EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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Dhami) ने बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder Case) की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation – CBI) से कराने की संस्तुति कर दी है। यह निर्णय ऐसे समय आया है, जब प्रदेश में सीबीआई जांच (CBI Investigation) की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज थे और विपक्ष सहित कई संगठन लगातार दबाव बना रहे थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने अंकिता के माता-पिता से बातचीत की, उनके आग्रह का सम्मान किया और इसी के आधार पर सीबीआई जांच की संस्तुति की गई। इस कदम को लोग न्याय प्रक्रिया में भरोसा बढ़ाने और संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मान रहे हैं।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleसीबीआई संस्तुति का निर्णय कैसे और क्यों महत्वपूर्णपेपरलीक प्रकरण के बाद फिर एक बड़ा निर्णयसीएम धामी के प्रमुख निर्णयों की सूची फिर चर्चा में1) अंकिता भंडारी प्रकरण की सीबीआई जांच की संस्तुति (CBI Probe Recommendation)2) यूकेएसएसएससी पेपरलीक पर सीबीआई जांच (UKSSSC Paper Leak CBI)3) समान नागरिक संहिता लागू (Uniform Civil Code – UCC)4) मदरसा व्यवस्था में परिवर्तन और मान्यता व्यवस्था को नया ढांचा (Madrasa Regulation Reform)5) धर्मांतरण विरोधी कानून को सख्त बनाना (Anti-Conversion Law Strengthened)6) नकल विरोधी कानून—देश में सबसे कड़े प्रावधान (Anti-Cheating Law)7) महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण (30% Horizontal Reservation For Women)8) राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत आरक्षण (10% Reservation For State Agitators)9) बैकडोर भर्ती पर कार्रवाई और नियुक्तियां रद्द (Backdoor Recruitment Action)10) अवैध अतिक्रमण पर अभियान और ऑपरेशन कालनेमी (Anti-Encroachment Drive + Operation Kalnemi)Tags (Dhami-s 10 Major Decisions) :Like this:Relatedसीबीआई संस्तुति का निर्णय कैसे और क्यों महत्वपूर्णअंकिता भंडारी प्रकरण पहले ही उत्तराखंड की न्याय व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और जनभावनाओं से जुड़ा मामला रहा है। हाल के दिनों में कुछ ऑडियो क्लिप (Audio Clip) और दावों के बाद एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में आ गया था। इसके चलते राज्य में धरना-प्रदर्शन (Protest) शुरू हुए और सीबीआई जांच की मांग ने जोर पकड़ लिया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य शुरू से निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करना रहा है।यह भी पढ़ें : किसान सुखवंत सिंह प्रकरण में उधम सिंह नगर पुलिस पर बड़ी कार्रवाई, आईटीआई कोतवाली प्रभारी सहित 2 उप निरीक्षक निलंबित और 10 पुलिसकर्मी लाइन हाजिरउन्होंने यह भी बताया कि प्रारंभ में विशेष जांच दल (Special Investigation Team – SIT) का गठन किया गया था और जांच प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन अब परिजनों की मांग और जनभावनाओं को देखते हुए सीबीआई संस्तुति का निर्णय लिया गया। अब अंतिम निर्णय केंद्र सरकार (Central Government) के स्तर पर होगा।पेपरलीक प्रकरण के बाद फिर एक बड़ा निर्णय राज्य में इससे पहले भी उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (Uttarakhand Subordinate Service Selection Commission – UKSSSC) के पेपरलीक (Paper Leak) प्रकरण में युवाओं के बीच स्वयं अचानक जाकर सीबीआई जांच की संस्तुति को लेकर सरकार के कदम चर्चा में रहे थे। ऐसे में अब अंकिता भंडारी प्रकरण में भी अंकिता के माता-पिता को बुलाकर और उनसे उनकी इच्छा जानकार सीबीआई संस्तुति से यह संदेश भी जा रहा है कि सरकार संवेदनशील और जनहित से जुड़े मामलों में बाहरी केंद्रीय जांच एजेंसी (Central Investigating Agency) को जोड़कर प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ाने का प्रयास कर रही है।क्या इससे जनता का भरोसा मजबूत होगा और ‘वीआईपी’ कोण (VIP Angle) जैसे सवालों पर स्पष्टता आएगी—यह प्रश्न भी स्वाभाविक रूप से उठ रहा है।सीएम धामी के प्रमुख निर्णयों की सूची फिर चर्चा मेंसीबीआई जांच संस्तुति के बाद मुख्यमंत्री धामी के कार्यकाल के कुछ बड़े निर्णयों की चर्चा भी फिर तेज हो गई है, जिनका सीधा संबंध कानून-व्यवस्था, शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक सुधार से रहा है। इनमें से कई निर्णय नीति (Policy) और कानून (Law) के स्तर पर असर डालने वाले रहे हैं।‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया विज्ञापन न केवल आपके व्यवसाय या संस्थान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाएगा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता को भी सशक्त बनाएगा। अग्रिम धन्यवाद। 1) अंकिता भंडारी प्रकरण की सीबीआई जांच की संस्तुति (CBI Probe Recommendation)अंकिता भंडारी प्रकरण (Ankita Bhandari Case) उत्तराखंड के सबसे संवेदनशील घटनाक्रमों में रहा है। लंबे समय से यह मामला जनता की भावनाओं, न्याय की अपेक्षा और राज्य की व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ा रहा। हाल में सीबीआई जांच की मांग तेज होने और कई संगठनों के आंदोलनों के बीच मुख्यमंत्री धामी ने अंकिता के माता-पिता से संवाद किया और उनकी मांग का सम्मान करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation – CBI) से जांच की संस्तुति की।यह भी पढ़ें : 'टीम इंडिया' में उत्तराखंड मूल के एक और युवा खिलाड़ी ‘बेबी एबी’-आयुष बड़ोनी की एंट्री, मौका मिलने-खेलने और गंभीर के पूर्व बयान पर चर्चा तेजइस फैसले का बड़ा संदेश यह रहा कि सरकार ने यह समझा कि पीड़ित पक्ष की संतुष्टि और न्याय की विश्वसनीयता केवल न्यायालयी प्रक्रिया से नहीं, बल्कि जांच की निष्पक्षता पर भी निर्भर करती है। आगे यह निर्णय अब केंद्र सरकार के स्तर पर अंतिम स्वीकृति की प्रक्रिया से जुड़ेगा।2) यूकेएसएसएससी पेपरलीक पर सीबीआई जांच (UKSSSC Paper Leak CBI)उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (Uttarakhand Subordinate Service Selection Commission – UKSSSC) से जुड़े पेपरलीक (Paper Leak) ने राज्य के युवाओं को सबसे अधिक प्रभावित किया। भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर संकट आया और सड़क से लेकर शिक्षण संस्थानों तक विरोध बढ़ा। लेकिन इसी बीच सीएम धामी का आंदोलनरत युवाओं के बीच पहुंचकर सीबीआई जांच की संस्तुति करना युवाओं के लिए भरोसा बढ़ाने वाला कदम माना गया। इसका असर यह हुआ कि भर्ती माफिया, नकल नेटवर्क और अवैध चयन जैसे मुद्दों पर सरकार की सख्त नीति का संकेत गया।3) समान नागरिक संहिता लागू (Uniform Civil Code – UCC)समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) उत्तराखंड में लागू होने के बाद राज्य देश में इस दिशा में सबसे आगे आया। यह निर्णय विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण, पंजीकरण जैसी व्यवस्थाओं में एकरूपता की दिशा में बड़ा कदम माना गया।इसके सामाजिक असर को लेकर दो दृष्टिकोण रहे—समर्थकों के अनुसार यह कानूनी समानता की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, जबकि आलोचकों का कहना रहा कि इससे कुछ समुदायों में असहजता और नए कानूनी प्रश्न भी उठ सकते हैं। बावजूद इसके, नीतिगत दृष्टि से यह धामी सरकार का सबसे बड़ा और सबसे अधिक चर्चा वाला निर्णय बन गया।4) मदरसा व्यवस्था में परिवर्तन और मान्यता व्यवस्था को नया ढांचा (Madrasa Regulation Reform)सरकार ने मदरसों (Madrasa) से जुड़ी व्यवस्था में परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ाए और मान्यता, पाठ्यक्रम और संबद्धता (Affiliation) को अधिक संस्थागत बनाने की कोशिश की। इसका असर अल्पसंख्यक शिक्षा (Minority Education), विद्यालयी मानक (School Standards) और पाठ्यक्रम की गुणवत्ता से जुड़ता है। समर्थक इसे शिक्षा सुधार मानते हैं, जबकि आलोचक इसे हस्तक्षेप की तरह देखते हैं। इस फैसले का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे कानूनी ढांचे और समान शिक्षा अवसर के अनुरूप कैसे लागू किया जाता है।5) धर्मांतरण विरोधी कानून को सख्त बनाना (Anti-Conversion Law Strengthened)उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता संशोधन (Freedom of Religion Amendment) के माध्यम से जबरन या प्रलोभन देकर धर्मांतरण (Forced Conversion) को रोकने के लिए दंड प्रावधान सख्त किये गये। सरकार का तर्क रहा कि इससे सामाजिक शांति और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा होगी। वहीं आलोचकों का कहना रहा कि कानून के दुरुपयोग की आशंका भी बनी रह सकती है। इस निर्णय का सबसे बड़ा प्रभाव कानून-व्यवस्था, सामाजिक तनाव नियंत्रण और न्यायिक प्रक्रिया पर दिखता है।6) नकल विरोधी कानून—देश में सबसे कड़े प्रावधान (Anti-Cheating Law)उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) कानून/अध्यादेश (Anti Cheating Law) को राज्य सरकार ने कठोर प्रावधानों के साथ लागू किया। इसमें पेपरलीक, नकल कराने, प्रश्नपत्र व्यापार जैसी गतिविधियों पर भारी दंड का प्रावधान किया गया। इसका सीधा लाभ उन लाखों युवाओं को है, जो वर्षों तक तैयारी कर परीक्षा देते हैं। यह कदम रोजगार नीति, प्रतियोगी परीक्षा विश्वसनीयता, और भर्ती पारदर्शिता को लेकर निर्णायक माना गया।7) महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण (30% Horizontal Reservation For Women)सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण (30% Horizontal Reservation) को कानूनी रूप से लागू करना महिला सशक्तीकरण का बड़ा निर्णय रहा। इससे यह संदेश गया कि सरकार रोजगार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए केवल प्रोत्साहन नहीं, बल्कि कानूनी अधिकार दे रही है। इसका असर परिवारों की आर्थिक स्थिति, महिलाओं की आत्मनिर्भरता और सामाजिक संतुलन पर दूरगामी हो सकता है।यह भी पढ़ें : दो बच्चों की मां का भतीजे ने चुराया दिल, प्रेम विवाह कर दोनों घर चलाने बन गए 'बंटी-बबली' जैसे चोर और….8) राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत आरक्षण (10% Reservation For State Agitators)राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण (10% Horizontal Reservation) को कैबिनेट स्तर पर मंजूरी देना, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन की भूमिका को संस्थागत सम्मान देने जैसा कदम माना गया। यह निर्णय भावनात्मक भी है और नीति आधारित भी। इस निर्णय से राज्य में आंदोलनकारियों के प्रति सम्मान का संदेश स्पष्ट रहा।9) बैकडोर भर्ती पर कार्रवाई और नियुक्तियां रद्द (Backdoor Recruitment Action)सरकार ने विधानसभा सहित कुछ संस्थानों में बैकडोर भर्ती (Backdoor Recruitment) पर जांच और नियुक्तियां रद्द करने जैसी कार्रवाई के संकेत दिए। जनता के लिए इसका अर्थ यह था कि योग्यता आधारित चयन (Merit Based Recruitment) की ओर वापसी होगी। यह कदम शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि इससे युवाओं में यह संदेश गया कि नियमों से हटकर चयन पर कार्रवाई संभव है।10) अवैध अतिक्रमण पर अभियान और ऑपरेशन कालनेमी (Anti-Encroachment Drive + Operation Kalnemi)धामी सरकार के कार्यकाल में अवैध अतिक्रमण (Illegal Encroachment) हटाने और ढोंगी बाबाओं के विरुद्ध अभियान ऑपरेशन कालनेमी (Operation Kalnemi) चर्चा में रहा। सरकार का कहना रहा कि इससे सार्वजनिक भूमि की रक्षा, नगर नियोजन, कानून-व्यवस्था और ठगी रोकने में मदद मिली। वहीं कुछ मामलों में प्रक्रिया और चयन को लेकर सवाल भी उठे। इस फैसले का मूल्यांकन इस आधार पर होगा कि कार्रवाई कितनी निष्पक्ष, विधिसम्मत और न्यायपूर्ण रही।धामी सरकार के इन फैसलों का समग्र असर यह है कि उत्तराखंड में कानून, रोजगार, शिक्षा और प्रशासन के मुद्दों पर सरकार ने कई बार तेज और कड़े निर्णय लिए। कुछ फैसले जनसमर्थन से जुड़े, कुछ पर बहस हुई, लेकिन राज्य नीति की दिशा में ये निर्णय लगातार प्रदेश ही नहीं देश भर में चर्चा के केंद्र में बने रहे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अगले चरण में इन फैसलों का स्थायी लाभ, कानूनी स्थिरता और जनविश्वास कितना मजबूत होता है।पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट यहाँ क्लिक करके पढ़ी जा सकती है। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचारों के लिए यहाँ👉, 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