पालतू कुत्ते का परित्याग करने पर लगेगा ₹20 हजार जुर्माना, पंजीकरण और डॉग केयर सेंटर पर भी सख्ती, देहरादून नगर निगम में नई डॉग पॉलिसी

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नवीन समाचार, देहरादून, 17 जनवरी 2026 (New Dog Policy in Dehradun)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पालतू कुत्तों के परित्याग और लापरवाह देखभाल पर लगाम लगाने के लिए नगर निगम ने नई कुत्ता नीति “डॉग पॉलिसी (Dog Policy)” तैयार कर ली है। पॉलिसी के अनुसार, घर में पल रहे पालतू कुत्ते को यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर छोड़ता है और पकड़ा जाता है, तो उस पर ₹20,000 का जुर्माना लगेगा, साथ ही अभियोग दर्ज होने की कार्यवाही भी हो सकती है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शहर में पालतू कुत्तों के परित्याग के मामले बढ़ने से पशु कल्याण, सार्वजनिक सुरक्षा और नगर व्यवस्था—तीनों पर असर पड़ रहा था।

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देहरादून नगर निगम की नई डॉग पॉलिसी के मुख्य प्रावधान

(New Dog Policy In Dehradun) देहरादून के डॉग लवर्स ध्यान दें! छोटे घरों में नहीं पाल सकेंगे पिटबुल और  रॉटविलर जैसे खूंखार कुत्तेनगर निगम (Municipal Corporation) की ओर से तैयार की गई इस नीति में पालतू कुत्तों से जुड़े कई नियमों को स्पष्ट किया गया है, ताकि जिम्मेदार पालतू पालन (Responsible Pet Ownership) को बढ़ावा मिल सके।

पालतू कुत्ता छोड़ने पर ₹20 हजार जुर्माना और अभियोग की संभावना

पॉलिसी में यह प्रावधान किया गया है कि यदि किसी श्वान मालिक ने पालतू कुत्ते का परित्याग किया, तो पकड़े जाने पर ₹20 हजार का जुर्माना लगेगा। इसके अलावा स्थिति और प्रकरण के अनुसार अभियोग भी दर्ज कराया जा सकता है।

पंजीकरण में रेजिडेंट वेलफेयर सोसायटी की जवाबदेही तय

नई नीति में रेजिडेंट वेलफेयर सोसायटी (Resident Welfare Society/RWA) की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है। अब सोसायटी को अपने परिसर में मौजूद सभी पालतू कुत्तों का अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। यानी पंजीकरण को केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी न मानकर सामुदायिक जिम्मेदारी भी तय की गई है।

डॉग केयर सेंटर का पंजीकरण अनिवार्य

पॉलिसी के तहत डॉग केयर सेंटर (Dog Care Center) का पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि कुत्तों की देखभाल से जुड़े केंद्र मानकों के अनुसार संचालित हों और निगरानी व्यवस्था मजबूत हो सके।

पेट शॉप के लिए लाइसेंस जरूरी

नगर निगम की डॉग पॉलिसी में पालतू जानवरों से जुड़ी दुकानों यानी पेट शॉप (Pet Shop) के लिए लाइसेंस लेना भी जरूरी किया गया है। इससे पालतू पशुओं की बिक्री और देखभाल से जुड़े काम में पारदर्शिता आने की उम्मीद है।

लोगों और स्वयंसेवी संस्थाओं से मिले 22 सुझाव, पॉलिसी में संशोधन

नगर आयुक्त नमामी बंसल (Namami Bansal) के अनुसार, डॉग पॉलिसी को लेकर पीपल फॉर एनिमल (People for Animal), देवभूमि पेट वेलफेयर एसोसिएशन (Devbhoomi Pet Welfare Association) और कई लोगों ने व्यक्तिगत रूप से कुल 22 आपत्तियां और सुझाव दिए। इनका निस्तारण करते हुए नगर निगम ने पॉलिसी में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।

‘मजल’ नियम में बदलाव: अब साथ रखना जरूरी, आक्रामक होने पर लगाना होगा

पहले नीति में यह अनिवार्य किया गया था कि कुत्ते को कहीं ले जाते या घुमाते समय मजल (Muzzle) लगाना ही होगा। लेकिन पशु प्रेमियों की आपत्ति के बाद इस नियम में संशोधन किया गया।

अब प्रावधान यह होगा कि श्वान मालिक अपने साथ मजल जरूर रखें। यदि कुत्ता आक्रामक होता है, तब उसका उपयोग करना अनिवार्य होगा। यह बदलाव इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे सुरक्षा और पशु कल्याण—दोनों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है।

भविष्य में माइक्रोचिप लगाने की योजना

नीति में भविष्य के लिए कुत्तों में माइक्रोचिप (Microchip) लगाने का भी प्रावधान रखा गया है। पशु चिकित्सा अनुभाग के अनुसार, माइक्रोचिप लागू होने पर ऑनलाइन निगरानी में मदद मिलेगी और नियम तोड़ने वालों पर कार्यवाही करना आसान होगा।

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पॉलिसी लागू कब होगी? गजट अधिसूचना के बाद प्रभावी

वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वरुण अग्रवाल (Varun Agrawal) ने बताया कि गजट अधिसूचना (Gazette Notification) के बाद यह पॉलिसी लागू हो जाएगी। उनके अनुसार फरवरी 2026 की शुरुआत तक पूरी प्रक्रिया लगभग पूरी होने की संभावना है।

मेयर सौरभ थपलियाल (Saurabh Thapliyal) और नगर आयुक्त नमामी बंसल ने भी सभी श्वान मालिकों से अपील की है कि वे पालतू कुत्तों का पंजीकरण अनिवार्य रूप से कराएं और पॉलिसी लागू करने में निगम का सहयोग करें।

पॉलिसी में किए गए अन्य अहम संशोधन

पॉलिसी में कई बिंदुओं पर स्पष्ट नियम और छूट भी तय की गई है—

नगर निगम के अनुसार—

  • पंजीकरण करवाने पर कुत्ते के लिए टोकन दिया जाएगा।

  • ब्रीडर (Breeder) के लिए 300 गज का मानक लागू नहीं होगा।

  • आवारा कुत्ते को गोद लेने पर पंजीकरण और टीकाकरण (Vaccination) नि:शुल्क रहेगा।

  • लाइसेंस नवीनीकरण (Renewal) के लिए 30 दिन का समय मिलेगा। इसके बाद ₹500 प्रतिमाह जुर्माना लगेगा।

क्यों जरूरी है यह नीति और क्या असर पड़ेगा?

देहरादून जैसे तेजी से बढ़ते शहर में पालतू पशुओं की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में परित्याग, अनियमित पंजीकरण, और देखभाल केंद्रों की निगरानी न होना—सामाजिक समस्या बन सकती है। नई नीति लागू होने के बाद उम्मीद है कि—

  • पालतू कुत्तों का परित्याग घटेगा।

  • पंजीकरण के जरिए जिम्मेदारी तय होगी।

  • निगरानी तंत्र मजबूत होगा।

  • सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा और स्वच्छता में सुधार होगा।

क्या यह नीति पालतू पशुओं की देखभाल को बेहतर बनाएगी और शहर में व्यवस्था सुधार पाएगी? यह सवाल अब नीति के सख्त क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

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