प्रसव के दौरान ‘बिन ब्याही माँ’ की हुई मृत्यु, पिता ने किया नवजात को अपनाने से इनकार, बाल कल्याण समिति ने शिशु गृह भेजा

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नवीन समाचार, देहरादून, 12 फरवरी 2026 (Unwed Mother Died)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) में प्रसव के दौरान ‘बिन ब्याही माँ’ बनी एक अविवाहित युवती की मृत्यु हो गई, और कथित पिता ने नवजात शिशु को अपनाने से इन्कार कर दिया। ऐसी स्थिति में बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) ने हस्तक्षेप करते हुए नवजात को अस्थायी अभिरक्षा में लेकर चिकित्सकीय परीक्षण के पश्चात शिशु गृह (Child Care Home) भेज दिया। यह घटना पटेलनगर (Patelnagar) स्थित श्री महंत इंद्रेश चिकित्सालय (Shri Mahant Indiresh Hospital) की है, जिसने बाल संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न सामने रखे हैं।

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बाल संरक्षण व्यवस्था सक्रिय, नवजात को मिला सहारा

Unwed Mother Died एक बेटे की खातिर 7 डिलीवरी और दो अबॉर्शन सहने वाली मां की मौत', क्‍या वाकई  हम 2019 में हैं? - woman dies during 10th pregnancy after having 7 daughter  and 2प्राप्त जानकारी के अनुसार देहरादून के पटेलनगर क्षेत्र स्थित श्री महंत इंद्रेश चिकित्सालय में बीते मंगलवार को एक अविवाहित युवती की प्रसव के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसके पश्चात नवजात शिशु की देखरेख और पालन-पोषण को लेकर मृतका के परिजनों तथा शिशु के कथित पिता के बीच विवाद उत्पन्न हो गया।

बताया गया कि प्रारंभ में परिजनों के दबाव में कथित पिता ने शिशु को अपनाने की सहमति दी, किंतु बाद में वह अपने निर्णय से पीछे हट गया। इस स्थिति में चिकित्सालय के नवजात गहन चिकित्सा कक्ष (NICU – Neonatal Intensive Care Unit) में भर्ती नवजात के भविष्य को लेकर चिकित्सालय प्रबंधन की चिंता बढ़ गई।

चिकित्सालय की सूचना पर समिति का हस्तक्षेप

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सालय प्रबंधन ने जिला बाल कल्याण समिति से संपर्क कर नवजात की अभिरक्षा का अनुरोध किया। मामले पर तत्काल संज्ञान लेते हुए समिति की पदाधिकारी नीता कांडपाल (Neeta Kandpal) ने बाल सहायता सेवा (Child Helpline) को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिये।

इसके बाद बाल कल्याण समिति के पदाधिकारी चिकित्सालय पहुंचे और निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के पश्चात नवजात को अस्थायी अभिरक्षा में लिया गया। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद शिशु को शिशु गृह भेज दिया गया, जहां उसके संरक्षण एवं देखभाल की व्यवस्था की गई है।

कानूनी प्रावधान और सामाजिक महत्व

बाल अधिकार संरक्षण से संबंधित कानूनों के अनुसार परित्यक्त अथवा असहाय बच्चों के संरक्षण की जिम्मेदारी राज्य और बाल संरक्षण संस्थाओं की होती है। ऐसे मामलों में बाल कल्याण समिति द्वारा नवजात की सुरक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य सुनिश्चित करने के लिये वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाती है।

यह घटना सामाजिक उत्तरदायित्व, महिला स्वास्थ्य, बाल संरक्षण व्यवस्था और पारिवारिक सहयोग की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों को सामने लाती है। क्या ऐसे मामलों में सामाजिक जागरूकता और संस्थागत सहायता तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है? यह प्रश्न भी इस घटना के साथ उभरकर सामने आया है।

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