अंकिता हत्याकांड में आजीवन कारावास पाए पुलकित आर्य ने उच्च न्यायालय में दी चुनौती

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-नैनीताल उच्च न्यायालय ने मांगा निचली अदालत का अभिलेख, 18 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
नवीन समाचार, नैनीताल, 7 जुलाई 2025 (Ankita Murder case-Pulkit Arya challenged High)उत्तराखंड के बहुचर्चित व सनसनीखेज अंकिता भंडारी हत्याकांड में कोटद्वार की विशेष अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा पाए मुख्य अभियुक्त पुलकित आर्य ने निर्णय के विरुद्ध उत्तराखंड उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी है। अभियुक्त की याचिका पर उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने निचली अदालत के समस्त अभिलेख तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई की तिथि 18 नवंबर नियत की है।

अभियुक्त व सरकार की ओर से यह दिए गए तर्क

(Ankita Murder case-Pulkit Arya challenged High (Courts Decision on Ankita Bhandari Murder Case)वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से तर्क रखा गया कि अभियोजन पक्ष कोई प्रत्यक्षदर्शी प्रस्तुत नहीं कर पाया, जबकि इस आधार पर उसे दोषसिद्ध किया गया। वहीं सरकार की ओर से विरोध करते हुए कहा गया कि अभियुक्त पुलकित आर्य सहित सहअभियुक्त सौरभ भास्कर व अंकित की मोबाइल लोकेशन घटना स्थल पर पाई गई थी। साथ ही अभियुक्तों द्वारा हत्या के बाद रिजॉर्ट का सीसीटीवी सिस्टम बंद किया गया, डीवीआर से छेड़छाड़ की गई, जो सबूतों से स्पष्ट हुआ है।

सरकारी पक्ष ने यह भी कहा कि अंकिता भंडारी द्वारा घटना से पूर्व अपने व्हाट्सएप संदेशों में भी संबंधित खतरों का जिक्र किया गया था, जो अभियुक्तों की नीयत व क्रियाकलापों की पुष्टि करते हैं। अभियोजन ने निचली अदालत में 47 गवाहों को प्रस्तुत कर आरोप साबित किए थे, जिसके आधार पर कोटद्वार की अदालत ने 30 मई 2025 को पुलकित आर्य को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 302, 354(क) और 201 के अंतर्गत आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

यह था मामला (Ankita Murder case-Pulkit Arya challenged High)

गौरतलब है कि पौड़ी जनपद के डोभ श्रीकोट गांव निवासी 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के वनन्त्रा रिजॉर्ट में कार्यरत थी। अभियोजन के अनुसार, 18 सितंबर 2022 की रात्रि को पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर व अंकित ने चीला बैराज पर अंकिता को धक्का देकर नहर में गिरा दिया था, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद आरोपितों द्वारा साक्ष्य मिटाने का प्रयास भी किया गया था।

यह प्रकरण न केवल राज्य में, बल्कि पूरे देश में आक्रोश का कारण बना था और इसे लेकर व्यापक जन आंदोलन भी हुए थे। अब उच्च न्यायालय में इस मामले पर पुनः न्यायिक परीक्षण की प्रक्रिया आरंभ हो गई है।

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