ऑल वेदर रोड से रेल नेटवर्क तक, 25 वर्षों में कैसे और कितनी बदली उत्तराखंड की तस्वीर

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नवीन समाचार, देहरादून, 27 जनवरी 2026 (Uttarakhand Developement)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) से लेकर सीमांत पर्वतीय क्षेत्रों तक बीते 25 वर्षों में सड़क एवं रेल परिवहन के विकास की तस्वीर में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है। कभी केवल शानदार मौसम, बर्फीले पहाड़ों, हरी-भरी वादियों और चारधाम जैसी तीर्थ यात्राओं के लिए पहचानी जाने वाली देवभूमि की पहचान गड्ढों युक्त संकरी-सर्पीली सड़कों से थी, और राज्य में रेल नेटवर्क अंग्रेजों के जाने के बाद से एक इंच भी आगे नहीं बढ़ा था। लेकिन आज आधुनिक आधारभूत संरचना (Infrastructure) और आस्था के संतुलित मॉडल के रूप में उभर रही है।

यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुर्गम भूगोल और सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य ने विकास की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं। राज्य गठन के बाद शुरुआती वर्षों में सड़क, रेल और संपर्क सुविधाओं की कमी सबसे बड़ी चुनौती रही। अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं। चौड़ी और मजबूत सड़कें, नए राष्ट्रीय राजमार्ग, नदियों पर आधुनिक पुल, पर्वतों के भीतर बनती सुरंगें और तेजी से विस्तार करता रेल नेटवर्क उत्तराखंड की नई पहचान बन रहे हैं।

ऑल वेदर रोड परियोजना से बदली पर्वतीय यात्रा की तस्वीर

(Uttarakhand Developement) Char Dham Distance Reduced From Uttarakhand All Weather Road. उत्तराखंड ऑलवेदर  रोड से कम हुई चारधामों की दूरी, जानिए कहां कितनी दूरी घटी. Uttarakhand All  Weather Road Project ...चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना (Char Dham All Weather Road Project) को राज्य की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में गिना जा रहा है। इस परियोजना के तहत भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सुरंगों, उन्नत जल निकासी व्यवस्था और चौड़ी सड़कों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे हर मौसम में सुरक्षित यात्रा संभव हो सके। सरकार के अनुसार इससे चारधाम यात्रियों को सुविधा मिलने के साथ-साथ सैन्य आवश्यकताओं को भी मजबूती मिलेगी। यात्रा समय में कमी और आपात स्थितियों में तेज आवागमन इस परियोजना का बड़ा लाभ माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व में बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान (Badrinath Master Plan), केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण (Kedarnath Reconstruction) और हेमकुंड साहिब रोपवे (Hemkund Sahib Ropeway) जैसी परियोजनाएं देवभूमि को नई दिशा दे रही हैं। कुमाऊँ मण्डल में भी सीमांत क्षेत्रों जैसे माणा, गुंजी और जोलिंगकोंग तक अच्छी सड़क की पहुंच ने रणनीतिक और पर्यटन दोनों दृष्टियों से राज्य को मजबूत किया है।

रेल और सड़क नेटवर्क से जुड़े पहाड़

पहाड़ों तक रेल पहुंचाना लंबे समय तक सपना माना जाता रहा, लेकिन ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना (Rishikesh–Karnaprayag Rail Project) उस सपने को साकार करने की ओर अग्रसर है। लगभग 125 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का अधिकांश भाग सुरंगों से होकर गुजरेगा, जिससे चारधाम यात्रा और स्थानीय आवागमन सरल होगा। इसके अतिरिक्त टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन (Tanakpur–Bageshwar Rail Line) के सर्वे और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन ने भविष्य की संभावनाओं को और मजबूत किया है। टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन पर नवीन समाचार में प्रकाशित अन्य समाचार हाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं। 

धार्मिक नगरों का कायाकल्प और नए प्रतीक

डोबरा चांटी पुल पर हमारे ब्रिज केबल्स लगाए गए हैं।हरिद्वार (Haridwar) में गंगा रिवर फ्रंट, हरकी पौड़ी पुनर्विकास और नगर सौंदर्यीकरण से तीर्थ नगरी का स्वरूप बदला है। वहीं टिहरी (Tehri) का डोबरा-चांठी सस्पेंशन ब्रिज (Dobra Chanti Suspension Bridge) एशिया के लंबे पुलों में शामिल होकर विकास का प्रतीक बन चुका है। इससे न केवल दूरी और समय घटा है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय जीवन भी सुगम हुआ है।

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उत्तराखंड में आस्था, आधुनिक विज्ञान और विकास का यह संगम राज्य को नई पहचान दे रहा है। सरकार का लक्ष्य केंद्रीय और राज्य योजनाओं के माध्यम से देवभूमि को तेज़ी से आगे बढ़ते राज्यों की श्रेणी में स्थापित करना है। बीते 25 वर्षों में मजबूत नींव रखी जा चुकी है, जबकि आगे की राह और भी व्यापक संभावनाओं से भरी हुई मानी जा रही है।

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