EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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फरवरी 2024 (Big Decision for Regularization of Employees)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य में शासकीय सेवाओं में अनियमित स्थिति में कार्य कर रहे कर्मचारियों के लिये बड़ा व महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश गुरुवार 22 फरवरी को नरेंद्र सिंह बिष्ट और अन्य चार लोगों की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिकाओं की सुनवाई करते हुये सुनाया है।यह भी पढ़ें : नैनीताल में फर्जी गाइड ने पर्यटक की कार लेकर की क्षतिग्रस्त, मालरोड पर पेड़ और डस्टबिन से टकराकर हुआ फरार, पुलिस तलाश में जुटी उत्तराखंड उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इस संबंध में सभी याचिकाओं को निस्तारित करते हुए निर्णय दिया है कि चार दिसंबर 2018 से पूर्व जिन कार्मिकों को नियमितीकरण किया जा चुका है उन्हें नियमित माना जाए और अन्य को दस वर्ष की दैनिक वेतन के रूप में सेवा करने की बाध्यता के आधार पर नियमित किया जा सकता है।10 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत हजारों कर्मचारियों के विनियमित होने की उम्मीद (Big Decision for Regularization of Employees) अपने आदेश के साथ खंडपीठ ने राज्य सरकार की वर्ष 2013 की विनियमितीकरण नीति पर अपनी मुहर लगा दी है। उच्च न्यायालय के इस आदेश से राज्य के 10 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत हजारों कर्मचारियों के विनियमित होने की उम्मीद की जा रही है।मामले के अनुसार राज्य सरकार ने वर्ष 2013 में सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों एवं स्वायत्तशासी संस्थाओं में काम करने वाले तदर्थ, संविदा कर्मियों के विनियमितीकरण के लिये एक नियमावली तैयार की थी। इसमें प्रावधान किया गया था कि सर्वोच्च न्यायालय उमा देवी के आदेश के आलोक में वर्ष 2011 में बनायी नियमावली के तहत जो कर्मचारी विनियमित नहीं हो पाये उन्हें विनियमित किया जा सके। सरकार का यह भी तर्क था कि चूंकि उत्तराखंड राज्य 9 नवम्बर 2000 को अस्तित्व में आया और उसके कई वर्ष बाद भी सरकारी विभागों का गठन हुआ, इसलिये उनमें तैनात कर्मचारियों को वर्ष 2011 की नियमावली का लाभ नहीं मिल पाया। सरकार ने तब हालांकि 2013 की नियमावली में 10 वर्ष की अवधि को घटाकर पांच साल तक सीमित कर दिया था। सरकार की मंशा थी कि इससे वे कर्मचारी लाभान्वित हो सकेंगे जिन्होंने उत्तराखंड बनने के बाद 10 साल या उससे अधिक की सेवा पूरी कर ली है। (Big Decision for Regularization of Employees)यह भी पढ़ें : भीमताल–हल्द्वानी मार्ग पर टेंपो ट्रैवलर खाई में गिरा, दिल्ली से आए छात्रों सहित 24–25 लोग थे सवार, कई घायलयाचिकाकर्ताओं ने सरकार के इस कदम को वर्ष 2018 में चुनौती दी और कहा कि सरकार विनियमितीकरण के लिये सेवा की अवधि को 10 साल से घटाकर पांच साल नहीं कर सकती है। युगलपीठ में सभी प्रकरणों पर बुधवार को सुनवाई हुई और अदालत ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सरकार की वर्ष 2013 की विनियमितीकरण नियमावली को जायज ठहरा दिया। साथ ही पीठ ने सरकार के पांच साल की सेवा अवधि को बढ़ाकर 10 साल कर दिया है। (Big Decision for Regularization of Employees)इस आदेश के बाद सरकारी विभागों, निगमों और स्वायत्तशासी संस्थाओं, कालेजों और विभागों में तदर्थ और संविदा पर काम करने वाले हजारों कर्मचारियों को विनियमित किया जा सकेगा। इस आदेश से इन कर्मचारियों में खुशी की लहर व्याप्त है। (Big Decision for Regularization of Employees)‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया विज्ञापन न केवल आपके व्यवसाय या संस्थान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाएगा, बल्कि 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