बनने के साथ ही स्वाभिमान मोर्चा में गहरी होने लगी दरार ? दिनेश चंद्र मास्टर के इस्तीफे से मोर्चा के भविष्य पर उठे प्रश्न

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नवीन समाचार, देहरादून, 20 फरवरी 2026 (Rift in Swabhiman Morcha)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की क्षेत्रीय राजनीति में चुनावी वर्ष से पहले हलचल तेज हो गयी है। बॉबी पंवार (Bobby Panwar) के नेतृत्व वाले उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा (Uttarakhand Swabhiman Morcha) से संस्थापक सदस्य और ऋषिकेश (Rishikesh) मेयर चुनाव के चर्चित प्रत्याशी दिनेश चंद्र मास्टर (Dinesh Chandra Master) के उनके द्वारा ‘वीआरएस’ बताकर दिए गए इस्तीफे ने संगठन की एकजुटता पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। हाल के महीनों में यह मोर्चा को दूसरा बड़ा झटका माना जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय राजनीतिक ताकतों के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

क्या है इस्तीफे के पीछे का कारण

(Rift In Swabhiman Morcha) May be an image of text that says "बॉबी नहीं संभाल पाए मोर्चा के बड़े चेहरों को बॉबी पंवार के स्वाभिमान मोर्चा को लगा बड़ा झटका| मास्टर जी ने छोड़ दिया स्वाभिमान मोर्चा। मोहित के बाद मास्टर के स्वाभिमान मोर्चा छोड़ने के क्या रहे कारण?"मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दिनेश चंद्र मास्टर ने निजी कारणों का हवाला देते हुए अपना इस्तीफा भेजा है। हालांकि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि ऋषिकेश से चुनाव लड़ने की उनकी इच्छा और संगठन की ओर से पौड़ी (Pauri) से मैदान में उतारने की तैयारी के बीच असहमति उत्पन्न हुई थी।

मास्टर ने सार्वजनिक बातचीत में कहा कि उन्होंने स्वेच्छा से मोर्चा छोड़ा है और किसी प्रकार के दबाव या आंतरिक विवाद से इंकार किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे फिलहाल किसी अन्य दल में शामिल नहीं होंगे और स्वतंत्र रूप से जन मुद्दों पर कार्य जारी रखेंगे।

पहले भी लगे झटके

दिनेश चंद्र मास्टर के इस्तीफे से पहले मूल निवास-भूकानून आंदोलन (Mul Niwas-Bhukanoon Movement) से जुड़े मोहित डिमरी (Mohit Dimri) को भी मोर्चा से हटाया गया था। इसके अतिरिक्त सुनील सिलस्वाल (Sunil Silswal) के अलग होने की खबरें भी सामने आयी थीं। लगातार हो रहे इन घटनाक्रमों को मोर्चा के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

क्या क्षेत्रीय ताकतें बिखर रहीं

दिनेश मास्टर ने एक साक्षात्कार में कहा है कि वे पूर्व में कॉंग्रेस में रहे और रायबरेली में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं, लेकिन उत्तराखंड में राष्ट्रीय दलों की भूमिका ठीक नहीं मानते। अलबत्ता वह स्वयं को उत्तराखंड के मुद्दों पर “फ्रंट लाइन फाइटर” मानते हैं, उनकी किसी से नाराज नहीं हैं। सभी अपने रास्तों से राज्य के मूल मुद्दों के लिए कार्य कर रहे हैं। वह क्षेत्रीय शक्तियों के बीच सेतु की भूमिका निभाना चाहते हैं। उनके अनुसार विभिन्न समूह अलग-अलग मुद्दों पर काम कर रहे हैं, जिसे पूरी तरह बिखराव नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Elections 2027) में अपनी भूमिका को परिस्थितियों और जनता की मांग पर निर्भर बताया। साथ ही यह भी कहा कि वे किसी राष्ट्रीय दल में शामिल होने के इच्छुक नहीं हैं और क्षेत्रीय राजनीति को ही राज्य के हित में अधिक प्रभावी मानते हैं।

बॉबी पंवार की प्रतिक्रिया

मोर्चा नेतृत्व की ओर से संकेत दिया गया है कि कुछ नेताओं के जाने के बावजूद संगठन अपने लक्ष्य पर कायम है। बॉबी पंवार ने समर्थकों से एकजुट रहने की अपील की है और युवाओं तथा राज्य हित के मुद्दों को आगे बढ़ाने की बात कही है।

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क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार चुनावी वर्ष से पहले क्षेत्रीय दलों में असंतोष या पुनर्संरचना भविष्य के गठबंधनों और वोट समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। उत्तराखंड की राजनीति में क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय दलों की बहस लंबे समय से चल रही है, ऐसे में प्रमुख चेहरों की भूमिका आगामी समय में निर्णायक हो सकती है।

अब बड़ा प्रश्न यह है कि क्या क्षेत्रीय ताकतें एक मंच पर आयेंगी या अलग-अलग राह चुनेंगी। आने वाले महीनों में दिनेश चंद्र मास्टर की राजनीतिक दिशा और स्वाभिमान मोर्चा की रणनीति पर सबकी नजर रहेगी।

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