डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 18 फरवरी 2026 (HC on PITCUL MD Case)। नैनीताल (Nainital) स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय (High Court of Uttarakhand) ने पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (Power Transmission Corporation of Uttarakhand Limited-PITCUL) में प्रबंध निदेशक (Managing Director) पद पर अतिरिक्त प्रभार के रूप में की गई नियुक्ति को निरस्त कर महत्वपूर्ण संदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक उपक्रमों में शीर्ष पदों पर नियुक्ति नियमों के अनुरूप ही होनी चाहिए। इस निर्णय का प्रभाव निगम की प्रशासनिक व्यवस्था और भविष्य की नियुक्ति प्रक्रिया पर पड़ना तय माना जा रहा है।
देहरादून (Dehradun) के मुख्यालय से जुड़े इस मामले में खंडपीठ ने दो याचिकाओं—प्रवीण टंडन बनाम राज्य (Praveen Tandon vs State) तथा राजीव गुप्ता बनाम राज्य (Rajeev Gupta vs State)—पर संयुक्त सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।
क्या था विवाद और न्यायालय ने क्या कहा

खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति आशीष नैथानी (Justice Ashish Naithani) और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Justice Subhash Upadhyay) शामिल थे, ने पाया कि प्रकाश चंद्र ध्यानी (Prakash Chandra Dhyani) को 10 सितंबर 2022 के आदेश के तहत प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था।
याचिकाकर्ता राजीव गुप्ता, जो पिटकुल में मुख्य अभियंता स्तर-एक (Chief Engineer Level-I) पर कार्यरत तथा वरिष्ठतम अभियंता थे, ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए कहा कि नियमित नियुक्ति प्रक्रिया पूरी न होने की स्थिति में वरिष्ठता के आधार पर उन्हें ही अतिरिक्त प्रभार मिलना चाहिए था।
नियम 9-ए बना निर्णय का आधार
याचिका में यह महत्वपूर्ण बिंदु उठाया गया कि उत्तराखंड चयन एवं प्रबंध निदेशक तथा निदेशकों की नियुक्ति प्रक्रिया निर्धारण नियम संशोधित 2021 (Uttarakhand Selection and Appointment of Managing Director and Directors Rules Amended 2021) के नियम 9-ए के अनुसार प्रबंध निदेशक पद के लिए अभियांत्रिकी में स्नातक उपाधि अनिवार्य है।
न्यायालय ने अभिलेखों का परीक्षण कर पाया कि संबंधित नियुक्ति इस अनिवार्य योग्यता प्रावधान के अनुरूप नहीं थी। इसी आधार पर खंडपीठ ने अतिरिक्त प्रभार की नियुक्ति को निरस्त कर दिया।
सरकार को दिए गए निर्देश
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि—
नियमित चयन प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जाए।
तब तक नियमों के अनुरूप अंतरिम व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अधिवक्ता डॉ. कार्तिकेय हरि गुप्ता (Dr. Kartikeya Hari Gupta) ने मामले में पैरवी करते हुए बताया कि न्यायालय ने सेवा नियमों के पालन को अनिवार्य माना है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
यह आदेश केवल एक पद की नियुक्ति तक सीमित नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों के अनुसार इस निर्णय से—
सार्वजनिक उपक्रमों में पारदर्शिता मजबूत होगी।
वरिष्ठता और योग्यता आधारित चयन को बल मिलेगा।
भविष्य में नियमों की अनदेखी पर न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना बढ़ेगी।
अब प्रश्न यह है कि पिटकुल में नई अंतरिम व्यवस्था कब तक लागू होती है और नियमित प्रबंध निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया कितनी शीघ्र आगे बढ़ती है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















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