January 7, 2026

पलायन की पीड़ा: पिथौरागढ़ के सीमांत तड़ीगांव में अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीण नहीं मिले, एसएसबी के जवानों ने निभाई जिम्मेदारी

0
Funural Antim Sanskar
इस समाचार को सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें

नवीन समाचार, पिथौरागढ़, 2 जनवरी 2026 (Migration-Armymen did Funeral)। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद के सीमांत गांव तड़ीगांव में एक बुजुर्ग महिला के निधन के बाद अंतिम संस्कार तक की यात्रा ने पहाड़ों से हो रहे पलायन की गहरी और संवेदनशील सच्चाई को सामने ला दिया। गांव में अंतिम यात्रा के लिए पर्याप्त लोग नहीं मिले, ऐसे में नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने आगे बढ़कर अर्थी को कंधा दिया, लकड़ियां ढोईं और अंत्येष्टि की पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई। यह घटना केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे पहाड़ की सामाजिक स्थिति का आईना बन गई।

पलायन से खाली होता गांव, अंतिम यात्रा में नहीं जुटे लोग

सौ वर्षीय महिला का निधन और गांव की मजबूरी

Migration-Armymen did Funeral) pithoragarh ssb jawans perform last rites elderly woman migration  uttarakhand पलायन का दर्द! बुजुर्ग महिला को कंधा देने नहीं मिले लोग, SSB जवानों  ने किया अंतिम संस्कार, Uttarakhand ...तड़ीगांव में रहने वाली लगभग 100 वर्षीय झूपा देवी का बुधवार को निधन हो गया। परंपरा के अनुसार शव को गांव से करीब ढाई किलोमीटर दूर काली नदी के तट पर ले जाकर अंत्येष्टि की जानी थी, लेकिन गांव में शव यात्रा के लिए मुश्किल से चार-पांच लोग ही उपलब्ध हो सके। वे सभी उम्रदराज थे और लंबी दूरी तक शव ले जाना उनके लिए संभव नहीं था। पूर्व ग्राम प्रधान भूपेंद्र चंद के अनुसार, गांव में अब इतने लोग ही नहीं बचे हैं कि अंतिम संस्कार जैसे सामाजिक दायित्व पूरे किए जा सकें।

एसएसबी जवान बने सहारा

सीमा पर तैनात जवानों ने निभाई मानवीय भूमिका

Migration-Armymen did Funeral)स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल से सहायता मांगी। इस पर चार जवान और दो अधिकारी तुरंत गांव पहुंचे। जवानों ने न केवल अर्थी को कंधा दिया, बल्कि लकड़ियां जुटाईं और काली नदी के तट तक शव ले जाकर अंतिम संस्कार की व्यवस्था कराई। 65 वर्षीय रमेश चंद ने अपनी माता को मुखाग्नि दी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जवान सहयोग न करते, तो अंत्येष्टि कर पाना बेहद कठिन हो जाता।

तड़ीगांव में पलायन की जड़ें

सड़क, वन्यजीव और बुनियादी सुविधाओं की कमी

तड़ीगांव से हो रहे पलायन के पीछे कई कारण हैं। वर्ष 2019 में पंचायत स्तर पर बनाई गई कच्ची सड़क अब तक पक्की नहीं हो सकी है, जिससे आवागमन कठिन बना हुआ है। खेती पर जंगली सुअरों का लगातार नुकसान, गुलदार और भालू की दहशत ने ग्रामीणों की आजीविका और सुरक्षा दोनों को प्रभावित किया है। गांव में बीस वर्ष पहले 37 परिवार रहते थे, लेकिन अब केवल 13 परिवार ही बचे हैं, जिनमें अधिकांश बुजुर्ग हैं।

यह भी पढ़ें :  हल्द्वानी में पार्षद पर अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से युवक की गोली मारकर हत्या करने का अभियोग, आरोपित हिरासत में

यह घटना क्यों है महत्वपूर्ण

सामाजिक ताने-बाने पर गहराता संकट

यह घटना केवल एक गांव या एक परिवार तक सीमित नहीं है। यह बताती है कि पहाड़ों में व खासकर सीमांत गांवों में पलायन अब केवल जनसंख्या घटने का आंकड़ा नहीं, बल्कि सामाजिक परंपराओं और मानवीय संबंधों पर भी सीधा असर डाल रहा है। जब अंतिम संस्कार जैसे संस्कार के लिए भी बाहरी सहायता की और खासकर सैनिकों की जरूरत पड़े, तो यह नीति निर्माताओं और प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है। सवाल यह भी है कि क्या सड़क, सुरक्षा और आजीविका से जुड़े मुद्दों का समाधान समय रहते हुआ होता, तो गांव की यह स्थिति पैदा होती?

पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।

नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट यहाँ क्लिक करके पढ़ी जा सकती है। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचारों के लिए यहाँ👉, अल्मोड़ा के समाचारों के लिए यहाँ👉, बागेश्वर के समाचारों के लिए यहाँ👉, चंपावत के समाचारों के लिए यहाँ👉, ऊधमसिंह नगर  के समाचारों के लिए यहाँ👉, देहरादून के समाचारों के लिए यहाँ👉, उत्तरकाशी के समाचारों के लिए यहाँ👉, पौड़ी के समाचारों के लिए यहाँ👉, टिहरी जनपद के समाचारों के लिए यहाँ👉, चमोली के समाचारों के लिए यहाँ👉, रुद्रप्रयाग के समाचारों के लिए यहाँ👉, हरिद्वार के समाचारों के लिए यहाँ👉और उत्तराखंडसे संबंधित अन्य समाचार पढ़ने के लिये यहां👉 क्लिक करें।

आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे उत्तराखंड के नवीनतम अपडेट्स-‘नवीन समाचार’ पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यहां क्लिक कर हमारे व्हाट्सएप चैनल से, फेसबुक ग्रुप से, गूगल न्यूज से यहाँ, एक्स से, थ्रेड्स चैनल से, टेलीग्राम से, कुटुंब एप से और डेलीहंट से जुड़ें। अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें यहाँ क्लिक करके सहयोग करें..

यह भी पढ़ें :  जौनसार बावर में फिजूलखर्ची पर सामूहिक निर्णय, विवाह केवल गांव और घरों में ही करने होंगे, महंगे होटलों में विवाह पर रोक और नियमों के उल्लंघन पर एक लाख जुर्माना

Tags (Migration-Armymen did Funeral)

Migration-Armymen did Funeral, Pithoragarh Village Migration Crisis, Uttarakhand Empty Villages Issue, Border Village Social Impact, SSB Jawans Humanitarian Act, Uttarakhand Rural Depopulation, Migration From Hill Villages India, Pithoragarh Border Area Problems, Rural Infrastructure Uttarakhand, Human Impact Of Migration, Elderly Population In Hills, Forest Wildlife Threat Uttarakhand, Road Connectivity Issues Hills, Social Traditions In Declining Villages, People First Uttarakhand News, Hindi News Uttarakhand, #UttarakhandNews, #PithoragarhNews, #MigrationFromHills, #BorderVillagesIndia, #HumanStories

Leave a Reply

आप यह भी पढ़ना चाहेंगे :