भारतीय गणतंत्र की नींव की स्वर्णिम कहानी: जब देहरादून में छपी संविधान की पहली प्रति और इतिहास का साक्षी बना उत्तराखंड

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नवीन समाचार, देहरादून, 26 जनवरी 2026 (1st Copy of Constitution)। उत्तराखंड (uttarakhand) और इसकी राजधानी देहरादून (Dehradun) का नाम केवल देवभूमि, प्राकृतिक सौंदर्य, सैन्य संस्थानों और शिक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के गणतंत्र (Republic of India) के इतिहास में भी स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। आज जब देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, तब यह जानना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि जिस भारतीय संविधान (Indian Constitution) के आधार पर 140 करोड़ से अधिक नागरिकों का लोकतंत्र संचालित हो रहा है, उसकी पहली छपी हुई प्रति कहां तैयार हुई थी और वह आज भी कहां सुरक्षित है।

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(1st Copy Of Constitution) FIRST COPY OF INDIAN CONSTITUTION
संविधान सभा के अध्यक्ष डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद संविधान की पहली प्रकाशित प्रति देखते हुए (Photo courtesy – Survey of India)

उल्लेखनीय है कि 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र तो हो गया था, लेकिन देश के संचालन के लिए कोई लिखित संविधान मौजूद नहीं था। एक संप्रभु गणराज्य बनने के लिए कानून, अधिकार और कर्तव्यों का स्पष्ट ढांचा आवश्यक था। इसी आवश्यकता के तहत संविधान सभा (Constituent Assembly) का गठन हुआ, जिसके अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad) बने और प्रारूप समिति की जिम्मेदारी डॉ. भीमराव आंबेडकर (Dr. B R Ambedkar) को सौंपी गई।

हाथों से लिखा गया संविधान और देहरादून की भूमिका

भारतीय संविधान को 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने अंगीकार किया और 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया। इसे लागू करने के 26 जनवरी की तिथि को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था। भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। इसकी मूल प्रति टाइप नहीं की गई थी, बल्कि इसे प्रसिद्ध सुलेखक प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा (Prem Behari Narain Raizada) ने हाथों से लिखा था। यह संविधान 234 पृष्ठों का है, जिसे चर्मपत्र शीट (Parchment Sheet) पर इटैलिक शैली (Italic Style) में तैयार किया गया।

संविधान के प्रत्येक पृष्ठ की कलात्मक सजावट शांति निकेतन (Shantiniketan) के कलाकारों ने की थी, जिनका निर्देशन नंदलाल बोस (Nandalal Bose) ने किया। इन चित्रों में मोहनजोदड़ो, सिंधु घाटी सभ्यता और भारतीय सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई देती है।

पहली छपाई और सर्वे ऑफ इंडिया

जब संविधान का निर्माण पूर्ण हुआ, तब अगली चुनौती थी इसकी प्रतियों की छपाई। चूंकि यह विशाल और अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज था, इसलिए उच्च गुणवत्ता वाली छपाई की आवश्यकता थी। उस समय देश में सबसे आधुनिक छपाई सुविधा केवल सर्वे ऑफ इंडिया (Survey of India) के पास उपलब्ध थी, जिसका मुख्य छापाखाना देहरादून के हाथीबड़कला (Hathibadkala) क्षेत्र में स्थित था। यहीं संविधान की पहली एक हजार प्रतियां फोटो लिथोग्राफिक तकनीक (Photo Lithographic Technique) से छापी गईं। यह क्षण न केवल संस्थान के लिए, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय था।

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FIRST COPY OF INDIAN CONSTITUTION
इन्हीं मशीनों से संविधान की पहली प्रतियां छपी थीं

आज भी सुरक्षित हैं ऐतिहासिक धरोहरें

भारतीय संविधान की हाथ से लिखी गई मूल प्रति आज नई दिल्ली (New Delhi) स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय (National Museum) में सुरक्षित है, जिसे हीलियम गैस से भरे विशेष कक्ष में रखा गया है, ताकि यह खराब न हो, सुरक्षित रहे। वहीं, संविधान की पहली छपी हुई प्रति आज भी सर्वे ऑफ इंडिया, देहरादून में सुरक्षित रखी गई है।

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भारतीय संविधान की पहली प्रति

सर्वे ऑफ इंडिया के नॉर्थ प्रिंटिंग ग्रुप (North Printing Group) और मानचित्र, अभिलेख एवं प्रसारण केंद्र के निदेशक कर्नल राकेश सिंह (Colonel Rakesh Singh) के अनुसार, संविधान को छापने वाली मूल मशीनें भी आज तक धरोहर के रूप में संरक्षित हैं। आधुनिक युग में भले ही ये मशीनें उपयोग में न हों, लेकिन ये भारतीय लोकतंत्र के जन्म की सजीव गवाह हैं।

देहरादून और लोकतंत्र की अमिट पहचान

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देहरादून में सुरक्षित संविधान की पहली प्रति में संविधान सभा के सदस्यों व प्रधानमंत्री के नाम।

देहरादून व उत्तराखंड का नाम इसलिए भी विशेष है क्योंकि यहीं से संविधान की पहली प्रतियां देशभर में भेजी गईं। यह प्रदेश व इसकी राजधानी न केवल प्रशासनिक और सैन्य दृष्टि से, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद के निर्माण में भी अहम भूमिका निभा चुका है।

आज जब गणतंत्र दिवस पर तिरंगा फहराया जाता है, तो यह स्मरण करना आवश्यक है कि उस संविधान की पहली छपी प्रति, जिसके सहारे देश चलता है, आज भी उत्तराखंड की धरती पर सुरक्षित है। यह केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि लोकतंत्र, स्वतंत्रता और समानता की जीवित धरोहर है।

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