EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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पुलिस हिरासत से फरार होने से हड़कंप मच गया। पुलिस आरोपित की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले, लेकिन अभी तक उसका पता नहीं चल सका है। शहर में 4 दिन में यह पुलिस की गिरफ्त से चोर के भागने की दूसरी घटना है। यह भी पढ़ें : नैनीताल: भगवान के मंदिर में बड़ी चोरी पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार तीन दिन पहले कनखल श्मशान घाट के निकट दरिद्र भंजन महादेव मंदिर से टीवी, भगवान शंकर के चांदी छत्र के अलावा अन्य सामान चोरी हुआ था। गुरुवार को पुलिस ने चोरी के आरोपित रवि उर्फ सरदार और उसके सगे भाई जितेंद्र उर्फ चवन्नी निवासी मोहल्ला कुम्हारगढ़ा कनखल को चोरी के सामान के साथ पकड़ा था। यह भी पढ़ें : एरीज नैनीताल में निकली नियुक्तियां, जल्द करें आवेदन…शुक्रवार को दोनों आरोपितों की न्यायालय में पेशी होनी थी। इस हेतु पुलिस ने दोनों आरोपितों को शुक्रवार सुबह हवालात से बाहर निकाला। इस दौरान आरोपित रवि ने शौच जाने का बहाना बनाया। थाने में तैनात मुंशी जसवंत उसे परिसर में ही शौचालय लेकर गया। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में ब्यूटी पार्लरों में भी हो रहा बड़ा कारोबार, पहली बार पड़े छापे तो हुआ खुलासा…शौचालय के पास ही खुला आंगन है। मुंशी आंगन में खड़ा होकर उसका इंतजार करने लगा। लेकिन आरोपित रवि शौचालय से बाहर आया और हाथ धोने के बहाने वहीं वॉश बेसिन की ओर चला गया और मुंशी की निगाह हटते ही रवि थाने की लगभग 4 फिट ऊंची दीवार फांदकर फरार हो गया। आरोपित सीसीटीवी कैमरों में भागता हुआ नजर आया है, पर उसका कुछ भी पता नहीं चल पाया है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleयह भी पढ़ें : पुलिस की कस्टडी से चकमा देकर भागा शातिर चोरयह भी पढ़ें : पूर्व विधायक के पूर्व नौकर की संदिग्ध परिस्थितियों में पुलिस हिरासत में मौत…यह भी पढ़ें : हल्द्वानी जेल के प्रधान बंदी रक्षक को यहीं बंद एक बंदी की ओर से खुद को गैंग्स्टर लॉरेंस बिश्नोई का करीबी बताते हुए धमकियां…यह भी पढ़ें : सेंट्रल जेल से हाइकोर्ट के अधिवक्ता को दी गई धमकी, जेल में निष्क्रिय मिला जैमर, तीन कैदियों को डाला तन्हाई सेल में…यह भी पढ़ें : हल्द्वानी जेल के जेल प्रभारी को जान से मारने की धमकी…यह भी पढ़ें : उम्रकैद सजा काट रहे हत्यारोपित की जेल में मौत से सनसनी…यह भी पढ़ें : बड़ा समाचार-बड़ी कार्रवाई: जेल अधीक्षक सहित चार जेल कर्मी सस्पेंडयह भी पढ़ें : जेेल में पुलिस, एसओजी व एसटीएफ की संयुक्त छापेमारी में बड़ी मात्रा में नगदी, चरस व मोबाइल बरामदयह भी पढ़ें : न्यायिक अभिरक्षा में मौत के मामले में खुलासा, चौकी प्रभारी कार व रुपए मांग रहा थायह भी पढ़ें : हल्द्वानी जेल में हुई बंदी की मौत की मजिस्ट्रीयल जांच के आदेशयह भी पढ़ें : हल्द्वानी जेल में एक और कैदी की मौत के मामले में हत्या का मुकदमा दर्जयह भी पढ़ें : हल्द्वानी जेल में महिला सहित 14 एचआईवी पॉजिटिवयह भी पढ़ें : बेहद खतरनाक हो सकता है किसी भी और का रक्त चढ़ानाLike this:Relatedयह भी पढ़ें : पुलिस की कस्टडी से चकमा देकर भागा शातिर चोर नवीन समाचार, हरिद्वार, 20 फरवरी 2023। राजस्थान में चोरी की बड़ी वारदात को अंजाम देने वाला एक शातिर चोर रविवार शाम हरकी पैड़ी क्षेत्र से अपनी लचर कार्यप्रणाली से लगातार आरोपों के घेरे में चल रही राजस्थान पुलिस को गच्चा देकर फरार हो गया है। राजस्थान पुलिस आरोपित को हरिद्वार चोरी के जेवरात बरामद करने के लिए लेकर आई थी। आरोपित चोर बहाना बनाकर शौचालय गया और खिड़की की जाली तोड़कर भाग निकला। यह भी पढ़ें : नैनीताल: यूट्यूब की महिला संचालक पर धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में अभियोग दर्जकाफी देर इंतजार के बाद जब चोर बाहर नहीं निकला तो पुलिसकर्मियों ने दरवाजे की कुंडी तोड़ी, जिसके बाद चोर के फरार होने की बात सामने आई। इसके बाद राजस्थान पुलिस, हरिद्वार पुलिस के साथ मिलकर आरोपित की तलाश में जुट गई है। लेकिन अभी तक उसका कुछ पता नहीं चल सका है। आरोपित चोर के खिलाफ शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है। यह भी पढ़ें : हल्द्वानी: दुष्कर्म पीड़ित बालिग युवती ने की दो बच्चों के पिता के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई करने की मांग, पुलिस भी पड़ी चक्कर में…कोतवाली हरिद्वार पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ के हनुमानगढ़ थाने की एक पुलिस टीम आरोपित भीम उर्फ भीमला निवासी रेगर मोहल्ला हुनमानगढ़ राजस्थान को चोरी के जेवरात बरामद करने के लिए रविवार को हरिद्वार लेकर आई थी। शाम को हरकी पैड़ी क्षेत्र से वापस लौटने के दौरान आरोपित ने लघु शंका निवारण की बात कही। इस पर पुलिस टीम उसे हरकी पैड़ी के पास स्थित होटल गंगा दर्शन ले गई और पुलिस ने आरोपित को लघुशंका के लिए शौचालय भेजा। साथ आए पुलिसकर्मी बाहर ही उसका इंतजार कर रहे थे। यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में अजब-प्यार की गजब कहानी ! ‘आठ साल का प्यार है सर, कैसे छोड़ दूं ? पर इसके साथ रहना भी संभव नहीं है…’‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या 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पुलिसकर्मी लाइन हाजिरइस मामले में राजस्थान पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल पुरुषोत्तम ने शहर कोतवाली में तहरीर देकर अभिरक्षा से फरार होने का मुकदमा दर्ज कराया है। शहर कोतवाल भावना कैथोला ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर आरोपित की तलाश शुरू कर दी गई है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : पूर्व विधायक के पूर्व नौकर की संदिग्ध परिस्थितियों में पुलिस हिरासत में मौत…नवीन समाचार, हरिद्वार, 20 जनवरी 2023। एक पूर्व विधायक के पूर्व नौकर की पुलिस हिरासत में संदिग्ध मौत होने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस की ओर से बताया जा रहा है कि अंकित नाम का मृतक पूर्व विधायक सुरेश राठौर का नौकर था। उसने विधायक के यहां से छह माह पहले काम छोड़ दिया था। इधर हरिद्वार जनपद की बहादराबाद पुलिस ने उसे चोरी के आरोप में पकड़ा था। यह भी पढ़ें : प्लॉट दिखाने के बहाने युवती से प्रॉपर्टी डीलर ने किया दुष्कर्म !इसके बाद पुलिस उसे चोरी का माल बरामद करवाने के लिए दिल्ली लेकर गई थी। बताया जा रहा है दिल्ली के अशोक नगर में वह पुलिस की अभिरक्षा से हाथ छुड़वाकर भागने के लिए एक मकान की छत से कूद गया। उसे घायल हालत में दिल्ली के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत गई गई। मृतक यूपी के बिजनौर का रहने वाला था। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : हल्द्वानी जेल के प्रधान बंदी रक्षक को यहीं बंद एक बंदी की ओर से खुद को गैंग्स्टर लॉरेंस बिश्नोई का करीबी बताते हुए धमकियां…नवीन समाचार, हल्द्वानी, 1 सितंबर 2022। उप कारागार हल्द्वानी के प्रधान बंदीरक्षक देवेंद्र प्रसाद को यहां बंद एक बंदी कवि बिष्ट के द्वारा पंजाब के गैंग्स्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम से धमकाने, पूरे परिवार को मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। देवेंद्र प्रसाद ने पुलिस को बताया कि 25 अगस्त को उनके मोबाइल में अन्जान नंबर से मैसेज आया। मैसेज में जेल में बंद बंदी कवि बिष्ट का ध्यान रखने को कहा गया। ध्यान न देने पर जान से मारने की धमकी दी गई। यह भी पढ़ें : 16 साल की नाबालिग छात्रा पहुंची थाने, लगाए ऐसे आरोप कि पुलिस को परिजनों को बुलाना पड़ा..इसके बाद 31 अगस्त को दोबारा हरमन नाम के व्यक्ति की ओर से दूसरे नबर से से भी फोन पर बंदी कवि बिष्ट का ध्यान न देने पर जान से मारने की धमकी दी गई। फोन करने वाले ने कहा कि जो भी खर्चा चाहिए ले लो, तुम्हारी बेटी की शादी भी है। कवि बिष्ट का ध्यान नहीं दिया तो पूरा परिवार निपट जाएगा। तीसरी बार में व्हाटसएप पर गुरजन्ट नाम के व्यक्ति ने भी कॉल करने वही धमकी दी।यह भी कहा कि बंदी कवि बिष्ट कारागार में अनुशासनहीनता करता रहता है। नियमों का उल्लघंन करता रहता है। खुद को लारेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ बताता है और कोर्ट में शिकायत कर झूठे मुकदमें में फसवाने की धमकी देता है। इधर उसने कहा, ‘मेरा अंबाला जेल का रिकार्ड पता कर लेना। गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हूं, जेल में कोई दिक्कत हुई तो तेरे पूरे परिवार को मरवा दूंगा।प्रधान बंदी रक्षक का कहना है कि इन धमकियों से वह अत्याधिक मानसिक तनाव में हैं। सीओ सिटी भूपेंद्र धोनी ने बताया आरोपित कवि बिष्ट व गुरजन्ट नाम के युवक पर धमकी की धारा में मुकदमा दर्ज किया है।उल्लेखनीय है कि लारेंस बिश्नोई पंजाब का गैंगस्टर है। इधर हाल में वह मशहूर पंजाबी सिंगर सिद्दू मूसेवाला की हत्या की जिम्मेदारी ले चुका है। इसके अलावा वह वालीवुड अभिनेता सलमान खान को मारने की धमकी भी दे चुका है। उस पर चार राज्यों में हत्या, लूट, डकैती, अपहरण आदि मामलों में 80 मुकदमे दर्ज हैं।जबकि हल्द्वानी उप कारागार में बंद बंदी कवि बिष्ट बठल कालोनी, थाना लालरू, मोहाली पंजाब का रहने वाला है। इसके विरुद्ध अंबाला, पंजाब व हल्द्वानी में लूट के सात मुकदमे दर्ज हैं। जेल अधीक्षक सतीश सुखीजा ने बताया कि आरोपित को तन्हाई सेल में रखा गया है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : सेंट्रल जेल से हाइकोर्ट के अधिवक्ता को दी गई धमकी, जेल में निष्क्रिय मिला जैमर, तीन कैदियों को डाला तन्हाई सेल में…नवीन समाचार, सितारगंज, 10 अगस्त 2022। सेंट्रल जेल सितारगंज में बंद एक कैदी द्वारा उच्च न्यायालय के एक अधिवक्ता को फोन कर धमकाने का मामला प्रकाश में आया है। इसकी सूचना के बाद पुलिस एवं गृह विभाग में खलबली मच गई। डीआइजी, एडीएम, एएसपी ने कई थानों की फोर्स के साथ जेल में औचक छापा मारकर 4 घंटे तक 24 बैरकों की तलाशी ली। इस दौरान जेल में तीन कैदियों सुखदेव सिंह उर्फ सुक्खा निवासी न्यूरिया पीलीभीत, सितारगंज के ग्राम दड़हा निवासी हरजीत सिंह उर्फ काला व मैनाझुंडी निवासी तरसेम सिंह के पास से तीन मोबाइल बरामद किए गए। इसके बाद जेल अधीक्षक अशोक कुमार ने तीनों कैदियों को तन्हाई, दो माह में एक मुलाकात व अर्जित समस्त परिहार समाप्त करने की कार्रवाई की है।बताया गया है कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के ग्राम शौकतनगर थाना न्यूरिया निवासी सुखदेव सिंह उर्फ सुक्खा ने मोबाइल पर हाइकोर्ट के अधिवक्ता के तौर पर प्रैक्टिस करने वाले अपने एक रिश्तेदार को धमकी दी थी। जेल अधीक्षक अशोक कुमार ने तीनों बंदियों के खिलाफ महानिरीक्षक कारागार से परिपत्र 2164 के जरिए तन्हाई में सजा काटने, दो माह में एक मुलाकात व बंदियों से अर्जित समस्त परिहार समाप्त करने की संस्तुति की है।इसके अलावा तलाशी के दौरान अफसरों को सेंट्रल जेल में चम्मच को घिसकर बनाए गए चाकू, कैंची व ब्लेड कटर मिले हैं। इसके अलावा कैदियों के पास से दो पेन ड्राइव भी बरामद हुए है। सभी सामान को कब्जे में ले लिया गया है। वर्तमान में खुली व सेंट्रल जेल में करीब 600 से अधिक विचाराधीन, दोषसिद्ध बंदी हैं। सेंट्रल जेल के करीब डेढ़ किमी के दायरे में मोबाइल फोन का इस्तेमाल न किया जा सके, इसके लिए जैमर का प्रयोग किया जाता है। लेकिन वर्षों से जैमर निष्क्रिय है।निवर्तमान जेल अधीक्षक डीआइजी कारागार दधिराम मौर्य ने जैमर एक्टिव करने के लिए पूर्व में प्रस्ताव तैयार किया था। अगर जैमर सक्रिय होता तो शायद जेल और उसके आस-पास के दायरे में मोबाइल फोन निष्क्रिय हो जाता। छापेमारी टीम को जेल में लगे सीसीटीवी कैमरे भी खराब मिले है। जबकि सेंट्रल जेल परिसर में करीब डेढ़ करोड़ के बजट से सीसीटीवी कैमरों का पूर्व में टेंडर भी हो चुका है। लेकिन जेल को सीसीटीवी से लैस करने की योजना अभी धरातल पर नहीं उतर सकी है। जो कि जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़े कर रहे है।यह भी पढ़ें : एम्स ऋषिकेश में चमोली के दंपति ने नौ दिन के मृत नवजात का देहदान किया, चिकित्सा शोध को मिला मानवता का बड़ा योगदानजेल अधीक्षक ने बताया कि सुखदेव सिंह सुक्खा को पिछले साल 21 मार्च को हल्द्वानी से शिफ्ट किया गया है। सितारगंज निवासी हरजीत सिंह काला को नौ फरवरी वर्ष 2020 को देहरादून व तरसेम सिंह को 26 जनवरी वर्ष 2020 को सेंट्रल जेल लाया गया था। डीआइजी कारागार दधिराम मौर्य ने बताया कि सेंट्रल जेल में बंद कैदी ने मोबाइल पर धमकी दी थी। जिसकी शिकायत मिली थी। जांच में तीन मोबाइल फोन कुछ सामान मिला है। प्रकरण की जांच की जा रही है। जेल में अंडरवर्ल्ड डॉन प्रकाश पांडे उर्फ पीपी ठाटबाट में पूरे ऐशो-आराम में रहता हुआ भी मिला है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : हल्द्वानी जेल के जेल प्रभारी को जान से मारने की धमकी…नवीन समाचार, हल्द्वानी, 28 जून 2022। हल्द्वानी जेल के प्रभारी को जान से मारने की धमकी मिली है। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार हल्द्वानी जेल के प्रभारी जय शंकर गिरी को जेल से घर लौटते समय दो अज्ञात नंबरों से कॉल आयी और जेल में बंद कैदी से मुलाकात कराने की बात करने लग गए। उन्होंने समय के अनुसार मुलाकात के समय आने को कहा। इसी बीच उन्हें दो लड़कों ने रास्ते में घेर लिया और गाली-गलौच करने लगे और उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।बताया कि उनमें से एक गौरव नेगी उर्फ अक्कू था, जो हल्द्वानी जेल में कई बार निरुद्ध रहा है। कोतवाल हरेंद्र चौधरी ने बताया मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : नैनीताल जेल में 4 दिन पूर्व जमानत तुड़वाकर आए बंदी की अस्पताल में 4 दिन उपचार के बाद मौत….नवीन समाचार, हल्द्वानी, 3 जून 2022। नैनीताल जेल में बंद हल्द्वानी निवासी एक युवक की एसटीएच हल्द्वानी में उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने उसके शरीर पर चोट के निशान होने का दावा करते हुए जेल कर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाया है। मृतक स्मैक के नशे का आदी भी था।बताया गया है कि किदवईनगर बनभूलपुरा निवासी 32 वर्षीय फैसल पुत्र मस्तान एक साल पहले स्मैक तस्करी के मामले में नैनीताल जेल भेजा गया था। सात माह पहले परिजन जमानत कराकर उसे बाहर ले आए थे। मृतक के ससुर नफीस अहमद ने बताया कि जेल से बाहर आने के बाद फैसल ने स्मैक का नशा करना शुरू कर दिया था, इस कारण 27 मई को फैसल के कहने पर वह उसे जमानत तुड़वाकर दोबारा जेल में छोड़ आए।इधर मंगलवार यानी 31 मई यानी जेल छोड़ने के चौथे दिन ही जेल प्रशासन ने उन्हें फैसल की तबीयत खराब होने और उसे हल्द्वानी के सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराने की सूचना दी। जबकि आज शुक्रवार की सुबह 10 बजे फैसल की मौत हो गई। ससुर नफीस ने आरोप लगाया कि जेल में उनके दामाद को बेरहमी से पीटा गया।उसके शरीर में चोट के निशान थे और उसके कपड़े भी खून से सने हुए थे। उन्होंने कहा कि इस मामले में एसएसपी पंकज भट्ट से मुलाकात की जाएगी और जेल प्रशासन के खिलाफ नैनीताल थाने में तहरीर दी जाएगी। इस बारे में जेल प्रशासन से संपर्क नहीं हो पाया। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : उम्रकैद सजा काट रहे हत्यारोपित की जेल में मौत से सनसनी…नवीन समाचार, हल्द्वानी, 3 जनवरी 2022। हत्या के मामले में सितारगंज जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे घोड़ाखाल निवासी एक कैदी की मौत हो गई है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है।पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मेहरागांव घोड़ाखाल भीमताल निवासी 60 वर्षीय पूरन लाल पुत्र सोहन लाल बीते 23 साल से जेल में सजा काट रहा था। 22 साल वह बरेली उत्तर प्रदेश की जेल में रहा। एक साल पहले उसे सितारगंज जेल शिफ्ट किया गया था।पुलिस के अनुसार बीते रविवार की रात पूरन लाल का स्वास्थ्य अचानक खराब हो गया। इस पर उसे उपचार के लिए सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय हल्द्वानी लाया गया। यहां पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मेडिकल चौकी प्रभारी अनिल आर्य ने बताया कि पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : बड़ा समाचार-बड़ी कार्रवाई: जेल अधीक्षक सहित चार जेल कर्मी सस्पेंडनवीन समाचार, देहरादून, 5 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड पुलिस की एसओजी व एसटीएफ ने सोमवार को अल्मोड़ा जिला जेल में चल रहे ही बड़े अपराधियों के गठजोड़ का भंडाफोड़ किया था। सर्च ऑपरेशन के दौरान यहां 1.30 लाख रुपये की नगदी, तीन मोबाइल सेट व 60 ग्राम चरस बरामद की गई थी। इस मामले की गाज जेल अधीक्षक सहित चार जेल कर्मियों पर गिर गई है। जेल विभाग ने चारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आगे इस प्रकरण में कुछ और पुलिस कर्मियों पर गाज की संभावना जताई जा रही है।आईजी-जेल पुष्पक ज्योति ने बताया कि प्रभारी अधीक्षक संजीव कुमार ह्यांकी, प्रधान बंदीरक्षक शंकर राम आर्य के साथ ही बंदीरक्षक प्रदीप माजिला और राहुल राय को निलंबित किया गया है। पुलिस इस प्रकरण की आगे भी जांच कर रही है, जिसमें कुछ और पर गाज गिरने की संभावना जताई जा रही है।उल्लेखनीय है कि इस मामले जेल से हरिद्वार के एक व्यवसायी की हत्या या रंगदारी वसूले जाने की साजिश रची जा रही थी। जांच में पता चला था कि अल्मोड़ा जेल में बंद हरिद्वार निवासी अब्दुल कलीम इसका मास्टर माइंड था। पुलिस ने इस मामले में दो शार्प शूटर सहित हरिद्वार से चार लोगों को गिरफ्तार भी किया था। इस प्रकरण में जेल कर्मियों की भूमिका पहले दिन से ही संदिग्ध मानी जा रही थी। अब शासन से हरी झंडी मिलने के बाद आईजी जेल ने इस प्रकरण में जेल अधीक्षक सहित चार को निलंबित कर दिया गया है। (डॉ.नवीन जोशी) अन्य ताज़ा नवीन समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : जेेल में पुलिस, एसओजी व एसटीएफ की संयुक्त छापेमारी में बड़ी मात्रा में नगदी, चरस व मोबाइल बरामदनवीन समाचार, अल्मोड़ा, 4 अक्टूबर 2021। अल्मोड़ा पुलिस ने उत्तराखंड एसटीएफ यानी स्पेशल टास्क फोर्स व एसओजी यानी विशेष कार्य समूह के साथ मिलकर अल्मोड़ा जिला जेल में चल रहे ही बड़े अपराधियों के गठजोड़ का भंडाफोड़ किया है। कभी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू तथा अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जिस जेल में रहे थे, वहां से पुलिस व एसटीएफ को सर्च ऑपरेशन के दौरान 1.30 लाख रुपये की नगदी, तीन मोबाइल सेट व 60 ग्राम चरस बरामद की है।यह भी खुलासा हुआ है कि कोरोना काल में हरिद्वार जेल से अल्मोड़ा जेल में रखे गए फिरौती आदि के लिए कुख्यात गैंगस्टर कलीम एक अन्य कैदी महिपाल की मदद से जेल से अपना गिरोह संचालित कर रहा था। यह भी पता लगा है कि जेल में बंद एक कैदी के परिजनों को ह्वाट्सएप कॉल व वीडियो भेज कर रंगदारी का दबाव बना रहा था। इस मामले में पुलिस जेल में तैनात एक कर्मचारी को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया है।यह भी पढ़ें : नैनीताल में फर्जी गाइड ने पर्यटक की कार लेकर की क्षतिग्रस्त, मालरोड पर पेड़ और डस्टबिन से टकराकर हुआ फरार, पुलिस तलाश में जुटीबताया गया है कि उत्तराखंड एसटीएफ ने कलीम गैंग का साथ देने के लिए बिहार से पहुंचे दो शूटरों को हथियारों के साथ हरिद्वार में और एक अन्य शूटर को बहादराबाद के पास से गिरफ्तार किया है। इसके अलावा रेेकी कर सूचना उपलध कराने व बदमाशों को शरण देने के मामले में मंगलौर से भी एक गैंगस्टर को हिरासत में लिया गया है।बताया जा रहा है कि छापेमारी हरिद्वार, बहादराबाद व मंगलौर में पकड़े गए बदमाशों से हुए खुलासों के बाद पुख्ता जानकारियों के आधार पर की गई। पुलिस सूत्र बता रहे हैं कि यह लोग संगठित तरीके से किसी बड़े हमले की तैयारी में थे। (डॉ.नवीन जोशी) अन्य ताज़ा नवीन समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : न्यायिक अभिरक्षा में मौत के मामले में खुलासा, चौकी प्रभारी कार व रुपए मांग रहा थानवीन समाचार, काशीपुर, 11 अगस्त 2021। वर्ष 2019 में यानी करीब डेढ़ वर्ष पहले एनडीपीएस एक्ट के एक आरोपित अब्दुल करीम की न्यायिक अभिरक्षा में हुई मौत के मामले में जांच रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आरटीआइ के जरिये सामने आई काशीपुर के तत्कालीन सिविल जज सीनियर डिवीजन विनोद कुमार बर्मन की 45 पन्नों की जांच रिपोर्ट में यह तथ्य प्रकाश में आए हैं कि कुंडा थाने की मंडी चौकी के तत्कालीन प्रभारी जगत सिंह भंडारी ने मृतक करीम से स्विफ्ट कार और रुपये मांगे थे। कई गवाहों ने न केवल यह आरोप लगाया है, बल्कि चौकी इंचार्ज द्वारा रुपये और कार मांगने से संबंधितएक वीडियो क्लिप मिलने का भीउल्लेखनीय है कि 2019 में मंडी चौकी पुलिस ने सरवरखेड़ा निवासी अब्दुल करीम उर्फ कल्लन को 9.93 ग्राम स्मैक के साथ पकड़ने का दावा कर एनडीपीएस एक्ट में जेल भेजा था। जेल जाने के बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। उसे इलाज के लिए हल्द्वानी के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, लेकिन उसने 28 सितंबर 2019 को हल्द्वानी से ऋषिकेश ले जाते समय कुंडा थाना क्षेत्र में दम तोड़ दिया। मामले की न्यायिक जांच काशीपुर के तत्कलाीन सिविल जज सीनियर डिवीजन विनोद कुमार बर्मन ने की।सिविल जज की ओर से की गई जांच रिपोर्ट एक कापी अधिवक्ता संजीव आकाश ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत हासिल की है। जांच अधिकारी ने मृतक के भाई आरिन अली और मां खैरुलनिशा से पूछताछ की। इस दौरान उन्होंने बताया कि कुंडा थाने की मंडी चौकी के तत्कालीन प्रभारी जगत सिंह भंडारी ने गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले एक व्यक्ति को भेजकर एक स्विफ्ट कार और रुपये की मांग मृतक अब्दुल करीम से की थी।मांग पूरी ना होने पर आठ अगस्त 2019 को चौकी इंचार्ज ने ग्राम सरवरखेड़ा में उनके निर्माणाधीन मकान के सामने खड़ी स्विफ्ट कार उठा ली और उसे लावारिस में दर्शा कर थाना कुंडा में खड़ा कर दिया। यह कार रामनगर के पीरुमदारा निवासी संदीप बिष्ट की थी। मृतक के परिजनों ने जांच अधिकारी को गाड़ी की आरसी भी दिखाई। आरोप लगाया कि कार और पैसा न देने की रंजिश में बाद में मृतक करीम को एनडीपीएस के फर्जी केस में जेल भेज दिया गया।जांच में यह बात भी प्रकाश में आई है कि कार का केवल आठ अगस्त 2019 की जनरल डायरी में उल्लेख किया गया जबकि मालखाना रजिस्टर में उस गाड़ी को दर्ज नहीं किया गया। उत्तराखंड पुलिस अधिनियम 2007 की धारा 46 के प्रावधानों का भी इस मामले में उल्लंघन हुआ क्योंकि एसएसपी और न्यायिक मजिस्ट्रेट को इस वाहन के संबंध में कोई सूचना नहीं भिजवाई गई। गाड़ी का मोटर अधिनियम 207 के तहत कागजात ना होने के बावत कोई चलान भी नहीं किया गया। (डॉ.नवीन जोशी) अन्य ताज़ा नवीन समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : हल्द्वानी जेल में हुई बंदी की मौत की मजिस्ट्रीयल जांच के आदेशडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 31 जुलाई 2021। नैनीताल के डीएम धीराज गर्ब्याल ने हल्द्वानी उपकारागार में निरूद्ध विचाराधीन बंदी इरशाद पुत्र इश्क बली निवासी अहमदाबाद बिलासपुर जिला रामपुर की 11 जुलाई 2021 को डॉ. सुशीला तिवारी चिकित्सालय हल्द्वानी में मृत्यु की मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश दिए हैं। जांच के लिए सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी को जांच अधिकारी नामित किया गया है।जानकारी देते हुए सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि इस घटना के संबंध में कोई भी प्रमाण या साक्ष्य किसी भी कार्य दिवस में उसी कार्यालय सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में उपस्थित होकर साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं। अन्य ताज़ा नवीन समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : हल्द्वानी जेल में एक और कैदी की मौत के मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज-इससे पहले एक मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय दे चुका है कड़े आदेश नवीन समाचार, हल्द्वानी, 26 जुलाई 2021। हल्द्वानी जेल में एक बंदी प्रवेश कुमार की मौत के मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय से सीबीआई जांच एवं नैनीताल की एसएसपी, हल्द्वानी के सीओ व आरोपित बंदी रक्षकों के स्थानांतरण के आदेशों के बीच यहां के एक और बंदी की मौत हो गई। अब इस मामले में पुलिस ने मृतक के परिजनों की शिकायत पर कोई देरी नहीं लगाई है। गत 11 जुलाई को एसटीएच में इलाज के दौरान हुई बंदी इरशाद की मौत के मामले में पुलिस ने उसके पिता की तहरीर पर अज्ञात बंदियों और बंदीरक्षकों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले में मृतक के पिता का आरोप है कि उसके बेटे को बंदियों और बंदीरक्षकों ने मिलकर मार डाला है। बीमारी की कहानी गढ़ी गई है।प्राप्त जानकारी के अनुसार यूपी के रामपुर जिले के अहमदाबाद बिलासपुर निवासी इरशाद (55) को रुद्रपुर पुलिस ने धारा 307, 504, 506 के तहत गत 25 मई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 11 जुलाई को उसकी एसटीएच में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इरशाद के पिता इशाक बली ने एसएसपी को पत्र भेजकर आरोप लगाया कि वह नौ जुलाई को बेटे से मिलने के लिए जेल गए थे। उस समय ड्यूटी पर तैनात सिपाही ने उसे मिलने नहीं दिया और डांटकर भगा दिया। 12 जुलाई को फोन कर सूचना मिली कि 11 जुलाई को एसटीएच में उनके बेटे की मौत हो गई है। लिहाजा उसका आरोप है कि इससे पहले उसके बेटे की बीमारी की जानकारी जेल प्रशासन ने नहीं दी थी। बेटे की हत्या जेल में करने के बाद बीमारी की झूठी कहानी गढ़ी गई है। मौत के मामले में कोई कागज नहीं मिला है। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने धारा 302 के तहत अज्ञात बंदीरक्षकों और बंदियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।उधर, जेल अधीक्षक सतीश सुखीजा ने बताया कि बंदी इरशाद टीबी रोग से ग्रसित था। बंदीरक्षकों ने तबियत खराब होने पर उसे 10 जुलाई को एसटीएच में भर्ती कराया गया। अगले दिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मेडिकल चौकी पुलिस ने दो डॉक्टरों के पैनल से वीडियोग्राफी के बीच उसका पोस्टमार्टम कराया था। मारपीट करने का सवाल ही नहीं उठता है। (डॉ.नवीन जोशी) अन्य ताज़ा नवीन समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : हल्द्वानी जेल में महिला सहित 14 एचआईवी पॉजिटिवनवीन समाचार, हल्द्वानी, 21 जुलाई 2021। हल्द्वानी उप कारागार में 14 कैदियों के एचआईवी संक्रमित पाए जाने से हड़कंप मच गया है। इन एचआईवी संक्रमित कैदियों में एक महिला कैदी भी शामिल है। कैदियों की स्वास्थ्य जांच में यह खुलासा होने के बाद एचआइवी संक्रमित पाये गए कैदियों को एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी से एचआईवी का उपचार करने के साथ उन्हें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए दूध व अंडा आदि पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है, तथा उन्हें सावधानी के साथ इलाज करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।उप कारागार हल्द्वानी के अधीक्षक सतीश कुमार सुखीजा ने बताया कि कैदियों के एचआइवी संक्रमित पाये जाने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया जेल आठ लोग पूर्व से एचआईवी पॉजिटिव हैं, जबकि इस वर्ष 20 मई को कराई गई जांच में 5 कैदी पॉजिटिव मिले थे। इधर इस माह गत 6 जुलाई को कराई गई जांच में एक महिला एचआईवी पॉजिटिव पाई गई है। उन्होंने बताया कि जेल में आने पर खासकर टीबी के मरीजों की नियमतः एचआईवी जांच कराई जाती है। और उन्हें अच्छा भोजन दिया जाता है।बताया गया है कि एचआईवी संक्रमित पाई गई महिला मूलतः पश्चिम बंगाल की है, और सैक्स वर्कर के तौर पर पकड़े जाने के बाद जेल में आई है। वह पहले से एचआईवी संक्रमित बताई जा रही है, लेकिन उसने इसकी जानकारी नियमतः जेल प्रशासन को नहीं दी। सैक्स वर्कर के रूप में कितने अन्य लोगों को वह संक्रमित कर चुकी होगी, यह एक अलग सवाल है। (डॉ.नवीन जोशी) अन्य ताज़ा नवीन समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : बेहद खतरनाक हो सकता है किसी भी और का रक्त चढ़ाना-रक्त मे 90 दिन पूर्व से हो रही केवल पांच बीमारियों की जांच ही है संभव -स्वयं का अथवा नियमित स्वैच्छिक रक्तदाताओं से रक्त लेना ही सर्वाधिक सुरक्षित -स्वैच्छिक रक्तदान ही नहीं हर 90 दिन में नियमित स्वैच्छिक रक्तदान है जरूरी नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, मनुष्य को बेहद जरूरी होने पर ही किसी दूसरे का रक्त चढ़ाना चाहिए। देश-प्रदेश में अभी तक चढ़ाए जाने वाले रक्त में 90 दिन से पुरानी और केवल पांच बीमारियों की ही जांच की व्यवस्था उपलब्ध है। यानी यदि रक्तदान करने वाले व्यक्ति को यदि 90 दिन से कम अवधि में किसी बीमारी का संक्रमण हुआ है तो रोगी को चढ़ाए जाने वाला रक्त भी उस बीमारी से संक्रमित हो सकता है। इस समस्या से बचाव के दो तरीके हैं। यदि संभव हो तो रक्त चढ़ाने की किसी संभावित स्थिति का पहले से पता हो तो स्वयं का रक्त भी 15 दिन पूर्व रक्त बैंक में जमा कराया जा सकता है। दूसरा तरीका नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदाताओं के रक्त को लेना है। इसके लिए लोगों को नियमित रूप से रक्तदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है। राज्य में कहीं-कहीं अब 15 दिन पुरानी बीमारियों का भी पता लगाने की व्यवस्था भी की जा रही है। लेकिन यह व्यवस्था भी केवल पांच बीमारियों-एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया तथा यौन गुप्त रोग संबंधी सिपलिस बीमारियों के लिए ही है।सुरक्षित एवं असुरक्षित रक्त की इस पहेली को समझने से पहले जान लें कि रक्तदाता पांच तरह के होते हैं। पहला, व्यवसायिक तौर पर रक्तदान जो कि 1999 से प्रतिबंधित है। दूसरा, रोगी के परिजनों के द्वारा। इसे सुरक्षित नहीं माना जाता। क्योंकि अधिकांशतया अपने परिजनों को बचाने के लिए लोग अपनी बीमारियों व अन्य समस्याओं को छुपाकर रक्तदान कर देते हैं। तीसरे, स्वयं रक्तदाता। ऐसे सीमित रक्तदाता कई बार अपने एक माह बाद होने वाली किसी ऑपरेशन जैसी स्थितियों के लिए 15 दिन पहले ही स्वयं का रक्त, रक्तबैंक में सुरक्षित रखवा सकते हैं। यह तरीका रक्त लेने का सबसे सुरक्षित तरीका बताया जाता है। इसके अलावा जो स्वैच्छिक रक्तदाताओं वाले पांचवे तरीके का सर्वाधिक प्रचार-प्रसार किया जाता है, इस वर्ग के रक्तदाताओं के भी पहले रक्तदान से मिले रक्त को चढ़ाने में भी कभी बड़ी समस्या आ सकती है।उत्तराखंड रक्त संचरण परिषद के राज्य नोडल प्रभारी एवं एनएसएस के पूर्व राज्य संपर्क अधिकारी डा. आनंद सिंह उनियाल ने बताया कि देश-प्रदेश में अब तक 90 दिन से (कुछ गिने-चुने केंद्रों में 15 दिन) पुरानी पांच बीमारियों- एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया तथा यौन गुप्त रोग संबंधी सिपलिस के टेस्ट ही उपलब्ध हैं। हमारे रक्त में मौजूद लाल रक्त कणिकाओं (आरबीसी) की उम्र 120 दिन की ही होती है। यानी हर 120 दिन में हमारे शरीर की आरबीसी मरती जाती हैं, और नया खून भी साथ-साथ बनता चला जाता है। इसीलिए हर व्यक्ति को 90 दिन में रक्तदान की सलाह दी जाती है। हर रक्तदान के दौरान रक्त की उपरोक्त पांच बीमारियों के लिए आवश्यक रूप से जांच होती है, लिहाजा पहली बार किसी व्यक्ति द्वारा दिए जाने वाले रक्त से बेशक उसकी नई बीमारियों का पता न चल पाए, लेकिन नियमित रूप से हर 90 दिन में रक्तदान करते जाने से उस व्यक्ति के इन बीमारियों से रहित होने की संभावना बढ़ जाती है। डा. उनियाल ने कहा कि इसीलिए अब स्वैच्छिक रक्तदान की जगह नियमित स्वैच्छिक रक्तदान करने का आह्वान किया जा रहा है। लिए लोगों को रक्तदान के प्रति ज्ञान देकर इस स्लोगन के साथ जागरूक किया जा रहा है कि रक्तदान से पहले रक्त का ज्ञान जरूरी है। यदि लोग रक्त व रक्तदान के प्रति ज्ञान रखने लगें तो इस समस्या का समाधान हो सकता है। अन्य ताज़ा नवीन समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।Share this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading...Related Post navigationमहिला द्वारा किए जा रहे देह व्यापार व नशे के कारोबार की शिकायत पर पहुंचे चौकी प्रभारी पर धारदार हथियार से हमला कोरोना के मोर्चे पर तीन वर्ष बाद सबसे बड़ा समाचार: कोरोना मुक्त हुआ उत्तराखंड, एक सप्ताह से नहीं आया कोई मामला
-रक्त मे 90 दिन पूर्व से हो रही केवल पांच बीमारियों की जांच ही है संभव -स्वयं का अथवा नियमित स्वैच्छिक रक्तदाताओं से रक्त लेना ही सर्वाधिक सुरक्षित -स्वैच्छिक रक्तदान ही नहीं हर 90 दिन में नियमित स्वैच्छिक रक्तदान है जरूरी नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, मनुष्य को बेहद जरूरी होने पर ही किसी दूसरे का रक्त चढ़ाना चाहिए। देश-प्रदेश में अभी तक चढ़ाए जाने वाले रक्त में 90 दिन से पुरानी और केवल पांच बीमारियों की ही जांच की व्यवस्था उपलब्ध है। यानी यदि रक्तदान करने वाले व्यक्ति को यदि 90 दिन से कम अवधि में किसी बीमारी का संक्रमण हुआ है तो रोगी को चढ़ाए जाने वाला रक्त भी उस बीमारी से संक्रमित हो सकता है। इस समस्या से बचाव के दो तरीके हैं। यदि संभव हो तो रक्त चढ़ाने की किसी संभावित स्थिति का पहले से पता हो तो स्वयं का रक्त भी 15 दिन पूर्व रक्त बैंक में जमा कराया जा सकता है। दूसरा तरीका नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदाताओं के रक्त को लेना है। इसके लिए लोगों को नियमित रूप से रक्तदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है। राज्य में कहीं-कहीं अब 15 दिन पुरानी बीमारियों का भी पता लगाने की व्यवस्था भी की जा रही है। लेकिन यह व्यवस्था भी केवल पांच बीमारियों-एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया तथा यौन गुप्त रोग संबंधी सिपलिस बीमारियों के लिए ही है।सुरक्षित एवं असुरक्षित रक्त की इस पहेली को समझने से पहले जान लें कि रक्तदाता पांच तरह के होते हैं। पहला, व्यवसायिक तौर पर रक्तदान जो कि 1999 से प्रतिबंधित है। दूसरा, रोगी के परिजनों के द्वारा। इसे सुरक्षित नहीं माना जाता। क्योंकि अधिकांशतया अपने परिजनों को बचाने के लिए लोग अपनी बीमारियों व अन्य समस्याओं को छुपाकर रक्तदान कर देते हैं। तीसरे, स्वयं रक्तदाता। ऐसे सीमित रक्तदाता कई बार अपने एक माह बाद होने वाली किसी ऑपरेशन जैसी स्थितियों के लिए 15 दिन पहले ही स्वयं का रक्त, रक्तबैंक में सुरक्षित रखवा सकते हैं। यह तरीका रक्त लेने का सबसे सुरक्षित तरीका बताया जाता है। इसके अलावा जो स्वैच्छिक रक्तदाताओं वाले पांचवे तरीके का सर्वाधिक प्रचार-प्रसार किया जाता है, इस वर्ग के रक्तदाताओं के भी पहले रक्तदान से मिले रक्त को चढ़ाने में भी कभी बड़ी समस्या आ सकती है।उत्तराखंड रक्त संचरण परिषद के राज्य नोडल प्रभारी एवं एनएसएस के पूर्व राज्य संपर्क अधिकारी डा. आनंद सिंह उनियाल ने बताया कि देश-प्रदेश में अब तक 90 दिन से (कुछ गिने-चुने केंद्रों में 15 दिन) पुरानी पांच बीमारियों- एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया तथा यौन गुप्त रोग संबंधी सिपलिस के टेस्ट ही उपलब्ध हैं। हमारे रक्त में मौजूद लाल रक्त कणिकाओं (आरबीसी) की उम्र 120 दिन की ही होती है। यानी हर 120 दिन में हमारे शरीर की आरबीसी मरती जाती हैं, और नया खून भी साथ-साथ बनता चला जाता है। इसीलिए हर व्यक्ति को 90 दिन में रक्तदान की सलाह दी जाती है। हर रक्तदान के दौरान रक्त की उपरोक्त पांच बीमारियों के लिए आवश्यक रूप से जांच होती है, लिहाजा पहली बार किसी व्यक्ति द्वारा दिए जाने वाले रक्त से बेशक उसकी नई बीमारियों का पता न चल पाए, लेकिन नियमित रूप से हर 90 दिन में रक्तदान करते जाने से उस व्यक्ति के इन बीमारियों से रहित होने की संभावना बढ़ जाती है। डा. उनियाल ने कहा कि इसीलिए अब स्वैच्छिक रक्तदान की जगह नियमित स्वैच्छिक रक्तदान करने का आह्वान किया जा रहा है। लिए लोगों को रक्तदान के प्रति ज्ञान देकर इस स्लोगन के साथ जागरूक किया जा रहा है कि रक्तदान से पहले रक्त का ज्ञान जरूरी है। यदि लोग रक्त व रक्तदान के प्रति ज्ञान रखने लगें तो इस समस्या का समाधान हो सकता है। अन्य ताज़ा नवीन समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
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