EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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पाठकों में संशयपूर्ण स्थिति बनी है। ऐसे में अनेक समाचार पत्रों ने पहले स्वयं ही अपने ह्वाट्सएप वर्जन-पीडीएफ फॉर्मेट में जारी किये और अपने संवाददाताओं एवं कार्मिकों से इन्हें ह्वाट्सएप एवं दूसरे सोशल मीडिया के ग्रुपों में डालने की जिम्मेदारी भी दी, ताकि उनके समाचार पत्र पाठकों तक डिजिटल फॉर्मेट में पहुंच सकें। किंतु अपना बनाया यह स्वयं का बना तरीका भी अब समाचार पत्रों को भारी पड़ने लगा है। इससे समाचार पत्र समूहों को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। संभवतया इसी कारण अब पीडीएफ फॉर्मेट को समाचार पत्रों के ई-पेपर की कॉपी और डिजिटल पाइरेसी बताकर इसे अवैध ठहराया जा रहा है। आईएनएस यानी इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी ने अखबारों के ई-पेपर से पेज डाउनलोड कर उनकी पीडीएफ फाइल वॉट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप में प्रसारित करने को गैर-कानूनी बताया है। प्रतिष्ठित समाचार पत्र दैनिक भास्कर के दिल्ली ब्यूरो से प्रकाशित समाचार के अनुसार ई-पेपर या उसके अंश कॉपी करके सोशल मीडिया पर अवैध रूप से प्रसारित करने वाले व्यक्ति के खिलाफ अखबार कड़ी कानूनी और भारी जुर्माने की कार्रवाई कर सकते हैं। किसी ग्रुप में इस तरह से अखबार की ई-कॉपी अवैध रूप से फैलाने के लिए उस ह्वॉट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप के एडमिन जिम्मेदार माने जाएंगे। साथ ही आईएनएस की सलाह पर समाचार पत्र समूह ऐसी तकनीक का भी प्रयोग करने जा रहे हैं, जिससे अखबार की पीडीएफ फाइल डाउनलोड कर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वाले व्यक्ति का पता चल सकेगा। साथ ही हर सप्ताह एक निर्धारित संख्या से ज्यादा पीडीएफ डाउनलोड करने वाले प्रयोक्ताओं को ब्लॉक भी किया जा सकता है। यह भी पढ़ें : छुट्टी नहीं मिली तो कर्मचारियों ने यमकेश्वर के माला गांव में एआई से दिखा दिया बब्बर शेर, वन विभाग की जांच में खुली पोल.... लॉक डाउन से प्रिंट पत्रकारिता उद्योग को हुआ 4500 करोड़ का नुकसान, नुकसान के 15 हजार करोड़ तक पहुंचने का अनुमानआईएनएस यानी इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी ने कोरोना विषाणु कोविद-19 के कारण लॉक डाउन लागू होने की अवधि में विज्ञापन राजस्व में कमी की वजह से मार्च और अप्रैल में लगभग 4,500 करोड़ रुपए का नुकसान होने का दावा किया है। साथ ही आशंका जताई है कि अगले सात महीनों तक प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री को नुकसान जारी रह सकता है, और इस तरह यह नुकसान कुल मिलाकर करीब 15,000 करोड़ रुपए तक का हो सकता है।यदि सरकार अच्छा खासा प्रोत्साहन पैकेज देती है, तो इस नुकसान से निपटा जा सकता है। आईएनएस ने इसके लिए अखबारी कागज (न्यूज प्रिंट) पर आयात शुल्क हटाने और दो साल तक टैक्स न लिए जाने की अपनी बात फिर दोहराई है। साथ ही ब्यूरो ऑफ आउट रीच एंड कम्युनिकेशन की विज्ञापन दरों को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने और बजट खर्च में भी 200 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने की मांग की है।यह भी पढ़ें : महिलाओं के लिए उत्तराखंड पुलिस ने वॉट्सएप पर शुरू की एक नायाब पहल, तत्काल मिलेगी मदद..नवीन समाचार, देहरादून, 4 फरवरी 2020। उत्तराखंड पुलिस ने महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा को लेकर एक और पुख्ता कदम उठाते हुए उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय में स्थापित महिला सुरक्षा सेल में महिला वॉट्सऐप हेल्पलाइन सेवा शुरू की है। उत्तराखंड पुलिस के महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था अशोक कुमार के अनुसार, महिला वॉट्सऐप हेल्पलाइन सेवा में महिलाएं, युवतियां और छात्राएं मोबाइल नंबप 9411112780 पर वॉट्सऐप के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं।बताया गया कि इस नंबर पर कोई भी घटना और समस्या से संबंधित संदेश, फोटो या वीडियो वॉट्सऐप के जरिए पुलिस मुख्यालय में स्थापित महिला सुरक्षा सेल को भेजा जा सकता है। महिला सुरक्षा सेल में तैनात पुलिस अधिकारी वॉट्सऐप पर आए संदेश पर पीड़ित महिला से संबंधित जनपद में जानकारी देंगी, जिस पर जनपद के संबंधित थाने की ओर से जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी। अशोक कुमार के अनुसार, इससे लाभ यह होगा कि महिलाएं और छात्राएं अपने साथ होने वाली छेड़छाड़ और घटना का विडियो, फोटो और मेसेज पुलिस को भेज सकेंगी। विपरीत परिस्थिति में शिकायत नहीं देने पर सिर्फ मेसेज या विडियो से भी पुलिस पीड़िता तक पहुंच जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि लोकलाज के चलते थाने नहीं जाने वाली पीड़ित महिलाओं को भी शिकायत देने में आसानी होगी।यह भी पढ़ें : एम्स ऋषिकेश में चमोली के दंपति ने नौ दिन के मृत नवजात का देहदान किया, चिकित्सा शोध को मिला मानवता का बड़ा योगदानयह भी पढ़ें : कड़वी सच्चाई : अभी सिर्फ 20 फीसद ही ‘डिजिटल इंडिया’ और 35.6 फीसद ही ‘डिजिटल उत्तराखंड’:‘डिजिटल इंडिया’ के दौर में उत्तराखंड देश से बेहतर, फिर भी हालत बदतर -देश के 79.8 फीसद लोग कम्प्यूटर चलाना और 83.5 फीसद लोग इंटरनेट चलाना नहीं जानते-उत्तराखंड के 75 फीसद लोग कम्प्यूटर और 64 फीसद लोग इंटरनेट चलाना भी नहीं जानतेनवीन समाचार, देहरादून, 24 दिसंबर 2019। देश में प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर चल रही ‘डिजिटल इंडिया’ की मुहिम के बीच कम्प्यूटर चला सकने वाली आबादी के मामले में वैसे तो उत्तराखंड की स्थिति देश से बहुत बेहतर है, और देश के राज्यों में भी उत्तराखंड पांचवे स्थान पर है। लेकिन फिर भी कड़वी सच्चाई यह है कि देश हो या उत्तराखंड व देश के अन्य राज्य, हालत कहीं भी बदतर से अधिक नहीं है। केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के भारतीय प्रतिदर्श संगठन (नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन-एनएसएओ) के 75वें दौर की भारत में शिक्षा पर पारिवारिक सामाजिक उपभोग के मुख्य संकेतक की ताजा सर्वे रिपोर्ट के अनुसार देश में औसतन केवल 16.5 प्रतिशत लोग ही कम्प्यूटर चलाना जानते हैं। जबकि देश में सबसे बेहतर स्थिति केरल की, फिर दिल्ली, तमिलनाडु, पंजाब और फिर उत्तराखंड की है। इंटरनेट के मामले में भी उत्तराखंड की हालत देश से अच्छी है। उत्तराखंड में जहां 35.6 फीसद लोग इंटरनेट इस्तेमाल करने की क्षमता रखते हैं वहीं देश में केवल 20.1 फीसद लोग ही इंटरनेट चलाना जानते हैं। इसका अर्थ यह भी है कि उत्तराखंड के 75 फीसद लोग कम्प्यूटर और 64.4 फीसद लोग इंटरनेट चलाना भी नहीं जानते हैं। वहीं देश की बात करें तो 20.1 प्रतिशत लोग ही कम्प्यूटर चलाना और 16.5 प्रतिशत ही इंटरनेट चलाना जानते हैं। यानी 79.8 फीसद लोग कम्प्यूटर चलाना और 83.5 फीसद लोग इंटरनेट चलाना नहीं जानते हैं।सरकारें डिजिटल इंडिया के नारे के साथ, चाहे जितना दावा करें मगर देश और उत्तराखंड सहित कमोबेश सभी राज्यों की कड़वी हकीकत यह है कि यहां की पांच साल से ऊपर की तीन चौथाई आबादी कम्प्यूटर चलाना तक नहीं जानती। यह हालत तब है जब प्रदेश में 14.3 फीसद परिवारों में कम्प्यूटर तो 43.5 फीसद परिवारों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश की पांच साल से ऊपर के केवल 25.3 फीसद लोग ही कम्प्यूटर चलाना जानते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो कुल 19.1 फीसद लोग यानी 23.5 फीसद पुरुष व 14.6 फीसद स्त्रियां ही कम्प्यूटर ऑपरेट करने की क्षमता रखते हैं। शहरी क्षेत्रों में स्थिति फिर भी बेहतर है। कुल 42.7 फीसद लोग यानी 48.3 फीसद पुरुष व 37.1 फीसद महिलाएं कम्प्यूटर का उपयोग करना जानते हैं।यह भी पढ़ें : दो बच्चों की मां का भतीजे ने चुराया दिल, प्रेम विवाह कर दोनों घर चलाने बन गए 'बंटी-बबली' जैसे चोर और….कम्प्यूटर चलाने वाली आबादी (प्रतिशत में)केरल-43.9, दिल्ली- 50.5, तमिलनाडु-27.1, पंजाब-35.0, उत्तराखंड-35.6, हिमाचल-33.5, महाराष्ट्र- 28.8, हरियाणा- 30.9, गुजरात-25.1, तेलंगाना-25.0, कर्नाटक-21.4, आंध्र प्रदेश-17.1, राजस्थान-17.1, प. बंगाल-14.9, जम्मू कश्मीर-21.8, छत्तीसगढ़-12.9, असम-16.6, उत्तर प्रदेश-13.0, मध्य प्रदेश-13.5, उड़ीसा-10.9, झारखंड-12.4, बिहार-12.1, देशभर में औसत -20.1 प्रतिशत।इंटरनेट चलाने वाली आबादी (प्रतिशत में)केरल-41.5, दिल्ली- 40.8, तमिलनाडु- 27.4, पंजाब- 26.6, उत्तराखंड-25.3, हिमाचल-24.6, महाराष्ट्र-24.4, हरियाणा-24.3, गुजरात-22.2,तेलंगाना-19.8, कर्नाटक-19.3, आंध्र प्रदेश-14.4, राजस्थान-14.2, प. बंगाल-13.0, जम्मू कश्मीर-12.6, छत्तीसगढ़-10.8, असम-10.0, उत्तर प्रदेश-09.7, मध्य प्रदेश-09.6, उड़ीसा-08.5, झारखंड-08.2, बिहार-08.0 देशभर में औसत -16.5 प्रतिशत।यह भी पढ़ें : ‘टच’ फोन को भूल जाइए आ रहा है ‘नो टच’ फोननवीन समाचार, नई दिल्ली, 24 जनवरी 2019। दक्षिण कोरियाई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी LG ने ऐलान किया है कि वह फरवरी में होने वाले मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस (MWC) में अपने लेटेस्ट फ्लैगशिप स्मार्टफोन से पर्दा उठाएगी। कंपनी ने घोषणा की है कि वह 24 फरवरी को बार्सिलोना में आयोजित होने वाले एक इवेंट में अपने नए इंटरफेस वाले स्मार्टफोन को लॉन्च करेगी। हाल ही में इस फोन का एक टीजर भी सामने आया है। 13 सेकंड के इस विडियो की टैग लाइन है : ‘ गुड बाय टच’ टीजर को देखकर साफ पता चलता है कि यह एक ऐसा फोन होगा जिसे हम बिना टच किए ऑपरेट कर सकेंगे, यानी इस फोन को बिना छुए भी चलाया जा सकेगा। इस फोन का नाम क्या होगा फिलहाल इस बारे में कोई जानकारी नहीं है और ना विडियो में इसका खुलासा किया गया है। लेकिन रिपोर्ट्स की मानें तो इस इवेंट में G7 thinQ के अपग्रेडेड वेरियंट G8 ThinQ को लॉन्च किया जा सकता है।Share this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading...Related Post navigationकब खत्म होगा कोरोना, ‘लाइफ साइकिल कर्व्स’ से किया जा रहा 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