लिव-इन संबंध में रह रही देहरादून की छात्रा की प्रसव के बाद मृत्यु, यूसीसी पंजीकरण न होने से उठा कानूनी और सामाजिक प्रश्न

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नवीन समाचार, देहरादून, 8 फरवरी 2026 (Death in Live in)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) से एक गंभीर और मानवीय प्रभाव वाला समाचार सामने आया है। लिव-इन संबंध (Live in Relationship) में रह रही बीसीए (Bachelor of Computer Applications) की एक छात्रा की समय पूर्व यानी प्री-मेच्योर सिजेरियन डिलीवरी (Premature Cesarean Delivery) के कुछ दिन बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई।

(Death In Live In) Know better with our experts . #waterbirth #waterbirthdelivery  #safalhospital #safalhospitalnagpयह छात्रा उधम सिंह नगर (Udham Singh Nagar) जनपद के खटीमा (Khatima) क्षेत्र की निवासी थी और देहरादून में अपने क्षेत्र के ही एक युवक के साथ रह रही थी। प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि दोनों ने समान नागरिक संहिता के पोर्टल (Uniform Civil Code–UCC Portal) पर अपना पंजीकरण भी नहीं कराया था और न ही परिजनों को साथ रहने की जानकारी दी थी।

प्रकरण की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, खटीमा की रहने वाली यह युवती देहरादून के सुभाष नगर (Subhash Nagar) क्षेत्र स्थित एक विश्वविद्यालय (University) से बीसीए तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रही थी। वह खटीमा निवासी युवक मनीष (Manish) के साथ लिव-इन संबंध में रह रही थी। मनीष भी इसी विश्वविद्यालय से बीएससी न्यूट्रीशन साइंस (BSc Nutrition Science) की पढ़ाई कर चुका है।

युवती गर्भवती थी और कुछ दिन पूर्व आठ माह के गर्भकाल में उसकी सिजेरियन प्री-मेच्योर डिलीवरी कराई गई थी। डिलीवरी के बाद नवजात शिशु को एनआईसीयू (NICU) में रखा गया है। डिलीवरी के उपरांत युवती अपने साथी के साथ ही रह रही थी।

तबीयत बिगड़ने के बाद मृत्यु

बीते रविवार को युवती की तबीयत अचानक अधिक बिगड़ गई। इसके बाद उसका साथी उसे चिकित्सालय (Hospital) लेकर पहुंचा, जहां चिकित्सकों ने जांच के उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर सोमवार को पुलिस ने न्यायाधीश (Magistrate) की उपस्थिति में शव का पंचनामा किया और पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

जैसे ही युवती की मृत्यु की सूचना मिली, उसके परिजन खटीमा से देहरादून पहुंचे। परिजनों का कहना है कि उन्हें युवती के लिव-इन संबंध और गर्भावस्था की जानकारी डिलीवरी के समय ही मिली थी।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका

पटेलनगर (Patel Nagar) थाना क्षेत्र के पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में किसी भी प्रकार की आपराधिक घटना के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि, मृत्यु के कारणों को पूरी तरह स्पष्ट करने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि डिलीवरी के बाद चिकित्सकीय देखभाल में किसी स्तर पर कोई चूक तो नहीं हुई।

यूसीसी पंजीकरण और कानूनी संदर्भ

इस प्रकरण में एक महत्वपूर्ण पहलू समान नागरिक संहिता से जुड़ा सामने आया है। लिव-इन संबंध में रह रहे युवक और युवती ने यूसीसी पोर्टल पर अपना पंजीकरण नहीं कराया था। उत्तराखंड में यूसीसी के तहत लिव-इन संबंधों के पंजीकरण का प्रावधान सामाजिक और कानूनी सुरक्षा के उद्देश्य से किया गया है, ताकि ऐसे संबंधों में रह रहे व्यक्तियों और संभावित संतानों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।

इस घटना ने यह प्रश्न खड़ा किया है कि यदि पंजीकरण कराया गया होता, तो क्या परिजनों को समय रहते जानकारी मिल सकती थी और चिकित्सकीय व प्रशासनिक सहायता की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सकती थी।

सामाजिक और मानवीय प्रभाव

यह मामला केवल एक छात्रा की असमय मृत्यु का नहीं है, बल्कि बदलते सामाजिक संबंधों, युवाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और कानूनी जागरूकता से भी जुड़ा है। शिक्षा ग्रहण कर रही एक युवती की मृत्यु और नवजात शिशु का एनआईसीयू में होना समाज को सोचने पर मजबूर करता है कि लिव-इन जैसे संबंधों में स्वास्थ्य, परिजनों से संवाद और कानून के प्रावधानों की जानकारी कितनी आवश्यक है।

आगे क्या हो सकता है

पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मृत्यु के वास्तविक कारण स्पष्ट होंगे और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। साथ ही, यह प्रकरण यूसीसी पंजीकरण को लेकर जागरूकता बढ़ाने और लिव-इन संबंधों में रह रहे युवाओं के लिए स्वास्थ्य व कानूनी परामर्श की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

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