नवीन समाचार, टिहरी गढ़वाल, 29 जनवरी 2026 (Death of Woman-New Born)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के टिहरी गढ़वाल (Tehri Garhwal) जनपद अंतर्गत देवप्रयाग (Devprayag) क्षेत्र से सामने आई यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी सच्चाई पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला को समय पर समुचित उपचार और एंबुलेंस सुविधा न मिल पाने के कारण उसकी और गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो गई। यदि समय रहते चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो जाती, तो संभवतः दो जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
बताया गया कि ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना (Rishikesh–Karnaprayag Rail Project) में कार्यरत विनोद (Vinod) की 31 वर्षीय पत्नी शिखा (Shikha) को बुधवार को अचानक प्रसव वेदना शुरू हुई। परिजन और पड़ोस में रहने वाले दुकानदार शीशपाल भंडारी (Shishpal Bhandari) उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागी (Community Health Centre Bagi) लेकर पहुंचे। इस दौरान शाम करीब सात बजे ही आपातकालीन सेवा 108 (Emergency Service 108) को सूचना दे दी गई थी।
स्वास्थ्य तंत्र की चूक और मानवीय पीड़ा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शिखा को निजी वाहन से जैसे-तैसे स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उनकी स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी और वे अचेत होने लगीं। चिकित्सकों ने प्राथमिक परीक्षण के बाद उन्हें श्रीनगर (Srinagar) उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए संदर्भित (Refer) कर दिया। किंतु यहीं पर सबसे बड़ी लापरवाही सामने आई। चिकित्सालय परिसर में खड़ी सरकारी एंबुलेंस (Ambulance) उपलब्ध होने के बावजूद यह कहकर देने से मना कर दिया गया कि वाहन चालक (Driver) अनुपस्थित है और एंबुलेंस तकनीकी रूप से ठीक नहीं है।
मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए शीशपाल भंडारी ने स्वयं वाहन चलाकर शिखा को ले जाने की पेशकश की, लेकिन उसे भी स्वीकार नहीं किया गया। परिणामस्वरूप कीमती समय बीतता चला गया। लगभग दो घंटे बाद रात्रि करीब नौ बजे 108 सेवा पहुंची, परंतु तब तक बहुत देर हो चुकी थी। श्रीनगर ले जाते समय रास्ते में शिखा ने दम तोड़ दिया, जिससे गर्भस्थ शिशु की भी मृत्यु हो गई।
प्रशासनिक पक्ष और नियमों का सवाल
चिकित्सालय की प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. अंजना गुप्ता (Dr. Anjana Gupta) के अनुसार, शिखा लगभग 32 सप्ताह की गर्भवती थीं और गिरने के कारण उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। चिकित्सालय स्तर पर उनकी स्थिति स्थिर करने का प्रयास किया गया और 108 सेवा को भी सूचित किया गया था। वहीं, एंबुलेंस चालक के दोपहर में अवकाश पर चले जाने की बात कही गई, जिससे सरकारी वाहन का उपयोग नहीं हो सका।
यह घटना सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में आपातकालीन व्यवस्था, बैकअप प्रणाली और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है। राष्ट्रीय मातृ स्वास्थ्य योजनाओं, सुरक्षित प्रसव और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर ऐसी घटनाएं नीति और क्रियान्वयन के बीच की खाई को दर्शाती हैं। सवाल यह भी है कि जब ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं, तब एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंबुलेंस जैसी मूलभूत सुविधा क्यों विफल रही।
परिवार के लिए यह घटना आजीवन न भरने वाला घाव बन गई है, वहीं समाज में यह चिंता गहराती जा रही है कि यदि ऐसी परिस्थितियों में भी समय पर सहायता न मिले, तो आम नागरिक किस पर भरोसा करे।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















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