नैनीताल उच्च न्यायालय बना न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतों का विवरण सार्वजनिक करने वाला देश का पहला उच्च न्यायालय

इस समाचार को सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 फरवरी 2026 (Nainital High Court-1st HC)। नैनीताल स्थित उत्तराखंड (Uttarakhand) उच्च न्यायालय (High Court Uttarakhand) ने न्यायिक पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए अधीनस्थ न्यायपालिका (Subordinate Judiciary) के न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों का विवरण सार्वजनिक किया है। इस प्रकार नैनीताल उच्च न्यायालय न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतों का विवरण सार्वजनिक करने वाला देश का पहला उच्च न्यायालय (The first High Court in the country to make public the details of complaints against judicial officers) बन गया है। 

(Nainital High Court-1st HC (UK High Court 2 Major Orders) (In Banbhulpura Riot Case-High Court on Bail) (High Court Postpones Silver Jubilee Celebrations,सूचना के अधिकार अधिनियम (Right To Information Act-RTI) के तहत साझा की गयी इस जानकारी के अनुसार 1 जनवरी 2020 से 15 अप्रैल 2025 के बीच कुल 258 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से चार मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ की गयी। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे न्याय व्यवस्था में सार्वजनिक विश्वास और संस्थागत पारदर्शिता को बल मिलने की संभावना है।

पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

उच्च न्यायालय के सतर्कता प्रकोष्ठ (Vigilance Cell) की ओर से उपलब्ध करायी गयी जानकारी में बताया गया कि अधीनस्थ न्यायालयों में तैनात न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध वर्षों में कुल 258 शिकायतें प्राप्त हुईं। जांच के बाद इनमें से केवल चार मामलों में विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गयी।

यह सूचना मुख्य वन संरक्षक अनुसंधान हल्द्वानी भारतीय वन्य सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी (iFS Officer Sanjeev Chaturvedi) द्वारा दायर सूचना आवेदन के बाद सामने आयी। उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 19(3) के अंतर्गत वर्ष 2020 से 2025 के बीच शिकायतों, लागू सेवा एवं आचरण नियमों तथा की गयी कार्रवाई का विवरण मांगा था।

सूचना देने से प्रारंभिक इन्कार, आयोग का हस्तक्षेप

प्रारंभ में उच्च न्यायालय के लोक सूचना अधिकारी (Public Information Officer-PIO) ने मामले को संवेदनशील बताते हुए सूचना देने से इन्कार किया था और कहा था कि इसके लिए मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) की अनुमति आवश्यक है। इसके बाद प्रकरण उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग (Uttarakhand State Information Commission) पहुंचा।

आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल गोपनीय बताकर सूचना रोकी नहीं जा सकती और शिकायतों की संख्या तथा जांच प्रक्रिया जनहित के दायरे में आती है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि किसी न्यायिक अधिकारी की व्यक्तिगत पहचान सार्वजनिक नहीं की जाएगी। आयोग के निर्देश के बाद संयुक्त रजिस्ट्रार (सतर्कता) एचएस जीना (HS Jina) ने 11 फरवरी को आवेदक को सूचना उपलब्ध करायी।

अन्य उच्च न्यायालयों से अलग रुख

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) उच्च न्यायालय, मद्रास (Madras) उच्च न्यायालय तथा दिल्ली (Delhi) उच्च न्यायालय पूर्व में ऐसी सूचनाएं साझा करने से इन्कार कर चुके हैं। अपीलकर्ता के अधिवक्ता सुदर्शन गोयल (Sudarshan Goyal) ने इसे न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने वाला कदम बताया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में न्यायिक जवाबदेही, संस्थागत निगरानी और सूचना अधिकार के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह प्रश्न भी उठता है कि क्या अन्य उच्च न्यायालय भी इसी तरह की पारदर्शी व्यवस्था अपनाएंगे।

यह भी पढ़ें :  दिल्ली-पंजाब के साथ उत्तराखंड में भी अप्रैल 2026 से होगा 'एसआईआर', चुनाव आयोग ने दिए संकेत और तैयारी तेज करने के निर्देश

पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।

नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट यहाँ क्लिक करके पढ़ी जा सकती है। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचारों के लिए यहाँ👉, अल्मोड़ा के समाचारों के लिए यहाँ👉, बागेश्वर के समाचारों के लिए यहाँ👉, चंपावत के समाचारों के लिए यहाँ👉, ऊधमसिंह नगर  के समाचारों के लिए यहाँ👉, देहरादून के समाचारों के लिए यहाँ👉, उत्तरकाशी के समाचारों के लिए यहाँ👉, पौड़ी के समाचारों के लिए यहाँ👉, टिहरी जनपद के समाचारों के लिए यहाँ👉, चमोली के समाचारों के लिए यहाँ👉, रुद्रप्रयाग के समाचारों के लिए यहाँ👉, हरिद्वार के समाचारों के लिए यहाँ👉और उत्तराखंड से संबंधित अन्य समाचार पढ़ने के लिये यहां👉 क्लिक करें।

आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे उत्तराखंड के नवीनतम अपडेट्स-‘नवीन समाचार’ पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यहां क्लिक कर हमारे व्हाट्सएप चैनल से, फेसबुक ग्रुप से, गूगल न्यूज से यहाँ, एक्स से, थ्रेड्स चैनल से, टेलीग्राम से, कुटुंब एप से और डेलीहंट से जुड़ें। अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें यहाँ क्लिक करके सहयोग करें..

यह भी पढ़ें :  बेतालघाट मिनी स्टेडियम में कंबल वितरण के दौरान हुई अव्यवस्था व दीवार गिरने पर अभियोग दर्ज, 6 लोग हुए थे घायल
Tags (Nainital High Court-1st HC) :

Nainital High Court-1st HC, Nainital High Court RTI Disclosure Case, Uttarakhand Judicial Complaints Data 2020 2025, Subordinate Judiciary Transparency India, High Court Vigilance Cell Complaint Report, RTI Impact On Judicial Accountability India, Uttarakhand State Information Commission Order, Judicial Disciplinary Action Statistics India, High Court Governance Reform Example, RTI And Court Transparency News India, Nainital Legal System Accountability Update, #JudicialTransparency #RTIIndia #HighCourtUttarakhand #JudicialAccountability #PublicInterestLaw #RightToInformation #GovernanceReform #JusticeSystemIndia #LegalTransparency #UttarakhandNews

Leave a Reply