नवीन समाचार, देहरादून, 3 फरवरी 2026 (Equal Pay-Equal Work-UPNL)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) से उपनल कर्मियों (UPNL Employees) यानी उत्तरॉखण्ड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लि. (Uttarakhand Purv Sainik Kalyan Nigam Ltd.) से जुड़ा एक महत्वपूर्ण और नीतिगत समाचार सामने आया है। लंबे समय से आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया के बीच अटकी समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग पर आखिरकार राज्य सरकार ने शासनादेश जारी कर दिया है।
इस निर्णय के साथ ही हजारों उपनल कर्मियों के वेतन, सेवा सम्मान और कार्य-सुरक्षा से जुड़े प्रश्नों पर स्पष्ट दिशा तय हो गई है। यह फैसला न केवल कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि सरकारी तंत्र में संविदा आधारित कार्यप्रणाली को लेकर चल रही बहस के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उत्तराखंड सरकार ने न्यायालय के आदेशों के क्रम में उपनल कर्मियों के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया है। शासन की ओर से यह आदेश सैनिक कल्याण सचिव दीपेन्द्र चौधरी (Deependra Chaudhary) द्वारा निर्गत किया गया है। शासनादेश में 12 नवंबर 2018 को कट-ऑफ तिथि (Cut Off Date) निर्धारित की गई है, जिसके आधार पर उपनल कर्मियों को वेतनमान का लाभ दिया जाएगा। यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए विशेष महत्व रखता है, जो वर्षों से नियमित कर्मियों के समान कार्य करने के बावजूद कम वेतन पर कार्यरत थे।
शासनादेश में क्या तय किया गया
शासन से जारी आदेश के अनुसार उपनल कर्मियों को उनके कार्य की प्रकृति और दक्षता के आधार पर विभिन्न वेतन स्तरों में रखा गया है। अकुशल श्रमिकों को वेतन स्तर एक, अर्धकुशल श्रमिकों को वेतन स्तर दो, कुशल कर्मियों को वेतन स्तर चार, उच्च कुशल कर्मियों को वेतन स्तर सात तथा अधिकारी वर्ग को वेतन स्तर दस की मूल वेतन संरचना में सम्मिलित किया गया है। यह व्यवस्था समान कार्य के लिए समान वेतन के संवैधानिक सिद्धांत को व्यवहार में लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
पृष्ठभूमि और आंदोलन का क्रम
उपनल कर्मचारी संगठन लंबे समय से इस मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। कई चरणों में धरना, प्रदर्शन और हड़ताल के माध्यम से कर्मचारियों ने अपनी आवाज शासन तक पहुंचाई थी। सरकार की ओर से पूर्व में आश्वासन दिए जाने के बाद कर्मचारियों ने आंदोलन और हड़ताल स्थगित की थी। इसके साथ ही न्यायालय में लंबित मामलों के निर्णय भी सरकार के इस फैसले की आधारशिला बने। शासनादेश जारी होने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार ने न्यायिक निर्देशों और कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया है।
कर्मचारियों और संगठन की प्रतिक्रिया
उपनल कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष विनोद गोदियाल (Vinod Godiyal) ने इस निर्णय पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह उत्तराखंड सरकार का ऐतिहासिक निर्णय है, जिससे हजारों उपनल कर्मियों को सम्मानजनक वेतन और कार्य का उचित मूल्य मिलेगा। उन्होंने सभी कैबिनेट मंत्रियों और उन समितियों के सदस्यों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने उपनल कर्मियों के वेतन निर्धारण की प्रक्रिया में भूमिका निभाई।
सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव
इस निर्णय का सीधा प्रभाव कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति, कार्य-संतोष और प्रशासनिक स्थिरता पर पड़ेगा। समान वेतन मिलने से न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि सरकारी विभागों में कार्य की गुणवत्ता और उत्तरदायित्व भी सुदृढ़ होगा। साथ ही यह फैसला अन्य संविदा और आउटसोर्स कर्मियों के लिए भी एक नीतिगत उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या बदलेगा
अब शासनादेश के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संबंधित विभागों पर होगी। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि वेतन निर्धारण और भुगतान की प्रक्रिया कितनी शीघ्र और पारदर्शी ढंग से पूरी होती है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि आदेश केवल कागजों तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू होगा।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















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