अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की सिफारिश, माता–पिता से बातचीत के बाद मुख्यमंत्री धामी का बड़ा निर्णय

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नवीन समाचार, देहरादून, 9 जनवरी 2026 (CBI Enquiry in Ankita Case)। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद से जुड़े बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder Case) को लेकर एक बड़ा और निर्णायक घटनाक्रम सामने आया है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhami) ने घोषणा की है कि राज्य सरकार इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation – CBI) को सौंपने की सिफारिश कर रही है। यह निर्णय अंकिता भंडारी के माता–पिता से सीधे संवाद के बाद लिया गया है, जिससे यह मामला एक बार फिर सामाजिक संवेदना, न्याय और विश्वास के केंद्र में आ गया है।

(CBI Enquiry in Ankita Case) Uttarakhand: अंकिता भंडारी केस पर मुख्यमंत्री धामी ने दिया बड़ा बयान, सीबीआई  जांच पर बोले ये बातें…मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अंकिता के माता–पिता ने उनसे बातचीत के दौरान जांच सीबीआई (CBI Enquiry) से कराए जाने की इच्छा जताई थी। उनकी बात का सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को सीबीआई जांच की संस्तुति भेजने का निर्णय लिया है। अब इस पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिया जाएगा। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि तीन वर्ष पुराने इस मामले में हाल के दिनों में नए आरोपों और कथित ऑडियो क्लिप के सामने आने के बाद प्रदेशभर में आंदोलन और असंतोष की स्थिति बन गई थी।

सरकार की कार्रवाई, जांच की पृष्ठभूमि और मुख्यमंत्री का पक्ष

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस फैसले को लेकर एक वीडियो संदेश भी जारी किया। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय अंकिता भंडारी के साथ हुई घटना की जानकारी मिलते ही राज्य सरकार ने बिना किसी भेदभाव के, पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ कार्रवाई शुरू की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक महिला आईपीएस अधिकारी (Indian Police Service – IPS) के नेतृत्व में विशेष जांच दल (Special Investigation Team – SIT) का गठन किया गया। प्रकरण से जुड़े सभी आरोपितों को शीघ्र गिरफ्तार किया गया और राज्य सरकार की ओर से न्यायालय में प्रभावी पैरवी की गई।

मुख्यमंत्री के अनुसार इसी सशक्त पैरवी का परिणाम रहा कि विचारण के दौरान किसी भी आरोपित को जमानत नहीं मिली और अंततः न्यायालय ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार ने शुरू से अंत तक दृढ़ता और पारदर्शिता के साथ न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास किया।

सोशल मीडिया, ऑडियो क्लिप और दोबारा उठा विवाद

हाल के दिनों में सोशल मीडिया (Social Media) पर प्रसारित हुई कुछ ऑडियो क्लिप और बयानों के बाद यह मामला फिर से चर्चा में आया। मुख्यमंत्री ने बताया कि इन ऑडियो क्लिप (Audio Clip) के संबंध में अलग–अलग प्राथमिकी (First Information Report – FIR) दर्ज की गई हैं और उनकी जांच जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भ्रामक स्थितियां उत्पन्न करने का प्रयास किया, जिससे प्रदेश में भ्रम की स्थिति बनी।

मुख्यमंत्री के अनुसार सरकार का दायित्व है कि देवतुल्य जनता को भ्रम से बाहर निकाला जाए और उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाए। इसी क्रम में उन्होंने यह आवश्यक समझा कि सबसे अधिक पीड़ित पक्ष, अर्थात अंकिता के माता–पिता की बात सुनी जाए। जब माता–पिता ने सीबीआई जांच की मांग की, तो सरकार ने उसी का सम्मान करते हुए यह संस्तुति की है।

तीन वर्ष बाद फिर क्यों चर्चा में आया मामला

यह प्रकरण तीन वर्ष बाद फिर उस समय सुर्खियों में आया, जब भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर ने फेसबुक लाइव (Facebook Live) के माध्यम से एक वीडियो जारी किया। इस वीडियो में उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड में किसी ‘वीआईपी’ (VIP in Ankita Bhandari Case) की भूमिका का उल्लेख किया और एक कथित ऑडियो का भी हवाला दिया। इसके बाद यह मामला तेजी से तूल पकड़ने लगा। कांग्रेस सहित कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने धरना–प्रदर्शन शुरू कर दिए और सीबीआई जांच की मांग तेज हो गई। 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान भी किया गया है।

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हत्याकांड का पूरा घटनाक्रम और न्यायिक स्थिति

अंकिता भंडारी पौड़ी जनपद स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट (Vanantara Resort) में कार्यरत थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर शव चीला शक्ति नहर में फेंक दिया गया था। घटना के लगभग एक सप्ताह बाद नहर से शव बरामद हुआ। एसआईटी जांच के बाद रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य सहित तीन आरोपितों के विरुद्ध लगभग 500 पृष्ठों की आरोप पत्र (Charge Sheet) न्यायालय में प्रस्तुत की गई। अभियोजन पक्ष की ओर से 97 गवाह बनाए गए, जिनमें से 47 गवाहों का परीक्षण कराया गया।

मुख्य आरोपित पुलकित आर्य (Pulkit Arya) पर भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code – IPC) की धारा 302, 201, 354(क) सहित अनैतिक देह व्यापार अधिनियम (Immoral Traffic Prevention Act) के अंतर्गत आरोप सिद्ध हुए। अन्य दो आरोपितों को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके बावजूद उस ‘वीआईपी’ का नाम आज भी सार्वजनिक नहीं हो पाया है, जिसके आने की जानकारी अंकिता ने घटना के दिन अपने मित्र को दी थी। यही प्रश्न आज भी समाज के मन में बना हुआ है।

सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार क्या निर्णय लेती है और क्या इस जांच से उन सभी प्रश्नों के उत्तर मिल पाएंगे, जो वर्षों से जनता के मन में उठ रहे हैं।

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