उत्तराखंड में होमस्टे पंजीकरण के नियम बदलेंगे, बाहरी लोगों को नहीं मिलेगा लाभ, ग्रामीण क्षेत्रों पर रहेगा फोकस

नवीन समाचार, देहरादून, 5 जनवरी 2026 (New Rules for Homestay in UK)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से राज्य की पर्यटन नीति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला प्रस्ताव सामने आया है। उत्तराखंड सरकार होमस्टे योजना को लेकर बड़ा निर्णय लेने की तैयारी में है, जिसके तहत अब राज्य से बाहर के लोग होमस्टे पंजीकरण नहीं करा सकेंगे।
प्रस्ताव के अनुसार होमस्टे योजना का लाभ केवल उत्तराखंड के स्थायी निवासियों को मिलेगा और सरकार का पूरा फोकस ग्रामीण तथा पर्वतीय क्षेत्रों तक इस योजना को सीमित रखने पर होगा। इस फैसले का उद्देश्य स्थानीय लोगों को पर्यटन से सीधा लाभ देना, गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत करना और पलायन पर प्रभावी रोक लगाना है। पढ़ें पूर्व संबंधित समाचार : उत्तराखंड सरकार की होम स्टे के लिए बड़ी योजना, प्रति कमरे के लिए ₹60,000 अनुदान, ट्रेकरों को भी मिलेगा लाभ
होमस्टे योजना को स्थानीय केंद्रित बनाने की तैयारी
कैबिनेट में जल्द आएगा प्रस्ताव
पर्यटन विभाग की ओर से होमस्टे योजना से संबंधित एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, जिसे आगामी कैबिनेट बैठक में अंतिम मंजूरी के लिए लाया जा सकता है। शासन स्तर पर तैयार इस प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि आगे चलकर होमस्टे पंजीकरण का अधिकार केवल उत्तराखंड के स्थायी निवासियों तक सीमित रहेगा। राज्य सरकार का मानना है कि होमस्टे योजना मूल रूप से स्थानीय स्वरोजगार और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गयी थी, लेकिन हाल के वर्षों में बाहरी लोगों की बढ़ती भागीदारी से स्थानीय हित प्रभावित हो रहे हैं। पढ़ें पूर्व
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ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों पर विशेष जोर
प्रस्ताव में यह भी शामिल किया गया है कि शहरी क्षेत्रों में संचालित होमस्टे को चरणबद्ध तरीके से इस योजना के दायरे से बाहर किया जायेगा। सरकार का फोकस पूरी तरह से ग्रामीण और पर्वतीय इलाकों पर रहेगा, ताकि दूरस्थ गांवों तक पर्यटन पहुंचे और वहां के लोगों को घर बैठे आजीविका के अवसर मिल सकें। अधिकारियों का मानना है कि इससे सीमांत और पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा और युवाओं को अपने गांवों में ही काम करने का विकल्प मिलेगा। पढ़ें पूर्व संबंधित समाचार : नैनीताल में होमस्टे और पर्यटन स्वरोजगार योजनाओं के लिए लाभार्थियों का चयन, जिला विकास प्राधिकरण की समीक्षा बैठक भी हुई…
होमस्टे योजना के लाभ और वर्तमान व्यवस्था
क्यों अहम है यह योजना
उत्तराखंड में होमस्टे योजना पर्यटन की रीढ़ के रूप में उभरी है। इस योजना के माध्यम से स्थानीय लोगों को न केवल अतिरिक्त आय का साधन मिला है, बल्कि बड़ी संख्या में लोग स्वरोजगार से भी जुड़े हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार छह कमरों तक के आवास में होमस्टे संचालन की अनुमति दी जाती है। होमस्टे संचालकों को बिजली और पानी का बिल घरेलू दरों पर देना होता है और उन्हें वस्तु एवं सेवा कर के दायरे से भी बाहर रखा गया है, जिससे छोटे संचालकों को सीधा लाभ मिलता है। पढ़ें पूर्व संबंधित समाचार : नैनीताल के सुनकिया गाँव में शुरू हुआ महिलाओं का सामुदायिक होमस्टे ‘घस्यारी’
बाहरी लोगों के लिए क्या विकल्प रहेगा
प्रस्ताव में यह स्पष्ट किया गया है कि उत्तराखंड से बाहर के लोग यदि चाहें तो व्यावसायिक रूप से बेड एंड ब्रेकफास्ट के रूप में अपने आवास का संचालन कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें सभी आवश्यक करों का भुगतान करना होगा और वस्तु एवं सेवा कर पंजीकरण भी अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इससे व्यावसायिक पर्यटन और स्थानीय स्वरोजगार के बीच स्पष्ट अंतर बना रहेगा। पढ़ें पूर्व संबंधित समाचार : उत्तराखंड के एक गाँव में 63 वर्ष बाद बना नया घर….
सरकार और विभाग की मंशा
पर्यटन सचिव का पक्ष
इस संबंध में धीरज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि सरकार की मंशा होमस्टे योजना का वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों तक सीमित रखने की है। प्रस्ताव को अगली कैबिनेट बैठक में रखा जा रहा है और मंजूरी मिलने के बाद इसे शीघ्र लागू किया जायेगा। उनका कहना है कि यह निर्णय ग्रामीण उत्तराखंड को पर्यटन से स्थायी लाभ दिलाने की दिशा में एक अहम कदम होगा।
आगे क्या बदलेगा
यदि कैबिनेट से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो उत्तराखंड में होमस्टे योजना की दिशा और स्वरूप दोनों बदल जायेंगे। इससे एक ओर जहां स्थानीय निवासियों को सीधा लाभ मिलेगा, वहीं पर्यटन का दबाव शहरी क्षेत्रों से हटकर गांवों तक पहुंचेगा। क्या यह फैसला पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में सफल होगा। इसका उत्तर आने वाले वर्षों में सामने आयेगा।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।











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