EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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पुरानी पेंशन योजना को लागू करने के दबाव के बीच उत्तराखंड सरकार राज्य कें सरकारी कर्मचारियों के पेंशन को नया कानून लाने जा रही है। लंबी अस्थायी सेवाओं के बाद स्थायी होने वाले कार्मिकों के लिहाज से यह कानून काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। उत्तराखंड सरकार का कहना है कि एक साथ स्थायी होने वाले कार्मिकों के लिहाज से यह कानून काफी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा सरकार पुरानी पेंशन को लागू करने के लिए भी फार्मूला बना रही है। उत्तराखण्ड पेंशन हेतु अर्हकारी सेवा तथा विधिमान्यकरण विधेयक-2022 को राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने मंजूरी दे दी। औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद यह उत्तराखंड का नया कानून बन जाएगा। इस कानून के लागू होने से मौलिक नियुक्ति की तारीख से ही सेवा अवधि की गणना की जाएगी और इसी आधार पर पेंशन तय होगी। राज्यपाल के सचिव रविनाथ रमन ने विधेयक को मंजूरी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि विधेयक को मंजूरी के बाद विधायी विभाग भेज दिया गया है।बजट सत्र में पास हुआ था विधेयक: गौरतलब है कि इसी वर्ष बीते मार्च माह में गैरसैंण में हुए बजट सत्र में यह विधेयक पारित हुआ था। उल्लेखनीय है कि पेंशन लाभ के लिए 10 साल की न्यूनतम सेवा अनिवार्य है। लेकिन लोनिवि, सिंचाई सहित कुछ विभागों में कार्मिकों ने अपनी दैनिक वेतन, तदर्थ, कार्यप्रभारित, संविदा, नियत वेतन व अंशकालिक रूप में अस्थायी सेवाओं को भी पेंशन के लिए जोड़ने की मांग की थी। कुछ मामलों में न्यायालय ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया था। इस प्रकार के मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने पेंशन को लेकर कानून बनाने का निर्णय किया था। यह कानून पूर्व में जारी फैसलों पर भी लागू होगा।यह भी पढ़ें : उत्तराखंड के 7 राजकीय मेडिकल कॉलेजों में 365 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती का प्रस्ताव, जल्द चयन बोर्ड को भेजा जाएगा अधियाचन...माध्यमिक शिक्षकों ने बताया कर्मचारी विरोधी: माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. अनिल शर्मा और महामंत्री जगमोहन रावत ने इस विधेयक को शिक्षक-कर्मचारी विरेाधी करार दिया है। उन्होंने इस विधेयक को स्वीकार न करने के बारे में राज्यपाल को ज्ञापन भी दिया था। डॉ. शर्मा के अनुसार सरकार को दोबारा से इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। कई-कई साल तक तदर्थ व अस्थायी आधार पर नौकरियां करते हैं। मौलिक नियुक्ति से सेवा की गणना करना नाइंसाफी होगा। पुरानी पेंशन को फार्मूला बन रहा: वर्ष 2005 से पहले की विज्ञप्ति के आधार पर चयनित कार्मिकों को पुरानी पेंशन का लाभ देने के लिए सरकार फार्मूला तैयार कर रही है। इसी माह आगामी 19 मई को मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु वित्त, कार्मिक, न्याय विभाग के साथ इस पर चर्चा करेंगे। वित्त विभाग ने सभी विभागों को इस विषय की तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं। करीब दो हजार शिक्षक-कर्मचारियों के इस फैसले के दायरे में आने की उम्मीद है। वित्त विभाग के उपसचिव नंदन सिंह बिष्ट ने सभी विभागों को भेजे पत्र में कहा कि 19 मई को मानकों का परीक्षण किया जाएगा। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। (Big news: Uttarakhand government surrounded on pension is bringing new law on pension, Governor has given approval, formula for implementing old pension is also being prepared, bada samaachaar: penshan par ghiree uttaraakhand sarakaar la rahee penshan par naya kaanoon, raajyapaal ne dee manjooree, puraanee penshan laagoo karane ka phormoola bhee ban raha)Share this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में सूचना के अधिकार के तहत ऐतिहासिक आदेश, अब अधीनस्थ न्यायपालिका के न्यायाधीशों के विरुद्ध शिकायतों और कार्रवाई की जानकारी देनी होगीLike this:Like Loading...Related Post navigation‘नवीन समाचार’ एक्सक्लूसिव ब्रेकिंग: लोनिवि में एक दर्जन अधिशासी अभियंता बदले, कई सहायक अभियंताओं को भी मिली अधिशासी अभियंता की बड़ी जिम्मेदारी 50 वर्ष पुराने मंदिर व 30 वर्ष पुरानी मजार सहित दर्जनों अवैध धार्मिक निर्माण ध्वस्त, मजार बचाने तो विधायक तक उतरे, मंदिर बचाने कोई नहीं आया..