 33 प्रश्न…

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नवीन समाचार, नई दिल्ली, 2 फरवरी 2026 (Census 2027 Timeline)। भारत सरकार ने जनगणना (Census) 2027 की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से शुरू करते हुए पहले चरण की समय-सीमा घोषित कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जनगणना 2027 का प्रथम चरण हाउसिंग और हाउसलिस्टिंग (Housing and Houslisting) के रूप में आयोजित किया जाएगा, जो 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच संपन्न होगा। यह जनगणना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना (Fully Digital Census) होगी और इसके आंकड़े नीति निर्माण, संसाधन आवंटन तथा सामाजिक योजनाओं की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

पहले चरण के लिए घोषित टाइमलाइन

Census 2027 Timeline)। Census 2027 Update : जनगणना 2027 की तैयारी, मकान से इंटरनेट तक सरकार लेगी  पूरी जानकारी!केंद्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, मकान सूचीकरण और आवास गणना की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होकर 30 सितंबर 2026 तक चलेगी। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस छह माह की अवधि के भीतर अपनी सुविधा के अनुसार लगातार 30 दिनों का समय तय करेगा, जिसके दौरान घर-घर जाकर हाउसिंग और हाउसलिस्टिंग का कार्य किया जाएगा। इस नई अधिसूचना के साथ 7 जनवरी 2020 को जारी पूर्व अधिसूचना को निरस्त कर दिया गया है, हालांकि उस अधिसूचना के अंतर्गत अब तक किए गए कार्यों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

पहले चरण में कौन-कौन से 33 प्रश्न पूछे जाएंगे, जानिए पूरी वजह

जनगणना 2027 के पहले चरण में प्रत्येक परिवार से कुल 33 बिंदुओं पर जानकारी ली जाएगी। इसमें केवल परिवार के सदस्यों की संख्या ही नहीं बल्कि आवास, बुनियादी सुविधाओं और जीवन स्तर से जुड़ी विस्तृत जानकारी शामिल होगी। इस चरण में मकान की संरचना से लेकर घरेलू संसाधनों तक के तथ्य दर्ज किए जाएंगे। 

पहले चरण में पूछे जाने वाले 33 प्रश्न :

  1. बिल्डिंग नंबर
  2. जनगणना मकान नंबर
  3. जनगणना मकान के फर्श की मुख्य सामग्री
  4. जनगणना मकान की दीवार की मुख्य सामग्री
  5. जनगणना मकान की छत की मुख्य सामग्री
  6. जनगणना मकान का उपयोग
  7. जनगणना मकान की स्थिति
  8. परिवार नंबर
  9. परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या
  10. परिवार के मुखिया का नाम
  11. परिवार के मुखिया का लिंग
  12. क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य से संबंधित है
  13. स्वामित्व की स्थिति
  14. परिवार के विशेष कब्जे में रहने वाले कमरों की संख्या
  15. परिवार में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या
  16. पीने के पानी का मुख्य स्रोत
  17. पीने के पानी के स्रोत की उपलब्धता
  18. रोशनी का मुख्य स्रोत
  19. शौचालय तक पहुंच
  20. शौचालय का प्रकार
  21. गंदे पानी की निकासी
  22. नहाने की सुविधा की उपलब्धता
  23. रसोई और LPG/PNG कनेक्शन की उपलब्धता
  24. खाना पकाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मुख्य ईंधन
  25. रेडियो/ट्रांजिस्टर
  26. टेलीविजन
  27. इंटरनेट तक पहुंच
  28. लैपटॉप/कंप्यूटर
  29. टेलीफोन/मोबाइल फोन/स्मार्टफोन
  30. साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड
  31. कार/जीप/वैन
  32. परिवार में खाया जाने वाला मुख्य अनाज
  33. मोबाइल नंबर (केवल जनगणना से संबंधित संचार के लिए)

इन 33 प्रश्नों का उद्देश्य केवल जनसंख्या की गणना करना नहीं है बल्कि देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को समझना है। इन आंकड़ों से सरकार यह आकलन करती है कि लोग कहां और किस तरह रहते हैं तथा उन्हें किन बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता है। जनगणना से प्राप्त जानकारी का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, रोजगार योजनाओं के साथ-साथ संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन, आरक्षण नीति, विकास बजट के आवंटन और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों में किया जाता है।

आत्म-गणना का नया विकल्प

जनगणना 2027 में पहली बार नागरिकों को आत्म-गणना, अर्थात स्वयं विवरण भरने का विकल्प दिया जाएगा। अधिसूचना के अनुसार, यह प्रक्रिया संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में 30 दिवसीय घर-घर हाउसलिस्टिंग शुरू होने से ठीक पहले 15 दिनों की अवधि में पूरी की जाएगी। इस दौरान नागरिक जनगणना ऐप या पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसे डिजिटल भागीदारी बढ़ाने और प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दो चरणों में होगी पूरी जनगणना

कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हुई जनगणना 2021 के बाद अब जनगणना 2027 को दो चरणों में संपन्न किया जाएगा। पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच हाउसिंग और हाउसलिस्टिंग का होगा, जबकि दूसरा चरण फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना के रूप में आयोजित किया जाएगा। पूरी जनगणना प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से 28 फरवरी 2027 तक चलेगी। इसके लिए 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) को संदर्भ तिथि निर्धारित की गई है। लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश, हिमाच्छादित क्षेत्रों तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए अलग प्रावधान किए गए हैं।

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मंत्रिमंडल की स्वीकृति और अनुमानित लागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अध्यक्षता में 12 दिसंबर 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना 2027 के आयोजन को मंजूरी प्रदान की थी। इस व्यापक राष्ट्रीय अभ्यास पर लगभग 11,718.2 करोड़ रुपये की अनुमानित धनराशि व्यय की जाएगी। इस बार की जनगणना में जातिगत पहचान से संबंधित आंकड़े भी दर्ज किए जाएंगे, जिससे सामाजिक न्याय और लक्षित नीतियों के निर्माण में सहायता मिलने की संभावना है।

पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना

जनगणना 2027 को भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा संकलन किया जाएगा और निगरानी के लिए एक केंद्रीय पोर्टल विकसित किया गया है। लगभग 30 लाख फील्ड कर्मी इस प्रक्रिया में शामिल होंगे। इसे विश्व का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास माना जा रहा है, जो तकनीक और शासन के समन्वय का उदाहरण बनेगा।

बेहतर डेटा और ‘सेंसस-एज-ए-सर्विस’ मॉडल

सरकार के अनुसार, इस बार जनगणना के आंकड़ों का प्रकाशन अधिक पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल होगा। ‘सेंसस-एज-ए-सर्विस’ (Census-as-a-Service) मॉडल के तहत नीति निर्माण से जुड़े आंकड़े एक क्लिक पर उपलब्ध कराए जाएंगे। विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को स्वच्छ, मशीन-पठनीय और उपयोगी डेटा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

घर-घर गणना और सुरक्षा प्रबंध

जनगणना प्रक्रिया के अंतर्गत प्रत्येक परिवार से अलग-अलग प्रश्नावलियों के माध्यम से हाउसिंग, हाउसलिस्टिंग और जनसंख्या गणना की जाएगी। सामान्यतः सरकारी शिक्षक और अन्य नामित कर्मचारी, जिन्हें राज्य सरकारें नियुक्त करेंगी, अपने नियमित दायित्वों के साथ यह कार्य करेंगे। पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (Census Management and Monitoring System) नामक विशेष पोर्टल विकसित किया गया है। डिजिटल डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त साइबर सुरक्षा प्रावधान भी किए गए हैं।

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कुल मिलाकर, जनगणना 2027 न केवल आंकड़ों के स्तर पर बल्कि तकनीक, पारदर्शिता और नीति निर्माण की दृष्टि से भारत के लिए एक ऐतिहासिक पहल के रूप में देखी जा रही है।

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