⚡पत्नी के नाम कंपनी बनाकर लगाए स्मार्ट मीटर, यूपीसीएल के अभियंता पर गंभीर आरोप

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नवीन समाचार, देहरादून, 15 जुलाई 2025 (UPCL-Engineer-Smart-Meter-Company-Wife-Sublet)। उत्तराखंड के देहरादून जनपद के अर्बन क्षेत्र में उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) में कार्यरत एक जूनियर इंजीनियर द्वारा अपनी पत्नी के नाम से कंपनी बनाकर उसी क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य करने का गंभीर मामला सामने आया है। इस कार्य में उसने जिस कंपनी को यूपीसीएल द्वारा स्मार्ट मीटर लगाने का ठेका दिया गया था, उससे कार्य उपसंविदा यानी सबलेट पर लेकर कार्य किया। यह प्रकरण यूपीसीएल प्रबंधन तक पहुंचने के बाद अब मुख्यालय स्तर से जांच के दायरे में है और मुख्य अभियंता गढ़वाल को इसकी विधिवत पड़ताल सौंपी गई है।

पत्नी के नाम बनाई कंपनी, उसी के नाम पर अपने ही क्षेत्र में लिया कार्य

यहां तो बिजली विभाग के जेई ने पत्नी के नाम कंपनी बनाकर ले लिया स्मार्ट मीटर  लगाने का ठेका - Janpaksh Aajkalप्राप्त जानकारी के अनुसार, मीटर टेस्ट डिवीजन अर्बन देहरादून में तैनात एक जूनियर इंजीनियर पर आरोप है कि उन्होंने नियमों की अनदेखी करते हुए अपनी पत्नी के नाम पर एक कंपनी का पंजीकरण कराया। इसके पश्चात, उसी कंपनी के नाम से देहरादून अर्बन व ग्रामीण क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य शुरू कर दिया। यह कार्य उस मूल कंपनी के माध्यम से किया गया जिसे यूपीसीएल ने स्मार्ट मीटर लगाने का जिम्मा सौंपा था, और जिसने काम आगे उपसंविदा पर सौंप दिया था।

विशेष बात यह है कि ऊर्जा निगम स्वयं स्मार्ट मीटर योजना की धीमी प्रगति को लेकर पहले से ही चिंतित था और मूल कंपनी को कई बार कार्य में शिथिलता के लिये चेतावनी व नोटिस दिए जा चुके थे। ऐसे में जब यह तथ्य सामने आया कि इसी मूल कंपनी के साथ विभाग का ही कर्मचारी अपनी पत्नी के नाम की कंपनी से काम कर रहा है, तो मामला गहराता चला गया।

जवाब तलब व कार्रवाई की धीमी गति

यूपीसीएल प्रबंधन को जैसे ही इस मामले की जानकारी मिली, पहले अधिशासी अभियंता स्तर से आरोपित जूनियर इंजीनियर से स्पष्टीकरण मांगा गया। किंतु जेई द्वारा कोई उत्तर नहीं दिया गया। इसके उपरांत वरिष्ठ अभियंता (एसई) स्तर से भी कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई। अंततः यह विषय मुख्यालय स्तर तक पहुंचा, जहां से मुख्य अभियंता गढ़वाल को जांच का उत्तरदायित्व सौंपा गया है।

इस मामले में यूपीसीएल प्रबंधन भी असहज स्थिति में आ गया है क्योंकि एक ओर वह जिस कंपनी को चेतावनी दे रहा था, उसी के साथ विभाग के ही कर्मचारी का नाम जुड़ा पाया गया।

पूर्व में भी सामने आ चुके हैं सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग के मामले (UPCL-Engineer-Smart-Meter-Company-Wife-Sublet)

ज्ञात हो कि इससे पूर्व मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना में भी ऊर्जा निगम व उरेडा से संबद्ध अभियंताओं द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए अपने नाम या परिजनों के नाम पर सौर संयंत्र स्थापित कर सरकारी अनुदान (सब्सिडी) प्राप्त करने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

इस मामले पर प्रमुख सचिव ऊर्जा आर. मीनाक्षी सुंदरम ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा था कि विभागीय अधिकारियों या उनकी पत्नियों के नाम पर लगे सौर संयंत्रों को किसी भी स्थिति में सब्सिडी नहीं दी जाएगी। यदि कोई तथ्य छिपाकर ऐसा करता है तो उसके विरुद्ध कठोर वसूली की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


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