महिलाओं के हाथों में पंचायत की बागडोर, रसोई से निकल अब बन रही गांव की नेता
नवीन समाचार, नैनीताल, 2 जुलाई 2025 (Women in Three-tier panchayats of Uttarakhand)। उत्तराखंड में इस वर्ष पंचायत चुनावों की तस्वीर पहले से काफी बदली हुई नजर आ रही है। पंचायत राज में इस बार प्रधान पद की कुल 7499 में से 3772 यानी आधी से अधिक (50.3%) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं।
यह आंकड़ा वर्ष 2019 के पंचायत चुनावों से अधिक है। प्रदेश की पंचायती व्यवस्था में सभी वर्गों की महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है। इससे स्पष्ट है कि इस बार ग्राम पंचायतों से लेकर जिला पंचायत तक महिलाओं की उपस्थिति पहले से अधिक और निर्णायक होगी।
हालांकि आंकड़ों के अनुसार पिछले चुनाव में महिलाओं की भागीदारी लगभग 52 प्रतिशत रही बताई गई थी, जिनमें शायद वे महिलायें भी शामिल हों, तो अनारक्षित सीटों से भी जीती हों। बहरहालअब एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव की बयार महसूस की जा रही है। इस बार भी यह आंकड़ा और अधिक रहने की संभावना है।
कई महिलाओं ने बड़ी नौकरी छोड़कर संभाली राजनीति की कमान
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बार कई महिलाओं ने अपनी जमी-जमाई नौकरियों से इस्तीफा देकर पंचायत चुनावों में उतरने का निर्णय लिया है। कुछ ने गृहस्थी और बच्चों की जिम्मेदारी अपने पति, माता-पिता व अन्य परिजनों को सौंप दी है, तो कुछ के पति स्वयं उनका प्रचार कर रहे हैं और घर के सारे कार्यकर्म संभाल रहे हैं।
उदाहरण के लिए नैनीताल जनपद की कमलुवागांजा मेहता हल्द्वानी निवासी डॉ. छवि कांडपाल ने हल्द्वानी महिला डिग्री महाविद्यालय में करीब 10 वर्षों तक सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्य करने के बाद दो माह पूर्व जनसेवा की भावना से इस्तीफा दे दिया। वे अब रामड़ीआन सिंह जिला पंचायत सीट से चुनाव लड़ रही हैं। छवि के पति प्रचार में व्यस्त हैं और उनकी दोनों बेटियों की जिम्मेदारी उनके माता-पिता ने संभाल रखी है। इस सीट से निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तोलिया के भी चुनाव लड़ने की संभावना है।
इसी प्रकार, ऊधमसिंहनगर जिले के बाजपुर विकास खंड की हरसान ग्राम सभा से प्रधान पद की प्रत्याशी उर्मिता पंत ने एमए, एलएलबी व एलएलएम तक की शिक्षा प्राप्त की है। उनके पति विद्याधर कृषक हैं। चुनाव प्रचार के चलते उर्मिता घर के कार्यों पर ध्यान नहीं दे पा रही हैं, ऐसे में उनके पति ही टिफिन बनाने से लेकर बेटियों को विद्यालय-विद्यालय पहुंचाने तक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
हल्द्वानी के गुनीपुर जीवानंद सीट से बीडीसी सदस्य पद की प्रत्याशी नीलू नेगी कहती हैं कि वह प्रातः 9 बजे से रात्रि 8 बजे तक प्रचार में व्यस्त रहती हैं। नीलू के पति दीपक रेस्टोरेंट चलाते हैं और आजकल घर का खाना बनाना भी उनकी जिम्मेदारी बन गया है। नीलू बताती हैं कि उनके पति अच्छा भोजन बनाते हैं, ऐसे में उन्हें रसोई में जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
राज्य के 12 जिलों में 24 व 28 जुलाई को चुनाव, 31 को आएंगे परिणाम (Women in Three-tier panchayats of Uttarakhand)
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी सरगर्मी तेज हो चुकी है। प्रदेश के 12 जिलों (हरिद्वार को छोड़कर) में दो चरणों 24 जुलाई व 28 जुलाई को चुनाव होंगे तथा 31 जुलाई को परिणाम घोषित किये जायेंगे।
गौरतलब है कि महिलाओं को ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्य के रूप में सभी वर्गों में आरक्षण प्राप्त है। इसके साथ राजनीतिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक बदलाव की भी शुरुआत हो चुकी है, जहां महिलाएं अब निर्णय लेने वाले पदों पर भी पहुंचने लगी हैं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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