नवीन समाचार, हरिद्वार, 15 फरवरी 2026 (kanwar Sang Burke men Mahila)। हरिद्वार (Haridwar) में कांवड़ यात्रा के दौरान बुर्का पहनकर कांवड़ उठाये दिखी एक महिला ने आस्था को लेकर एक नई सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है। यह महिला अपने पति के साथ बुर्का पहनकर कांवड़ उठाये नजर आई। उसका वीडियो इंटरनेट पर प्रसारित होने के बाद जहां कुछ लोगों ने उसकी सराहना की, वहीं दूसरे पक्ष से आलोचना भी सामने आयी, जिसके चलते उन्हें पुलिस सुरक्षा तक देनी पड़ी। देखें संबंधित वीडिओ :
आस्था, सामाजिक प्रतिक्रिया और प्रशासन की भूमिका
प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के संभल (Sambhal) जिले के बदनपुर बसई गांव की निवासी तमन्ना मलिक करीब साढ़े तीन वर्ष पहले गांव के ही अमन त्यागी नाम के युवक से प्रेम विवाह कर चर्चा में आयी थीं। विवाह के बाद उसने अपना नाम बदलकर तुलसी रख लिया। पारिवारिक विरोध के कारण दंपति कुछ समय तक गांव से बाहर रहे, बाद में वापस लौट आये। वर्तमान में इनके दो पुत्र हैं—ढाई वर्ष का आर्यन और एक वर्ष का दक्ष।
हरिद्वार पहुंचकर उठायी कांवड़
इधर दंपति दो पुत्र होने की मन्नत पूरी होने पर 10 फरवरी को हरिद्वार पहुंचे और 11 फरवरी को गंगा स्नान के बाद इन्होंने ‘बम भोले’ के जयकारों के साथ कांवड़ उठाई। इसी दौरान बुर्के में कांवड़ लेकर जाते हुए तमन्ना का वीडियो इंटरनेट माध्यम पर तेजी से प्रसारित हो गया। देखें संबंधित वीडिओ :
बिजनौर में विरोध और पुलिस सुरक्षा
आगे मिली सूचना के अनुसार बिजनौर (Bijnor) में कुछ लोगों ने बुर्के में कांवड़ उठाने पर उसका आपत्ति जताते हुए विरोध किया। उस समय कांवड़ यात्रियों की भीड़ के बीच दंपति किसी तरह आगे बढ़ गये। बाद में स्थिति की जानकारी मिलने पर उत्तर प्रदेश पुलिस (Uttar Pradesh Police) ने एहतियातन उन्हें सुरक्षा उपलब्ध करायी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम
यह प्रकरण धार्मिक आस्था, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक सह-अस्तित्व जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों को सामने लाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत के संविधान में प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है, लेकिन सामाजिक संवेदनशीलता और कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। ऐसे मामलों में संवाद और संतुलन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
फिलहाल दंपति अपनी धार्मिक यात्रा जारी रखे हुए हैं, जबकि इंटरनेट माध्यम पर इस विषय पर चर्चा जारी है। आगे प्रशासन इस तरह की संवेदनशील स्थितियों से कैसे निपटेगा, इस पर भी नजर बनी हुई है। क्या निजी आस्था का यह सार्वजनिक प्रदर्शन समाज में नई बहस की दिशा दिखा रहा है? यह प्रश्न भी अब चर्चा के केंद्र में है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















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