भूमि धोखाधड़ी पर कुमाऊँ पुलिस का कड़ा कदम, सभी एसआईटी भंग, लगभग 10 करोड़ रुपयों की ठगी के आरोपित धनंजय गिरी के प्रकरण में विवेचक निलंबित

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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 7  फरवरी  2026 (Kumaun Police Action)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) जनपद से भूमि धोखाधड़ी के मामलों पर प्रशासन और पुलिस की सख्ती से जुड़ा महत्वपूर्ण समाचार सामने आया है। कुमाऊँ परिक्षेत्र (Kumaun Range) में भूमि धोखाधड़ी (Land Fraud) की बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर पर गठित लैंड फ्रॉड समिति (Land Fraud Committee) के समन्वय में कुमाऊँ पुलिस ने पारदर्शी और प्रभावी कार्रवाई शुरू की है। 

Kumaun Police Actionकुमाऊँ परिक्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक ऋद्धिम अग्रवाल (Riddhim Aggarwal) के निर्देशन में गठित विशेष जांच दल (Special Task Force-STF) के माध्यम से भूमि धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की समीक्षा और जांच की जा रही है। इसी क्रम में जिला स्तर पर पूर्व में गठित सभी विशेष जांच दलों को भंग कर दिया गया है। अब यह व्यवस्था लागू की गई है कि किसी भी भूमि धोखाधड़ी मामले की प्रारंभिक जांच संबंधित क्षेत्राधिकारी द्वारा ही की जाएगी। इससे जांच प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाने और अनावश्यक विलंब को रोकने की दिशा में ठोस कदम माना जा रहा है।

धनंजय गिरी प्रकरण में कार्रवाई

कुमाऊँ परिक्षेत्र कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार इसी कड़ी में धनंजय गिरी (Dhananjay Giri) से जुड़े लगभग 10 करोड़ रुपयों की भूमि धोखाधड़ी प्रकरण में पीड़ितों की कई शिकायतें सामने आई थीं। कुमाऊँ परिक्षेत्र कार्यालय ने इन शिकायतों के आधार पर मामले की विस्तृत समीक्षा की। जांच में यह पाया गया कि विवेचना कर रहे अधिकारी की भूमिका संदिग्ध रही और कर्तव्य निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरती गई। इसके बाद भोटिया पड़ाव चौकी में तैनात उप निरीक्षक अनिल कुमार (Anil Kumar) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

यह कार्रवाई इस दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि इससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि भूमि धोखाधड़ी मामलों में किसी भी स्तर पर मिलीभगत या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। क्या यह कदम अन्य मामलों में भी जांच की गति और निष्पक्षता को बढ़ाएगा। यह प्रश्न अब आमजन के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

पीड़ितों को धन वापसी की पहल

पुलिस महानिरीक्षक के निर्देश पर परिक्षेत्रीय विशेष जांच टीम को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि नए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) कानून की धारा 107 के अंतर्गत न्यायालय के माध्यम से आरोपित द्वारा धोखाधड़ी से अर्जित धनराशि पीड़ितों को वापस दिलाई जाए। यह प्रक्रिया पीड़ितों के लिए राहत का माध्यम बन सकती है, क्योंकि अब केवल अभियोग दर्ज करना ही नहीं बल्कि आर्थिक क्षति की भरपाई भी प्राथमिकता में शामिल की गई है।

कुमाऊँ पुलिस ने ऐसे सभी पीड़ितों से अपील की है, जिन्होंने अभी तक शिकायत दर्ज नहीं कराई है या जिनके साथ धनंजय गिरी अथवा उसके सहयोगियों ने भूमि से जुड़ी धोखाधड़ी की है, वे परिक्षेत्रीय विशेष जांच टीम से संपर्क करें। इससे धन वापसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा और मामले की व्यापकता का आकलन भी संभव होगा।

साथ ही आमजन से आग्रह किया गया है कि किसी भी भूमि सौदे या निवेश से पहले उसकी वैधानिक स्थिति, दस्तावेजों की प्रामाणिकता और पंजीकरण की जांच अवश्य करें। यह कार्रवाई न केवल कानून व्यवस्था को मजबूत करेगी बल्कि नागरिकों में विश्वास भी बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

धनंजय गिरी पर हल्द्वानी में वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी से जमीन धोखाधड़ी के मामले में है अभियोग दर्ज

पूर्व में वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी बीएल फिरमाल की शिकायत पर काठगोदाम पुलिस ने ठेकेदार धनंजय गिरी तथा एक अज्ञात बैंक अधिकारी के विरुद्ध धोखाधड़ी का अभियोग पंजीकृत किया था। शिकायत के अनुसार वर्ष 2017 में धनंजय गिरी ने दमुवाढूंगा स्थित निर्माणाधीन हाउसिंग परियोजना में तीसरी मंजिल पर लगभग 1400 वर्गफुट का फ्लैट 40 लाख रुपये में देने का आश्वासन देकर पांच लाख रुपये अग्रिम धनराशि ली थी और तीन वर्ष में फ्लैट देने की बात कही थी। बाद में पता चला कि उसी फ्लैट पर बैंक ऋण भी ले लिया गया।

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इसके अतिरिक्त आरोपित ठेकेदार के विरुद्ध पूर्व में देवभूमि बहुद्देशीय स्वायत्त सहकारिता प्रकरण में हजारों निवेशकों सेभी हल्द्वानी क्षेत्र में लगभग ₹6.8 करोड़ की धोखाधड़ी और अन्य मामलों के लगभग 10 गंभीर अभियोग दर्ज हैं। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।

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