EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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कुछ हद तक तस्वीर पेश कर रहे हैं। बुधवार को आए एबीपी न्यूज के ओपिनियन पोल सर्वे के नतीजे बताते हैं कि उत्तराखंड में एक बार फिर भाजपा की 36-40 सीटों के साथ सरकार बनने के आसार हैं। जबकि विपक्षी कांग्रेस को 26 से 30 सीटों पर ही संतुष्ट होना पड़ेगा। वहीं आप एक से तीन सीटों पर ही सिमट सकती है, जबकि अन्य को सिर्फ एक ही सीट मिल सकती है। अलबत्ता इस ओपिनियन पोल में मुख्यमंत्री के चेहरे पर 37 फीसदी वोटों के साथ पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पहले नंबर पर, जबकि 29 प्रतिशत वोटों के साथ पुष्कर सिंह धामी दूसरे, भाजपा के अनिल बलूनी 18 फीसदी वोटों के साथ तीसरे व आप के कर्नल अजय कोठियाल नौ फीसदी वोटों के साथ चौथी पसंद बने हुए हैं।वहीं जी न्यूज के सर्वे के अनुसार भाजपा को इस चुनाव में 31 से 35, कांग्रेस को 33 से 37, तथा आप व अन्य को 1-1 सीटें मिल सकती हैं, जबकि मुख्यमंत्री के रूप में हरीश रावत 41, धामी 26, बलूनी 14 व कोठियाल 10 फीसद लोगो की पसंद हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleयह भी पढ़ें : देखें ‘नवीन समाचार’ के ऑनलाइन सर्वे के परिणाम, किन मुद्दों व पार्टियों को कितने प्रतिशत लोगों के मिलेंगे वोट, कौन हैं पार्टियों से पसंदीदा प्रत्याशी ?आप भी दें ऑनलाइन सर्वे में अपनी राय व देखें ताज़ा परिणाम : उत्तराखंड विधानसभा चुनाव-2022 के मुद्दों, पार्टियों व प्रत्याशियों पर सबसे बड़ा ऑनलाइन सर्वेयह भी पढ़ें : उत्तराखंड में किसकी बनेगी सरकार, दो ओपिनियन पोल्स से जानिए जनता का मूडयह भी पढ़ें : ‘नवीन समाचार’ एक्सक्लूसिव: कुमाऊं मंडल की 29 सीटों के चुनावी समीकरण, कौन जीतेंगे-कौन जीत सकते हैं ?इस संस्करण की दूसरी कड़ी में आज प्रस्तुत है बागेश्वर जनपद की सीटों के राजनीतिक समीकरण:यह भी पढ़ें : अल्मोड़ा जनपद की सीटों के राजनीतिक समीकरण:Like this:Relatedयह भी पढ़ें : देखें ‘नवीन समाचार’ के ऑनलाइन सर्वे के परिणाम, किन मुद्दों व पार्टियों को कितने प्रतिशत लोगों के मिलेंगे वोट, कौन हैं पार्टियों से पसंदीदा प्रत्याशी ?डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 16 जनवरी 2022। यूं सभी प्रत्याशी अपनी-अपनी ओर से अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सबसे पसंदीदा प्रत्याशी के रूप में खुद को दिखा रहे हैं, परंतु ‘नवीन समाचार’ के ऑनलाइन सर्वे में एक अलग तस्वीर नजर आ रही है। आपकी प्रिय एवं भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ की ओर से अपने पाठकों के लिए उनके उत्तराखंड के आगामी विधानसभा चुनाव के मुद्दों, पसंदीदा पार्टियों व प्रत्याशियों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए ऑनलाइन सर्वे तैयार किया था। वर्तमान में जबकि अभी प्रमुख दल अपने प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया में हैं, इसलिए पहले चरण में इस सर्वेक्षण के परिणाम जारी किए जा रहे हैं। यहां हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह सर्वेक्षण रिपोर्ट अंतिम नहीं है। यह सर्वेक्षण आगे भी जारी रहेगा, और इसके परिणाम आगे भी जारी किये जायेंगे।आप भी दें ऑनलाइन सर्वे में अपनी राय व देखें ताज़ा परिणाम : उत्तराखंड विधानसभा चुनाव-2022 के मुद्दों, पार्टियों व प्रत्याशियों पर सबसे बड़ा ऑनलाइन सर्वे इस सर्वे में पहला प्रश्न था कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव-2022 में हमारे पाठक किन मुद्दों पर आप अपना वोट देंगे ? इस प्रश्न के उत्तर में उत्तराखंड राज्य में बेरोजगारी को सर्वाधिक 8.55 प्रतिशत, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों को 6.65 प्रतिशत, अच्छा प्रत्याशी को 6.6 प्रतिशत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों को 6.13 प्रतिशत, उत्तराखंड राज्य में रोजगार के साधनों की कमी को 6.08 प्रतिशत, उत्तराखंड राज्य में पलायन को 5.94 प्रतिशत, उत्तराखंड राज्य के अस्पतालों में डॉक्टरों व स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को 5.61 प्रतिशत, भ्रष्टाचार को 5.32 प्रतिशत, उत्तराखंड राज्य में सुख-सुविधाओं की कमी को 4.99 प्रतिशत, उत्तराखंड राज्य में अनियोजित विकास को 4.09 प्रतिशत, उत्तराखंड राज्य के स्कूलों में शिक्षकों की कमी को 4.09 प्रतिशत, अच्छी पार्टी को 4.09 प्रतिशत।केंद्र सरकार की नीतियों को 4.04 प्रतिशत, केंद्र सरकार के कार्यों के आधार पर 3.66 प्रतिशत लोगों ने वोट देने की बात कही। जबकि धामी सरकार पिछली कांग्रेस सरकारों से बेहतर मानते हुए 3.56 प्रतिशत, देश-राष्ट्रवाद के मुद्दे पर 3.28 प्रतिशत, धामी सरकार के भाजपा की त्रिवेंद्र व तीरथ सरकारों से बेहतर मानते हुए 3.09 प्रतिशत, उत्तराखंड राज्य में आवागमन के साधनों की कमी पर 2.85 प्रतिशत, राजनीतिक स्थायित्व पर 2.52 प्रतिशत, उत्तराखंड राज्य की अवधारणा के मुद्दों पर 2.42 प्रतिशत, धामी सरकार को पिछली कांग्रेस सरकारों से बुरी मानते हुए 2.42 प्रतिशत, उत्तराखंड राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैण चाहने के मुद्दे पर 2.28 प्रतिशत, अन्य मुद्दों पर 0.71 प्रतिशत, अपनी जाति या धर्म के प्रत्याशी को वोट देने वाले 0.48 प्रतिशत, धामी सरकार को भाजपा की त्रिवेन्द्र व तीरथ सरकारों से बुरी मानते हुए 0.33 प्रतिशत, अपने जान-पहचान या निकट सम्बन्ध के प्रत्याशी को 0.22 प्रतिशत लोगों ने वोट देने की बात कही।यह भी पढ़ें : किसान सुखवंत सिंह प्रकरण में उधम सिंह नगर पुलिस पर बड़ी कार्रवाई, आईटीआई कोतवाली प्रभारी सहित 2 उप निरीक्षक निलंबित और 10 पुलिसकर्मी लाइन हाजिरवहीं, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022 में आपका वोट किस पार्टी के प्रत्याशी को जायेगा, के प्रश्न पर भाजपा को सर्वाधिक 55.41 प्रतिशत, कांग्रेस को 30.67 प्रतिशत, आम आदमी पार्टी को 5.15 प्रतिशत, नोटा या कोई नहीं को 3.35 प्रतिशत, निर्दलीयों को 2.06 प्रतिशत, उत्तराखंड क्रांति दल को 1.55 प्रतिशत, बसपा को 0.77 प्रतिशत, सपा को 0.26 प्रतिशत, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी को 0.26 प्रतिशत व बामपंथी दलों व अन्य को 0.26 प्रतिशत लोगों ने वोट देने की बात कही।‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया विज्ञापन न केवल आपके व्यवसाय या संस्थान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाएगा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता को भी सशक्त बनाएगा। अग्रिम धन्यवाद। इसी तरह नैनीताल विधानसभा में 2022 के लिए कौन होना चाहिए पार्टियों से उम्मीदवार ? प्रश्न पर हेम आर्य को भाजपा से 25.42 प्रतिशत, संजीव आर्य को कांग्रेस से 23.31 प्रतिशत, सरिता आर्य कांग्रेस को 14.41 प्रतिशत, प्रकाश आर्य-भाजपा को 13.56 प्रतिशत, मोहन पाल भाजपा को 8.9 प्रतिशत, दिनेश आर्य भाजपा को 4.66 प्रतिशत, डॉ. भुवन आर्य आप को 4.24 प्रतिशत व अन्य को 3.81 प्रतिशत ने प्रत्याशी बनाए जाने के लिए वोट दिया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में किसकी बनेगी सरकार, दो ओपिनियन पोल्स से जानिए जनता का मूडनवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 12 जनवरी 2022। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव के बाद किसकी सरकार बनेगी, इस बारे में टाइम्स नाउ व वेटो तथा सीवोटर और एबीपी न्यूज की ओर से दो ‘ओपिनियन पोल्स’ किए गए हैं। आइए देखते हैं इन ओपिनियन पोल्स में क्या है जनता की राय:पहले बात टाइम्स नाउ नवभारत व वेटो के द्वारा 31 दिसंबर 2021 से 9 जनवरी 2022 के बीच 11,310 लोगों से बात करके जारी किए गए सर्वेक्षण की। इस सर्वेक्षण में चुनाव में बेरोजगारी को सर्वाधिक 47.20 प्रतिशत लोगों ने सबसे बड़ा मुद्दा बताया। इसके बाद महंगाई को 26.30 प्रतिशत लोगों ने दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा, हिंदू आस्था को 10.60 प्रतिशत लोगों ने और भ्रष्टाचार को 10.84 प्रतिशत लोगों ने बड़ा मुद्दा बताया। आगे क्या 5 साल में तीन मुख्यमंत्री बनाना भाजपा के विरोध में जाएगा ? इस प्रश्न पर 33.32 प्रतिशत ने हां व 52.50 प्रतिशत ने नां एवं 14.18 प्रतिशत ने कह नहीं सकते जवाब दिया।वहीं भाजपा मं मुख्यमंत्री के पद का सबसे पसंदीदा चेहरा कौन के प्रश्न पर पुष्कर सिंह धामी को 74.75 प्रतिशत, अनिल बलूनी को 16.98 प्रतिशत, त्रिवेंद्र सिंह रावत को 3.20 प्रतिशत व सतपाल महाराज को 3.05 प्रतिशत ने तथा कांग्रेस में सीएम पद का हरीश रावत को 61.84 प्रतिशत, प्रीतम सिंह को 31.04 प्रतिशत, गणेश गोदियाल को 4.10 प्रतिशत व यशपाल आर्या को 3.02 प्रतिशत लोगों ने तथा उत्तराखंड में दोनों पार्टियों से मुख्यमंत्री के लिए पहली पसंद के प्रश्न पर पुष्कर सिंह धामी को 42.34 प्रतिशत, हरीश रावत को 23.89 प्रतिशत, कर्नल अजय कोठियाल को 14.55 प्रतिशत एवं अन्य को 19.22 प्रतिशत लोगों ने पहली पसंद बताया।सर्वेक्षण में उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों की 36 सीटों में से भाजपा को 28-30, कांग्रेस को 4-5 व आम आदमी पार्टी को 4-5 सीटें एवं भाजपा को 45.40 प्रतिशत, कांग्रेस को 26.45 प्रतिशत व आप को 17.90 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना जताई गई, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों की 34 सीटों में से भाजपा को 16-20, कांग्रेस को 8-10 व आप को 1-3 सीटें तथा भाजपा को 39.20 प्रतिशत, कांग्रेस को 35.40 प्रतिशत व आप को 15.38 प्रतिशत वोट जबकि कुल मिलाकर उत्तराखंड राज्य में भाजपा को 44-50, कांग्रेस को 12-15 तथा आप को 5-8 सीटें एवं भाजपा को 43.09 प्रतिशत, कांग्रेस को 30.13 प्रतिशत व आप को 16.25 प्रतिशत वोट मिलने की बात कही गई है।वहीं एबीपी न्यूज व सीवोटर के ओपिनियन पोल के अनुसार भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में नजदीकी मुकाबला हो सकता है। ओपिनियन पोल के अनुसार भाजपा को 31 से 37, कांग्रेस को भी 30 से 36 सीटें मिल सकती हैं, जबकि आम आदमी पार्टी को 2-4 सीटों पर सिमट सकती है। इस सर्वेक्षण के अनुसार इस चुनाव में भाजपा को 39 फीसदी, कांग्रेस को 37 फीसदी, आम आदमी पार्टी के खाते में 13 फीसदी तथा अन्य को 11 फीसदी वोट मिल सकते हैं। उल्लेखनीय है कि 2017 के चुनाव में भाजपा को 46 फीसदी व कांग्रेस को 33 फीसदी वोट मिले थे।इसके अलावा इस ओपिनियन पोल में शामिल सर्वाधिक 37 फीसदी लोगों ने कांग्रेस नेता हरीश रावत को मुख्यमंत्री पद के लिए पहली पसंद बताया तो 29 फीसदी लोग पुष्कर सिंह धामी को दोबारा मौका देना चाहते हैं। 18 फीसदी लोग भाजपा के अनिल बलूनी व 9 फीसदी ने आम आदमी पार्टी के सीएम उम्मीदवार कोठियाल को पसंद किया तो 7 फीसदी किसी अन्य को मुख्यमंत्री पद पर देखना चाहते हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : 'टीम इंडिया' में उत्तराखंड मूल के एक और युवा खिलाड़ी ‘बेबी एबी’-आयुष बड़ोनी की एंट्री, मौका मिलने-खेलने और गंभीर के पूर्व बयान पर चर्चा तेजयह भी पढ़ें : ‘नवीन समाचार’ एक्सक्लूसिव: कुमाऊं मंडल की 29 सीटों के चुनावी समीकरण, कौन जीतेंगे-कौन जीत सकते हैं ?डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 7 जनवरी 2022। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव अब करीब हैं। कभी भी चुनाव आचार संहिता लागू हो सकती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि राजनीतिक दल किस प्रत्याशी को टिकट देंगे और किस प्रत्याशी व पार्टी की जीतने की संभावना है। सत्तारूढ़ दल भाजपा जहां उत्तराखंड के हर चुनाव में सत्ता परिवर्तन का इतिहास बदलने की कोशिश में है, वहीं विपक्षी कांग्रेस इसी भरोसे चुनाव जीतने की उम्मीद पाल रही है। आम आदमी पार्टी पहली बार किंगमेकर की भूमिका में आने की इच्छा के साथ चुनाव मैदान है। फिर भी स्वाभाविक तौर पर सत्तारूढ़ दल-भाजपा की प्रतिष्ठा सर्वाधिक दांव पर है। ‘नवीन समाचार’ ने भी इस संबंध में कुमाऊं मंडल की 29 सीटों पर एक सर्वेक्षण किया है, जिसमें सीटवार निम्नवत् तथ्य उभर कर आए हैं।इस संस्करण की छठी कड़ी में आज प्रस्तुत है ऊधमसिंह नगर जनपद की सीटों के राजनीतिक समीकरण:रुद्रपुर: भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल एक बार फिर चुनाव जीत सकते हैं। कांग्रेस में पूर्व विधायक तिलक राज बेहड़ पर संशय बना हुआ है।खटीमा: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी राह निष्कंटक कर चुके हैं। कांग्रेस से कार्यकारी अध्यक्ष व उनके पूर्व प्रतिद्वंद्वी भुवन कापड़ी का टिकट पक्का है।सितारगंज: भाजपा विधायक सौरभ बहुगुणा जीतते नजर आ रहे हैं।नानकमत्ता: किसान आंदोलन के बावजूद भाजपा विधायक डॉ. प्रेम सिंह राणा की राह कठिन नहीं है।गदरपुर: भाजपा सरकार में शिक्षा मंत्री के लिए राज्य में अब तक किसी भी शिक्षा मंत्री के चुनाव न जीतने का मिथक तोड़ने की चुनौती है। कांग्रेस से स्वर्गीय जनकराज शर्मा परिवार की सुरेशी शर्मा के अलावा शिल्पी अरोड़ा भी दावेदार हैं।बाजपुर: भाजपा से कांग्रेस में वापस लौटे निवर्तमान विधायक यशपाल आर्य की राह अपनों से घिरकर आसान नहीं है। अलबत्ता, भाजपा के पास भी बेहतर प्रत्याशी नहीं है।काशीपुर: भाजपा विधायक हरभजन चीमा के खुद की जगह चुनाव लड़ाने के ऐलान के बाद स्थितियां बदल गई हैं। चीमा खुद लड़ते तो जीत सकते हैं, पर अन्य की राह निष्कंटक नहीं है। आआपा से बाली कांग्रेस प्रत्याशी के साथ मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकते हैं।जसपुर: कांग्रेस से आदेश चौहान विधायक हैं व मजबूत हैं। भाजपा से कांग्रेस के पूर्व में विधायक रहे डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल आआपा के यूनुस चौधरी के मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने के साथ भाजपा को जीत की राह पर ला सकते हैं।किच्छा: यह सीट दोनों ओर असमंजस पूर्ण है। पिछले चुनाव में हरीश रावत को हराने वाले भाजपा विधायक राजेश शुक्ला यहां कमजोर हुए हैं। कांग्रेस में भी स्थिति ठीक नहीं है। तिलक राज बेहड़ के भी यहां से आने की चर्चा है। भाजपा से अजय तिवारी बेहतर प्रत्याशी हो सकते हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।इस संस्करण की पांचवी कड़ी में आज प्रस्तुत है नैनीताल जनपद की सीटों के राजनीतिक समीकरण:प्राधिकरण द्वारा लगाया गया आई लव नैनीताल का बोर्ड।नैनीताल: पिछली बार भाजपा के साथ ही अपने प्रभाव के कांग्रेसी नेताओं व वोटरों के वोटों से जीते निवर्तमान विधायक संजीव आर्य भाजपा से कांग्रेस में जाने, और इस कारण इस बार केवल कांग्रेसी वोटों के भरोसे सिमटने व भाजपा को बहुत हल्का डेंट देने के बावजूद जीतते नजर आ रहे हैं। भाजपा से दिनेश आर्य पार्टी संगठन व संघ और मोहन पाल कुछ नेताओं के भरोसे टिकट की उम्मीद में हैं। कांग्रेस की पूर्व विधायक सरिता आर्य के निर्णय पर भी चुनाव का मूड प्रभावित हो सकता है।भीमताल: पिछली बार निर्दलीय जीते राम सिंह कैड़ा को भाजपा से टिकट मिलना और भाजपा से कम से एक का बागी होना तय लग रहा है। कांग्रेस से दान सिंह भंडारी के अलावा निर्दलीय लाखन सिंह नेगी का चुनाव लड़ना व मुकाबला त्रिकोणीय होना तय है। भीमताल कैड़ा अथवा लाखन दोनों की जीत की स्थितियों में इतिहास को दोहरा सकता है।रामनगर: भाजपा के दीवान सिंह बिष्ट विधायक हैं। कांग्रेस से कभी हरीश रावत के सबसे करीबी और अब सबसे दूर हो चुके कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत टिकट की जुगत में हैं। ऐसे में लंबे समय से विधायक बनने की जुगत में लगे संजय नेगी विकल्प तलाश सकते हैं और राजनीतिक हवा बदल सकते हैं।लालकुआं: राज्य में तीसरे सबसे बड़े अंतर से जीते चंपावत के कैलाश गहतोड़ी की तर्ज पर दूसरे सबसे बड़े अंतर से जीते नवीन दुम्का को भी अपनों से ही सबसे बड़ी चुनौती मिल रही है। पार्टी को कई चुनाव जिता चुके और अपनी कुर्सी बचाकर दूसरी बार के जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट विकल्प हो सकते हैं। कांग्रेस से पूर्व विधायक हरीश दुर्गापाल के साथ ही पूर्व ब्लॉक प्रमुख संध्या डालाकोटी बेहतर प्रत्याशी साबित हो सकते हैं।कालाढुंगी: पूर्व में चुनाव लड़ने से इंकार कर चुके कबीना मंत्री बंशीधर भगत की परंपरागत सीट है। बेटे को चुनाव लड़ाना चाहते थे, लेकिन लगता है कि खुद ही चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे। प्रत्याशी बदला तो सीट फंस सकती है। कांग्रेस से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के पति महेश शर्मा बेहतर प्रत्याशी हो सकते हैं।हल्द्वानी: डॉ. इंदिरा हृदयेश के नेता प्रतिपक्ष रहते असामयिक मृत्यु के कारण रिक्त हुई इस सीट से उनके पुत्र सुमित हृदयेश स्वाभाविक उम्मीदवार हैं। सहानुभूति खो चुके हैं, किंतु फिर भी इंदिरा हृदयेश के विरासत वोट पाने की हैसियत रखते हैं। हरीश रावत उन्हें टिकट देने के अपने बयान को अपने शब्दों से पलट चुके हैं। यदि रावत की चली तो सुमित का टिकट कट जाए तो सीट के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल सकते हैं। फिलहाल मेयर जोगेंद्र पाल सिंह रौतेला भाजपा के सबसे प्रबल दावेदार हैं, जो इंदिरा हृदयेश को भी कड़ी टक्कर दे चुके हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : छुट्टी नहीं मिली तो कर्मचारियों ने यमकेश्वर के माला गांव में एआई से दिखा दिया बब्बर शेर, वन विभाग की जांच में खुली पोल....इस संस्करण की चौथी कड़ी में आज प्रस्तुत है चंपावत जनपद की सीटों के राजनीतिक समीकरण:चम्पावतचंपावत: कैलाश गहतोड़ी 2017 में प्रदेश में तीसरे सबसे बड़े अंतर से चुनाव जीते थे। काशीपुर में रहकर चंपावत का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी रही हैं। पार्टी में ही काफी विरोध है। स्थानीय को टिकट देने की मांग उठ रही है। सुभाष बगोली व गोविंद सामंत बेहतर विकल्प हो सकते हैं। कांग्रेस में पूर्व विधायक हेमंत खर्कवाल का टिकट पक्का है। पर जनता में उनकी छवि को लेकर भी उहापोह है।लोहाघाट: भाजपा विधायक पूरन फर्त्याल जनता के लिए कई बार सरकार के लिए मुसीबत बन चुके हैं, फिर भी न जनता की पसंद बन सके हैं, न पार्टी की। पूर्व में चंपावत सीट पर सक्रिय रहे और दिल्ली में बड़े कारोबार के साथ स्थानीय युवकों को रोजगार दिलाने वाले नरेंद्र लड़वाल पार्टी के इशारे पर यहां सक्रिय बताए जा रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व विधायक खुशाल सिंह अधिकारी के आगे बेहतर प्रत्याशी साबित हो सकते हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।इस संस्करण की तीसरी कड़ी में आज प्रस्तुत है पिथौरागढ़ जनपद की सीटों के राजनीतिक समीकरण:पिथौरागढ़: पूर्व मंत्री प्रकाश पंत की असामयिक मृत्यु के बाद उनकी पत्नी चंद्रा पंत सहानुभूति लहर में चुनाव जीतकर भाजपा विधायक हैं, किंतु जन अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पाई हैं। कांग्रेस से पूर्व विधायक मयूख महर की जीत पक्की मानी जा रही है। भाजपा क्षत्रिण-ब्राह्मण काम्बिनेशन की परवाह न कर नगर पालिकाध्यक्ष राजेंद्र रावत को टिकट देकर उन्हें भविष्य के लिए तैयार कर सकती है।धारचूला: पूर्व में हरीश रावत के लिए अपनी सीट कुर्बान करने वाले हरीश धामी कांग्रेस से विधायक हैं, और मजबूत नजर आते हैं। वीरेंद्र पाल को भाजपा पहले आजमा चुकी है। ऐसे में भाजपा ब्लॉक प्रमुख धन सिंह धामी को टिकट देकर मुकाबला अधिक कड़ा कर सकती है।डीडीहाट: कबीना मंत्री बिशन सिंह चुफाल त्रिकोणीय संघर्ष में चुनाव जीतते रहे हैं। छह बार से विधायक हैं। हर बार की तरह इस बार भी उनके विरुद्ध एंटी इंकमबेंसी है। कांग्रेस से प्रदीप पाल को टिकट मिल सकता है। किशन भंडारी निर्दलीय के तौर पर इस बार कुछ कमजोर हुए हैं। फिर भी चुफाल जीत सकते हैं। गंगोलीहाट: मीना गंगोला भाजपा से विधायक हैं। उनके पति के प्रति जनता में काफी नाराजगी हैं। पार्टी के पास उनकी जगह कोई दूसरा दमदार विकल्प भी नहीं है। कांग्रेस से नारायण राम आर्य की यह परंपरागत सीट है। उनसे भी जनता खुश नहीं है। कांग्रेस से खजान गुड्डू भी ताल ठोक रहे हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।इस संस्करण की दूसरी कड़ी में आज प्रस्तुत है बागेश्वर जनपद की सीटों के राजनीतिक समीकरण:बागेश्वर: भाजपा से विधायक चंदन राम दास एकमात्र प्रभावी प्रत्याशी हैं। कांग्रेस से रंजीत दास को टिकट मिल सकता है। बसपा से लौटे बसंत कुमार आम आदमी पार्टी की ओर से त्रिकोणीय संघर्ष खड़ा कर सकते हैं। सीट भाजपा के पक्ष में नजर आती है।कपकोट: पूर्व मंत्री बलवंत सिंह भौर्याल भाजपा विधायक हैं। इस बार जनापेक्षाओं से कमतर साबित हुए हैं। कांग्रेस से पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण का टिकट पक्का है। भौर्याल की जगह सुरेश गड़िया पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी से निकटता के बल पर टिकट की उम्मीद कर रहे हैं, किंतु पूर्व विधायक शेर सिंह गड़िया भाजपा से बेहतर विकल्प हो सकते हैं। भाजपा, बसपा आदि से लौटे भूपेश उपाध्याय आआपा से मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकते हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : अल्मोड़ा जनपद की सीटों के राजनीतिक समीकरण:अल्मोड़ा: अल्मोड़ा जनपद मुख्यालय की इस पूर्व में बारामंडल कही जाने वाली सीट से उत्तराखंड के विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान विधायक हैं। कांग्रेस से पूर्व में विधायक रहे मनोज तिवारी को टिकट मिलना तय माना जा रहा है। चौहान की स्थिति यहां अच्छी नहीं है। भाजपा से कैलाश शर्मा उनसे बेहतर उम्मीदवार साबित हो सकते हैं। जबकि चौहान अपना टिकट कटना तो एक बार बर्दास्त कर सकते हैं, कैलाश शर्मा को किसी कीमत पर टिकट उन्हें मंजूर नहीं है। फिलहाल सीट का झुकाव कांग्रेस की ओर लगता है।जागेश्वर: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल कांग्रेस से विधायक हैं, उनका टिकट भी पक्का है, और वह मजबूत नजर आते हैं। भाजपा से सुभाष पांडे उन्हें कड़ी टक्कर दे सकते हैं। कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन सिंह मेहरा भी भाजपा से दावेदार हैं।सोमेश्वर: प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य विधायक हैं। कांग्रेस से पूर्व में विधायक रहे व सांसद प्रदीप टम्टा को टिकट मिलना कमोबेश तय है। रेखा के खिलाफ भी यहां नाराजगी है, फिर भी वे ही हैं जो भाजपा के टिकट पर जीत सकती हैं। राजेंद्र बाराकोटी भी भाजपा से मजबूत प्रत्याशी हो सकते हैं। यहां दोनों दलों में बराबरी का मुकाबला है।रानीखेत: विधानसभा में उप नेता करन महरा विधायक हैं। भाजपा के लिए यह सीट नैनीताल सांसद व केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट की प्रतिष्ठा से जुड़ी है। टिकट के लिए भट्ट की पसंद के रूप में हल्द्वानी की पूर्व पालिकाध्यक्ष रेनु अधिकारी के पति महेंद्र मेहरा कुछ समय से सक्रिय हैं। वहीं भट्ट के खिलाफ लगातार ताल ठोकने वाले व भाजपा से निश्काषित परंतु बंशीधर भगत के भाजपा अध्यक्ष बनने पर उनके साथ नजर आए प्रमोद नैनवाल लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय हैं और निर्दलीय चुनाव भी लड़ चुके हैं।द्वाराहाट: सैक्स स्केंडल से चर्चित भाजपा के महेश नेगी विधायक हैं। उक्रांद से पुष्पेश पांडे भी यहां से विधायक रहे हैं। क्षेत्र में काफी सक्रिय हैं, पर पार्टी के भीतर से उन पर लगे आक्षेपों को हवा दी जा रही है। कैलाश भट्ट भी भाजपा के लिए बेहतर प्रत्याशी साबित हो सकते हैं।सल्ट: विधायक भाई सुरेंद्र जीना की असामयिक मौत के भाई पूरी सरकार के समन्वित प्रयासों से बमुश्किल चुनाव जीते महेश नेगी भाजपा विधायक हैं। उनकी ही पार्टी के दिनेश कोटनाला लगातार उनका विरोध मारपीट के स्तर तक कर रहे हैं। उनसे मामूली अंतर से हारीं गंगा पंचोली दुबारा कांग्रेस प्रत्याशी हो सकती हैं। भाजपा से यशपाल रावत यहां बेहतर विकल्प हो सकते हैं।आगे हम इसी लिंक पर हर रोज अगले छह दिनों में कुमाऊं के एक-एक जनपद की सीटों के समीकरण प्रस्तुत करेंगे। इसके लिए इस लिंक को हर रोज रिफ्रेश करते रहें। कमेंट बॉक्स में अपनी निश्पक्ष टिप्पणी दे सकते हैं। हम कोशिश करेंगे कि अगले सर्वेक्षण में आपके मत को भी शामिल करेंगे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।Share this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading...Related Post navigationभाषा के काम सरकार के भरोसे नहीं हो सकते, समाज को आगे आना होगा: नरेंद्र सिंह नेगी नैनीताल के निकटवर्ती पहाड़ी गांव-देवीधूरा तक चढ़ आया हाथियों का झुंड
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