नवीन समाचार, देहरादून, 15 फरवरी 2026 (Uttarakhand Levying Green Cess-Outside Vehicles)। पूर्व में कहा जा रहा था की उत्तराखंड देश का पहला राज्य बनने जा रहा है जहां दिसंबर 2025 से बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर “ग्रीन सेस” (Green Cess) वसूला जाएगा। अब बताया गया है कि उत्तराखंड में आगामी 15 फरवरी 2026 से बाहरी राज्यों से आने वाले सभी वाहनों पर ग्रीन सेस लागू होने जा रहा है, जिसकी वसूली पूर्णतः ऑटोमेटिक होगी और FASTag के माध्यम से प्रवेश करते ही राशि कट जाएगी। इससे राज्य में बाहरी वाहनों का आना महंगा हो जाएगा।
रुद्रपुर में बाहरी वाहनों से 24 घंटे में एक बार कटेंगे 80 रुपये, लागू हुई ग्रीन सेस की डिजिटल व्यवस्था
रुद्रपुर। उत्तराखंड के रुद्रपुर शहर में एएनपीआर यानी ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों के माध्यम से बाहरी राज्यों के वाहनों से ग्रीन सेस की वसूली पूरी तरह लागू कर दी गई है। अब दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों की डिजिटल निगरानी के साथ सेस की धनराशि स्वतः कट रही है।
एआरटीओ प्रशासन मोहित कोठारी के अनुसार एलएमवी श्रेणी के बाहरी वाहनों पर 24 घंटे में एक बार 80 रुपये ग्रीन सेस लागू होगा। शहर में सात स्थानों पर लगाए गए एएनपीआर कैमरे वाहन की नंबर प्लेट स्कैन करते ही निर्धारित धनराशि काट लेते हैं।
परिवहन विभाग के अनुसार यह व्यवस्था पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण तथा यातायात प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लागू की गई है। साथ ही बाहरी वाहनों की आवाजाही का सटीक डिजिटल डेटा भी प्राप्त होगा। नियमित आवागमन करने वाले वाहनों के लिए मासिक और वार्षिक पास व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।
ग्रीन सेस की दरें
रजिस्ट्रेशन के समय (नॉन ट्रांसपोर्ट वाहन)
मोटरसाइकिल – 500 रुपये
पेट्रोल कार – 1500 रुपये
डीजल कार – 3000 रुपये
15 वर्ष पुराने वाहन नवीनीकरण (हर 5 वर्ष पर)
मोटरसाइकिल – 1000 रुपये
पेट्रोल वाहन – 3000 रुपये
डीजल वाहन – 5000 रुपये
ट्रांसपोर्ट वाहन (रजिस्ट्रेशन/फिटनेस के समय)
5 वर्ष तक – पेट्रोल 400 रुपये, डीजल 500 रुपये
5 से 10 वर्ष – पेट्रोल 600 रुपये, डीजल 750 रुपये
10 से 15 वर्ष – पेट्रोल 800 रुपये, डीजल 1000 रुपये
15 वर्ष से अधिक – पेट्रोल 1000 रुपये, डीजल 1250 रुपये
दूसरे राज्यों के वाहन (प्रति प्रवेश)
पैसेंजर कार/मैक्सी कैब – 80 रुपये
डिलीवरी वैन (3 टन तक) – 80 रुपये
लाइट गुड्स वाहन (3 से 7.5 टन) – 120 रुपये
मध्यम/भारी गुड्स वाहन – 250 रुपये
बस (12 सीट से अधिक) – 140 रुपये
हेवी वाहन (एक्सल के अनुसार) – 450 से 700 रुपये
ग्रीन सेस से छूट
इलेक्ट्रिक, बैटरी, सोलर, सीएनजी तथा हाइब्रिड वाहन
एम्बुलेंस
सेना के वाहन
कृषि ट्रैक्टर और हार्वेस्टर
सरकारी वाहन
विभिन्न वाहन श्रेणियों पर लागू सेस दरें
सेस की निर्धारित राशि
चार पहिया वाहन — 80 रुपये
डिलीवरी वैन — 250 रुपये
बस — 140 रुपये
भारी वाहन — 120 रुपये प्रतिदिन
ट्रक — 140 से 700 रुपये, आकार के अनुसार
यह व्यवस्था लागू होने के बाद उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले पर्यटकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ेगा, ठीक उसी तरह जैसे हिमाचल प्रदेश में ग्रीन सेस पहले से लिया जा रहा है। परिवहन विभाग का कहना है कि यह प्रणाली चरणबद्ध तरीके से और अधिक सुदृढ़ की जाएगी ताकि प्रदूषण नियंत्रण और यातायात प्रबंधन को प्रभावी बनाया जा सके।
उत्तराखंड में ग्रीन सेस टैक्स का दायरा बढ़ा, 15 फरवरी से 15 प्रवेश द्वारों पर लागू
उत्तराखंड में अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों पर लागू ग्रीन सेस टैक्स का दायरा बढ़ाया जा रहा है। नारसन चेकपोस्ट के बाद आशारोड़ी, भगवानपुर, नादेही और रुद्रपुर में इसका ट्रायल शुरू हो चुका है। परिवहन विभाग की योजना 15 फरवरी 2026 तक राज्य के 15 प्रमुख प्रवेश द्वारों पर इस व्यवस्था को लागू करने की है। परिवहन विभाग के अनुसार एएनपीआर कैमरों के माध्यम से वाहनों की नंबर प्लेट पहचान कर फास्टैग से स्वचालित रूप से ग्रीन सेस की वसूली की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य वायु प्रदूषण में कमी लाना, पुराने प्रदूषणकारी वाहनों पर नियंत्रण करना और स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को प्रोत्साहित करना है।
इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन, सोलर और बैटरी चालित वाहनों को इस टैक्स से छूट दी गई है। अनुमान है कि ग्रीन सेस टैक्स से उत्तराखंड को प्रतिवर्ष लगभग 100 करोड़ रुपये की आय होगी, जिसका उपयोग वायु निगरानी, सड़क धूल नियंत्रण, हरित क्षेत्र विस्तार और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम के विकास में किया जाएगा।
इस हेतु प्रदेश में 40 से अधिक एएनपीआर कैमरे स्थापित कर व्यवस्था को पारदर्शी बनाया गया है। यदि कोई वाहन 24 घंटे के अंदर दोबारा प्रदेश की सीमा पार करता है तो पुनः सेस लिया जाएगा। सरकार के अनुसार इससे हर वर्ष 100 से 150 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। इसी के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता को राहत देते हुए 15 वर्ष से अधिक पुराने वाणिज्यिक वाहनों की बढ़ी फिटनेस फीस को 1 जुलाई 2026 तक स्थगित कर दिया है। परिवहन विभाग ने नागरिकों से वाहन पंजीकरण के मोबाइल नंबर अपडेट कराने की अपील की है, ताकि चालान व अन्य संदेश समय पर मिल सकें।
उत्तराखंड में ग्रीन सेस लागू होने का उद्देश्य
प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण
उत्तराखंड सरकार का कहना है कि ग्रीन सेस लगाने का मुख्य उद्देश्य राज्य में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना व स्वच्छता तथा शहरी परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है।
ग्रीन सेस से प्राप्त धनराशि—
वायु प्रदूषण पर नियंत्रण
सड़क सुरक्षा सुधार
शहरी परिवहन को आधुनिक बनाने
पर व्यय की जाएगी।
पूरी प्रक्रिया होगी ऑटोमेटिक
परिवहन विभाग ने ग्रीन सेस प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए एक निजी कंपनी से करार किया है।
राज्य की सीमाओं पर 16 स्थानों पर ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं।
अतिरिक्त 20 से अधिक कैमरे मुख्य मार्गों पर लगाए गए हैं।
कहाँ लगे हैं एएनपीआर कैमरे
गढ़वाल क्षेत्र
कुल्हाल (उत्तराखंड–हिमाचल सीमा)
तिमली रेंज
आशारोड़ी सीमा
नारसन सीमा
गोवर्धनपुर
चिड़ियापुर
कुमाऊँ क्षेत्र
खटीमा
काशीपुर
जसपुर
रुद्रपुर
पुलभट्टा (बरेली रोड)
अन्य प्रवेश बिंदु
कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन कर FASTag से स्वतः राशि काट देंगे।
किन वाहनों को मिलेगी छूट
निम्न श्रेणियों के वाहन ग्रीन सेस से मुक्त
दोपहिया वाहन
इलेक्ट्रिक वाहन
सीएनजी वाहन
सरकारी वाहन
चिकित्सालय सेवा हेतु एंबुलेंस
अग्निशमन वाहन
15 वर्ष पुराने वाणिज्यिक वाहनों को बड़ी राहत
बढ़ी हुई फिटनेस फीस स्थगित
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की है कि केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाई गई वाणिज्यिक वाहनों की फिटनेस फीस, जो 10 गुना तक बढ़ी है, 1 जुलाई 2026 तक उत्तराखंड में लागू नहीं होगी। इस अवधि में पूर्व की दर ही लागू रहेगी।
मुख्यमंत्री का बयान
उन्होंने कहा कि— “जनभावनाओं का सम्मान करते हुए प्रदेश वासियों पर अचानक अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं डाला जाएगा। राज्य सरकार का संकल्प है कि आमजन, टैक्सी चालक, परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों पर अनावश्यक बोझ न पड़े।” धामी ने यह भी बताया कि भविष्य में केंद्र सरकार द्वारा जो भी संशोधित दरें लागू होंगी, राज्य उसी के अनुरूप निर्णय लेगा।
उत्तराखंड में ग्रीन सेस और परिवहन सुधार – एक समग्र दृष्टिकोण
राज्य पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर है
प्रतिदिन बाहरी राज्यों से हजारों वाहन प्रवेश करते हैं
प्रदूषण की स्थिति कई स्थानों पर चिंताजनक होती जा रही है
ग्रीन सेस से राज्य को स्थायी राजस्व प्राप्त होगा
यह राजस्व सीधे परिवहन और पर्यावरण सुधार में लगेगा
नियमों के आलोक में व्यवस्था को तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाया जा रहा है
चालान और मोबाइल नंबर अपडेट करने की अपील
परिवहन विभाग का निर्देश
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन वी.के. सिंह ने बताया कि— राज्य में मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 136A और केंद्रीय मोटरयान नियम 167A के तहत इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग लागू है। एएनपीआर कैमरे, इंटरसेप्टर वाहन व टास्कफोर्स द्वारा किए जा रहे चालान में वाहन को रोकने की आवश्यकता नहीं पड़ती। यदि पंजीयन विवरण में वाहन स्वामी का मोबाइल नंबर अपडेट नहीं है, तो—
चालान की सूचना समय पर नहीं मिलती
बीमा व प्रदूषण प्रमाणपत्र के नवीनीकरण में भी ओटीपी संबंधित समस्या आती है। इसलिए सभी नागरिक अपने वाहनों में अपने मोबाईल नंबर अपडेट कर लें।
नागरिक कैसे मोबाइल नंबर अपडेट करें
परिवहन विभाग की वेबसाइट Parivahan.gov.in पर घर बैठे
अथवा संबंधित कार्यालय में उपस्थित होकर
जनता और प्रशासन के बीच इस मुद्दे पर संतुलित सहभागिता आवश्यक है, ताकि पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधा दोनों का समन्वय रह सके।
आप ग्रीन सेस लागू करने के निर्णय को कितना उचित मानते हैं? क्या इससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी या पर्यटक भार बढ़ेगा? अपने विचार कमेन्ट बॉक्स में अवश्य लिखें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















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