EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्यों पर रोक लगा दी है। साथ ही सूखाताल झील के पास चिन्हित अतिक्रमणों को पुलिस की सुरक्षा में हटाने के आदेश दिए हैं। इसे नैनी झील के संरक्षण के लिए उच्च न्यायालय का बड़ा कदम बताया जा रहा है। यह भी पढ़ें : डॉ. साह के असामयिक निधन से चिकित्साजगत में शोक की लहर….सूखाताल प्रोजेक्ट का शुभारम्भ करते मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत।उल्लेखनीय है कि 27 फरवरी 2021 को 27 करोड़ की लागत के इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास करने के बाद तत्कालीन सीएम रावत कैंची धाम में दर्शन करने के बाद गैरसेंण में आयोजित विधानसभा के सत्र में भाग लेने गए थे। वहां उन्होंने गैरसेंण को राज्य की तीसरी कमिश्नरी बनाने की घोषणा की थी और उनकी इस घोषणा के बाद पूरे प्रदेश में हुई आलोचना व विरोध के बाद उनकी कुर्सी ही चली गई थी। इस प्रकार सूखाताल का प्रोजेक्ट उनके द्वारा शिलान्यास किया गया अंतिम बड़ा प्रोजेक्ट था। यह भी पढ़ें : नैनीताल ब्रेकिंग: मिला चार दिनों से गायब 19 वर्षीय युवक का शवइधर मंगलवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने एक पत्र को जनहित याचिका मानते हुए चल रहे मामले में सुनवाई करते हुए सूखाताल झील के चारों ओर सूखे क्षेत्र में सभी निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाते हुए राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण और राज्य आद्रभूमि प्रबंधन प्राधिकरण को भी पक्षकार बनाते हुए नोटिस भी जारी किए हैं, तथा सुनवाई के लिए अगली तारीख 20 दिसंबर तय की है। यह भी पढ़ें : नैनीताल से पार्टी कर वापस लौट रहे दोस्तों की कार दुर्घटनाग्रस्त, दरोगा व युवती सहित 3 की मौत, शादी की खुशियां भी मातम में बदलीं..सुनवाई के दौरान, एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) कार्तिकेय हरि गुप्ता ने अदालत को बताया कि जलवैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि बारिश से भरने वाली सूखाताल झील नैनी झील को 40 से 50 प्रतिशत तक रिचार्ज (पानी की पूर्ति) करती है। उन्होंने कहा कि झील के आधार पर कंक्रीट बिछाया जा रहा है जो सूखाताल व नैनीताल दोनों झीलों के लिए खतरनाक है। यह भी पढ़ें : नैनीताल : जिला चिकित्सालय में शुरू हुई सीटी स्कैन मशीनन्याय मित्र ने कहा कि राज्य सरकार ने क्षेत्र का सौंदर्यीकरण करने से पहले कोई पर्यावरणीय सर्वेंक्षण नहीं किया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में आईआईटी रूड़की ने एक अध्ययन किया था लेकिन पर्यावरणीय प्रभावों पर उनकी विशेषज्ञता नहीं होने के कारण उनकी रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता। यह भी पढ़ें : नैनीताल के दीपक ने 49 रुपए में जीते दो लाख रुपएआईआईटी रूड़की ने अपनी रिपोर्ट में झील के सौंदर्यीकरण के लिए कई सुझाव दिए हैं। अपनी रिपोर्ट में संस्थान ने झील के किनारों पर एक चारदीवारी बनाने को कहा है ताकि झील में कोई अतिक्रमण न हो। इस पर जिला विकास प्राधिकरण ने झील की सतह पर कंक्रीट बिछाकर उसे एक बारहमासी झील में बदलने का फैसला लिया। यह भी पढ़ें : विवाहेत्तर संबंधों का दु:खद अंत : जिसके लिए अपना घर-परिवार छोड़कर आई शादीशुदा प्रेमिका, उसी ने जहर खिलाकर मार डाला…न्याय मित्र ने अदालत को बताया कि अगर सूखाताल को बारहमासी बना दिया गया तो इसका नैनीझील पर बुरा प्रभाव पड़ने के साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान होगा और आपदा आने की आशंका भी बनी रहेगी। यह भी पढ़ें : विधायक ने की इंटर कॉलेज को 5 लाख रुपए देने की घोषणाउल्लेखनीय है नैनीताल निवासी पर्यावरणविद् स्वर्गीय डॉ. जीपी साह तथा कई अन्य लोगों ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखकर कहा था कि सूखाताल के सौंदर्यीकरण कार्य से झील का प्राकृतिक जलस्रोत बंद हो जाएगा। सूखाताल नैनीझील को रिचार्ज करती है और वहां निर्माण कार्य अवैज्ञानिक तरीके से किए जा रहे हैं। पत्र में कहा गया था कि झील में लोगों ने भी अतिक्रमण कर लिया है जिससे उसकी सतह का क्षेत्रफल कम हो गया है। इसी पत्र को उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया था। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleयह भी पढ़ें : नैनीताल में 44 भवन स्वामियों को गुरुवार तक घर खाली करने के आदेश, ध्वस्तीकरण की चेतावनी… हड़कंप..यह भी पढ़ें : सूखाताल झील क्षेत्र में 43 अवैध भवनों को तोड़े जाने के लिए तीन दिन का नोटिस, हड़कंपयह भी पढ़ें : सूखाताल के पुर्नजीवीकरण कार्यों के लिए चार सदस्यीय समिति गठित, स्थानीय लोगों को सीमेंट-कंक्रीट के कार्यों पर ऐतराजयह भी पढ़ें : सूखा नहीं रहेगा अब सूखाताल, 27 करोड़ से नए पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगायह भी पढ़ें : सूखाताल झील के पुर्नजीवीकरण, तल्लीताल में पार्किंग व सातताल में बर्ड वॉचिंग के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहायह भी पढ़ें : दिखाया 26 करोड़ से सूखाताल को पर्यटन स्थल बनाने का ख्वाब, किया निरीक्षण…यह भी पढ़ें : झीलों के शहर में उभरे 6 नए ताल, पर सूखा ही रहा सूखाताल यह भी पढ़ें : मंडलायुक्त ने निरस्त किये सूखाताल झील के पुर्नजीवीकरण के तीन प्रस्ताव, गांधी ग्राम के कार्यों के लिए दी डेटलाइन..गांधी आश्रम के जीर्णोद्धार कार्य सितंबर माह तक पूरे करने के निर्देशयह भी पढ़ें : सूखाताल के कल से प्रस्तावित ध्वस्तीकरण मामले में आज हाईकोर्ट में यह हुआ..यह भी पढ़ें : सूखाताल झील क्षेत्र में अवैध भवनों को तोड़े जाने के नोटिस पर आया याचिकाकर्ता डा. रावत का बयानयह भी पढ़ें : डीएम के प्रयास से टाइटन कंपनी बनाएगी सूखाताल को भरा ताल…राज्य के सभी प्रमुख समाचार पोर्टलों में प्रकाशित आज-अभी तक के समाचार पढ़ने के लिए क्लिक करें इस लाइन को…यह भी पढ़ें : नैनीताल दिखाने को नैनीताल सुखाने की तैयारी !शहर से बाहर वसूली गई लेक ब्रिज चुंगीयह भी पढ़ें : सूखाताल से निकलने वाली नदी से हुआ था नैनी झील का निर्माणLike this:Relatedयह भी पढ़ें : नैनीताल में 44 भवन स्वामियों को गुरुवार तक घर खाली करने के आदेश, ध्वस्तीकरण की चेतावनी… हड़कंप..नवीन समाचार, नैनीताल, 12 जुलाई 2022। जिला विकास प्राधिकरण नैनीताल की ओर से नगर के सूखाताल क्षेत्र के 44 अतिक्रमणकारियों को एक बार फिर गुरुवार तक घर खाली करने के आदेश जारी किये हैं। घर खाली नहीं करने पर इन्हें प्राधिकरण द्वारा ध्वस्त करने की बात कही है। बताया गया है कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के पूर्व के आदेशों के क्रम में गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर इन अवैध तरीके से बनाए गए भवनों को प्राधिकरण की टीम ने चिन्हित किया है। इससे भवन स्वामियों में हड़कंप मचना तय है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व मार्च 2020 में भी इन भवन स्वामियों को 3 दिन में घर खाली करने के नोटिस दिए गए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई थी।बताया गया है कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय में पर्यावरणविद डॉ. अजय रावत द्वारा वर्ष 2012 में सूखाताल से संबंधित याचिका पर 2015 में उच्च न्यायालय के निर्देशों पर एक कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सूखाताल क्षेत्र में 44 भवन अवैध पाए गए थे। बताया गया है कि यह भवन नगर पालिका की, सरकारी और सूखाताल झील की भूमि पर अवैध कब्जे करके बनाए गए हैं। 16 भवनों में प्राधिकरण और 18 भवनों में नगर पालिका का स्वामित्व पाया गया। इधर, सूखाताल झील के पुर्नजीवीकरण व सौंदयीकरण के पहले चरण के कार्य पूरे होने के बाद दूसरे स्तर के कार्य शुरू होने हैं। इस कारण प्रशासन अब इन भवनों को हटाने के प्रति गंभीर नजर आ रहा है।यह भी पढ़ें : हल्द्वानी : गौलापार के होटल में काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले, फेसबुक लाइव वीडियो में 4 करोड़ रुपये के भूमि विवाद और उत्पीड़न के आरोपप्राधिकरण के सहायक अभियंता सतीश चौहान ने बताया कि 2015 से ही इन भवन स्वामियों को प्राधिकरण व नगर पालिका की ओर से नोटिस दिए गए हैं। अब इन्हें हटाने की कार्रवाई शुरू होने जा रही है। प्राधिकरण के सचिव पंकज उपाध्याय ने कहा कि 44 अतिक्रमणकारियों को तीन दिनों के अंदर जगह खाली करने के नोटिस दिए गए हैं। आदेश का पालन नहीं होने पर प्राधिकरण की ओर से धवस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।उल्लेखनीय है कि इनके अलावा भी नगर के मेट्रोपोल कंपाउंड क्षेत्र में 128, सीआरएसटी इंटर कॉलेज के पीछे के क्षेत्र में 14 के साथ ही परदा धारा एवं फांसी गधेरा क्षेत्र मे भी कई लोगों को अवैध निर्माण स्वयं हटाने के पालिका व प्राधिकरण की ओर से पूर्व में नोटिस दिए गए हैं। हालांकि यह कहना मुश्किल है कि प्रशासन इन अवैध निर्माणों को कब हटाएगा।यह भी पढ़ें : सूखाताल झील क्षेत्र में 43 अवैध भवनों को तोड़े जाने के लिए तीन दिन का नोटिस, हड़कंप नवीन समाचार, नैनीताल, 1 मार्च 2020। विश्व प्रसिद्ध नैनी झील की सर्वाधिक जल प्रदाता सूखाताल झील के डूब क्षेत्र में अतिक्रमण कर भवन बनाने के मामले में एनडीडीए यानी नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण ने कार्रवाई शुरू कर दी है। एनडीडीए ने क्षेत्र के 16 कब्जेदारों को भवन खाली और ध्वस्तीकरण के नोटिस भेज दिए हैं। नोटिस मिलते ही अवैध निर्मंकर्ताओं में खलबली मच गई है।उल्लेखनीय है कि पर्यावरणविद् प्रो. अजय रावत ने सूखाताल झील के किनारे अनधिकृत तरीके से अतिक्रमण कर किए निर्माणों के खिलाफ वर्ष 2012 में एक जनहित याचिका दायर की थी। इसे लेकर हाईकोर्ट ने झील किनारे मानकों के विपरीत बने भवनों के चिह्नीकरण के निर्देश प्राधिकरण और पालिका को दिए थे। वर्ष 2014 में तत्कालीन मंडलायुक्त डी.सेंथिल पांडियन के निर्देशों के बाद प्राधिकरण, सिंचाई, लोनिवि और पालिका की संयुक्त टीम ने सर्वे भी किया था। टीम ने सर्वे में 44 भवन चिह्नित किए थे। इससे पूर्व पालिका की ओर से एक अवैध निर्माण को आंशिक रूप से ध्वस्त किया जा चुका है, जबकि 43 मकानों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होनी है। इधर एनडीडीए के सचिव पंकज उपाध्याय ने बताया कि प्राधिकरण के द्वारा 16 तथा नगर पालिका के अंतर्गत 27 भवन पूर्व में स्वीकृत मानचित्र तथा नजूल भूमि में आवंटित निर्माण से संबंधित हैं। पालिका के ईओ अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि रविवार को कार्मिकों ने चिह्नित भवनों पर नोटिस चस्पा कर दिए हैं। पांच मार्च को सभी 43 भवनों को ध्वस्त किया जाएगा। इससे स्थानीय लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। यह भी पढ़ें : सूखाताल के पुर्नजीवीकरण कार्यों के लिए चार सदस्यीय समिति गठित, स्थानीय लोगों को सीमेंट-कंक्रीट के कार्यों पर ऐतराजडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 14 जुलाई 2021। सूखाताल के पुनर्जीवन, नैनी झील के रिचार्जिंग जोन एवं सौदर्यीकरण हेतु बुधवार को एलडीए सभागार में स्थानीय लोगों एवं अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंडलायुक्त अरविंद सिंह ह्यांकी ने कहा कि सूखाताल की वर्तमान स्थिति को ठीक करने, सूखाताल झील को संरक्षण, संवर्धन करते एवं सौंदर्यीकरण करते हुए इसे भविष्य में झील के स्वरूप तथा नए टूरिस्ट डेस्टीनेशन के रूप में विकसित करने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने इस हेतु जियोलॉजिस्ट, इकोलॉजिस्ट व हाईड्रोलॉजिस्ट को शामिल करते हुए चार सदस्यीय टेक्नीकल एडवाईजरी सब कमेटी का गठन किया जिसमें डॉ. अजय रावत को अध्यक्ष तथा प्रोफेसर चारु पंत, अनुपम साह, तथा विशाल सिंह को सदस्य नामित किया गया।बैठक में क्षेत्रीय विधायक श्री संजीव आर्य ने कहा कि क्षेत्रीय जनता एवं जियोलॉेजिस्ट के सकारात्मक सुझावों के साथ उनकी चिंताओं को दूर करने का कार्य भी किया जायेगा। इस दौरान सांसद प्रतिनिधि गोपाल रावत, विशाल सिंह, चारु पंत, अनुपम साह, दिनेश साह, मारुति साह, राजीव लोचन साह, डॉ. ललित तिवारी आदि ने भी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करते हुए अपने-अपने सुझाव रखे। इस दौरान अत्रिकमण रोकने एवं सुरक्षात्मक दृष्टि से झील के चारों ओर दीवार निर्माण पर सहमति व्यक्त की गयी अलबत्ता झील की सतह के संबंध में सामग्री का चुनाव नहीं हो पाया।बैठक में जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल, केएमवीएन के एमडी एवं उपाध्यक्ष जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण नरेंद्र सिंह भंडारी, सचिव प्राधिकरण पंकज उपाध्याय, जीएम केएमवीएन एपी वाजपेयी, अधिशासी अभियंता संतोष उपाध्याय, सभासद गजाला कमाल, जिला पर्यटन विकास अधिकारी अरविंद गौड़, अधिशासी अधिकारी एके वर्मा, कंसलटेंट पंकज मौर्य सहित राजेश साह, अनूप साह, नीरज जोशी, अन्विता पांडे, विनोद कुमार पांडे, जीएस राणा, एमपी सिंह, नीता पवार राणा, नोमान सिद्दीकी, एससी भट्ट व कविता उपाध्याय आदि सूखाताल क्षेत्र के स्थानीय लोग भी उपस्थित रहे।क्षेत्रीय लोगों ने कहा सीमेंट-कंक्रीट नहीं पीएम की मंशानुरूप प्राकृतिक तरीके से हो पुर्नजीवीकरण नैनीताल। बैठक में क्षेत्रीय लोगों की ओर से सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड रिसर्च-सीडर के कार्यकारी निदेशक विशाल सिंह ने इस बात पर चिंता जताई कि राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की की रिपोर्ट के अनुसार करीब 71 हजार की आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने वाली नैनी झील को रिचार्ज करने में 40 फीसद योगदान देने वाली सूखाताल झील को शहर का मलबा डालने का स्थान बना दिया गया है। अब पुर्नजीवीकरण के नाम पर भी यहां भारी मात्रा में सीमेंट-कंक्रीट का इस्तेमाल किया जाएगा। इसकी जगह उन्होंने प्रकृति आधारित समाधान तलाशने की आवश्यकता जताई।उन्होंने कहा कि इसे प्रधानमंत्री मोदी की परिकल्पनानुसार केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत पुर्नजीवित किया जाना चाहिए। भूविज्ञानी प्रो. चारु पंत ने भी कहा कि सूखाताल के मिट्टी के तल तक पहुंचने की जरूरत है। यदि तल पर टाइलें लगाई गईं तो नई पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न होंगी। विनोद पांडे ने भी कहा कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार सूखाताल एक आर्द्रभूमि है। यहां मौजूदा नियमों के तहत कोई निर्माण नहीं किया जा सकता है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़ें : सूखा नहीं रहेगा अब सूखाताल, 27 करोड़ से नए पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगानवीन समाचार, नैनीताल, 07 मार्च 2021। नैनीताल की प्रमुख नैनी झील को वैज्ञानिक शोधों के अनुसार सर्वाधिक 77 फीसद प्राकृतिक भूजल उपलब्ध कराने के बावजूद वर्ष के अधिकांश माह सूखी रहने के कारण सूखाताल कही जाने वाली झील के दिन अब बहुरने जा रहे हैं। गत 27 फरवरी को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने 27 करोड़ रुपए की सूखाताल पुर्नजीवन योजना का शुभारंभ किया है। अब करीब एक सप्ताह बाद ही रविवार को स्थानीय विधायक संजीव आर्य ने सूखाताल झील के प्रस्तावित चित्र जारी किए हैं, जिनमें सूखाताल झील काफी सुंदर नजर आ रही है। विधायक आर्य ने कहा है, वो ताल ही क्या जो सूखाताल कहलाये। सूखाताल को पानी से भरे प्राकृतिक ताल के रूप में बदलते हुए इसके जीर्णोद्धार के कार्य किए जाएंगे। साथ ही यहां पाथ वे, एक्सलेटर, लिफ्ट, ओपन एयर थियेटर तथा हाट व क्राफ्ट सेंटर का निर्माण कर सूखाताल का कायाकल्प किया जाएगा। सूखाताल नैनीताल के पर्यटन का नये केंद्र के रूप में विकसित होगा। सूखाताल अब सूखा ताल नहीं रहेगा बल्कि यह नई सुविधाओं युक्त पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा। नीचे क्लिक करके देखें तस्वीरें :सूखाताल अब नहीं रहेगा सूखा ! क्योंकि वह ताल ही क्या जो सूखा कहलाये ? अब 27 करोड़ की लागत से होगा सूखाताल का जीर्णोद्धार। हाट एंड क्राफ़्ट सेंटर निर्माण सहित कुछ इस तरीक़े से होगा सूखाताल का कायाकल्प! नैनीताल के पर्यटन का नये केंद्र के रूप में ऐसे विकसित होगा सूखाताल। pic.twitter.com/mU1beQF8yg— Navin Samachar @ deepskyblue-swallow-958027.hostingersite.com (@navinsamachar) March 7, 2021यह भी पढ़ें : सूखाताल झील के पुर्नजीवीकरण, तल्लीताल में पार्किंग व सातताल में बर्ड वॉचिंग के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहानवीन समाचार, नैनीताल, 23 जनवरी 2021। नगर की विश्व प्रसिद्ध नैनीताल की सर्वाधिक-70 फीसद तक जल प्रदाता सूखाताल झील को पुनर्जीवित कर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 26 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इस हेतु गत दिवस जिला विकास प्राधिकरण के सचिव द्वारा किये गए स्थलीय निरीक्षण की कड़ी में आगे बढ़ते हुए शनिवार को प्राधिकरण के अध्यक्ष, कुमाऊं मंडल के आयुक्त व मुख्यमंत्री के सचिव अरविंद ह्यांकी ने बैठक ली। इस दौरान उन्होंने कार्यदायी संस्था जल संस्थान व नगर पालिका से सूखाताल को जल प्लावित करने के लिए कार्य योजना तैयार करने व उस पर काम करने को कहा। इसके अलावा उन्होंने तल्लीताल फांसी गधेरा में पार्किंग के निर्माण को लेकर बनाए गए प्रोजेक्ट पर जल्द कार्य शुरू करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया।शनिवार को जिला विकास प्राधिकरण सभागार में बैठक लेते हुए मंडलायुक्त श्री ह्यांकी ने अधिकारियों की बैठक लेते हुए बताया कि सातताल में पक्षियों की अत्यधिक उपस्थिति को देखते हुए वहां पक्षी प्रेमियों को आकर्षित करने के लिए प्रस्ताव तैयार करने को भी कहा। उन्होंने बताया कि तल्लीताल फांसी गधेरा में 30 मीटर के दायरे में पार्किंग एवं सूखाताल में 2.26 एकड़ क्षेत्र में झील बनाई जाएगी। झील के चारों और पैदल पथ भी बनाया जाएगा। उन्होंने इन योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने की सख्त हिदायत भी दी। बैठक में प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रोहित मीणा, नगर पालिका के ईओ अशोक कुमार वर्मा, जल संस्थान के ईई संतोष उपाध्याय व प्राधिकरण के प्रोजेक्ट मैनेजर सीएम साह आदि अधिकारी भी उपस्थित रहे।यह भी पढ़ें : दिखाया 26 करोड़ से सूखाताल को पर्यटन स्थल बनाने का ख्वाब, किया निरीक्षण…नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जनवरी 2021। नैनी झील को करीब 70 फीसद यानी सर्वाधिक जल प्रदाता मानी जाने वाली, लेकिन इसके बावजूद सूखी रहने के कारण सूखाताल कही जाने वाली झील केा एक बार फिर पानी से वर्ष भर भरे रहने व पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने का ख्वाब देखा जा रहा है। इस कोशिश में मंगलवार को जिला विकास प्राधिकरण के सचिव पंकज उपाध्याय ने नगर पालिका, ऊर्जा निगम व सिंचाई विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ सूखाताल झील का निरीक्षण किया, और यहां हो सकने वाले कार्यों पर चर्चा की। इस दौरान श्री उपाध्याय ने बताया कि सूखाताल झील में करीब 26 करोड़ रुपए की लागत से पुनर्जीवीकरण व सौंदर्यीकरण के कार्य किये जाने हैं। इसमें पानी के एकत्रीकरण के साथ ही रेलिंग लगाने के कार्य प्रमुख हैं। उन्होंन बताया कि झील के भर जाने पर उसका पानी बाहर निकालने की समस्या खड़ी ना हो इसके लिए सर्वे किया जा रहा है। आगामी 22 जनवरी को प्राधिकरण के अध्यक्ष व कुमाऊं आयुक्त अरविंद ह्यांकी इस संबंध में बैठक लेने वाले हैं। लिहाजा इस हेतु कार्य योजना तैयार की जा रही है। इस पर जल्द कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस मौके पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता हरीश चंद्र भारती, नगर पालिका के ईओ अशोक वर्मा, प्राधिकरण के प्रोजेक्ट मैनेजर सीएम साह, ऊर्जा निगम के एसडीओ पर्यंक पांडे, सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता डीडी सती व प्राधिकरण के सहायक अभियंता कमल जोशी सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।यह भी पढ़ें : झीलों के शहर में उभरे 6 नए ताल, पर सूखा ही रहा सूखाताल नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अगस्त 2020। सरोवरनगरी में इस वर्ष हो रही अच्छी वर्षा से जहां नैनी झील के साथ ही वर्ष भर सूखे रहने वाले कई प्राकृतिक ताल पानी से भर गए हैं, वहीं नैनी झील की सर्वाधिक जल प्रदाता सूखाताल झील सूखी हुई है। नगर के अयारपाटा वार्ड के सभासद मनोज साह जगाती ने बताया कि उनके अयारपाटा वार्ड में अरविंद आश्रम के पीछे दो तालाब, समर फील्ड, टिफिन टॉप के पास, शेरवुड, डीआईजी आवास रोड पर शिव मंदिर के पास 6 ताल पानी से भर गए हैं। इनमें समर फील्ड का ताल तो लबालब भरा हुआ है। उन्होंने बताया कि वन्य जीव इन तालों में पानी पीने के लिए आते हैं, साथ ही इन में भरा पानी रिस-रिस कर नैनी झील में आता है। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में नई समस्या बने नीले ड्रम, ‘देशी गीजर’ बनाकर हो रही बिजली चोरी, रुड़की ऊर्जा निगम की कार्रवाई में 148 नीले ड्रम बरामद...उल्लेखनीय है कि नगर की सूखाताल झील पूर्व में पानी से भर जाती थी और इसके पानी में जलागम क्षेत्र में बने घरों में भरे पानी को हटाने के लिए पंप लगाने पड़ते रहे हैं, तथा पूर्व में इस झील में नौकायन की तस्वीरें भी मिलती हैं। इस झील से नैनी झील में 70 फीसद तक जल पहुंचने के वैज्ञानिक तथ्य भी हैं। सूखाताल झील के पुनरुद्धार के लिए भी शासन-प्रशासन द्वारा बड़ी-बड़ी परियोजनाएं बनाने की बातें भी कही जाती हैं, किंतु नालों पर अतिक्रमण, ताल में स्वयं प्रशासन द्वारा ही पिछले वर्षों में मलबा भरने एवं अन्य कारणों से सूखाताल झील भर नहीं पा रही है। जबकि पूर्व में सूखाताल के जलागम क्षेत्र में स्थित आर्डवेल को आठ कुंवे यानी छोटे तालाब होने की बात भी कही जाती है, किंतु निर्माणों के कारण अब इन तालों का कोई अस्तित्व नहीं है। यह भी पढ़ें : मंडलायुक्त ने निरस्त किये सूखाताल झील के पुर्नजीवीकरण के तीन प्रस्ताव, गांधी ग्राम के कार्यों के लिए दी डेटलाइन..-सिंचाई विभाग व जिला विकास प्राधिकरण से आपसी समन्वय से नये सिरे से वैज्ञानिक प्रस्ताव बनाने को कहा नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जुलाई 2020। नगर की विश्व प्रसिद्ध नैनी झील की सर्वाधिक-70 फीसद तक जल प्रदाता मानी जाने वाली सूखाताल झील के पुर्नजीवीकरण हेतु एक बार फिर प्रयास शुरू होते नजर आ रहे हैं। अलबत्ता मंडलायुक्त अरविंद सिंह ह्यांकी ने सिंचाई विभाग द्वारा सूखाताल झील के विकास हेतु प्रस्तुत की गयी तीन योजनाओं को निरस्त कर दिया है, और सिंचाई विभाग व जिला विकास प्राधिकरण से 20 अगस्त से पहले नगर के संभ्रान्त नारिकों के साथ बैठक कर आपसी समन्वय से नये सिरे से वैज्ञानिक प्रस्ताव बनाने को कहा है।बृहस्पतिवार को यहां प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा करते हुए सिंचाई विभाग तथा जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण से प्रस्ताव तैयार करते इस बात का विशेष ध्यान रखने को भी कहा कि सूखाताल झील में पानी बना रहे तथा आवश्यकता पड़ने पर नैनी झील को सूखाताल झील से पानी उपलब्ध कराया जा सके। साथ ही पर्यटन की दृष्टि से सूखाताल झील को नए डेस्टीनेशन के रूप में भी विकसित जाये। उन्होंने निर्देश दिए कि सूखाताल झील के जीवितीकरण हेतु तैयार होने वाले प्रस्ताव में जल संग्रहण का भाग सिंचाई विभाग तथा सौन्दर्यकरण का भाग जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण आपसी तालमेल से तैयार करें। उन्होंने सड़ियाताल (सरिता ताल) झील में पानी भरे रहने तथा झील के पानी में दुर्गंध की समस्या का समाधान करने को भी कहा। बैठक में केएमवीएन के एमडी एवं जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रोहित कुमार मीणा, प्राधिकरण के सचिव पंकज उपाध्याय, एसडीएम विनोद कुमार, मुख्य अभियंता सिंचाई एनएस पतियाल, अधिशासी अभियंता सिंचाई एचसी सिंह, अधिशासी अभियंता जल संस्थान संतोष कुमार उपाध्याय आदि मौजूद रहे।गांधी आश्रम के जीर्णोद्धार कार्य सितंबर माह तक पूरे करने के निर्देश-डेढ़ करोड़ रुपए से हो रहे हैं जीर्णोद्धार के कार्य नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जुलाई 2020। जिला-मंडल मुख्यालय के निकट राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नैनीताल आगमन के गवाह ताकुला गांधी ग्राम मंे इन दिनों 1.5 करोड़ रुपए की लागत से जीर्णोद्धार के कार्य किये जा रहे हैं। मंडलायुक्त अरविंद सिंह ह्यांकी ने बुधवार को गॉधीग्राम ताकुला पहुॅचकर गॉधी आश्रम में चल रहे जीर्णोद्धार कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने यहां मंद गति से चल रहे जीर्णोद्धार कार्य पर नाराजगी जताई और कार्यों के लिए कार्यदायी संस्था को अधिक मजदूरों को लगाकर कार्य में गति लाने व सितम्बर माह के अंत तक पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने गांधी आश्रम की दीवारों को आकर्षक बनाने व वहां फोटो गैलरी भी लगाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि गॉधी आश्रम में बच्चों, शोधार्थियों तथा पर्यटकों के आकर्षण हेतु जो भी चीजें की जा सकती हैं, उन पर विस्तार से रणनीति बनाकर कार्य किया जायेगा। निरीक्षण के दौरान केएमवीएन के एमडी एवं जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रोहित कुमार मीणा, एडीबी के सपोटिंग इंजीनियर एचसी शर्मा आदि उपस्थित थे।यह भी पढ़ें : सूखाताल के कल से प्रस्तावित ध्वस्तीकरण मामले में आज हाईकोर्ट में यह हुआ.. -मामले को एकलपीठ ने दूसरी पीठ को किया संदर्भित, कोर्ट ने मौखिक आदेश देते हुए प्राधिकरण को 5 मार्च को ध्वस्तीकरण अभियान रोकने को कहा 2014 में भरी सूखाताल झील (फाइल फोटो)नवीन समाचार, नैनीताल, 4 मार्च 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की एकलपीठ ने जिला विकास प्राधिकरण नैनीताल द्वारा सूखाताल के डूब क्षेत्र में बने भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई से इंकार करते हुए मामले को अन्य बेंच को भेज दिया है। अलबत्ता कोर्ट ने मौखिक आदेश देते हुए प्राधिकरण को 5 मार्च को ध्वस्तीकरण अभियान रोकने को कहा है। मामले के अनुसार जिला विकास प्राधिकरण ने हाईकोर्ट द्वारा प्रो. अजय रावत बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य में 27 अगस्त 2019 को पारित आदेश में सूखाताल के जलागम क्षेत्र में बने 44 भवनों को 5 मार्च से पूर्व भवन स्वामियों से स्वयं ध्वस्त करने के आदेश दिए थे । इसके बाद 5 मार्च से प्राधिकरण द्वारा ध्वस्तीकरण अभियान चलाने के नोटिस दिए थे । इस नोटिस को सूखाताल के सुधीर सिंह व अन्य ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने सुनवाई से इंकार करते हुए मामला दूसरी पीठ को रेफर कर दिया।यह भी पढ़ें : सूखाताल झील क्षेत्र में अवैध भवनों को तोड़े जाने के नोटिस पर आया याचिकाकर्ता डा. रावत का बयाननवीन समाचार, नैनीताल, 3 मार्च 2020। नैनीताल को इको सेंसेटिव जोन बनाने तथा सूखाताल झील क्षेत्र जो कि नैनीताल झील को जल प्रदान करने का मुख्य स्रोत है, को रिचार्ज करने के लिए एक जनहित याचिका सन 2012 में प्रोफेसर अजय रावत द्वारा दाखिल की गई थी। इस याचिका के साथ 14 अन्य याचिकाएं भी माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निस्तारित की गई हैं लेकिन किसी भी कार्यवाही में प्रोफेसर रावत की याचिका का ही जिक्र किया जाता है, जो कि व्यक्तिगत रूप से नैनीताल के संरक्षण के लिए प्रयासों को आहत करता है। वर्तमान में जिला विकास प्राधिकरण डीडीए और नगर पालिका के द्वारा सूखाताल के क्षेत्र में कतिपय भवनों के मालिकों को ध्वस्तीकरण संबंधी नोटिस दिया गया है । जबकि झील के तल क्षेत्र अथवा महत्वपूर्ण डूब क्षेत्र में अवैध रूप से निर्माण किए गए रसूखदार लोगों के भवनों को हटाए जाने की आवश्यकता है,इन अवैध रूप से निर्माण किए गए रसूखदार लोगों भवनों के कारण ही झील में बरसात में भरने वाले पानी को बाहर निकाल दिया जाता है जिससे सूखा ताल झील में जल भर ही नहीं पाता ।यह महत्वपूर्ण है कि लेकबेड विशेषकर झील के तल क्षेत्र पर के भवनों के निर्माण किए जाने से वर्षा काल में सूखा ताल में जल नहीं भर पाता है और जिसके कारण नैनीताल झील में वर्ष पर्यंत पानी की कमी रहती है जिससे कि नगर वासियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।झील के डूब क्षेत्र में आने वाले भवनों को हटाकर ही वास्तविक रूप से सूखा ताल झील का संरक्षण किया जा सकता है इससे ना सिर्फ नैनीताल नगर को जल की अबाध आपूर्ति हो सकती है साथ ही सूखाताल क्षेत्र को एक पर्यटक क्षेत्र के में भी विकसित किया जा सकता है अभी पिछले दिनों एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, जिसमें कहा गया है कि देश के पर्वतीय पर्यटक स्थलों जैसे कि मसूरी, शिमला, दार्जिलिंग, इत्यादि में तेजी से पानी समाप्त होते जा रहा है, यदि सूखाताल क्षेत्र का संरक्षण नहीं किया गया तो नैनीताल भी जल्द ही पानी से वंचित हो जाएगा और जिसका दुष्प्रभाव यहां के पर्यटक व्यवसाय पर पड़ेगा। यह भी पढ़ें : छुट्टी नहीं मिली तो कर्मचारियों ने यमकेश्वर के माला गांव में एआई से दिखा दिया बब्बर शेर, वन विभाग की जांच में खुली पोल.... यह भी पढ़ें : डीएम के प्रयास से टाइटन कंपनी बनाएगी सूखाताल को भरा ताल… -ढाई मीटर की गहराई तक खुदाई कर किया जाएगा झील का क्षेत्र विस्तार, 1978 के नक्शों के आधार पर बनेगी कार्ययोजना नवीन समाचार, नैनीताल, 22 नवंबर 2019। डीएम सविन बंसल के प्रयासों से नैनी झील की प्रमुख जल प्रदाता सूखाताल की दशा सुधरने की उम्मीद है। देश की बड़ी घड़ी निर्माता टाईटन कम्पनी अपने सीएसआर यानी नैगमिक सामाजिक उत्तरदायित्व मद से सूखाताल झील के जीर्णोद्धार के लिए हामी भर दी है। कम्पनी के सीएसआर हेड अश्वनी ने बताया कि डीएस की अध्यक्षता में बीती शाम आयोजित हुई बैठक में कम्पनी द्वारा सीएसआर मद से प्रथम फेज में सूखाताल झील की जल संचयन क्षमता बढ़ाने तथा द्वितीय व तृतीय फेज में अन्य कार्य किये जाने की बात कही। राज्य के सभी प्रमुख समाचार पोर्टलों में प्रकाशित आज-अभी तक के समाचार पढ़ने के लिए क्लिक करें इस लाइन को…बैठक में श्री बंसल ने कहा कि कम्पनी को झील के सुधारीकरण एवं सौन्दर्यकरण के लिए किए जाने वाले कार्यों की वैज्ञानिक एवं सुनियोजित कार्य योजना दिखाने के उपरान्त ही जल संस्थान, सिंचाई, पालिक व लेक सेफ्टी कमेटी की सहमति के आधार पर ही कार्य करने की स्वीकृति प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि कार्य योजना में हाईकोर्ट के आदेशों का भी विशेष ध्यान रखा जाए। अलबत्ता, उन्होंने जल संस्थान, सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि कम्पनी को कार्य योजना तैयार करने में पूरी मदद करें। इस हेतु उन्होंने नैनीझील के जलागम क्षेत्र एवं नालों आदि के 1978 के नक्शों एवं एनआरएसए के मौजूदा उपग्रहीय चित्रों के आधार पर कुमाऊं विवि के भू-वैज्ञानिक, जल संस्थान, सिंचाई विभाग, पालिका व कम्पनी से संयुक्त रूप से झील व झील के रिचार्ज जोन एवं नालों का तकनीकी सर्वे करने को भी कहा। बैठक में सीडीओ विनीत कुमार, केएमवीएन के एमडी रोहित कुमार मीणा, डीडीओ रमा गोस्वामी, जल संस्थान के एसई एएस अंसारी, ईई एसके उपाध्याय, विशाल कुमार, सिंचाई विभाग के ईई हरीश चन्द सिंह के अलावा कम्पनी के प्रतिनिधि एनके भट्ट व कविता आदि मौजूद रहे।यह भी पढ़ें : नैनीताल दिखाने को नैनीताल सुखाने की तैयारी !नैनीताल के आकर्षण में आ रहे वाहनों के लिए सूखाताल को बना दिया पार्किंग सूखाताल झील में प्रशासन द्वारा खड़े किये गये वाहन।नवीन समाचार, नैनीताल, 31 दिसंबर 2018। सरोवरनगरी में नये वर्ष के स्वागत एवं बीत रहे वर्ष को विदाई देने के जश्न में शामिल होने के लिए सैलानियेां के आगमन का सिलसिला दो दिन पूर्व ही शुरू हो गया था, जो कि सोमवार को भी जारी रहा। सैलानियों के निजी वाहनों से उमड़ने से नगर की मौजूदा पाकिंग सुविधाएं दिन में ही फुल हो गयीं। पिछले वर्षों की तरह डीएसए मैदान के खेल वाले हिस्से को वाहनों की पार्किंग के लिए नहीं खोला गया, वरन इसकी जगह नगर की जिस सबसे संवेदनशील, नगर की प्राण कही जाने वाली नैनी झील की वैज्ञानिक तौर पर सबसे बड़ी जल प्रदाता सूखाताल झील को वाहनों की पार्किंग में तब्दील कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि नगर में अतिक्रमण, असुरक्षित क्षेत्रों एवं अवैध निर्माणों के संबंध में डा. अजय रावत की जिस जनहित याचिका पर आदेश पारित होते रहे हैं, वह मूलतः सूखाताल को उसके मूल स्वरूप में लौटाने से संबंधित है। यह भी पढ़ें : नाम सूखाताल, लेकिन नैनी झील को देती है वर्ष भर और सर्वाधिक 77 प्रतिशत पानी चिंताजनक: बारिश से नैनी झील लबालब पर जल प्रदाता सूखाताल झील खालीइस बारे में डा. अजय रावत ने आशंका जताई कि आज एक दिन के लिए सूखाताल को पार्किंग बनाने की परंपरा आगे भी जारी रह सकती है, यह दीर्घकाल में नैनी झील के अस्तित्व को समाप्त करने का उपक्रम हो सकता है। पार्किंग समस्या के क्षणिक समाधान के लिए नैनी झील के अस्तित्व पर खतरा बढ़ाना ठीक नहीं है, क्योंकि जो सैलानी नगर में आ रहे हैं वह मूलतः नैनी झील के आकर्षण में ही आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सूखाताल नैनी झील की सबसे बड़ी जल प्रदाता झील है, और यह मूलतः ‘वेटलेंड’ यानी जल प्लावित क्षेत्र है। उच्च न्यायालय भी किसी भी झील के ‘बेड’ यानी आधार क्षेत्र में किसी भी तरह का अवैध निर्माण न करने के आदेश दे चुकी है।‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया विज्ञापन न केवल आपके व्यवसाय या संस्थान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाएगा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता को भी सशक्त बनाएगा। अग्रिम धन्यवाद। शहर से बाहर वसूली गई लेक ब्रिज चुंगीनैनीताल। नगर में नये वर्ष के स्वागत में उमड़ रहे वाहनों के कारण नगर के लेक ब्रिज चुंगी स्थल तल्लीताल में वाहनों का जाम लगने के मद्देनगर सोमवार को चुंगी को भवाली व हल्द्वानी रोडों पर स्थानांतरित कर दिया गया। वहीं सीओ विजय थापा ने बताया कि वाहनों को काठगोदाम, कालाढुंगी से लेकर ज्योलीकोट, रूसी बैंड, मंगोली, बारापत्थर आदि स्थानों पर रोका व उनकी पड़ताल की जा रही है कि वाहन शराब पीकर तो नहीं चलाये जा रहे हैं। साथ ही नगर के पार्किंग स्थलों के फुल हो जाने के बाद वाहनों को सूखाताल झील में खड़ा किया जा रहा है।यह भी पढ़ें : सूखाताल से निकलने वाली नदी से हुआ था नैनी झील का निर्माण Catchment Area of Sukhatal in Nainital’s Survey of India Map (1936)-सेंट जोन्स चर्च व तल्लीताल डांठ के पास नदी का मार्ग अवरुद्ध होने से बनी झीलें नवीन जोशी, नैनीताल। कुमाऊं विवि के सेवानिवृत्त प्रोेफेसर वरिष्ठ भूगोलविद् एवं नैनी झील पर गहन शोधरत प्रो.जीएल साह ने अपने शोध के उपरांत निश्कर्ष निकाला है कि विश्व प्रसिद्ध नैनी झील का निर्माण लाखों वर्ष पूर्व एक नदी का मार्ग अवरुद्ध होने की वजह से हुआ होगा। संभवतया बलिया नाम की उस नदी का उद्गम स्थल आज की सूखाताल झील के पास रहा होगा। इस नदी में वर्तमान सेंट जोन्स चर्च के पास तथा तल्लीताल डांठ के पास भूगर्भीय हलचलों की वजह से नगर की पूर्वी व पश्चिमी ओर की पहाड़ियां शेर का डांडा और अयारपाटा में विचलन से हुए भूस्खलन की वजह से नदी का मार्ग अवरुद्ध हो गया होगा, और इस प्रकार आज की नैनी झील और सूखाताल झील का निर्माण हुआ होगा। Pr. G.L.Sahअपने करीब दो वर्ष पूर्व से नैनी झील पर किए जा रहे शोध के निश्कर्षों का खुलासा करते हुए प्रो. साह ने बताया कि सूखाताल झील, नैनी झील के अस्तित्व के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उल्लेखनीय है इन दिनों उत्तराखंड उच्च न्यायालय भी सूखाताल झील को पुर्नजीवित करने के लिए प्रयासरत है, जबकि अन्य पक्ष सूखाताल के भूतकाल में झील ही ना होने के तर्क दे रहे हैं। ऐसी स्थितियों में प्रो. साह के खुलासे बेहद महत्वपूर्ण हैं। प्रो. साह ने बताया कि 1872, 1893 व 1899 के अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए नक्शों में भी सूखाताल झील को प्रदर्शित किया गया है, तथा इसे वर्षाकाल में भरने वाली झील बताया गया है। वहीं 1936 के सर्वे ऑफ इंडिया के मानचित्र के आधार पर प्रो. साह ने बताया कि तब सूखाताल झील के जल आप्लावित क्षेत्र का क्षेत्रफल 3.3 हेक्टेयर और अधिकतम जल भराव की गहराई वर्तमान में सूखाताल झील में बने मां शाकुंभरी देवी मंदिर के स्थान पर 35 फीट थी। तब सूखाताल झील के पश्चिमी छोर पर ‘वांलिंटियर रायफल रेंज’ यानी चांदमारी थी, जहां लोग एवं अंग्रेज सिपाही निशाना लगाना सीखते थे। सूखाताल झील सितंबर मध्य तक बारिश के पानी से भरी रहती थी, और अगले वर्ष मार्च-अप्रैल तक इसका पानी रिस-रिस कर नैनी झील में जाता रहता था।इसलिए सूखी है सूखाताल झीलनैनीताल। सूखाताल के सूखी होने पर लोग अलग-अलग कयास लगाते हैं। इस बाबत प्रो. जीएल साह ने अनेक कारण बताए। पहला कारण इस झील का जलागम क्षेत्र नैना पीक व हांडी-भांडी की ओर से कुल मिलाकर केवल 70 हेक्टेयर क्षेत्रफल का होना है। इसमें से भी बड़ा हिस्सा नैनी झील के सबसे बड़े, नाला नंबर 23 से और दूसरी ओर स्लीपी हॉलो क्षेत्र से नैनी झील में चला जाता है। दूसरे, चूंकि यह नदी का उद्गम स्थल था, और दुनिया की हर नदी की तरह इस नदी के उद्गम स्थल पर भी कम पानी की धार ही फूटती थी। तीसरे, नैनी झील की तरह ही सूखाताल झील भी वर्षा के जल से भरने वाली यानी ‘इंटरमिटेंट’ झील है। चौथे, इसके जलागम क्षेत्र का 30 फीसद हिस्सा चट्टानों व तीक्ष्ण ढलान वाला है, इस कारण इसमें पानी बारिश के दौरान तत्काल आ जाता है, रिस-रिस कर धीरे-धीरे नहीं पहुंचता। तथा पांचवा, अंग्रेजी दौर से ही इसके जलागम में सर्वाधिक भवन थे, हालिया दौर में यहीं अत्यधिक निर्माण हुए हैं, जिस कारण भी पानी के रिस कर पहुंचने की दर बहुत कम है। तथा सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि हालिया वर्षों में सूखाताल झील को बकायदा एक निविदा प्रक्रिया के तहत मलवा डालकर भर दिया गया है। इससे झील की गहराई खत्म हो गई है। इसलिए यह जल्द भर जाती है, और जल्द खाली भी हो जाती है। 20 मई की शाम बारिश से भरती सूखाताल झील। सूखाताल झील में प्रशासन द्वारा खड़े किये गये वाहन। दिसंबर 2014 में बर्फ से पटी सूखाताल झील दिसंबर 2014 में बर्फ से पटी सूखाताल झील 2014 में भरी सूखाताल झील 2014 में भरी सूखाताल झील 2014 में भरी सूखाताल झील 2014 में भरी सूखाताल झील भरी हुई सूखाताल झील कभी इस तरह नाव भी चलती थी सूखाताल में.कभी आठ कुंए भी थे सूखाताल क्षेत्र मेंनैनीताल। प्रो. साह क्षेत्र में आर्डवेल नाम के एक भवन को ‘आठ वेल’ यानी आठ कुंओं का अपभ्रंश मानते हुए यहां पॉलीटेक्निक व एटीआई के बीच मुल्ला पोखर सहित आठ कुंए होने का दावा करते हैं। सर्वे ऑफ इंडिया के 1932 के नक्शे में भी ऐसे अनेक कुंए दर्शाए गए हैं। Share this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading...Related Post navigationनैनीताल : केक मिक्सिंग के साथ हुई क्रिसमस सेलीब्रेशन की शुरुआत नैनीताल के 9 युवाओं ने आज भरी हवा में पहली ऐतिहासिक उड़ान…
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