नवीन समाचार, हरिद्वार, 26 मई 2025 (Saint Community Opposed to Redicos Trikal Whisky)। उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद में शराब निर्माता कंपनी रेडिको खेतान द्वारा हाल में शुरू की गई प्रीमियम श्रेणी की ‘त्रिकाल’ व्हिस्की को लेकर संत समाज और राष्ट्रस्तरीय नेताओं ने गहरी आपत्ति जतायी है। धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े ‘त्रिकाल’ जैसे पवित्र शब्द को शराब के उत्पाद से जोड़ने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए संतों ने इसे सनातन धर्म की मर्यादा और आस्था के साथ किया गया सीधा अपमान बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस व्हिस्की का नाम तुरंत नहीं बदला गया तो संत समाज सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगा।
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित ने ‘त्रिकाल’ नाम पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि यह सनातन आस्था के प्रतीक भगवान शिव का अपमान है, जिन्हें हमारे शास्त्रों में त्रिकालदर्शी कहा गया है। यह शब्द अध्यात्मिक गहराई लिये हुए है, और इसका उपयोग एक नशे के उत्पाद के साथ करना न केवल अपमानजनक है, बल्कि धर्म की अवमानना भी है। उन्होंने कहा कि धर्म और संस्कृति से जुड़े शब्दों को भौतिक वस्तुओं और नशे के साधनों से जोड़ने से सामाजिक संतुलन बिगड़ सकता है और धार्मिक सद्भाव को ठेस पहुंच सकती है।
उज्ज्वल पंडित ने सभी कंपनियों से अपील की है कि वे सनातन संस्कृति का सम्मान करें और भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचें।
राजनेताओं और हिंदू संगठनों का भी विरोध
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘त्रिकाल’ व्हिस्की का नाम तुरंत बदला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे नामों से समाज में आक्रोश पैदा होता है और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है। उन्होंने कंपनी से संयम और संवेदनशीलता बरतने की अपील की है।
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि हाल के वर्षों में हिंदू देवी-देवताओं के चित्रों और प्रतीकों का अपमान जनक ढंग से उपयोग बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब भारत में ही इस प्रकार की मानसिकता बढ़ती है, तो यह और भी चिंताजनक हो जाता है। विनोद बंसल ने कहा कि निर्माताओं और प्रचारकों को इस तरह की संज्ञाओं से दूर रहना चाहिए जो आस्था के प्रतीक हैं।
संत समिति और अखाड़ा परिषद का स्पष्ट रुख (Saint Community Opposed to Redicos Trikal Whisky)
अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष महंत विशाल दास महाराज ने इस कृत्य को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि हमारे धर्म ग्रंथों में भगवान शिव को त्रिकालदर्शी कहा गया है और ऐसे पवित्र नाम से किसी व्यसन संबंधी वस्तु को जोड़ना सनातन धर्म और सभ्यता की खुली अवमानना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कंपनी ने त्वरित रूप से नाम नहीं बदला, तो अखाड़ा परिषद सहित सभी संत समाज इस विषय में व्यापक आंदोलन करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि धर्मावलंबी ऐसी किसी भी वस्तु या कंपनी को समाज में स्वीकार नहीं करेंगे, जो धर्म या आस्था से जुड़े प्रतीकों का दुरुपयोग करती हो। उन्होंने इस विषय पर भारत सरकार से भी हस्तक्षेप करने की मांग की है।
संत समाज, राजनेता और हिंदू संगठनों का यह सामूहिक विरोध दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति से जुड़े प्रतीकों को लेकर समाज में कितनी गहराई से भावनाएं जुड़ी होती हैं। ऐसे में व्यावसायिक संस्थानों को अपनी विपणन रणनीतियों में अधिक सजगता बरतनी चाहिए ताकि धार्मिक भावनाओं का अनादर न हो और सामाजिक सौहार्द बना रहे। (Saint Community Opposed to Redicos Trikal Whisky)
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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