उत्तराखंड भाजपा का ‘मिशन 2027’: बेदाग छवि वाले चेहरों को आगे लाने के संकेत, संगठन में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज

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नवीन समाचार, देहरादून, 23 जनवरी 2026 (UK BJP-s Mission 2027)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से सियासी संकेत स्पष्ट होने लगे हैं कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को नया अध्यक्ष मिलने के बाद, अब प्रदेश संगठन में भी फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार भाजपा (BJP) का फोकस ऐसे चेहरों पर है जिनकी छवि बेदाग हो और जिन पर किसी प्रकार का विवाद न हो, ताकि चुनावी माहौल में नकारात्मक संदेश जाने से रोका जा सके।

‘विवादित चेहरों से दूरी’ और ‘युवा नेतृत्व’ पर जोर: भाजपा की चुनाव-पूर्व रणनीति

राष्ट्रीय नेतृत्व में बदलाव के बाद उत्तराखंड संगठन में भी हलचल

(UK BJP-S Mission 2027 Nitin Nabin: सिर्फ मेहनत नहीं, इस 'खास फैक्टर' ने नितिन नबीन को बनाया  बीजेपी का नया बॉस, जानें - bihar connection behind nitin nabin becoming  national president state considered lucky for bjp -भाजपा ने 20 जनवरी 2026 को 45 वर्षीय नितिन नवीन (Nitin Nabin) को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना है, जिसे पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव और युवा मतदाताओं को साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इसी क्रम में उत्तराखंड में भी संगठनात्मक स्तर पर बदलावों की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी संकेत दे रही है कि आगामी चुनावों में ऐसे नेता अग्रिम पंक्ति (Frontline) में नहीं दिखेंगे जिनकी सार्वजनिक छवि को लेकर आम लोगों के बीच नकारात्मक धारणा बनी हो।

नौ वर्षों की सत्ता के बाद ‘तीसरी लगातार जीत’ का लक्ष्य

उत्तराखंड में भाजपा लगभग नौ वर्षों से सत्ता में है और अब लगातार तीसरी जीत के लिए “मिशन 2027” (Mission 2027) जैसी रणनीति पर आगे बढ़ रही है। इसके लिए संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ संदेश और नेतृत्व का संतुलन साधने पर जोर है। पार्टी का आकलन है कि साफ-सुथरी छवि और लोकप्रियता वाले चेहरे चुनावी वातावरण को सकारात्मक दिशा दे सकते हैं।

संगठन को सक्रिय रखने की तैयारी: सात मोर्चों की संरचना पर पहले ही काम

भाजपा ने हाल के महीनों में अपने सात मोर्चों (Frontal Organisations—अनुषंगी संगठन/मोर्चे) को सक्रिय करने के संकेत दिए हैं।

  • 18 संगठनात्मक जिलों में सात मोर्चों के जिलाध्यक्षों की घोषणा की गई।

  • इसके बाद सातों मोर्चों की कार्यकारिणी (Executive Teams) में 268 पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां दिये जाने की जानकारी सामने आई है।

राजनीतिक दृष्टि से यह कदम बताता है कि भाजपा बूथ स्तर से लेकर जिले और प्रदेश स्तर तक संगठन को चुस्त-दुरुस्त रखना चाहती है। क्या यही तैयारी आगे चलकर प्रदेश नेतृत्व और चुनावी चेहरों में बदलाव का आधार बनेगी?

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संभावित फेरबदल में ‘युवाओं’ को प्राथमिकता के संकेत

सूत्रों के अनुसार, संभावित फेरबदल में युवाओं को विशेष तवज्जो मिल सकती है। राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से भी युवाओं और दूसरी पंक्ति (Second Line Leadership) को आगे बढ़ाने के संकेत माने जा रहे हैं।

भाजपा का लक्ष्य केवल 2027 चुनाव नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए नेतृत्व की “मजबूत कतार” (Leadership Pipeline) तैयार करना भी बताया जा रहा है। इसका सीधा असर संगठन के पदों, जिलों की कमान और चुनावी रणनीति तय करने वाली भूमिकाओं पर पड़ सकता है।

‘बेदाग छवि’ का जोर: चुनावी माहौल में क्यों जरूरी माना जा रहा?

भाजपा नेतृत्व यह नहीं चाहता कि चुनाव के समय ऐसे नेता आगे हों जिनके कारण पार्टी को जनता के बीच सफाई देनी पड़े। यही वजह है कि विवादों से जुड़े या नुकसानदेह छवि वाले पदाधिकारियों के स्थान पर नए चेहरों को अवसर देने की चर्चा तेज है।

यह रणनीति केवल राजनीतिक संदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध शासन, प्रशासन, योजनाओं के क्रियान्वयन और जनविश्वास से भी है। चुनावी समय में जनता अक्सर सवाल करती है—“काम किसने किया?” और “भरोसेमंद कौन है?” ऐसे में छवि आधारित रणनीति भाजपा को लाभ पहुंचा सकती है।

आगे क्या: कब और किस स्तर पर दिखेंगे बदलाव?

फिलहाल पार्टी ने औपचारिक रूप से बड़े फेरबदल की घोषणा नहीं की है, लेकिन संकेतों से यह माना जा रहा है कि—

  • संगठनात्मक दायित्वों में बदलाव,

  • कुछ पुराने चेहरों का पीछे होना,

  • और युवाओं/नए चेहरों को आगे लाना
    आने वाले दिनों में तेज हो सकता है।

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राज्य की राजनीति में 2027 से पहले यह बदलाव भाजपा की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है—क्योंकि टिकट वितरण, प्रचार नेतृत्व और सांगठनिक अनुशासन, तीनों पर इसका असर पड़ना तय है।

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