नवीन समाचार, देहरादून, 10 जनवरी 2026 (2 Tourism Villages in Distts)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से पर्यटन और रोजगार से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। धामी सरकार अब राज्य के हर जिले में दो-दो गांवों को पर्यटन गाँव (Tourism Village) के रूप में विकसित करने जा रही है, जिसमें होम स्टे (Home Stay) निर्माण, स्थानीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) को केंद्र में रखा जाएगा।
पर्यटन विकास परिषद (Tourism Development Board) की टास्क फोर्स (Task Force) बैठक में उत्तराखंड के पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल (Dheeraj Garbyal) ने गांवों के शीघ्र चयन के निर्देश दिए हैं। यह योजना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहाड़ के गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, पलायन पर प्रभाव पड़ सकता है और पर्यटन से जुड़ी आय गांवों तक सीधे पहुंचने की संभावना बनेगी। पढ़ें पूर्व संबंधित समाचार : उत्तराखंड में देहरादून व हल्द्वानी के निकट दो गांव बनेंगे हाईटेक ईको-विलेज, पर्यटक करेंगे ‘वर्क फ्रॉम विलेज’, होंगे आधुनिक सुविधाओं से युक्त
हर जिले में डीएम की अध्यक्षता में टास्क फोर्स बनेगी, कई विभाग होंगे शामिल
पर्यटन सचिव के अनुसार प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी (District Magistrate – DM) की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स समिति गठित की जाएगी। इसमें ग्रामीण विकास (Rural Development), आयुष (AYUSH), उद्यान (Horticulture), कृषि (Agriculture), सगंध पौधा केंद्र (Aromatic Plant Centre), पंचायती राज (Panchayati Raj), प्रशिक्षण एवं सेवायोजन (Training and Employment) सहित अन्य विभागों को शामिल किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि चयनित गांवों में पर्यटन विभाग के सहयोग से अवस्थापना सुविधाएं (Infrastructure Facilities) विकसित हों और गांव “मॉडल पर्यटन गांव” के रूप में उभरें।
इस ढांचे का सीधा लाभ यह होगा कि योजना केवल पर्यटन विभाग तक सीमित न रहकर बहुविभागीय समन्वय के साथ लागू होगी। क्या इससे गांवों में सड़क, स्वच्छता, डिजिटल संपर्क, प्रशिक्षण और स्थानीय उत्पादों के बाजार तक पहुंच सुधरेगी—यह सवाल भी इसी योजना के साथ जुड़ता है।
चयनित गांवों में क्या विकसित होगा, होम स्टे और स्थानीय संसाधन बनेंगे आधार
बैठक में बताया गया कि चयनित टूरिज्म विलेज में अधिक से अधिक होम स्टे को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ गांवों की प्रकृति और सांस्कृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए वैलनेस पर्यटन (Wellness Tourism), कृषि आधारित पर्यटन (Agri Tourism), हर्बल पर्यटन (Herbal Tourism), विरासत पर्यटन (Heritage Tourism) और साहसिक पर्यटन को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का संकेत है कि गांवों की “पहचान” के अनुसार विकास होगा, ताकि पर्यटन अनुभव वास्तविक और स्थानीय बना रहे।
यह योजना पर्यटन के साथ-साथ छोटे उद्यमों, हस्तशिल्प, स्थानीय भोजन, खेती, जड़ी-बूटी और ग्रामीण सेवाओं की मांग बढ़ा सकती है। यानी पर्यटन केवल घूमने तक नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विस्तार का माध्यम बन सकता है।
किन गांवों को किस श्रेणी में विकसित करने की योजना
सचिव पर्यटन के निर्देशों के अनुसार विभिन्न जिलों के कुछ गांवों को विशेष विषयों के अनुसार विकसित करने की दिशा में तैयारी की जा रही है। बैठक में जिन गांवों का उल्लेख हुआ, उनमें—
अल्मोड़ा (Almora) के माट (Mat) और कसार देवी (Kasar Devi), पिथौरागढ़ (Pithoragarh) के मदकोट (Madkot), नैनीताल (Nainital) के प्यूड़ा (Pyoora), देहरादून (Dehradun) के लाखामंडल (Lakhamandal) को वैलनेस पर्यटन से जोड़ने की बात कही गई है। इसी तरह बागेश्वर (Bageshwar) को सामुदायिक आधारित पर्यटन (Community Based Tourism), साहसिक पर्यटन और कृषि आधारित पर्यटन के अंतर्गत विकसित करने का संकेत दिया गया।
साथ ही चमोली (Chamoli) के घेस (Ghes), उत्तरकाशी (Uttarkashi) के जखोल (Jakhol), टिहरी (Tehri) के सौड़ (Saud) और रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) के सारी (Sari) गांवों को साहसिक पर्यटन से जोड़ने की योजना सामने आई है। उल्लेखनीय है कि इन गांवों की पहचान पहले से पर्यटन मानचित्र पर रही है, लेकिन अब इन्हें सुनियोजित ढंग से विकसित करने की दिशा में ठोस प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।
2024 में 18 गांव चुने गये थे, अब पूरे राज्य में लागू होगी योजना
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2024 में 18 गांवों का चयन किया था। उस समय राज्य में पहली बार आयुष, वैलनेस, कृषि जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण पर्यटन को संगठित रूप से आगे बढ़ाने के लिए एक टास्क फोर्स बनाई गई थी। अब इसी पहल को विस्तार देते हुए सरकार इसे पूरे प्रदेश में लागू कर रही है, ताकि हर जिले को ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से नई पहचान और रोजगार के अवसर मिलें।
रोजगार, पलायन और गांवों की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा
उत्तराखंड में ग्रामीण क्षेत्रों की सबसे बड़ी चिंता रोजगार और पलायन रही है। ऐसे में यदि होम स्टे, स्थानीय उत्पाद, प्रशिक्षण और साहसिक गतिविधियां गांवों में व्यवस्थित रूप से विकसित होती हैं, तो युवाओं के लिए रोजगार के विकल्प बढ़ सकते हैं। साथ ही महिला स्वावलंबन भी बढ़ सकता है, क्योंकि होम स्टे संचालन, स्थानीय भोजन, हस्तकला और गाइड सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी स्वाभाविक रूप से बढ़ती है।
प्रश्न यह भी है कि चयन के मानक कितने पारदर्शी होंगे, बजट और समयबद्ध क्रियान्वयन कितना प्रभावी होगा, और क्या स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिलेगी। यदि इन बिंदुओं पर ध्यान रहा, तो यह योजना उत्तराखंड के पर्यटन मॉडल में बड़ा बदलाव ला सकती है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।














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