दोषमुक्त को 10 हजार रुपये वेतन-पेंशन से अदा करने के आदेश, भुगतान न होने पर 10 प्रतिशत जुर्माना वसूली का निर्देश
नवीन समाचार, नैनीताल, 8 अगस्त 2025 (Nainital-Accused Acquitted in Electricity Theft)। विशेष सत्र न्यायालय (विद्युत अधिनियम) नैनीताल ने वर्ष 2022 में विद्युत चोरी के आरोपित पर लगे आरोपों को निराधार पाते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया है। साथ ही न्यायालय ने मामले से जुड़े विद्युत विभाग के कनिष्ठ अभियंता, सब-स्टेशन ऑपरेटर, लाइनमैन एवं पुलिस उप निरीक्षक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है। दोषी विभागीय कर्मियों के वेतन अथवा पेंशन से वसूलकर 10 हजार रुपये दोषमुक्त को 30 दिन में अदा करने के आदेश भी दिये हैं, अन्यथा 10 प्रतिशत अतिरिक्त जुर्माना वसूला जाएगा।
न्यायालय का आदेश
प्राप्त जानकारी के अनुसार विशेष सत्र न्यायालय (विद्युत अधिनियम) एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरीश कुमार गोयल के न्यायालय में विद्युत चोरी के आरोपित आनंद नाथ पर अभियोग की सुनवाई पूरी होने के बाद शुक्रवार को निर्णय सुनाया गया। आरोपित पर विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 138 व 139 के तहत अभियोग दर्ज था।
न्यायालय ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को गरमपानी के कनिष्ठ अभियंता हेम चंद्र कपिल, बेतालघाट के सब-स्टेशन ऑपरेटर गिरीश चंद्र पंत और लाइनमैन भूपाल दत्त फुलारा के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने की सिफारिश की है। साथ ही आदेश दिया कि दोषमुक्त को 10 हजार रुपये अदा करें, जिसे इन अधिकारियों के वेतन या पेंशन से वसूला जा सकता है।
न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड को उप निरीक्षक रमेश चंद्र पंत के विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई करने की सिफारिश की है। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सुशील कुमार शर्मा ने पैरवी की।
मामला और बचाव पक्ष की दलील (Nainital-Accused Acquitted in Electricity Theft)
नैनीताल। आरोप था कि 18 अगस्त 2022 को ग्राम बिसगुली स्थित आरोपित के खेत में विद्युत विभाग को सूचना पर लगभग 20 मीटर लंबा ‘फ्लैक्सिबल तार’ मिला, जिसे जब्त किया गया। 20 अगस्त को जांच में दावा किया गया कि इस तार से 11000 किलोवाट की हाई टेंशन लाइन से छेड़छाड़ कर बिजली चोरी की जा रही थी, जिससे विद्युत आपूर्ति बार-बार बाधित हो रही थी। इस आधार पर 20 अगस्त को ही थाना बेतालघाट में विभागीय कर्मियों की ओर से शिकायत दर्ज करायी गयी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता हितेश पाठक ने दलील दी कि 2.5 मिमी का तार खेत में पड़ा मिला, जबकि हाई टेंशन लाइन 15 से 20 फुट ऊंचाई पर थी। यदि इतने पतले तार को 11000 किलोवाट की लाइन से जोड़ा जाएगा तो वह तत्काल जल जाएगा और लगाने वाले की मौके पर मृत्यु हो जाएगी। साथ ही विभागीय गवाह यह भी नहीं बता सके कि वे कब मौके पर पहुंचे थे। इन्हीं आधारों पर न्यायालय ने आरोपित को दोषमुक्त कर दिया।
इस मामले में यह बात भी सामने आयी कि विद्युत विभाग को बिजली चोरी की सूचना महिला ग्राम प्रधान के पति का फोन आया था, जिस पर विभागीय कर्मी बिना जांचे कि तार किसका था और किस उपयोग के लिये था, एक तार पकड़कर ले आये और पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी। यह बात भी प्रकाश में आयी कि ग्राम प्रधान पति और आरोपित के बीच राजनीतिक विवाद भी था।
लिहाजा इस मामले में यह बात जा रही है कि विद्युत विभाग को अपनी कार्यशैली में व्यापक सुधार किये जाने की आवश्यकता है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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