नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जनवरी 2026 (Restaurant on Govt Land)। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद में नैनीताल-कालाढूंगी मार्ग पर स्थित मंगोली क्षेत्र में राजस्व विभाग की टीम ने गुरुवार को सरकारी भूमि पर संचालित एक रेस्टोरेंट/कैफे को कब्जे में लेते हुए कुर्की की कार्रवाई पूरी की। यह कार्रवाई उपजिलाधिकारी (एसडीएम, Sub Divisional Magistrate) न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई। प्रशासन के अनुसार, संबंधित संपत्ति को लेकर लंबे समय से ग्रामीणों और संचालकों के बीच विवाद चल रहा था, जिसके कारण क्षेत्र में तनाव और शांतिभंग की आशंका जताई गई थी।
इस निर्णय को स्थानीय सुरक्षा, सरकारी भूमि संरक्षण और कानून व्यवस्था के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देखें पूर्व संबंधित वीडिओ :
सरकारी भूमि विवाद में प्रशासन की सख्त कार्रवाई, कुर्की से स्पष्ट संदेश
विरोध प्रदर्शन के बाद दर्ज हुआ अभियोग, मामला एसडीएम न्यायालय तक पहुंचा
मंगोली क्षेत्र में “चशेड़ी रेस्टोरेंट/कैफे” को लेकर स्थानीय लोगों ने बीते दिनों विरोध प्रदर्शन किया था। ग्रामीणों का आरोप था कि एक व्यक्ति ने सरकारी भूमि पर रेस्टोरेंट/कैफे का निर्माण कर संचालन शुरू किया। इसके बाद एक पक्ष की ओर से संचालकों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कराया गया। मामला एसडीएम नैनीताल की न्यायालय प्रक्रिया में पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया गया।
तहसीलदार की जांच आख्या बनी निर्णय का आधार
एसडीएम न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान तहसीलदार ने अपनी जांच आख्या प्रस्तुत की। जांच में बताया गया कि उमा देवी पत्नी ललित कुमार, हाल निवासी मंगोली द्वारा सरकारी भूमि पर रेस्टोरेंट संचालित किया जा रहा है और आए दिन ग्रामीणों के साथ विवाद की स्थिति बन रही है।
प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, उक्त भूमि को लेकर उमा देवी और एक ग्रामीण के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई थी। यह तथ्य इस मामले को केवल भूमि विवाद नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था से जुड़ा संवेदनशील विषय भी बनाता है।
साक्ष्य प्रस्तुत न कर पाने पर भी बनी तनाव की स्थिति
सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष अपने-अपने दावे के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाए। इसके बावजूद क्षेत्र में विवाद और टकराव की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने शांतिभंग की आशंका को गंभीर माना। तहसीलदार ने मामले में प्रस्तुत एक अन्य आख्या का संज्ञान भी न्यायालय के समक्ष रखा, जिसके आधार पर कुर्की का आदेश जारी किया गया।
गुरुवार को कुर्की की कार्रवाई, प्रशासन ने संपत्ति का कब्जा लिया
गुरुवार को तहसीलदार अक्षय भट्ट की मौजूदगी में राजस्व विभाग की टीम ने आदेश के अनुपालन में संपत्ति को कब्जे में लेकर कुर्की की कार्यवाही पूरी की। मौके पर हेम चंद्र पंत, एचआर ममगाई, ललित मोहन जोशी, चम्पा जोशी, ज्योति चौधरी, सुशीला खाती सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे। इस कार्रवाई के बाद यह स्पष्ट हो गया कि सरकारी भूमि पर अनधिकृत कब्जे और विवादित संचालन के मामलों में प्रशासन कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से कठोर कदम उठा सकता है।
पृष्ठभूमि में “स्थानीय सुरक्षा” का सवाल, पहले भी बढ़ा था तनाव
इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में मंगोली-गहलना क्षेत्र को लेकर पहले से ही तनाव का माहौल रहा है। क्षेत्र में बाहरी लोगों की बढ़ती आवाजाही और कथित अराजक गतिविधियों के कारण स्थानीय ग्रामीण असुरक्षा महसूस कर रहे थे। सड़क पर धक्का-मुक्की की एक घटना के बाद एक निर्धन स्थानीय महिला चोटिल अवस्था में चिकित्सालय में भर्ती कराई गई थी, जिसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस से सुरक्षा की मांग करते हुए शिकायत पत्र सौंपा था और धरना-प्रदर्शन की घोषणा की थी। ऐसे मामलों में प्रश्न उठता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद और स्थानीय सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक निगरानी कितनी सक्रिय है?
पढ़ें पूर्व संबंधित समाचार : नैनीताल : मंगोली-गहलना क्षेत्र में बाहरी लोगों की गतिविधियों से बढ़ी चिंता, ग्रामीणों ने सुरक्षा की मांग उठाते हुए की है धरना-प्रदर्शन की घोषणा…
क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई: सरकारी भूमि संरक्षण, कानून व्यवस्था और जनविश्वास
यह प्रकरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सरकारी भूमि संरक्षण, ग्रामीण क्षेत्रों में विवाद नियंत्रण और प्रशासनिक निर्णयों की प्रभावशीलता से जुड़ा है। सरकारी भूमि पर अतिक्रमण और अनधिकृत संचालन के मामलों में सख्ती न केवल सार्वजनिक संपत्ति को बचाती है, बल्कि स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा और भरोसे की भावना भी बढ़ाती है। साथ ही, यह संदेश भी जाता है कि न्यायालय के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए राजस्व विभाग और प्रशासनिक तंत्र सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आगे यह देखा जाएगा कि इस कुर्की के बाद भूमि संबंधी विवाद का स्थायी समाधान किस प्रक्रिया से निकलता है और क्षेत्र में तनाव घटाने के लिए प्रशासन कौन-कौन से कदम उठाता है।
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