EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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लोक गायक प्रहलाद मेहरा का 53 वर्ष की अल्पायु में दिल का दौरा पड़ने से असामयिक निधन हो गया है। हल्द्वानी के कृष्णा अस्पताल में उन्होंने बुधवार अपराह्न अंतिम सांस ली। पढ़ें प्रह्लाद मेहरा के उस कुमाउनी गीत-रंगभंग खोला पारी के बारे में, जिसे कहा जा रहा अब तक का सर्वश्रेष्ठ उत्तराखंडी गीत, पहाड़ी गीत न सुनने वाले भी सुनने लगे…यह भी पढ़ें : राहत का समाचार : जंगली जानवरों के हमले में घायल व्यक्तियों के इलाज पर उत्तराखंड सरकार उठाएगी ₹15 लाख तक खर्च, शासनादेश जल्द https://deepskyblue-swallow-958027.hostingersite.com/creation/बताया जा रहा है कि प्रह्लाद अपने हल्द्वानी स्थित घर पर रह रहे थे। बुधवार को अचानक उनकी तबीयत खराब होने पर परिवारजन उन्हें हल्द्वानी के कृष्णा अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके पार्थिव शरीर को उनके माता-पिता के लालकुआ बिंदूखत्ता के संजय नगर स्थित आवास पर ले जाया गया है, जहां उत्तराखंड के कई कलाकार और आम लोग उनके आवास पर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।प्रह्लाद मेहरा के यह गीत रहे प्रसिद्ध (Untimely demise of famous singer Prahlad Mehra)प्रह्लाद मेहरा ने 150 से ज्यादा गानों को अपनी आवाज दी थी। उनके गाये गीत खासकर बेड़ू पाको, चांदी बटना दाज्यू कुर्ती कॉलर मां, ऐजा मेरा दानपुरा, रंगभंग खोला पारी, हाय काकड़ी झिलमा, चंदना म्यारा पहाड़, पहाड़क चेली ले कभे नी खाए द्वि रोटी सुख ले, मेरी मधुली, का छ तेरो जलेबी को डाब, ओ हिमा जाग, न्योली, मासी को फूल, पहाड़ की चेली ले व पंछी उड़ि जानी आदि काफी प्रसिद्ध रहे हैं। (Untimely demise of famous singer Prahlad Mehra) उनके निधन से पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर है। प्रहलाद मेहरा कुमाऊं के प्रसिद्ध लोक गायक थे, जो लगातार कुमाऊं की संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम कर रहे थे। ऐसे में अचानक उनके निधन से लोक कलाकार बेहद दुखी है। प्रह्लाद मेहरा के निधन पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी समेत अन्य लोगों ने दुःख प्रकट किया है, प्रहलाद मेहरा के निधन से पूरे राज्य भर में शोक की लहर है। (Untimely demise of famous singer Prahlad Mehra)मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने X पर दी श्रद्धांजलि (Untimely demise of famous singer Prahlad Mehra)मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है, ‘प्रदेश के सुप्रसिद्ध लोक गायक प्रह्लाद मेहरा का निधन लोक संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। प्रह्लाद दा ने लोक संगीत के माध्यम से हमारी संस्कृति को विश्व पटल पर पहचान देने का अविस्मरणीय कार्य किया। आपके द्वारा गाए गए गीत सदैव देवभूमि की संस्कृति को आलोकित करेंगे।’ !’ (Untimely demise of famous singer Prahlad Mehra)यह भी पढ़ें : उत्तराखंड के 7 राजकीय मेडिकल कॉलेजों में 365 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती का प्रस्ताव, जल्द चयन बोर्ड को भेजा जाएगा अधियाचन...वहीं पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपने शोक संदेश में कहा है, ‘अपनी मधुर वाणी से कुमाउनी गीतों को अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक ले जाने वाले उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोकगायक, बाल्यकाल से मेरे अति प्रिय रहे छोटे भाई प्रह्लाद मेहरा के निधन से मन एवं हृदय कष्ट में है। उनका संघर्षमय जीवन प्रदेश की युवा पीढ़ी के लिये प्रेरणा का श्रोत रहेगा।’ (Untimely demise of famous singer Prahlad Mehra) सुनें का एक गीत :‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया विज्ञापन न केवल आपके व्यवसाय या संस्थान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाएगा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता को भी सशक्त बनाएगा। अग्रिम धन्यवाद। प्रह्लाद मेहरा की पारिवारिक जानकारी (Untimely demise of famous singer Prahlad Mehra)प्राप्त जानकारी के अनुसार दिवंगत लोक गायक प्रह्लाद सिंह मेहरा का जन्म 4 जनवरी 1971 को पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी तहसील के चामी भेंसकोट में शिक्षक रहे पिता हेम सिंह व माता लाली देवी के घर में हुआ था। प्रहलाद को बचपन से ही कुमाउनी गीत गाने और परंपरागत कुमाउनी वाद्य यंत्र बजाने का शौक रहा, और इसी शौक को प्रहलाद मेहरा ने अपना काम बना लिया। वह स्वर सम्राट गोपाल बाबू गोस्वामी और गजेंद्र राणा से प्रभावित होकर उत्तराखंड के संगीत जगत में आए।यह भी पढ़ें : एम्स ऋषिकेश में चमोली के दंपति ने नौ दिन के मृत नवजात का देहदान किया, चिकित्सा शोध को मिला मानवता का बड़ा योगदानवर्ष 1989 में अल्मोड़ा आकाशवाणी में उन्होंने स्वर परीक्षा पास की और वह अल्मोड़ा आकाशवाणी के ‘ए’ श्रेणी के गायक एवं उत्तराखंड के संस्कृति विभाग से पंजीकृत कलाकार भी रहे। उन्होंने 150 से अधिक बच्चों को भी संगीत सिखाया। वह देश के अनेक बड़े शहरों में स्टेज पर लाइव प्रस्तुतियां भी दे चुके हैं।वह अपने पीछे पत्नी हंसी देवी, पुत्र मनीष, नीरज व कमल मेहरा को शोक संतप्त छोड़ गये हैं। उनके पुत्र नीरज मेहरा वर्ष 2016 में छात्र संख्या के लिहाज से कुमाऊं विश्वविद्यालय के सबसे बड़े महाविद्यालय एमबीपीजी के निर्दलीय छात्र संघ अध्यक्ष रहे हैं। उनके छोटे भाई मनोहर सिंह मेहरा आरएसएस से जुड़े हैं।आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यहां क्लिक कर हमारे व्हाट्सएप चैनल से, फेसबुक ग्रुप से, गूगल न्यूज से, टेलीग्राम से, कू से, एक्स से, कुटुंब एप से और डेलीहंट से जुड़ें। अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें सहयोग करें..। (Untimely demise of famous singer Prahlad Mehra)Share this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like 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