नवीन समाचार, अल्मोड़ा, 4 फरवरी 2026 (Praveen Valmiki-Almora Jail)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के अल्मोड़ा (Almora) जनपद स्थित जिला कारागार (District Jail) से सामने आई एक घटना ने एक बार फिर जेल सुरक्षा, संगठित अपराध और प्रशासनिक निगरानी की गंभीरता पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि (Praveen Valmiki) के पास जेल के भीतर से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (electronic gadgets) बरामद किए गए हैं। हत्या, जमीन कब्जा, रंगदारी और फर्जी दस्तावेजों जैसे गंभीर अभियोगों में सजा काट रहा यह अपराधी पहले भी अपने नेटवर्क और प्रभाव के कारण चर्चा में रहा है।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जेल के भीतर रहते हुए भी संगठित अपराध की आशंका, कानून-व्यवस्था और कारागार प्रबंधन की प्रभावशीलता पर सीधा असर डालती है।
संगठित अपराध की पृष्ठभूमि और जेल से मिला संदिग्ध सुराग
प्रवीण वाल्मीकि उत्तराखंड के रुड़की (Roorkee)–हरिद्वार (Haridwar) क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहे कुख्यात सुनील राठी (Sunil Rathi) गिरोह का प्रमुख गुर्गा रहा है। बाद में उसने अपना अलग गिरोह खड़ा कर लिया, जिसने क्षेत्र में भय और दबाव की राजनीति के जरिए अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया। वर्ष 2018 में जमीन विवाद से जुड़े एक प्रकरण में हुई हत्या ने वाल्मीकि गिरोह की हिंसक प्रवृत्ति को उजागर किया था। इसके बाद फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी (power of attorney) के माध्यम से जमीन हड़पने, जबरन कब्जा करने और रंगदारी वसूलने की कई शिकायतें दर्ज हुईं। इन मामलों में करोड़ों रुपये की संपत्तियों पर अवैध कब्जे के आरोप सामने आए।
अल्मोड़ा जेल में नियमित जांच के दौरान उसके पास से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिलने से यह सवाल उठ रहा है कि जेल के भीतर रहते हुए वह किन गतिविधियों को संचालित करने की कोशिश कर रहा था। जांच एजेंसियां यह पड़ताल कर रही हैं कि इन उपकरणों का उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा था और क्या इसके जरिए किसी आपराधिक नेटवर्क को निर्देश दिए जा रहे थे।
प्रशासन और जांच एजेंसियों की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड के विशेष कार्यबल (Special Task Force) ने पूर्व में वाल्मीकि गिरोह के विरुद्ध अभियान चलाकर उसके कई सक्रिय सदस्यों और सहयोगियों को गिरफ्तार किया था। जांच में यह भी सामने आया था कि गिरोह को राजनीतिक और पुलिस स्तर पर संरक्षण मिलने के आरोप हैं। कुछ मामलों में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता उजागर होने के बाद विभागीय और विधिक कार्रवाई भी की गई थी। ताजा घटना के बाद कारागार प्रशासन और जांच एजेंसियों ने संयुक्त रूप से जांच तेज कर दी है। यह भी देखा जा रहा है कि जेल के भीतर सुरक्षा प्रोटोकॉल में कहां चूक हुई।
समाज और व्यवस्था पर असर
यह घटना केवल एक अपराधी के पास उपकरण मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जेल व्यवस्था, संगठित अपराध पर नियंत्रण और न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा व्यापक प्रश्न है। यदि सजा काट रहे अपराधी जेल के भीतर से भी नेटवर्क संचालित करने में सक्षम होते हैं, तो यह कानून के भय को कमजोर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं जेल सुधार, तकनीकी निगरानी और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी और जेल सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।














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