डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 17 फरवरी 2026 (HC on Ayurveda University)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) में स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) ने आयुर्वेद विश्वविद्यालय (Ayurveda University) के शिक्षकों के अवशेष वेतन और कैरियर उन्नयन योजना (Career Advancement Scheme) भुगतान मामले में राज्य सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि शिक्षक नियमित सेवाएं दे रहे हैं तो उनका वेतन रोकना उचित नहीं है। इस आदेश से लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहे शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
न्यायालय की सख्ती और सरकार को निर्देश
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता (Justice Manoj Kumar Gupta) और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Justice Subhash Upadhyay) की खंडपीठ ने आयुर्वेद विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (Teachers Welfare Association) की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि शिक्षकों के बकाया भुगतान हेतु तत्काल आवश्यक धनराशि जारी की जाए। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 निर्धारित की गई है।
कार्यकारी परिषद के निर्णय के बावजूद भुगतान अटका
याचिका में बताया गया कि विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (Executive Council) की 9 दिसंबर 2025 की बैठक में अंतरिम व्यवस्था के रूप में शिक्षकों के छह माह के बकाया वेतन भुगतान का निर्णय लिया गया था। किंतु शासन से बजट स्वीकृत न होने के कारण यह निर्णय लागू नहीं हो सका।
शिक्षक संघ के अनुसार, कई महीनों से वेतन न मिलने से शिक्षकों के सामने गंभीर आर्थिक कठिनाई उत्पन्न हो गई है। न्यायालय ने भी इस स्थिति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सेवाएं लेने के बावजूद भुगतान रोकना न्यायसंगत नहीं है।
राज्य सरकार की आपत्तियां खारिज
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा कि वित्त सचिव (Finance Secretary), जो कार्यकारी परिषद के सदस्य भी हैं, ने कैरियर उन्नयन योजना के लाभ पर आपत्ति दर्ज की थी। न्यायालय ने यह तर्क अस्वीकार करते हुए कहा कि जब परिषद अंतरिम निर्णय ले चुकी है तो वर्तमान वेतन रोकने का कोई औचित्य नहीं बनता।
न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया कि अगली तिथि से पहले धनराशि जारी कर अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए। यह आदेश उच्च शिक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों के सेवा अधिकारों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य को भी मिली राहत
इसी खंडपीठ ने एक अन्य प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग (Health Department) को श्री गुरु राम राय डिग्री कॉलेज (Shri Guru Ram Rai Degree College), देहरादून (Dehradun) के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य विनय आनंद बौराई (Vinay Anand Bourai) के चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति तत्काल करने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी से स्वास्थ्य योजना (Health Scheme) का अंशदान विलंब से या एकमुश्त लिया गया हो, तो इस आधार पर चिकित्सा व्यय देने से इन्कार नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में सेवानिवृत्ति के बाद गंभीर बीमारी के उपचार हेतु उन्होंने 11,12,992 रुपये के बिल प्रस्तुत किए थे, जिन्हें तकनीकी आधार पर अस्वीकार कर दिया गया था।
क्यों महत्वपूर्ण है यह आदेश
यह निर्णय केवल वेतन भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, कर्मचारी अधिकार और सरकारी वित्तीय प्रक्रियाओं की पारदर्शिता से भी जुड़ा है। क्या अब लंबित भुगतानों के मामलों में तेजी आएगी? इस पर सबकी नजर रहेगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















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