EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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वैज्ञानिकों के अंतर्राष्ट्रीय समूह ने अमेरिका, जापान, रूस, क्रीमिया और बुल्गारिया में स्थित विशेष उपकरणों वाली 7 दूरबीनों का उपयोग कर की यह महत्वपूर्ण खोज डॉ. नवीन जोशी नवीन समाचार, नैनीताल, 8 नवंबर 2023। स्थानीय एरीज (ARIES) यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. आलोक गुप्ता के नेतृत्व में 28 वैज्ञानिकों के एक अंतर्राष्ट्रीय समूह ने एक बड़ी वैज्ञानिक खोज की है। पहली बार पता लगाया है कि हमारी आकाशगंगा के इतर पांच अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक अन्य बाहरी सक्रिय आकाशगंगा ओजे-287 में मौजूद दो ब्लेक होल्स केे उत्सर्जन को प्रभाव को अलग-अलग मापा जा सकता है। उन्होंने बताया कि चूंकि यह दोनों ब्लेक होल आपस में काफी करीब, केवल 10 माइक्रोआर्क सेकंड की दूरी पर हैं, इसलिये अब तक छोटे ब्लेक होल के उत्सर्जन को भी बड़े का ही उत्सर्जन मान लिया जाता था। डॉ. आलोक गुप्तावर्तमान में शंघाई एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी, चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज, चीन में अध्ययनरत डॉ. गुप्ता ने ‘नवीन समाचार’ को दूरभाष पर बताया कि सामान्यतया आकाशगंगाओं के केंद्र में एक ब्लेक होल होते हैं, लेकिन ओजे-287 आकाशगंगा के केंद्र में दो ब्लेक होल मौजूद हैं। इनके द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान के मुकाबले 10 की घात 9 यानी 10 अरब गुना व 10 की घात 6 यानी 10 लाख गुना अधिक द्रव्यमान के हैं। इस कारण यह एक विशिष्ट एवं सक्रिय आकाशगंगा है। इनके बारे में वैज्ञानिकों ने लगभग 100 वर्षों के अध्ययन के बाद 1988 में खोजा गया था और 1995-96 में प्रयोगात्मक तरीके से यह स्थापित हुआ कि बड़े ब्लेक होल में उत्सर्जन का चक्र 12 वर्षों का होता है, जबकि छोटे ब्लेक होल में उत्सर्जन अनियमित तरीके से इसके कुछ अंतराल बाद होता है। इस उत्सर्जन के दौरान इन ब्लेक होल्स की चमक लगभग 10 हजार गुना तक बढ़ जाती है। इन ब्लेक होल्स के गुरुत्वाकर्षण विकिरण में खोई हुई ऊर्जा के कारण कक्षा धीरे-धीरे अंदर की ओर सर्पिल होती जाती है। इस ऊर्जा हानि की पुष्टि 2008 में ही कर दी गई थी। इधर 2023 में इसकी पुनः पुष्टि की है। गौरतलब है कि गुरुत्वाकर्षण विकिरण वर्तमान में वैज्ञानिकों के अध्ययन का बड़ा महत्वपूर्ण विषय है, और इस विषय पर 2018 में हुई खोज पर हाल ही में काफी कम अवधि में नोबल पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है। इधर चीन, भारत, फिनलैंड, रूस, अमेरिका, जापान और बुल्गारिया के 28 वैज्ञानिकों के एक अंतर्राष्ट्रीय समूह ने हाल ही में किए गए एक अध्ययन में छोटे (द्वितीयक) ब्लैक होल से सीधे उत्पन्न होने वाले संकेतों का अवलोकन करके इस परिदृश्य में नए प्रमाण जोड़े हैं। इस अध्ययन का नेतृत्व एरीज (ARIES) के वैज्ञानिक आलोक गुप्ता ने किया है। संक्षेप में शोधकर्ताओं का दावा है कि वे ओजे-287 से आने वाले ध्रुवीकृत प्रकाश के माप का उपयोग करके पहली बार द्वितीयक ब्लैक होल को देखने में सक्षम हो गये हैं। ‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया विज्ञापन न केवल आपके व्यवसाय या संस्थान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाएगा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता को भी सशक्त बनाएगा। अग्रिम धन्यवाद। इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, रूस, क्रीमिया और बुल्गारिया में स्थित ध्रुवीकरण माप के लिए विशेष उपकरणों वाली सात दूरबीनों का उपयोग किया गया है। इसमें एक सामान्य नियम पाया गया जिसका पालन ओजे-287 करता है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि उनकी इस खोज से वैज्ञानिकों को भविष्य के लिये गुरुत्वाकर्षण विकिरण के स्रोत का पता चल गया है, लिहाजा इसका लाभ वैज्ञानिकों को भविष्य की खोजों में मिलेगा। आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो यहां क्लिक कर हमें सहयोग करें..यहां क्लिक कर हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें। यहां क्लिक कर हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से, यहां क्लिक कर हमारे टेलीग्राम पेज से और यहां क्लिक कर हमारे फेसबुक ग्रुप में जुड़ें। हमारे माध्यम से अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleयह भी पढ़ें : राज्यपाल ने एरीज (ARIES) को देश अग्रणी शोध संस्थान बताया, 50 सेवानिवृत्त वैज्ञानिकों-कार्मिकों को किया सम्मानितयह भी पढ़ें : राज्यपाल पहुंचे नैनीताल, जानें क्या चल रहा है कार्यक्रमयह भी पढ़ें : एरीज (ARIES) में सम्पूर्णानंद ऑप्टिकल दूरबीन का गोल्डन जुबली समारोह शुरू, राज्यपाल भी आएंगेयह भी पढ़ें : एरीज में सर्वश्रेष्ठ योगदान देने वाले 50 लोग सम्मानित होंगे: राज्यपाल…यह भी पढ़ें :(ARIES) बड़ा समाचार: नैनीताल जनपद में स्थापित हुई कमरे जितने बड़े व्यास वाली तरल लेंस की दूरबीनयह भी पढ़ें : एरीज में कर्मचारी ने 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रहा है एरीज काLike this:Relatedयह भी पढ़ें : राज्यपाल ने एरीज (ARIES) को देश अग्रणी शोध संस्थान बताया, 50 सेवानिवृत्त वैज्ञानिकों-कार्मिकों को किया सम्मानितनवीन समाचार, नैनीताल, 18 अक्तूबर 2022। उत्तराखंड के राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने मंगलवार को नगर के मनौरा पीक स्थित एरीज (ARIES) यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्था में 1972 से स्थापित 104 सेंटीमीटर संपूर्णानंद आप्टिकल दूरबीन की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित हो रहे स्वर्ण जयंती समारोह में 50 सेवानिवृत वैज्ञानिकों व कार्मिक को सम्मानित किया। यह भी पढ़ें : अंकिता हत्याकांड में एक नई अपडेट: अंकिता की स्वैप डीएनए जांच की फॉरेंसिक रिपोर्ट आई…तीन दिनों तक चलने वाले इस समारोह के दूसरे दिन का हिस्सा बने राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में एरीज (ARIES) की 50 वर्ष की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि एरीज (ARIES) सुदूर ब्रहमांड में अवलोकन संबंधी खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी और वायुमंडलीय विज्ञान में विशेषज्ञता रखने वाले देश के अग्रणी अनुसंधान संस्थानों में से एक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी वर्षों में एरीज (ARIES) और भी नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। यह भी पढ़ें : अवमानना याचिका की तलवार लटकने के बाद फिर शुरू हुआ प्रशासन व फड़ वालों के बीच चूहे-बिल्ली का खेल इस मौके पर एरीज (ARIES) के निदेशक प्रोफेसर दीपांकर बनर्जी ने एरीज (ARIES) की 50 वर्ष की स्वर्णिम उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्व पटल में अपने योगदान से एरीज (ARIES) को ऊपरी पायदान पर ले जाने वाले संस्था के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक और कार्मिकों को मिल रहा सम्मान स्वयं में अभूतपूर्व है। यह भी पढ़ें : बागेश्वर के सद्भाव ने तीसरी बार जीती 5वीं लिटिल मास्टर चेस चैंपियनशिपउन्होंने संस्था की एवं 1972 से स्थापित 104 सेमी संपूर्णानंद दूरबीन से किए गए स्टार-क्लस्टर्स, युवा स्टार-फॉर्मिंग क्षेत्रों, ब्राउन ड्वार्फ्स, गामा-रे-बर्स्ट, सुपरनोवा और एक्स-रे स्रोतों के अध्ययन, खुले क्लस्टर्स के पोलारिमेट्रिक अध्ययन, गामा किरण महाविस्फोट, तारों की अधोगति, हमारी और दूसरी आकाशगंगाओं और खगोलीय पिंडों में शोध कार्य तथा तारों के बनने व नए तारों की खोज के साथ माइक्रोलेंसिंग जैसी नई घटनाओं के प्रेक्षणों का वीडियो के माध्यम से प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि संपूर्णानंद दूरबीन से अंतराष्ट्रीय स्तर 5 तथा राष्ट्रीय स्तर पर 400 शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं। यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट के ब्रीफ होल्डरों व चतुर्थ श्रेणी कर्मियों से भी कम है जिला कोर्ट के सरकारी अधिवक्ताओं का मानदेय उन्होंने बताया कि हमारे सौरमंडल के यूरेनस उपग्रह के छल्ले को खोजने में भी एरीज (ARIES) का बड़ा योगदान रहा है। बताया कि एरीज (ARIES) में लगभग 6 से 10 छात्र हर साल खगोल विज्ञान और वायुमंडल विज्ञान में शोध कर सकते हैं। (ARIES) इस अवसर पर डीएम धीराज गर्ब्याल, सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बीबी सनवाल, डॉ. बृजेश कुमार, डॉ शशिभूषण पांडेय, एसएसपी पंकज भट्ट, एसपी हरबंस सिंह, एडीएम शिवचरण द्विवेदी, एसडीएम राहुल शाह व योगेश सिंह सहित एरीज (ARIES) के प्रोफेसर, शोधार्थी व कार्मिक उपस्थित रहे। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : राज्यपाल पहुंचे नैनीताल, जानें क्या चल रहा है कार्यक्रमनवीन समाचार, नैनीताल, 18 अक्तूबर 2022। उत्तराखंड के राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह अपने एक दिवसीय कार्यक्रम पर नैनीताल पहुंच गए हैं। यहां कैलाखान हैलीपैड पर उतरने के बाद वह सीधे नगर के मनोरा पीक स्थित एरीज (ARIES) यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान पहुंच गए हैं। यह भी पढ़ें : हनी ट्रैप : भारी पड़ी वीडियो कॉल पर महिला के साथ अश्लीलता, वीडियो डिलीट करने कायहां पहुंचने पर एरीज (ARIES) के निदेशक दीपांकर बनर्जी ने अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ उनकी अगुवानी की। राज्यपाल यहां 1972 में स्थापित 104 सेमी व्यास की सम्पूर्णानंद ऑप्टिकल दूरबीन के 50 साल पूरे होने पर सोमवार से शुरू हुए दो दिवसीय गोल्डन जुबली समारोह में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग कर रहे है। यह भी पढ़ें : दुखियारी युवती से दूसरे धर्म के युवक ने नाम-धर्म छिपाकर शादी का झांसा देकर किया दुष्कर्म….उल्लेखनीय है कि राज्यपाल गुरमीत सिंह पूर्व में 13 जून 2021 को अपने नैनीताल राजभवन के परंपरागत ग्रीष्मकालीन प्रवास के दौरान एरीज (ARIES) गए थे और यहां उन्होंने कहा था कि एरीज (ARIES) विश्व प्रतिष्ठित शोध संस्थान होने के साथ उत्तराखंड का सौभाग्य व गौरव है। यह भी पढ़ें : 25 वर्षीय आईएएस अंशुल भट्ट ने ग्राहक बनकर पकड़ा बिना पंजीकरण के चल रहा होटल और किया सील, प्रश्न-जनपद मुख्यालय में प्रशासन ऐसी ही स्थितियों में मौन क्यों...?उन्होंने एरीज (ARIES) के संचालन में सर्वश्रेष्ठ योगदान देने वाले 50 वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित करने और हल्द्वानी में स्थापित किये जाने वाले एस्ट्रोपार्क विज्ञान केंद्र की स्थापना संबंधित प्रस्ताव पर एरीज (ARIES) को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया था। माना जा रहा है कि आज वह एरीज (ARIES) में किया गया अपना वादा पूरा करते हुए 50 वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित करेंगे। यह भी पढ़ें : बिग ब्रेकिंग: हल्द्वानी के 2 स्पा सेंटरों से मुक्त कराई गईं 10 युवतियांयह भी पढ़ें : एरीज (ARIES) में सम्पूर्णानंद ऑप्टिकल दूरबीन का गोल्डन जुबली समारोह शुरू, राज्यपाल भी आएंगेनवीन समाचार, नैनीताल, 17 अक्तूबर 2022। नैनीताल स्थित एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान में 1972 में स्थापित 104 सेमी व्यास की सम्पूर्णानंद ऑप्टिकल दूरबीन के 50 साल पूरे होने पर सोमवार को दो दिवसीय गोल्डन जुबली समारोह शुरू हो गया है। कार्यक्रम की शुरुआत एरीज के निदेशक प्रो. दीपांकर बनर्जी व एरीज (ARIES) के पूर्व विज्ञानियों ने की। इस मौके पर ऐतिहासिक दूरबीन की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया। यह भी पढ़ें : फिर बड़ी वारदात : दिनदहाड़े पुलिस कर्मियों पर बदमाशों ने की फायरिंग, दो पुलिस कर्मी घायल एरीज (ARIES) गवर्निग काउंसलिंग सदस्य डॉ. सोमक राय चौधरी ने बताया कि सम्पूर्णानंद दूरबीन ने एरीज (ARIES) को देश-दुनिया में पहचान दिलाई है। वर्तमान में भी यह दूरबीन वैज्ञानिकों के लिए बेहद मददगार साबित हो रही है। प्रो. दीपांकर बनर्जी ने कहा कि यूरेनस व शनि ग्रह के छल्लों की खोज से इस दूरबीन के उपयोग की शुरुआत हुई थी और गामा किरणों के विस्फोट का अध्ययन तक की खोज इस दूरबीन के जरिए संभव हो सका है। यह भी पढ़ें : शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म करने का आरोपित गिरफ्तारडॉ. आरके श्रीवास्तव ने दूरबीन के शुरुआती दिनों में किए गए प्रेक्षण कार्यों पर प्रकाश डाला। प्रो. आरसी कपूर ने नगर देवी लॉज से लेकर मनोरा पीक तक के एरीज के अतीत के बारे में जानकारी दी। डॉ. जय प्रकाश चतुर्वेदी ने एरीज की अब तक की उपलब्धियों का बखान किया। कार्यक्रम के दौरान तमाम यादों से जुड़ी चित्रों युक्त स्मारिका का विमोचन भी किया गया। साथ ही दूरबीन भवन इस दूरबीन से लिए गए चित्रों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया गया। यह भी पढ़ें : बिग ब्रेकिंग: हल्द्वानी के 2 स्पा सेंटरों से मुक्त कराई गईं 10 युवतियांआयोजन में एरीज के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक, अभियंता व कर्मचारी शामिल हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शशिभूषण पांडेय व डॉ. बृजेश कुमार ने किया। इस मौके पर पूर्व निदेशक प्रो. रामसागर, रजिस्ट्रार रवीद्र यादव, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. अमितेश ओमर, डॉ. एसके पांडे, डॉ. कृष्ण गुप्ता सहित अन्य वैज्ञानित मौजूद रहे। यह भी पढ़ें : बिग ब्रेकिंग: हल्द्वानी के 2 स्पा सेंटरों से मुक्त कराई गईं 10 युवतियांकल राज्यपाल होंगे शामिल नैनीताल। उत्तराखंड के राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह मंगलवार 18 अक्टूबर को एक दिवसीय जनपद भ्रमण पर आ रहे है। प्रशासनिक विज्ञप्ति के अनुसार राज्यपाल जीटीसी हैलीपैड देहरादून से चल कर सवा नौ बजे कैलाखान हैलीपैड पहुचेंगे। यहां से वह पौने 10 बजे मनौरा पीक स्थित एरीज यानी आर्य भट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान पहुंच कर यहां चल रहे सम्पूर्णानंद ऑप्टिकल दूरबीन के गोल्डन जुबली समारोह में प्रतिभाग करेंगे। इसके उपरान्त 11ः20 बजे कैलाखान से देहरादून के लिये लौट जाएंगे। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : एरीज में सर्वश्रेष्ठ योगदान देने वाले 50 लोग सम्मानित होंगे: राज्यपाल…-राज्यपाल ने नैनीताल के साथ अन्य जिलों में भी एस्ट्रो टूरिज्म की संभावनाओं पर विचार करने को कहा डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जून 2022। उत्तराखंड के राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने सोमवार को नगर के मनोरा पीक स्थित एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान का भ्रमण किया। (ARIES) इस दौरान राज्यपाल ने कहा कि यह विश्व प्रतिष्ठित शोध संस्थान उत्तराखंड का सौभाग्य व गौरव है। उन्होंने एरीज के संचालन में सर्वश्रेष्ठ योगदान देने वाले 50 वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित करने और हल्द्वानी में स्थापित किये जाने वाले एस्ट्रोपार्क विज्ञान केंद्र की स्थापना संबंधित प्रस्ताव पर एरीज को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।(ARIES) इस अवसर पर वैज्ञानिकों ने राज्यपाल को शोध संस्थान की विभिन्न गतिविधियों के इतिहास एवं वर्तमान के बारे में जानकारी दी। बताया कि उत्तर प्रदेश राजकीय वेधशाला के नाम से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 20 अप्रैल 1954 को वाराणसी में गठित भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत यह स्वायत्तशासी संस्थान 1955 से नैनीताल एवं 1961 में वर्तमान स्थान पर स्थापित है।(ARIES) यहां 104 सेमी व्यास की संपूर्णानंद दूरबीन एशिया की सबसे पुरानी व पहली दूरबीन है। इसकी स्थापना को इसी वर्ष 50 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इस अवसर पर राज्यपाल ने दूरबीन से चंद्रमा का अवलोकन भी किया और कहा कि यह देखना एक अद्भुत अनुभव रहा। (ARIES) उन्होंने वैज्ञानिको से नैनीताल जनपद के देवस्थल और ताकुला की तर्ज पर अन्य जिलों में भी एस्ट्रो टूरिज्म की संभावनाओं पर विचार करने को कहा। इस दौरान प्रथम महिला गुरमीत कौर, एरीज के निदेशक प्रो. दीपांकर बनर्जी, संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शशि भूषण पांडे, डॉ. बृजेश कुमार सहित अन्य वैज्ञानिक कर्मचारी उपस्थित रहे।(ARIES) राज्यपाल ने किए हनुमानगढ़ी मंदिर के दर्शन नैनीताल। (ARIES) उत्तराखंड के राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने सोमवार को नगर के हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश वासियों की समृद्धि और खुशहाली के लिए कामना की। उन्होंने कहा की यहां आकर एक अलग ही शांति एवं दिव्यता की अनुभूति हुई। राज्यपाल ने मंदिर में साफ-सफाई, शांत वातावरण के लिए मंदिर प्रबंधन की प्रशंसा की। इस दौरान उनके साथ प्रथम महिला गुरमीत कौर भी उपस्थित रहीं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें :(ARIES) बड़ा समाचार: नैनीताल जनपद में स्थापित हुई कमरे जितने बड़े व्यास वाली तरल लेंस की दूरबीन-जहां पहुंचने में सूर्य की किरण को 95 हजार वर्ष लग जाएं, वहां की तस्वीर खींच रचा कीर्तिमान, देवस्थल में शुरू हुई दुनिया की सबसे बड़ी 4 मीटर व्यास की आईएलएम दूरबीन डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 2 जून 2022। नैनीताल जनपद एवं यहां स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के नाम खगोल विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी एतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। जनपद के देवस्थल में दुनिया की सर्वाधिक 4 मीटर यानी एक बड़े कमरे जितने बड़े व्यास की पहली आईएलएमटी यानी इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलिस्कोप स्थापित हो गई है।(ARIES) अपने नाम के अनुरुप मरकरी यानी पारे के तरल लेंस से बनी यह दूरबीन पांच देशों-भारत, बेल्जियम, कनाडा, पौलैंड व उज्बेकिस्तान की साझा परियोजना के तहत 50 करोड़ की लागत से स्थापित की गई है। यह दूरबीन बिना अपने स्थान से हिले हर रात्रि अपने ऊपर स्थित आसमान में होने वाली गतिविधियों को कैमरे से करीब 10 जीबी डेटा को रिकॉर्ड करती रहती है। बताया गया है कि दूरबीन ने पहले चरण में ही हजारों प्रकाश वर्ष दूर की आकाशगंगा व तारों की तस्वीरें लेकर कीर्तिमान भी स्थापित कर दिया है।एरीज (ARIES) के निदेशक प्रो दीपांकर बनर्जी ने गुरुवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में इसके बारे में जानकारी देते हुए उम्मीद जताई कि एरीज नैनीताल से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर 2450 मीटर की ऊंचाई पर देवस्थल नाम के स्थान पर स्थित इस दूरबीन के स्थापित होने से एरीज अंतरिक्ष के बड़े-अबूझ रहस्यों को समझने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल कर पाने में सक्षम होगा। (ARIES) उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में इसका निर्माण कार्य शुरू किया गया था। इसके निर्माण में पाल हिक्सन जैसे दुनिया के प्रसिद्ध विशेषज्ञों की मदद ली गई। इससे पहले चरण में ही 95 हजार प्रकाश वर्ष दूर एनजीसी 4274 आकाशगंगा की स्पष्ट तस्वीर लेकर कीर्तिमान स्थापित किया गया है। इसके अलावा अपनी आकाशगंगा मिल्की-वे के तारों को भी स्पष्ट रूप से कैमरे में कैद किया गया है।(ARIES) उन्होंने बताया कि एरीज के पास 3.6 मीटर की ऑप्टिकल दूरबीन भी देवस्थल में मौजूद है। इन दोनों दूरबीनो से आसमान में होने वाली गतिविधियों की दोतरफा पुष्टि की जा सकती हैं, और एक ही स्थान से सटीक जानकारी जुटाई जा सकती है। एरीज के वरिष्ठ खगोल विज्ञानी डा. शशिभूषण पांडेय ने बताया कि इस दूरबीन से बृहद डेटा भी एकत्र किया जा सकेगा। डा कुंतल मिश्रा ने दूरबीन के निर्माण व खूबियों से संबंधित जानकारी दी। डा. बृजेश कुमार ने तकनीक व भविष्य में होने वाले शोध के बारे में जानकारी दी।डा. वीरेंद्र यादव ने दूरबीनों के प्रयोग व एरीज (ARIES) की सुविधाओं से संबंध में बताया। कहा कि इस दूरबीन से अंतरिक्ष में होने वाले दो वस्तुओं के बीच के ट्रांजिट यानी पारगमन का सटीक डाटा मिल सकेगा। साथ ही बड़े तारों में होने वाले सुपरनोवा विस्फोटों एवं आकाशगंगाओं के आकार में होने वाले परिवर्तन, यूएफओ व आकाश में उड़ने वाली वस्तुओं के अलावा उल्कावृष्टि जैसी घटनाओं को कैमरे में कैद करने के साथ नए ग्रहों नक्षत्रों को खोजा जा सकेगा। (ARIES) साथ ही यह किसी भी तारे के घनत्व, तापमान व अन्य बारीक जानकारी जुटाने में मददगार साबित होंगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : एरीज में कर्मचारी ने रात्रि में परिवार सहित दिया धरना, सुबह यूनियन के लोग भी विरोध में आएडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 8 मई 2022। स्थानीय एरीज (ARIES) नैनीताल के लिए बन रही सड़क के निर्माण कार्य में लगे कुछ लोगों को एरीज (ARIES) परिसर में रहने के लिए स्थान देने पर एरीज (ARIES) कर्मचारी संगठन के लोग भड़क गए।(ARIES) इस बात पर पहले रात्रि में प्रभावित परिवार और रविवार को कर्मचारी संगठन के कुछ लोग, प्रभावित परिवार की महिला व बच्चे एरीज प्रशासन पर ‘अनियमितता, तानाशाही व कर्मचारी उत्पीड़न’ जैसे बड़े आरोप लगाते हुए धरने पर बैठ गए। हालांकि एरीज प्रबंधन का दावा है कि मामले का निपटारा कर दिया गया है।आंदोलित कर्मचारियों का कहना था कि एरीज (ARIES) प्रबंधन ने सड़क पर डामरीकरण के कार्य में लगे मुरादाबाद आदि के रहने वाले लेबरों को नियमों को ताक पर रखकर 20-25 दिन के लिए रहने के लिए दे दिया है। जबकि एरीज (ARIES) के कर्मचारियों को आवास नियम-कानून बताकर नहीं दिए जाते हैं। इसलिए रात्रि में प्रभावित परिवार के लोग, महिला व बच्चे धरने पर बैठे रहे और रविवार को कर्मचारी संगठन भी उनके समर्थन में आ गया।इस बारे में पूछे जाने पर एरीज (ARIES) के रजिस्ट्रार रवींद्र कुमार यादव ने कहा कि लेबरों नहीं बल्कि काम देखने वाले पांच मेटों को बरसात के मौसम को देखते हुए एक कक्ष दिया गया था। आपत्ति के बाद अब उन्हें यहां से हटाकर सुरक्षा कर्मियों के पास के एक कक्ष में स्थानांतरित किया जा रहा है। मामला निपट गया है।यह भी पढ़ें : एरीज (ARIES) नैनीताल और आईआईटी रुड़की के बीच हुआ बड़ा समझौता, मिलेगा लाभ…नवीन समाचार, हरिद्वार, 4 मार्च 2022। आईआईटी यानी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रुड़की ने एरीज (ARIES) यानी आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज नैनीताल के साथ शैक्षणिक सहयोग हेतु आपसी हितों के क्षेत्र में एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किये हैं।इस समझौते के अनुसार आईआईटी रुड़की और एरीज नैनीताल शोध और शिक्षा के क्षेत्र में विज्ञान, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और सोशल साइंसेज संबंधी एक-दूसरे की शक्तियों को मान्यता देते हैं और एक-दूसरे के पारंपरिक हित में स्वयं के शैक्षिक सहयोग के लिए सहभागिता कर रहे हैं। इस सहमति ज्ञापन का लक्ष्य एक-दूसरे से प्राप्त जानकारियों के आधार पर सर्वश्रेष्ठ प्रयासों से एक-दूसरे के हितों की रक्षा और लगातार विचारों के आदान-प्रदान से सहयोग करते हुए ज्ञान बढ़ाना है।इसके अतिरिक्त आईआईटी रुड़की और एरीज ने सहमति व्यक्त की है कि वे संयुक्त रूप से अनुसंधान में सहयोग करेंगे, परामर्श को बढ़ाएंगे और संकाय सदस्यों, वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों का आदान-प्रदान करेंगे, वैज्ञानिक और तकनीकी मामलों को एक-दूसरे से साझा करेंगे, संयुक्त सम्मेलन, कार्यशालाएं और अल्पकालीन पाठ्यक्रम आयोजित करेंगे। (ARIES) आईआईटी रुड़की के फिजिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थी एरीज की विभिन्न प्रकार की दूरबीनों पर प्रोजेक्ट संबंधी गतिविधियों में शामिल हो सकेंगे।इलेक्ट्रॉनिक्स व कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थी एरीज की हो रही माइक्रोवेव इंजीनियरिंग एटमोस्फियरिक रडार पर चल रहे प्रोजेक्ट की गतिविधियों में सहभागी हो सकेंगे। कम्प्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थी एरीज की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग, जो कि इसरो के भावी मिशन के अध्ययन के लिए आदित्य एल-1 मिशन से जुड़े डाटा के विश्लेषण से संबंधित है, के प्रोजेक्ट्स पर चल रही गतिविधियों में प्रतिभागिता कर सकते हैं।इस अवसर पर आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर अजीत के. चतुर्वेदी ने कहा कि इस भागीदारी का उद्देश्य आईआईटी रुड़की और आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं को एक-दूसरे के समीप लाना है ताकि उनकी तत्संबंधी शक्तियों को मिलाकर वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग संबंधी समस्याओं का हल मिलकर ढूंढा जा सके। यह भी पढ़ें : 'टीम इंडिया' में उत्तराखंड मूल के एक और युवा खिलाड़ी ‘बेबी एबी’-आयुष बड़ोनी की एंट्री, मौका मिलने-खेलने और गंभीर के पूर्व बयान पर चर्चा तेज(ARIES) एरीज के निदेशक प्रो. दीपंकर बनर्जी ने कहा कि आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेस वैज्ञानिक उपकरणों को आईआईटी रुड़की को अपने श्रेष्ठ प्रयास करके प्रदान करने में सहायक होगा, जो कि एक-दूसरे के लाभ के लिए होगा और दोनों संस्थानों के विद्यार्थियों को सुविधाएं प्रदान करेगा। (डॉ. नवीन जोशी) अन्य ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।यह भी पढ़ें : एरीज के वैज्ञानिक का अजब दावा: कोरोना काल में अधिक प्रदूषित हुआ पहाड़ का आसमानडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 30 दिसंबर 2021। आम तौर पर देखा-महसूस किया और माना भी गया कि 2020 के कोरोना काल में देश-दुनिया सहित पहाड़ों पर प्रदूषण कम हुआ। इस दौरान लंबे लॉक डाउन के दौरान मानवीय गतिविधियां काफी सीमित होने के दौरान सुदूर मैदानी क्षेत्रों से पहाड़ और हिमालय की चोटियां साफ दिखने लगीं, नदियों का पानी साफ-स्वच्छ दिखा।किंतु नैनीताल स्थित एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनीष नाजा ने ऐसे प्रेक्षण किये हैं, जिनसे पता चल रहा है कि इस दौरान नैनीताल और इसकी 50 से 100 किलोमीटर की हवाई दूरी के व्यास में आने वाले कुमाऊं मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों के आसमान में प्रदूषण सामान्य के मुकाबले अधिक बढ़ गया था।अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘एनवायरनमेंटल साइंस एंड पोल्यूशन’ के ताजा अंक में प्रकाशित डॉ. नाजा के शोध पत्र के अनुसार 2020 के लॉकडाउन के दौरान कुमाऊं के आसमान जमीन से 3 से 4 किलोमीटर ऊंचाई पर में कार्बन मोनो ऑक्साइड और नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड के साथ ओजोन की मात्रा 15 प्रतिशत तक बढ़ गई थी। (ARIES) डॉ. नाजा के अनुसार इसका कारण मध्य-उत्तर एवं पश्चिमी भारत यानी कलकत्ता, मुंबई व गुजरात आदि में लगे थर्मल पावर प्लांट से अधिक प्रदूषण का फैलना रहा। हवा के इस ओर बहाव एवं ऊपर की ओर उठने के गुण के कारण यह प्रदूषण वहां से यहां के पहाड़ों पर आ गया।डॉ. नाजा ने यह शोध पत्र वर्ष 2018, 2019 और 2020 के लिए यूमेटसैट और नासा के उपग्रह अवलोकनों से प्राप्त तस्वीरों और डाटा के विश्लेषण से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर प्रकाशित किया है। हालांकि डॉ. नाजा इस बारे में पक्के तौर पर बताने की स्थिति में नहीं हैं, और यह उनके शोध का विषय भी नहीं है कि थर्मल पावर प्लांटों में लॉक डाउन के दौरान क्यों अधिक प्रदूषण हुआ। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : लद्दाख एवं नैनीताल की वेधशाला भविष्य हेतु दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए संभावनाओं से भरपूरडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अक्टूबर 2021। नैनीताल की देवस्थल स्थित एशिया की दूसरी सबसे बड़ी 3.6 मीटर व्यास की ऑप्टिकल वेधशाला एवं लद्दाख में लेह के निकट हान्ले में स्थित भारतीय खगोलीय वेधशाला-आईएओ सहित पहाड़ की वेधशालाएं दुनिया भर में संभावनाओं से भरपूर वेधशालाएं स्थल बन रही हैं। (ARIES) हाल के एक अध्ययन में यह कहा गया है। ऐसा इसलिये कि यहां की रातें बहुत साफ होती हैं, प्रकाश से उत्पन्न होने वाला प्रदूषण नाममात्र को होता है, हवा में तरल बूंदों की मौजूदगी के साथ अत्यंत शुष्क परिस्थितियां हैं और मानसून से किसी प्रकार की बाधा नहीं आती।उल्लेखनीय है कि दुनिया भर के खगोल-विज्ञानी लगातार दुनिया में ऐसे आदर्श स्थानों की तलाश में हैं, जहां वे अपनी अगली विशाल दूरबीन लगा सकें, जो कई वर्षों के जमा किये हुये स्थानीय मौसमी आंकड़ों के आधार पर लगाई जायें। इसी कड़ी में भारत के भारतीय तारा भौतिकी संस्थान (आईआईए) बेंगलुरू के डॉ. शांति कुमार सिंह निंगोमबाम और आर्यभट्ट वेधशाला विज्ञान अनुसंधान संस्थान, नैनीताल के वैज्ञानिकों ने ने आठ ऊंचे स्थान पर स्थित लद्दाख की हान्ले और मेराक स्थित भारतीय खगोलीय वेधशाला, देवस्थल नैनीताल की वेधशाला, चीन के तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र की अली वेधशाला, दक्षिण अफ्रीका की लार्ज टेलिस्कोप, टोक्यो यूनिवर्सटी, (ARIES) अटाकामा ऑबजर्वेटरी, चिली, पैरानल और मेक्सिको की नेशनल एस्ट्रॉनोमिकल ऑबजर्वेटरी आदि वेधशालाओं के ऊपर रात के समय बादलों के जमघट का विस्तार से अध्ययन किया। इन वेधशालाओं में नैनीताल की देवस्थल सहित तीन भारत की वेधशालायें भी थीं।अनुसंधानकर्ताओं ने एवं फोटोमेट्री और स्पेक्ट्रोस्कोपी जैसे उपकरण विभिन्न खगोलीय उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए पुनर्विश्लेषित आंकड़ों के साथ ही पिछले 41 वर्षों के दौरान किये जाने वाले मुआयनों एवं उपग्रह से जुटाये गये 21 वर्ष के आंकड़ों को शामिल करते हुए यह निर्णय निकाला है कि हान्ले चिली के अटाकामा रेगिस्तान जितना ही शुष्क है और देवस्थल से कहीं अधिक सूखा है। वहां वर्ष में 270 रातें बहुत साफ होती है। इसलिए यह स्थान इंफ्रारेड और सब-एमएम ऑप्टिकल एस्ट्रोनॉमी के लिये सर्वथा उचित है।वैज्ञानिकों ने यह भी देखा कि अन्य स्थानों की तुलना में देवस्थल में साफ रातें ज्यादा होती हैं, लेकिन वहां साल में तीन महीने बारिश होती है। बहरहाल, आइएओ-हान्ले में रातों को 2 मीटर के हिमालय चंद्र दूरबीन (एचसीटी) से अवलोकन बिना मानसून की बाधा के साल भर किया जा सकता है। रातें ज्यादा साफ हैं, प्रकाश का न्यूनतम प्रदूषण है, पानी की बूंदे मौजूद हैं और अत्यंत शुष्क वातावरण है। (ARIES) साथ ही मानसून की कोई अड़चन भी नहीं है। इसलिये यह क्षेत्र खगोलीय अध्ययन के लिये अगली पीढ़ी के हवाले से पूरी दुनिया के लिये संभावनाओं से भरपूर क्षेत्र बन रहा है। अध्ययन में यह तथ्य भी आया कि भारत के हान्ले, मेराक व देवस्थल तथा चीन के अली में बादलों का जमघट क्रमशः 66-75 प्रतिशत, 51-68 प्रतिशत, 61-78 प्रतिशत और 61-76 प्रतिशत रहता है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : बड़ी उपलब्धि : ब्रह्मांड की एक बड़ी खोज के गवाह रहे एरीज के वैज्ञानिक भी-नासा की दूरबीन से हुए एक खास गामा किरणों के विस्फोट कोे एरीज के वैज्ञानिक डॉ. शशि भूषण पांडेय ने भी देखा -26 अगस्त 2020 को हुआ खास जीआरबी, आज नेचर पत्रिका में प्रकाशित हुआ इस पर शोध अध्ययनडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 26 जुलाई 2021। गत वर्ष 26 अगस्त 2020 को अंतरिक्ष में स्थित नासा के फर्मी गामा-रे स्पेस टेलीस्कोप ने उच्च ऊर्जा विकिरण के एक ऐसा विस्फोट का पता लगाया था, जो ब्रह्मांड की वर्तमान आयु के लगभग आधे समय से पृथ्वी की ओर आ रही थी। (ARIES) केवल एक सेकंड तक चले, समय के हिसाब से इस अब तक का सबसे छोटे गामा-रे विस्फोट यानी जीआरबी का कारण किसी विशाल तारे की मृत्यु थी, परन्तु इसने एक नया कीर्तिमान भी स्थापित कर दिया। यह विस्फोट सोमवार 26 जुलाई 2021 को नेचर एस्ट्रोनॉमी नामक पत्रिका में प्रकाशित दो अध्ययनों का विषय है।स्थानीय आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वैज्ञानिक शशि भूषण पांडेय, उस वैज्ञानक समूह के सदस्य हैं जिन्होंने 10.4 मीटर जीटीसी से इस घटना को देखा और उसके दूरी का मापन कर इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डा. पांडेय के अनुसार इस घटना के अध्ययन ने गामा किरण विस्फोट के बारे में दुनिया के वैज्ञानिकों की समझ में नये आयामों को जोड़ा है। इससे इस विषय को और अधिक गहराई से समझने में मदद मिलेगी।डॉ. पांडेय ने बताया कि 0.65 सेकेंड तक चले इस जीआरबी में 200826 एंपियर उच्च ऊर्जा विकिरण का एक तेज वस्फोट हुआ था। विस्तारशील ब्रह्मांड में युगों तक यात्रा करने के बाद, फर्मी गामा रे बर्स्ट मॉनीटर द्वारा इसका पता लगया गया था। (ARIES) तब यह संकेत लगभग 1 सेकेंड का हो गया था। यह घटना नासा के पृथ्वी और सूर्य के बीच एक बिंदु की परिक्रमा करने वाले 15 लाख किलोमीटर दूर स्थित विंड मिशन, और 2001 से मंगल ग्रह की परिक्रमा करने वाले मार्स ओडिसी तथा ईएसए यानी यूरोपियन स्पेश एजेंसी के इंटीग्रल उपग्रह द्वारा भी देखा गया। 26 अगस्त 2020 को हुए इस विस्फोट को इस तारीख के आधार पर जीआरबी 200826ए नाम दिया गया है।उन्होंने बताया कि यह खोज लंबे समय से असुलझी पहेली को सुलझाने मे मदद करती है। लंबी अवधि के जीआरबी सुपरनोवा से जुड़े होने चाहिए, लेकिन लंबी अवधि के जीआरबी की तुलना में सुपरनोवा बहुतायत में पाते हैं। खगोलविद जीआरबी का प्रेक्षण कर सकें इसके लिए जेट हमारी दिशा में झुके होने चाहिये, इस तथ्य का ध्यान रखने के बाद भी यह विसंगति जारी है। (ARIES) शोधकर्ता एकमत हैं कि संकुचनशील तारे से उत्सर्जित होने वाले छोटी अवधि के जीआरबी बहुत कम ही होते होंगे, जिनके प्रकाश की गति से निकले जेट सफलता और असफलता की एकदम सीमा पर होंगे। यह निष्कर्ष इस धारणा से भी संगत है कि ज्यादातर विशालकाय तारों का अंत जेट और जीआरबी उत्पन्न किये बिना हो जाता है। मोटे तौर पर यह निष्कर्ष दर्शाता है कि जीआरबी की अवधि मात्र इसके मूल स्रोत का अंदेशा नहीं दे सकती। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : एरीज के वैज्ञानिकों ने लॉक डाउन के दौरान खोजा दुर्लभ सुपरनोवा-डॉ. शशिभूषण पांडे के निर्देशन में काम करने वाले पीएचडी शोध छात्र अमित कुमार के नेतृत्व में किया गया यह अध्ययन रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की मासिक पत्रिका में हुआ है प्रकाशित डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जुलाई 2021। एरीज नैनीताल के भारतीय शोधकर्ताओं ने एक अत्यंत विशाल व उज्जवल और हाइड्रोजन की कमी के साथ तेजी से उभरने वाले सुपरनोवा का पता लगाया है। (ARIES) यह सुपरनोवा एक अति-शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र के साथ एक अनोखे न्यूट्रॉन तारे से ऊर्जा लेकर चमकता है। इसका पता लगने से आकाशीय पिंडों के गहन अध्ययन से प्रारंभिक ब्रह्मांड के रहस्यों की जांच करने में मदद मिल सकती है।बताया गया है कि इस प्रकार के सुपरनोवा को सुपरल्यूमिनस सुपरनोवा (एसएलएसएनई) कहा जाता है जो काफी दुर्लभ होते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वे आम तौर पर बहुत बड़े तारों (न्यूनतम सूर्य के 25 गुना से अधिक द्रव्यमान वाले) तारों से उत्पन्न होते हैं और हमारी आकाशगंगा अथवा आसपास की आकाशगंगाओं में ऐसे विशाल तारों का वितरण काफी कम है। (ARIES) एसएलएसएनई-1 स्पेक्ट्रोस्कोपिक तौर पर अब तक पहचाने गए अपनी तरह के लगभग 150 आकाशीय पिंडों में शामिल है। ये प्राचीन पिंड सबसे कम समझे जाने वाले सुपरनोवा में शामिल हैं क्योंकि उनके अंतर्निहित स्रोतों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है और उनकी अत्यधिक चमक को पारंपरिक एसएन पावर सोर्स मॉडल का उपयोग करके भी स्पष्ट नहीं किया जा सका है।बताया गया है कि इस श्रेणी के एसएन 2020एएनके नाम के सुपरनोवा की खोज सबसे पहले 19 जनवरी 2020 को ज्विकी ट्रांजिएंट फैसिलिटी द्वारा की गई थी। फरवरी 2020 से और उसके बाद मार्च एवं अप्रैल की लॉकडाउन अवधि में इसका अध्ययन भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एरीज नैनीताल के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया। यह सुपरनोवा उस क्षेत्र में मौजूद अन्य पिंडों के समान नीली वस्तु के रूप में स्पष्ट तौर पर दिख रहा था, जो उसकी अत्यंत चमक वाली प्रकृति को दर्शाता है।इसका अध्ययन करने वाली टीम ने एरीज स्थित संपूर्णानंद टेलीस्कोप-1.04 मीटर और हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप- 2.0 मीटर के साथ हाल ही में चालू किए गए भारत के देवस्थल में स्थापित की गई एशिया की दूसरी सबसे बड़ी 3.6 मीटर व्यास की ऑप्टिकल टेलीस्कोप-डॉट में विशेष व्यवस्थाओं का उपयोग करते हुए इसका अवलोकन किया। (ARIES) उन्होंने पाया कि प्याज जैसी संरचना वाले सुपरनोवा की बाहरी परतों को छील दिया गया था और कोर किसी अन्य ऊर्जा स्रोत के साथ चमक रहा था। यह अध्ययन डॉ. शशिभूषण पांडे के निर्देशन में काम करने वाले एक पीएचडी शोध छात्र अमित कुमार के नेतृत्व में किया गया और इसे रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की मासिक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।इसमें कहा गया है कि ऊर्जा का स्रोत एक अति-शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र (मैग्नेटार) वाला अनोखा न्यूट्रॉन तारा हो सकता है जिसका कुल उत्सर्जित द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान के मुकाबले 3.6 से 7.2 गुना अधिक है। यह अध्ययन भविष्य में बहुत ही दुर्लभ एसएलएसएनई की खोज में देवस्थल में स्थापित डॉट-3.6. मीटर के उपयोगी हो सकने की भी पुष्टि करना है। (ARIES) साथ ही इसकी गहन जांच से इसमें अंतर्निहित भौतिक ढांचे, संभावित पूर्वजों, ऐसे दुर्लभ विस्फोटों की मेजबानी करने वाले वातावरण और गामा-रे बर्स्टएवं फास्ट रेडियो बर्स्ट जैसे अन्य ऊर्जावान विस्फोटों के साथ उनके संभावित जुड़ाव का पता लगाया जा सकता है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : देश के 100 PG छात्रों ने एरीज से जाने खगोल विज्ञान के अनजाने रहस्य…-17 से सोमवार 24 मई तक ‘भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष आजादी का अमृत महोत्सव’ के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम नवीन समाचार, नैनीताल, 24 मई 2021। मुख्यालय स्थित एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के द्वारा गत 17 से सोमवार 24 मई के बीच 8 दिनों तक स्नातकोत्तर छात्रों के लिए खगोल विज्ञान में एक ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम-‘एरीज ट्रेनिंग स्कूल इन ऑब्जर्वेशनल एस्ट्रोनॉमी-एटीएसओए-2021’ आयोजित किया गया। ‘(ARIES) भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष आजादी का अमृत महोत्सव’ के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में पूरे देश के 25 से अधिक विश्वविद्यालयों के लगभग 100 छात्रों ने वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया और खगोल विज्ञान के विविध आयामों व रहस्यों से परिचित हुए। यह भी पढ़ें : एम्स ऋषिकेश में चमोली के दंपति ने नौ दिन के मृत नवजात का देहदान किया, चिकित्सा शोध को मिला मानवता का बड़ा योगदान(ARIES) इस कार्यक्रम के दौरान एरीज के वैज्ञानिकों ने छात्रों को दूरबीनों, तारों की रचना एवं विकास, सौर मंडल से बाहर के ग्रहों, सौर भौतिकी, मंदाकिनी एवं परामंदाकिनी यानी अपनी आकाशगंगा एवं आकाशगंगा से बाहरी ब्रह्मांड, खगोल विज्ञान, एरीज की प्रेक्षण सुविधाओं, दुनिया की सबसे बड़ी प्रस्तावित 30 मीटर टेलीस्कोप परियोजना और आदित्य एल-1 अंतरिक्ष मिशन जैसे विभिन्न विषयों से परिचित कराया। साथ ही फोटोमेट्री, स्पेक्ट्रोस्कोपी, पोलारिमेट्री और मशीन लर्निंग जैसी विभिन्न खगोलीय डेटा प्रोसेसिंग तकनीकों पर आधारित व्यावहारिक और प्रदर्शन सत्र भी आयोजित हुए। बताया गया कि ब्रह्मांड की वर्तमान समझ न केवल प्रेक्षण सुविधाओं के निरंतर होते विकास पर निर्भर है, बल्कि इन सुविधाओं से उत्पन्न डेटा का विश्लेषण करने वाले लोगों की संख्या पर भी है। तकनीकी विकास के कारण विद्युत चुम्बकीय तरंगों के विभिन्न पट्टों में पूरे विश्व और अंतरिक्ष में कई खगोलीय वेधशालाएं कार्यरत हैं और कई आगामी हैं। (ARIES) ये वेधशालाएं बड़ी मात्रा में डेटा उत्पन्न करेंगी, जिसके विश्लेषण के लिए और खगोलीय पिंडों की समझ बेहतर करने के लिए शोधकर्ताओं की बड़ी संख्या की आवश्यकता होगी। प्रतिवर्ष प्रशिक्षण स्कूलों का संचालन करने के पीछे एरीज का उद्देश्य युवा छात्रों को खगोलीय डेटा-विश्लेषण में विशेषज्ञता-कुशलता प्रदान करना और हमारे देश में एक प्रतिभावान पीढ़ी विकसित करना है। एटीएसओए-2021 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।यह भी पढ़ें : ब्रह्मांड के अंतिम छोर के आंकलन की ओर बढ़े वैज्ञानिक, एरीज के नाम भी जुड़ी बड़ी उपलब्धि-एरीज की छात्रा दुनिया के खगोलविदों के समूह जीएआईए द्वारा की गई बड़ी खोज में शामिल, एरीज की डॉट व आईएलएमटी दूरबीनों का भी खोज में योगदाननवीन समाचार, नैनीताल, 08 अप्रैल 2021। मुख्यालय स्थित एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के नाम पर बड़ी उपलब्धि जुड़ी है। दुनिया के खगोलविदों के संगठन जीएआईए यानी गुरुत्वाकर्षण लेंस वर्किंग ग्रुप ने जनपद के देवस्थल में लगी एशिया की दूसरे नंबर की सबसे बड़ी प्रकाशीय दूरबीन-डॉट यानी देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप और यहीं प्रस्तावित 4 मीटर व्यास की आईएलएमटी दूरबीन सहित दुनिया की कई जमीन और अंतरिक्ष में लगी दूरबीनों की मदद से चतुष्कोणीय बहुरूपीय क्वेजार की खोज की है। (ARIES) इसे मनुष्यों एवं तथा मशीन आधारित एआई यानी संवर्धित बुद्धि की मदद से इंसान और मशीन की अनूठी जुगलबंदी की एक बड़ी खोज भी माना जा रहा है। इस अध्ययन में एरीज की शोध छात्रा प्रियंका जालान भी बेल्जियम की यूनिवर्सिटी ऑफ लिज के प्रोफेसर जीन सुरर्देज के साथ सह लेखिका हैं। बताया गया है कि पिछले केवल डेढ़ वर्ष से चल रहे इस शोध अध्ययन में पृथ्वी से अरबों प्रकाश वर्ष दूर स्थित पिंडों के अध्ययन में सहायता मिलेगी। इस अध्ययन से ब्रह्मांड के अंतिम छोर का आंकलन भी हो सकेगा। बताया गया है कि विशाल आकाशगंगाओं के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा एक क्वेजार की चार छवियां यानी चतुष्कोणीय बहुरूपीय क्वेजार प्राप्त करना दुर्लभ होता है। वर्ष 1985 में पहला चतुष्कोणीय प्रतिबिंब खोजा गया था।(ARIES) इसके बाद पिछले चार दशकों में करीब 50 चतुष्कोणीय बहुरूपीय क्वेजार या क्वैड्स खोजे गए हैं, लेकिन इधर इस अध्ययन में केवल डेढ़ वर्ष में किये गए अध्ययन से क्वैड्स की संख्या में 25 फीसद की वृद्धि हो गयी है। इस अध्ययन में अमेरिका की जेट प्रोपल्शन प्रयोगशाला के डैनियन स्टर्न और क्रोन मार्टिस आदि वैज्ञानिक भी सहयोगी हैं।यह भी पढ़ें : देहरादून में प्रदूषण नियंत्रण में बड़ी भूमिका निभाएगा नैनीताल का एरीज..-केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की मौजूदगी में ऑनलाइन आयोजित कार्यक्रम में एमओयू हुआ हस्ताक्षरित नवीन समाचार, नैनीताल, 27 मार्च 2021। भारत सरकार के पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने देश भर में वायु प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम-एनसीएपी शुरू किया था। अब इस एनसीएपी कार्यक्रम को देश के 132 गैर-प्राप्ति वाले शहरों में लागू किया जा रहा है। (ARIES) एनसीएपी के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए नैनीताल के एरीज यानी आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशन साइंसेज, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड-यूकेपीसीबी और देहरादून नगर निगम के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के अनुसार एरीज व यूकेपीसीबी प्रदेश की राजधानी देहरादून शहर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए विशिष्ट कार्य योजना तैयार करने के लिए तकनीकी भागीदार होंगे। जबकि राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड-सीपीसीबी और एमओईएफ और सीसी समन्वय और तकनीकी अनुपालन की देखरेख करेंगे। (ARIES) इन सभी के द्वारा केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की उपस्थिति में ऑनलाइन एमओयू हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया गया। समारोह में एरीज के निदेशक प्रो. दीपांकर बनर्जी और अध्यक्ष, वायुमंडलीय प्रभाग के वैज्ञानिक डॉ. मनीष नाजा ने शामिल रहकर एरीज की ओर से हस्ताक्षर किए। यह भी पढ़ें : चांद-सितारों की तलाश करते ‘एरीज’ पर फिर उभरा भ्रष्टाचार का ‘ग्रहण’पिछले विवादित निदेशक प्रो. रामसागर के कार्यकाल पर कैग ने लगाए लाखों रूपयों के वित्तीय अनियमितता के आरोपनैनीताल निवासी देवेन्द्र जोशी द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत मांगी गयी रिपोर्ट में हुआ खुलासा नवीन जोशी, नैनीताल, 8 जनवरी 2018। चांद-सितारों व आकाशगंगाओं के अध्ययन के कार्य में जुटे नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण एवं शोध संस्थान यानी एरीज और खासकर इसके पिछले विवादित निदेशक प्रो. रामसागर के कार्यकाल पर भ्रष्टाचार के आरोप रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। (ARIES) भारत सरकार के लेखा परीक्षा वैज्ञानिक विभाग यानी कैग के प्रधान निदेशक द्वारा वर्ष 2012 से 2016 के बीच विभिन्न मामलों का निरीक्षण करने का बाद तैयार रिपोर्ट में नैनीताल स्थित एरीज परिसर में 80 सेमी की दूरबीन स्थापित करने, देवस्थल में स्थापित 3.6 मीटर की टेलीस्कॉप के लिए स्पेक्ट्रोग्राफ उपकरण का निर्माण करने तथा गैरकानूनी तरीकों से पदों का सृजन करने व केन्द्रीय वित्त मंत्रालय की सहमति के बिना वेतन वृद्धि करने जैसे कई बड़ी गड़बड़ियां होने और सरकारी कोष को करोड़ों रुपए का नुकसान करने की बात कही गयी हैं।भारत सरकार के विद्यान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत उत्तराखंड में संचालित एरीज के बाबत कैग की करीब डेढ़ दर्जन पन्नों वाली इस रिपोर्ट के अनुसार नैनीताल स्थित एरीज परिसर में 80 सेमी की दूरबीन को स्थापित करने में कई तय प्रावधानों का उल्लंघन किया गया। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में संबंधित कंपनी ने 259 दिनों की देरी की। इसके बावजूद एरीज ने कंपनी को 54.13 लाख में से 53.90 लाख रूपये का भुगतान बेरोकटोक कर दिया। (ARIES) प्रोजेक्ट में देरी के लिए न तो कंपनी का भुगतान रोका और न ही बैंक गारंटी कैश करायी। इस प्रकार एरीज की लापरवाही से सरकारी कोष को 53.90 लाख रूपये का नुकसान उठाना पड़ा, और इतनी धनराशि खर्च करने के बावजूद तकनीकी गड़बड़ियों के चलते टेलीस्कोप लगाने का उद्देश्य भी पूरा नहीं हो पाया। इसी एरीज के देवस्थल परिसर में स्थापित एशिया की अपनी तरह की सबसे बड़ी 3.6 मीटर की आप्टिकल टेलीस्कोप के लिए स्पेक्ट्रोग्राफ नामक यंत्र की जरूरत थी, जिसे एरीज ने अपने वर्कशाप में बनाने का निर्णय लिया। (ARIES) इसके लिए वर्कशॉप में सीएनसी वर्टिकल मशीनरी सेंटर की स्थापना करने के लिए निविदा के माध्यम से बैंगलुरू की भारत फ्रिट्ज वेलनेर लिमिटेड नामक कंपनी को 60 लाख रूपये में जिम्मेदारी सौंपी गयी। बाद में धनराशि को 60 से बढ़ाकर पहले 77.95 लाख और दुबारा बढ़ाकर 78.35 लाख रूपये कर दिया गया। (ARIES) बावजूद कंपनी ने न केवल काम में देरी की बल्कि जो मशीनरी उपलब्ध करायी वह भी काम नहीं कर पायी। यानी स्पेक्ट्रोग्राफ उपकरण बनाने का काम भी शुरू नहीं हो पाया। लेकिन इस कंपनी को भी दो चरणों में कुल 74.04 लाख रूपये का यानी करीब पूरा भुगतान कर दिया गया।यह भी पढ़ें : दिवाली पर खुला अंतरिक्ष की ‘बड़ी दिवाली’ का राज, आइंस्टीन ने किया था इशारामनुष्य की तरह पैदा होते, साँस लेते, गुनगुनाते और मरते भी हैं तारेदुनिया की ‘टीएमटी’ के निर्माण में भारत व एरीज की भागेदारी तय21 जून ‘विश्व योग दिवस’ को आएगा ऐसा अनूठा पल, गायब हो जाएगी आपकी छाया !कामयाबी: देवस्थल में एशिया की सबसे बड़ी दूरबीन ‘डॉट’ स्थापितकामयाबी: देवस्थल में एशिया की सबसे बड़ी दूरबीन ‘डॉट’ स्थापित, आइएलएमटी की तैयारीदुनिया की ‘टीएमटी” में अपनी ‘टीएमटी” का ख्वाब भी बुन रहा है भारतसूर्य पर ‘महाविस्फोट’ का खतरा, उभरा 10 लाख किमी व्यास का ‘सौर कलंक’कुमाऊं विवि में विकसित हो रही ‘नैनो दुनियां’, सोलर सेल बनाने को बढ़े कदमइसके बाद एरीज ने अपनी नाकामी को छुपाने के लिए कुशल मैकेनिकल इंजीनियर नहीं होने का बहाना बनाकर नवम्बर 2014 में गाजियाबाद के पवन उद्योग नामक आउटसोर्स कंपनी को 37.74 लाख रूपये में स्पेक्ट्रोग्राफ खरीदने का आर्डर दे दिया। इस कंपनी ने भी निर्धारित समयावधि के बाद उपकरण उपलब्ध कराया, और उसे 35.90 लाख रूपये का भुगतान कर दिया गया। (ARIES) इस प्रकार रिपोर्ट में कहा गया है कि एरीज की लापरवाही के कारण सरकारी कोष को लाखों रूपये का नुकसान उठाना पड़ा है। इसी प्रकार रिपोर्ट में के अनुसार एरीज ने भारत सरकार के वित्त तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की अनुमति के बिना ही 26 पदों का पदों का सृजन कर दिया, और केन्द्र सरकार के नियमों व प्राविधानों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन कर वैज्ञानिकों व इंजीनियरों के 25 पदों व रजिस्ट्रार के एक पद को भी अपग्रेड कर दिया। (ARIES) इस बाबत रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि एरीज ने मौलिक नियमों का उल्लंघन किया और 43.73 लाख रूपये का अनावश्यक वित्तीय बोझ बढ़ाया। रिपोर्ट में कहा गया कि एरीज के निदेशक का वर्ष 2004 व 2006 में वेतनमान नियमविरुद्ध दो बार 16400-450-20000 से बढ़ाकर 22400-600-26000 कर दिया गया। साथ ही ग्रेड बी के 11 वैज्ञानिकों को ग्रेड सी व ग्रेड सी के तीन वैज्ञानिकों को ग्रेड डी में यानी कुल 14 वैज्ञानिकों को समय पूर्व पदोन्नति दी गयी। (ARIES) इससे 65.42 लाख रूपये का अनावश्यक बोझ पड़ा। इसी तरह 2009 से 2016 के मध्य 2082.10 लाख रूपये की लागत से विभिन्न प्रकार के कार्य करवाये लेकिन केन्द्र सरकार के नियमों के तहत 104.11 लाख रूपये का लेबर सेस व वर्क कांटेक्ट टैक्स (डब्ल्यूसीटी) की वसूली नहीं की। इसमें ‘द बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्क्स वेलफेयर एक्ट 1996’ का उल्लंघन करते हुए 20.82 लाख रूपये का लेबर सेस व 83.29 लाख रूपये का डब्ल्यूसीटी शामिल है। (ARIES) इस बाबत पूछे जाने पर एरीज के रजिस्ट्रार ने कहा कि आरोप प्रारंभिक व पुरानी लंबी अवधि के हैं, लिहाजा भ्रष्टाचार के आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई हैं। इनमें से कई पर कैग को जवाबी रिपोर्ट भेज दी गयी है।एरीज में रिकार्ड 16 वर्ष लंबी सल्तनत रही है विवादित निदेशक प्रो. रामसागर की1996 से 2012 तक उत्तर प्रदेश राजकीय वेधशाला के उत्तराखंड वेधशाला और एरीज बनने के बाद तक रहा निदेशक के रूप में सर्वाधिक लंबा कार्यकालनवीन जोशी, नैनीताल। सूर्य एवं चांद सितारों के प्रेक्षण, वायुमंडलीय एवं मौसमी शोधों के साथ देश की सबसे बड़ी ३.६ मीटर व्यास की दूरबीन स्थापित करने और दुनिया की सबसे बड़ी ३० मीटर व्यास की दूरबीन में सहभागिता के लिए पहचाने जाने वाला एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान इस बार अपने पूर्व निदेशक प्रो. रामसागर २००८ के एक मामले में सीबीआई द्वारा की गई जांच के बाद जेल जाने को लेकर सुर्खियों में रहे हैं, आखिर उन्हें देहरादून स्थित सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण करना पड़ा।उल्लेखनीय है कि १९५५ में यूपी राजकीय वेधशाला के रूप में स्थापित वर्तमान एरीज के करीब छह दशक लंबे इतिहास में प्रो. राम सागर के नाम सर्वाधित १६ वर्ष निदेशक रहने का रिकार्ड दर्ज है। इस बीच कभी अपने लोगों को ही नियुक्तियां देने तो कभी एरीज-मनोरा पीक और कभी देवस्थल में अनाधिकृत तौर पर पेड़ काटने जैसे आरोप भी उन पर लगते रहे, लेकिन उनकी जमी-जमाई सल्तनत में कभी कोई विरोध का स्वर अधिक मुखर नहीं हो पाया। (ARIES) किंतु इधर उन पर बुरे वक्त ने ऐसा खेल दिखाया कि एक अभियंता की नियुक्ति के मामले ने ऐसा तूल पकड़ा कि उनके खिलाफ सीबीआई जांच हो गई, और लाख प्रयासों के बाद असफल रहने के बाद आखिर उन्हें आत्मसमर्पण करने को मजबूर ही होना पड़ा। इधर एरीज में उनके जेल जाने पर एक भी अधिकारी, वैज्ञानिक कर्मचारी एक भी शब्द बोलने से बचते दिखे। कुछ का कहना था, मामले में कानून अपना कार्य कर रहा है, उसे अपना कार्य करने देना चाहिए।बनारस के एक कमरे से देश की सबसे बड़ी दूरबीन तक का सुनहरा इतिहास रहा है एरीज कानैनीताल। आजादी के बाद खगोल विज्ञान प्रेमी यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री संपूर्णानंद ने सर्वप्रथम १९५१ में राजकीय वेधशाला बनाने का निर्णय लिया था। २० अप्रैल १९५४ में यह बरारस गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज के एक कक्ष में स्थापित की गई। डीएसबी कॉलेज नैनीताल के डा. एएन सिंह को इसका निदेशक बनाया गया, लेकिन जुलाई ५४ में ही उनका हृदयाघात से निधन हो जाने के बाद नवंबर १९५४ में डा. एमके वेणुबप्पू इसके निदेशक बनाए गए, (ARIES) जिन्होंने पहाड़ पर ही खगोल विज्ञान की वेधशाला होने की संभावना को देखते हुए इसे पहले नैनीताल के देवी लॉज में तथा बाद में वर्तमान १९५१ मीटर ऊंचाई वाली मनोरा पीक चोटी में स्थापित करवाया। आगे डा. केडी सिंभ्वल १९६० से १९७८, डा. एमसी पांडे ७८ से बीच में कुछ अवधि छोड़कर १९९५ तक इसके निदेशक रहे, तथा जुलाई १९९६ में प्रो. रामसागर इसके निदेशक बने।(ARIES) आगे राज्य बनने के बाद यूपी राजकीय वेधशाला उत्तराखंड सरकार को हस्तांतरित हुई तथा २२ मार्च २००४ में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी मंत्रालय ने इसे अपने हाथ में लेकर एरीज के रूप में केंद्रीय संस्थान की मान्यता दे दी। वर्तमान में यहां सीसीडी कैमरा, स्पेक्टोफोटोमीटर व फिल्टर्स जैसी आधुनिकतम सुविधाओं युक्त १५ सेमी, ३८ सेमी, ५२ सेमी, ५६ सेमी व १.०४ मीटर एवं देवस्थल में १.३ मीटर की दूरबीनें उपलब्ध हैं, (ARIES) जिन पर खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी, वायुमंडलीय विज्ञान एवं सूर्य तथा सौर प्रणाली पर २४ वैज्ञानिक गहन शोध करते रहते हैं। २८ अक्टूबर २००३ को यहां के वरिष्ठ सौर वैज्ञानिक व वर्तमान कार्यवाहक निदेशक डा. वहाबउद्दीन ने विश्व में पहली बार १५ सेमी की दूरबीन से ४बी/एक्स१७.२क्लास की ऐतिहासिक बड़ी सौर भभूका का प्रेक्षण करने में सफलता प्राप्त की थी। (ARIES) ग्रह नक्षत्रों के मामले में अंधविश्वासों से घिरे आमजन तक विज्ञान की पहुंच बढ़ाने एवं खासकर छात्राों को ब्रह्मांड की जानकरी देने की लिऐ एरीज ने अपने ‘पब्लिक आउटरीच” कार्यक्रम के तहत पूर्णतया कम्प्यूटरीकृत दूरबीन (प्लेनिटोरियम) स्थापित की है। देवस्थल में देश व एशिया की अपनी तरह की सबसे बड़ी ३.६ मीटर व्यास की की आप्टिकल अगले कुछ माह में स्थापित होने जा रही है, जिसके लिए १९८० के दौर से प्रयास चल रहे हैं।Share this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading...Related Post navigationज्योर्तिलिंग जागेश्वर, यहीं से शुरू हुई थी शिवलिंग की 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