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नैनीताल चिड़ियाघर का न्यूनतम शुल्क 50 रुपये और औसत आय महज 37.29 रुपये, आरटीआई से हुआ खुलासा…

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-सूचना के अधिकार से प्राप्त सूचना से हुआ खुलासा
नवीन समाचार, नैनीताल, 5 मई 2019। मुख्यालय स्थित पंडित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान यानी नैनीताल चिड़ियाघर में आने वाले सैलानियों एवं यहां प्राप्त आय व होने वाले खर्च पर बड़ा खुलासा हुआ है। सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया को नैनीताल प्राणि उद्यान के वन क्षेत्राधिकारी दिनकर तिवाड़ी द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार राज्य बनने के बाद से यहां मार्च 2019 तक 32 लाख 52 हजार 833 देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचे हैं। इन सैलानियों से प्राणि उद्यान को कुल 12 करोड़, 13 लाख 14 हजार 300 रुपये की यानी औसतन प्रति सैलानी मात्र 37.29 रुपये की आय दिखाई गयी है। जबकि गौरतलब है कि वर्तमान में चिड़ियाघर के लिए बच्चों से 50 एवं बड़ों से 100 रुपये का टिकट लिया जाता है। वहीं इसके अलावा प्राणि उद्यान को सरकार से भी 5 करोड़ 83 लाख 64 हजार 200 रुपये की धनराशि विभिन्न कार्यों हेतु प्राप्त हुए हैं। यानी इस प्रकार प्राणि उद्यान पर एक तरह से इतनी धनराशि अतिरिक्त खर्च भी हुई है। बावजूद इस अवधि में प्राणि उद्यान में कुल 232 वन्य प्राणियों की मृत्यु हुई है। बच्चों से प्राप्त होने वाली धनराशि से भी कम औसत आय पर श्री तिवाड़ी ने पूछे जाने पर कहा कि दरेंएक वर्ष पूर्व मार्च 2018 से ही बढ़ी हैं। पूर्व में दरें बच्चों के लिए 20 व बड़ों के लिए 50 रुपये थीं। इसके अलावा खास दिनों पर बच्चों के समूहों को निःशुल्क चिड़ियाघर का भ्रमण कराया जाता है। ऐसे निःशुल्क घूमने वाले बच्चों की संख्या भी आगंतुक पर्यटकों में गिनी जाती है। इसलिए औसत कम आता है। साथ ही उन्होंने बताया कि चिड़ियाघर को वन्य जीवों को गोद लेने से भी आय की प्राप्ति होती है और चिड़ियाघर पर्यटकों व वन्य जीवों को गोद लेने से वन्य जीवों पर होने वाले खर्च व कर्मचारियों के वेतनों की प्रतिपूर्ति कर लेता है। नये निर्माणों के लिए सरकार से मदद मिलती है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 24 अप्रैल 2019। मुख्यालय स्थित पंडित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान में ग्वालियर स्थित गांधी जूलॉलिकल पार्क से चार वर्ष की युवा शिखा नाम की रॉयल बंगाल टाइगर प्रजाति की बाघिन को लाया गया है। शिखा को यहां लाया जाना इसलिये महत्वपूर्ण है कि चिड़ियाघर में पहले से मौजूद 13 साल की रानी और दो वर्ष पूर्व बेतालघाट में कंटीले तारों में फंसने के बाद बचाकर लाये गये 14.5 साल के बेताल नाम के बाघ उम्रदराज या कहें कि अपनी उम्र करीब पूरी कर चुके हैं। चिड़ियाघर की रेंज अधिकारी ममता चंद ने बताया कि ‘एनीमल एक्सचेंज प्रोग्राम’ के तहत इनके बदले ग्वालियर को दो तेंदुवे दिये गये हैं। इसके बाद यहां एक नर व दो मादा रॉयल बंगाल टाइगर तथा चार नर एवं दो मादा बंगाल टाइगर हो गये हैं। आगे युवा मादा बंगाल टाइगर शिखा का जोड़ा बनाने के लिए युवा नर बंगाल टाइगर लाने की भी कोशिश है। उन्होंने बताया कि 22 को शिखा यहां पहुंची और आज बुधवार से उसे यहां आने वाले सैलानियों के लिये खोल दिया, अलबत्ता आज वह नये स्थान पर आने के कारण अधिकांश समय शरमाते हुए झाड़ियों में ही दुबकी रही, और कम ही लोग उसके दीदार कर पाये।

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राष्ट्रीय सहारा, 09 दिसंबर,2017

-शेड्यूल एक का प्राणी भारतीय मोर करीब चार दिन से हैं ठंड की वजह से बीमार
-नैनीताल चिड़ियाघर में चिकित्सक डा. भारद्वाज कर रहे मनुष्यों के नेबुलाइजर से इलाज
नवीन जोशी, नैनीताल। संशाधनों की कमी से ही खासकर ‘अपने हित के लिए जुगाड़’ तैयार होते हैं। शायद इसीलिए भारत को ‘जुगाड़ों का देश’ भी कहा जाता है। सरोवरनगरी स्थित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान यानी नैनीताल चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक ने शेड्यूल-1 के मूक प्राणी ‘इंडियन पीफाउल’ यानी भारतीय मोर को बचाने के लिए नेबुलाइजर का जुगाड़ बनाकर मिसाल पेश की है। यह नैनीताल चिड़ियाघर के साथ ही उत्तराखंड राज्य का भी अपनी तरह का पहला मामला है।

देश में यूं तो मानव के लिए ही स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है, ऐसे में पशु-पक्षियों की स्वास्थ्य व चिकित्सा सुविधाओं की बात ही नहीं हो पाती है। उत्तराखंड में चिकित्सकों के बाद कभी-कभार ही मूक पशुओं के चिकित्सकों व संसाधनों की कमी पर चिंता हो पाती है, वन्य जीव-जंतुओं की चिकित्सा भगवान भरोसे ही है। राज्य में नैनीताल, रानीबाग, जिम कार्बेट पार्क व देहरादून चिड़ियाघर आदि में ही यह सुविधाएं कहने मात्र को उपलब्ध हैं। ऐसी स्थितियों के बीच नैनीताल चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डा. योगेश भारद्वाज ने तीन-चार दिन से ठंड से बीमार और श्वांस लेने में परेशानी महसूस कर रहे मोर पक्षी को बचाने के लिए कर्नाटक, तमिलनाडु आदि दक्षिण भारतीय राज्यों के पशु चिकित्सकों से संपर्क कर राय ली गयी। उन्होंने बताया कि वहां पशु-पक्षियों को ऐसी स्थितियों में खास तौर पर बने नेबुलाइजरों से सांस दी जाती हैं। इसकी अनुपलब्धता की स्थिति में डा. भारद्वाज ने बीमार मनुष्यों को कृत्रिम श्वांस चढ़ाने के लिए प्रयुक्त होने वाले ‘नेब्युलाइजर’ से जुगाड़ बनाया और इससे मोर का उपचार किया। डा.भारद्वाज ने बताया कि नेब्युलाइजर के जरिए मोर या किसी पक्षी को मनुश्यों की तरह मुंह-नांक से सांस नहीं दी जा सकती थी। इसलिए उन्होंने थर्मोकोल के एक बड़े बॉक्स को इससे जोड़ा और उसमें बीमार मोर को रखकर उससे कृत्रिम गर्म श्वांस देने का उपाय किया है। साथ ही इसे इंजेक्शन के माध्यम से अन्य दवाएं भी दी जा रही हैं। बताया कि मोर की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है, परंतु अपनी ओर से हरसंभव बेहतर उपाय किये जा रहे हैं। यह उपाय सफल रहा तो आगे अन्य वन्य जीवों को भी इस तरह की स्थितियों में वैकल्पिक उपचार देने की राह खुल सकती है।
वन्य जीवों को ठंड से बचाने के लिए किए हैं चिड़ियाघर में प्रबंध
नैनीताल। नैनीताल चिड़ियाघर वन्य जीवों, पशु-पक्षियों को शीतकाल में ठंड से बचाने के लिए उनके बाड़ों के आगे परदे लगाने तथा भोजन में उबले हुए अंडे और ‘एंटी स्ट्रेस बिटामिन’ और ‘मिनरल सप्लीमेंट’ भी दिए जाते हैं।

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-पांच सौ करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्राणी उद्यान में आधुनिक अस्पताल भी होगा जहां जानवरों के इलाज के साथ-साथ पहली दफा सर्जरी की भी व्यवस्था होगी

-वन्य जीव सफारी, मांसाहारी व शाकाहारी जीवों को अलग-अलग खंड, जैव विविधता पार्क और जुरासिक पार्क भी बनेंगे 

-वन्य जीवों के वासस्थल सीमेंट और कंक्रीट की बजाय लकड़ियों एवं हरित प्रणाली से तैयार किये जाएंगे

रविन्द्र देवालियल, नैनीताल (वार्ता)। वन्य जीवों के शौकीनों के लिये एक अच्छी खबर है। अफ्रीकी एवं यूरोपीय देशों की तरह देश में एक आधुनिक सुविधाओं से युक्त अंतरराष्ट्रीय प्राणी उद्यान जल्द अस्तित्व में आने वाला है जहां न केवल अफ्रीकी देशों की तर्ज पर वन्य जीव सफारी होगी बल्कि विदेशी जीव जंतु भी आकर्षण का केन्द्र होंगे। पांच सौ करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्राणी उद्यान में आधुनिक अस्पताल भी होगा जहां जानवरों के इलाज के साथ-साथ पहली दफा सर्जरी की भी व्यवस्था होगी। अलग-अलग प्रकृति के जीवों को अलग-अलग खंडों में रखा जाएगा। मांसाहारी व शाकाहारी जीवों को अलग-अलग खंडों में रखा जाएगा। यही नहीं, यहां पक्षियों की भी अलग दुनिया होगी, साथ ही वन्य जीवों व पर्यटकों के लिए आधुनिक सुख सुविधायें भी मौजूद होंगी।

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हल्द्वानी के गौलापार में 412 हेक्टेयर में बनाया जा रहा यह प्राणी उद्यान इसलिये भी अपनी तरह का पहला अंतरराष्ट्रीय प्राणी उद्यान होगा कि यह कार्बन न्यूट्रल जू होगा। यह संपूर्ण रूप से प्राकृतिक संसाधनों से निर्मित होगा। प्रकाश और ऊर्जा के लिए पवन और सौर ऊर्जा का प्रयोग किया जाएगा। इसको इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यहां से कार्बन उत्सर्जन कम से कम हो और जानवरों तथा पर्यटकों को यहां साफ सुथरा वातावरण मिल सके। इसके लिये यहां उसी प्रकार की तकनीक इस्तेमाल की जाएगी और संयत्र लगाये जाएंगे। वन्य जीवों के वासस्थल सीमेंट और कंक्रीट की बजाय लकड़ियों एवं हरित प्रणाली से तैयार किये जाएंगे। इस प्राणी उद्यान में पर्यटकों के मनोरंजन के लिये कई तरह की सुविधाएं होंगी। इसके बीचो बीच 5.5 एकड़ में कृत्रिम झील का निर्माण भी किया जा रहा है जहां पर्यटक नौकायन का लुत्फ उठा सकेंगे। इसके अलावा मोनो रेल और बच्चों के लिए टॉय ट्रेन भी संचालित की जाएगी।

वन्य जीवों के अलावा उद्यान का आकर्षण का केन्द्र यहां बनने वाला जैव विविधता पार्क और जुरासिक पार्क भी होगा। बच्चों के मनोरंजन के लिये चिल्ड्रन पार्क एवं घूमने के शौकीनों के लिए जॉगिंग पार्क अलग से तैयार किया जाएगा। पर्यटक इस प्राणी उद्यान में शेर, बाघ, तेंदुआ, भालू और हिरणों की अलग-अलग सफारी का लुत्फ उठा सकेंगे। सबसे बड़ी बात यह कि देश के अन्य प्राणी उद्यानों की तरह यहां वन्य जीव कैद नहीं रहेंगे। वे विचरण करते रहेंगे। यहां देशी वन्य जीवों के साथ आस्ट्रेलियाई, अमेरिकी और यूरोपीय वन्य जीव भी देखने को मिलेंगे और इनके लिये अलग-अलग जोन बनाये जाएंगे। पक्षियों और रेंगने वाले जीवों का भी यहां अपना अलग संसार होगा। खासकर सांप और मगरमच्छों की अलग दुनिया होगी। साथ ही वन्य जीवों के संरक्षण के लिए अलग से वृहद ब्रीडिंग सेंटर भी तैयार किया जा रहा है।

प्राणी उद्यान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और वन संरक्षक डा. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि प्राणि उद्यान अलग-अलग चरणों में बनाया जाएगा और यह दो साल के अंदर अस्तित्व में आ जाएगा। उन्होंने कहा कि सबसे पहले वन्य जीवों के संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए आधुनिक सुविधाओं वाला अस्पताल बनाया जा रहा है जिसमें छोटे-बड़े हर जीव का इलाज किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर आधुनिक तरीके से सर्जरी भी की जा सकेगी। इसके साथ ही एक रेस्क्यू सेंटर भी स्थापित किया जा रहा है। केन्द्र सरकार की ओर से इन दोनों सेंटर को बनाने के लिए साढ़े 11 करोड़ की धनराशि उपलब्ध कराई गई है।

बिन्दुवार कुछ विशेषताएं :

अलग अगल प्रकृति के जीवों के लिये अलग जोन
सेण्ट्रल जू अथाॅरिटी की ओर से इस प्राणि उद्यान का निर्माण किया जा रहा है। यह प्राणि उद्यान हल्द्वानी के गौलापार में 412 हेक्टेअर में बनाया जाएगा। यह देश का अपनी तरह का पहला अंतर्राष्ट्रीय प्राणि उद्यान होगा। इसमें सभी प्रकार के वन्य जीवों का समावेश होगा। बड़ी संख्या में विभिन्न प्रकार की प्रजाति के वन्य जीव यहां मिलेंगे। मांसाहारी व शाकाहारी जीवों को अलग अलग खंडों में रखा जाएगा। यही नहीं यहां चिड़ियाओं की भी अलग दुनिया होगी।
देश का पहला कार्बन न्यूट्रल प्राणि उद्यान
इस प्राणि उद्यान की खासियत है कि यह कार्बन न्यूट्रल जू होगा। साथ ही यह संपूर्ण रूप से प्राकृतिक संसाधनों से निर्मित्त होगा। प्रकाश व उर्जा के लिए पवन उर्जा व सोलर उर्जा का प्रयोग किया जाएगा। इस प्राणि उद्यान को ऐसा डिजायन किया गया है कि यह कार्बन उत्सर्जन न कर सके और जानवरों व पर्यटकों को यहां साफ सुथरा वातावरण व उर्जा मिल सके। इसके लिये यहां उसी प्रकार की तकनीक इस्तेमाल की जाएगी व संयत्र लगाये जाएंगे। वन्य जीवों के वासस्थल सीमेंण्ट व कंकरीट के बजाय लकड़ियों व हरित प्रणाली से तैयार किये जाएंगे।
वन्य जीवों के लिये होगा देश का पहला आधुनिक अस्पताल
यह प्राणि उद्यान देश में अपनी शैली का पहला प्राणि उद्यान होगा। इसमें वन्य जीवों के लिए जहां आधुनिक तकनीक का अस्पताल होगा वहीं अत्यंत सुख सुविधाओं से युक्त राहत केन्द्र बनाया जा रहा है। अब देश व आसपास के जंगलों में कोई भी जीव कुत्ते की मौत नहीं मारा जाएगा। मनुष्यों की तरह वन्य जीवों का संपूर्ण इलाज यहां किया जाएगा। यहां तक कि जरूरत पड़ने पर जानवरों की सर्जरी भी की जाएगी।
नौका विहार के लिये होगी झील व मोनो रेल
 देश में अभी तक बड़े बड़े प्राणि उद्यानों व पार्कों में ऐसी सुविधायें उपलब्ध नहीं हैं। इसके साथ ही इस प्राणि उद्यान के बीचोंबीच 5.5 एकड़ में कृत्रिम झील का निर्माण भी किया जा रहा है। पर्यटक यहां बोटिंग का लुत्फ उठा सकेंगे। इसके अलावा यहां आने वाले वन्य जीवों के लिए मोनो रेल व बच्चों के लिए टाॅय ट्रेन भी संचालित की जाएगी।
जैव विविधता पार्क के साथ ही होगा जुरासिक पार्क
वन्य जीवों के अलावा उद्यान का आकर्षण का केन्द्र यहां बनने वाला जैव विविधता पार्क व जुरासिक पार्क भी होगा। बच्चों के मनोरंजन के लिये चिल्ड्रन पार्क व घूमने के शौकीनों के लिये जाॅगिंग पार्क अलग से तैयार किया जाएगा। पर्यटक इस प्राणि उद्यान में शेर, बाघ, तेंदुआ, भालु व हिरनों की अलग अलग सफारी का लुत्फ ले सकेंगे। इसके लिए अलग अलग हिस्सों में अलग अलग वन्य जीवों के वास स्थल बनाये जायेंगे। शेर, बाघ भालु व हिरन सफारी होंगी। यही नहीं यहां अफ्रीकन सफारी भी मौजूद रहेगी।
देश ही नहीं विदेशी जानवर भी रहेंगे मौजूद
सबसे बड़ी बात यह कि देश के अन्य प्राणि उद्यानों की तरह यहां वन्य जीव यहां कैद नहीं रहेंगे। वे विचरण करते रहेंगे। यहां देशी वन्य जीवों की तरह ऑस्ट्रेलियन, अमेरिकन व यूरोपियन वन्य जीव भी देखने को मिलेंगे और इनके लिये अलग अलग जोन बनाये जायेंगे।
पक्षियों का होगा अलग संसार
इस प्राणि उद्यान में पक्षियों व रेंगने वाले जीवों का भी यहां अपना अलग संसार होगा। खासकर सांप व मगरमच्छों की अलग दुनिया होगी। साथ ही वन्य जीवों के संरक्षण के लिए अलग से वृहद ब्रीडिंग सेंटर भी तैयार किया जा रहा है। प्राणि उद्यान के अंतर्गत अलग हिस्से में पक्षियों की अलग दुनिया बसायी जा रही है। इसमें देश दुनिया के सभी पक्षी कलरव करते नजर आयेंगे।
दो साल में आ जाएगा अस्तित्व में
प्राणि उद्यान के सीईओ व वन संरक्षक डा0 पराग मधुकर धकाते ने बताया कि प्राणि उद्यान अलग अलग चरणों में बनाया जाएगा और यह दो साल के अंदर अस्तित्व में आ जाएगा। उन्होंने कहा कि सबसे पहले वन्य जीवों के संरक्षण व सुरक्षा के लिए एक आधुनिक सुख सुविधाओं से युक्त व्यापक अस्पताल बनाया जा रहा है। जिसमें छोटे से लेकर बड़े हर जीव का इलाज किया जाएगा व आवश्यकता पड़ने पर आधुनिक तरीके से सर्जरी भी की जा सकेगी। इसके साथ ही एक रेस्क्यू सेंटर भी स्थापित किया जा रहा है। केन्द्र सरकार की ओर से इन दोनों सेंटरों को बनाये जाने के लिए साढे़ ग्यारह करोड़ की धनराशि अवमुक्त की गयी है। डा0 धकाते के अनुसार यह देश का पहला अंतर्राष्ट्रीय व कार्बन न्यूट्रल प्राणि उद्यान होगा।
आकर्षण के प्रमुख केन्द्र
1. जैव विविधता पार्क,
2. जुरासिक थीम पार्क,
3. मोनो रेल,
4. टाॅय ट्रेन,
5. चिल्ड्रन पार्क,
6. इको केफेटेरिया,
7. बायोडाइवरसिटी पार्क,
8. वन्य जीव सफारी ( शेर, बाघ, तेंदुआ, भालू व हिरन),
9. अफ्रीकन सफारी,
10. ऑस्ट्रेलियन, यूरोपियन तथा अमेरिकन वन्य जीव जोन,
11. पक्षियों की दुनिया
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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….।मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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