नवीन समाचार, देहरादून, 10 फरवरी 2026 (Dehradun-20 Acres Land)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) से भारतीय सैन्य अकादमी (Indian Military Academy–IMA) के समीप स्थित लगभग 20 एकड़ कृषि भूमि को एक मुस्लिम शैक्षणिक संस्थान के नाम पर प्राप्त कर बाद में उस पर अवैध रूप से प्लाटिंग कर ‘डेमोग्राफी चेंज’ (Demography change) का प्रयास करते हुए बिक्री किए जाने का न्यायिक आदेशों के उल्लंघन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण समाचार सामने आया है।
जिला प्रशासन की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह गतिविधि उच्च न्यायालय के सशर्त आदेशों का उल्लंघन है और इससे सैन्य क्षेत्र की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
प्रकरण की पृष्ठभूमि और जांच का आधार
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह भूमि देहरादून जनपद के ग्राम हरियावाला धौलास, पछुवादून परगना, विकासनगर (Vikasnagar) क्षेत्र में स्थित है। जानकारी सामने आने के बाद कि कृषि प्रयोजन के लिए ली गई इस भूमि पर आवासीय प्लाट काटे जा रहे हैं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए। इसके बाद देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल (Savin Bansal) के निर्देशन में जांच कराई गई। प्रारंभिक जांच विकासनगर के उपजिलाधिकारी विनोद कुमार (Vinod Kumar) ने की।
उच्च न्यायालय की सशर्त अनुमति का उल्लंघन
जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस भूमि को बेचने की अनुमति पूर्व में उच्च न्यायालय (High Court) ने सशर्त रूप से दी थी। शर्तों में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि भूमि का भू-उपयोग परिवर्तित (Land उसे change) नहीं किया जाएगा और इसका प्रयोग केवल कृषि एवं उससे जुड़े कार्यों के लिए ही किया जाएगा। किसी भी प्रकार का व्यावसायिक या आवासीय उपयोग निषिद्ध था। इसके बावजूद जांच में पाया गया कि भूमि पर आबादी बसाने के उद्देश्य से प्लाटिंग की गई और छोटे-छोटे भूखंड बनाकर बिक्री की जा रही थी।
सैन्य सुरक्षा पर संभावित खतरा
प्रशासनिक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह भूमि भारतीय सैन्य अकादमी के अत्यंत निकट स्थित है। ऐसे में अनियंत्रित बसावट और अज्ञात व्यक्तियों की आवाजाही से सैन्य प्रशिक्षण संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। जिला प्रशासन ने इस पहलू को गंभीर मानते हुए इसे केवल भूमि अनियमितता का मामला न मानकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय माना है।
भूमि को राज्य सरकार में निहित करने की तैयारी
जिला प्रशासन के अनुसार, यह कृत्य न केवल न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है बल्कि सरकारी भूमि नीति और सुरक्षा मानकों के भी विरुद्ध है। इसलिए पूरी 20 एकड़ भूमि को राज्य सरकार में निहित किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि आईएमए के समीप किसी भी स्थिति में सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता और अवैध गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आरोप–प्रत्यारोप
इस प्रकरण ने राजनीतिक हलकों में भी तीखी प्रतिक्रिया पैदा की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मुस्लिम शैक्षणिक संस्थान के नाम पर भूमि आवंटन किया गया और यदि वही सरकार सत्ता में रहती तो उसी दिशा में आगे बढ़ती। मुख्यमंत्री ने इसे जनसांख्यिकी परिवर्तन के प्रयास से भी जोड़ते हुए सख्त कार्रवाई के संकेत दिए।
भाजपा विधायक और राज्य पार्टी प्रवक्ता विनोद चमोली (Vinod Chamoli) ने इसे कांग्रेस सरकारों की “खतरनाक साजिश” बताया। उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या यह भूमि तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी (Narayan Dutt Tiwari) के कार्यकाल में इस्लामिक/मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना के उद्देश्य से दी गई थी और क्या इसकी निगरानी तत्कालीन वरिष्ठ नेताओं के स्तर पर की जा रही थी।
कांग्रेस का पक्ष
कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Harish Rawat) ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि यह मामला वर्ष 2004 का है, जब राज्य में नारायण दत्त तिवारी मुख्यमंत्री थे। उन्होंने तर्क दिया कि इसके बाद भारतीय जनता पार्टी कई बार सत्ता में रही और यदि आवंटन में कोई अनियमितता थी तो उसे पहले ही निरस्त किया जा सकता था।
ट्रस्ट, पावर ऑफ अटॉर्नी और आगे की जांच
जांच में यह भी सामने आया है कि यह भूमि शेखुल हिंद एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट (Sheikhul Hind Education Charitable Trust) के नाम पर ली गई थी। इस ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. महमूद असद मदनी है। जो कि दारुल उलूम देवबंद और जमीयत उलेमा ए हिंद के नेता और राज्यसभा सदस्य भी रहे हैं। उन्होंने 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल में मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए स्थानीय हिंदुओं की इस भूमि को ट्रस्ट के लिए अधगृहीत कराया। लेकिन बाद में भाजपा की सरकार आ जाने के कारण मुस्लिम यूनिवर्सिटी न बना पाने पर हरीश रावत की सरकार के दौरान 2022 में भी इस हेतु प्रयास किए।
पुनः सफल न होने पर इस प्रकरण से स्वयं को अलग करते हुए रईस अहमद (Rais Ahmed) नामक व्यक्ति को भूमि की पावर ऑफ अटॉर्नी दे दी। सरकारी अभिलेखों के अनुसार, वर्तमान में वही व्यक्ति भूमि की बिक्री और प्लाटिंग से जुड़े कार्य देख रहा है और उसने कई बाहरी मुस्लिमों को यह भूमि power of Attorney के माध्यम से बेच दी है। प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि इस 20 एकड़ भूमि में कहीं वन विभाग या अन्य सरकारी भूमि तो शामिल नहीं है, साथ ही संभावित खरीदारों के पृष्ठभूमि सत्यापन की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला
यह प्रकरण केवल भूमि आवंटन या अवैध प्लाटिंग तक सीमित नहीं है। यह न्यायिक आदेशों के अनुपालन, प्रशासनिक जवाबदेही, भूमि सुधार नीति और सबसे महत्वपूर्ण सैन्य सुरक्षा जैसे विषयों से जुड़ा हुआ है। आगे की कार्रवाई यह तय करेगी कि भविष्य में सैन्य क्षेत्रों के आसपास भूमि उपयोग को लेकर नीतियां और अधिक सख्त होंगी या नहीं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।













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