EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / کٲشُرКыргызKurdîKʋsaalLëblaŋoлаккулезгиLugandaLingálaລາວلۊری شومالیlüüdidxʷləšucidmadhurâमैथिलीŊmampulliMalagasyKajin M̧ajeļമലയാളംМонголᠮᠠᠨᠵᡠManipuriма̄ньсиဘာသာမန်mooreमराठीမြန်မာ閩南語 / Bân-lâm-gú閩南語(漢字)閩南語(傳統漢字)Bân-lâm-gú (Pe̍h-ōe-jī)Bân-lâm-gú (Tâi-lô)KhoekhoegowabNorsk (bokmål)नेपालीनेपाल भाषाli nihanawdmNorsk (nynorsk)ngiembɔɔnߒߞߏSesotho sa LeboaThok NaathChichewaNzemaଓଡ଼ିଆਪੰਜਾਬੀPiemontèisΠοντιακάⵜⴰⵔⵉⴼⵉⵜTarandineрусскийसंस्कृतсаха тылаᱥᱟᱱᱛᱟᱞᱤ (संताली)सिंधीکوردی خوارگDavvisámegiellaKoyraboro SenniSängöⵜⴰⵛⵍⵃⵉⵜတႆးසිංහලᠰᡞᠪᡝSlovenčinaСрпски / srpskiSesothoSENĆOŦENSundaSvenskaŚlůnskiதமிழ்ತುಳುతెలుగుไทยትግርኛትግሬцӀаӀхна мизSetswanaChiTumbukaTwiⵜⴰⵎⴰⵣⵉⵖⵜудмуртУкраїнськаاردوOʻzbekchaꕙꔤTshiVenḓaVènetoWaaleWolofLikpakpaanlYorùbá中文中文(中国大陆)中文(简体)中文(繁體)中文(香港)中文(澳門)中文(马来西亚)中文(新加坡)中文(臺灣)Help इस समाचार को सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें -सीबीएसई के नए चेयरमैन जोशी का नैनीताल-उत्तराखंड से है संबंध डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 16 फरवरी 2022। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा सीबीएसई यानी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के नये चेयरमैन बनाये गये विनीत जोशी का संबंध नैनीताल जनपद व उत्तराखंड से है। विनीत जोशी वर्तमान में शिक्षा मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव तथा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी-एनटीए के महानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं। वह मणीपुर के स्थानिक आयुक्त भी रह चुके हैं।नगर के लांग व्यू पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य भुवन त्रिपाठी ने बताया कि 1992 बैच के मणिपुर कैडर के आईएएस अधिकारी विनीत का मूल गांव नैनीताल जनपद के कोटाबाग के निकट पांडेगांव में है। बताया गया है कि उनका परिवार इस गांव में रहने वाला इकलौता जोशी परिवार था। काफी पहले उनका परिवार यहां से इलाहाबाद चला गया था। इलाहाबाद के एनी बेसेंट स्कूल और जीआईसी से विनीत ने शुरुआती शिक्षा प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने आइआइटी कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री ली और भारतीय विदेश व्यापार संस्थान से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातकोत्तर किया।वह पूर्व में भी सीबीएसई के चेयरमैन रहे हैं। तब नई ग्रेडिंग प्रणाली के लिए प्राइवेट विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की एक प्रदेश स्तरीय कार्यशाला में नैनीताल में आगमन के दौरान उन्होंने भी कोटाबाग से होने की बात स्वीकारी थी। बताया गया है कि पांडेगांव में अब भी उनका पुश्तैनी मकान है, परंतु बंद पड़ा है। आंवलाकोट रोड के पास भी उनके परिवार ने एक भवन बनाया था, जो किराये में दिया गया है। अलबत्ता, क्षेत्रीय ग्रामीणों को उनके बारे में अधिक जानकारी नहीं है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleयह भी पढ़ें : मोदी राज में कमाल, शीर्ष पद पर उत्तराखंड का एक और लाल : प्रो. जोशी बने संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, हर्ष की लहरयह भी पढ़ें : अब डोभाल को मिली देश की यह सबसे बड़ी जिम्मेदारी2019 से NSA अजित डोभाल को लेकर मोदी ने किया बड़ा फैसलासबसे ताकतवर नौकरशाह बने NSA अजीत डोवालडोभाल से क्यों डरता है पाकिस्तान?यह भी पढ़ें : उत्तराखंड मूल के ओपी रावत बने देश के सीईसीखरोला होंगे एयर इंडिया के नए सीएमडीएडमिरल जोशी ने आगे बढ़ाई बीडी पांडे व विनोद पांडे की परम्परामोदी के मंत्रिमंडल विस्तार में राजनीति पर प्रशासनिक दक्षता पड़ी भारीअश्विनी लोहनी को बनाया गया रेलवे बोर्ड का नया चेयरमैनलोहनी से पहले 1954 में कुमाऊँ के घनानंद पाण्डे भी रह चुके हैं रेलवे बोर्ड के चेयरमैन उत्तराखंडी ‘बांडों’ के कन्धों पर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारीयह भी पढ़ें : इतिहास के झरोखे से कुछ महान उत्तराखंडियों के नाम-उपनाम व एतिहासिक घटनायेंअब रक्षा मंत्रालय के वार रूम (गोपनीय कक्ष जहां योजना बनती है) मे high level meetings काल्पनिक तौर पर गढवाली मे ऐसे हो सकती हैं :प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सचिव खुल्बे, भारतीय कोस्टगार्ड के डीजी राजेंद्र और एयरक्राफ्ट के डीजी भी उत्तराखंड केअल्मोड़ा के खज़ान पांडे बने भारतीय तटरक्षक बल के एडीजीऋषभ पंत बने भारतीय टी-20 क्रिकेट टीम का हिस्सायह भी पढ़ें : भारतीय टीम में ओपनर की भूमिका तलाश रहे उन्मुक्त ने नैनीताल में गोल्फ स्टिक से उड़ाये छक्केयोगी आदित्यनाथ के उत्तराखंड के अजय सिंह से योगी बनने की रोचक कहानीनैनीताल की बेटी अभिलाषा जोशी बनी वैंकुवर में भारतीय दूतावास जनरलउत्तराखंडी व्यक्तित्वों पर यह आलेख भी क्लिक करके पढ़ें :Like this:Relatedयह भी पढ़ें : मोदी राज में कमाल, शीर्ष पद पर उत्तराखंड का एक और लाल : प्रो. जोशी बने संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, हर्ष की लहरनवीन समाचार, नैनीताल, 07 अगस्त 2020। ‘मोदी दौर’ में उत्तराखंड मूल के लोगों के देश के शीर्ष पदों पर जाने का सुखद संयोग जारी है। प्रधानमंत्री मोदी के दौर में उत्तराखंड के एक औल लाल को देश के शीर्ष पद की बड़ी जिम्मेदारी मिली है। शिक्षाविद् प्रो. प्रदीप कुमार जोशी को यूपीएससी यानी संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। प्रोफेसर जोशी की नियुक्ति यूपीएससी अध्यक्ष के तौर पर छह अगस्त को हुई है। वे यूपीएससी के निवर्तमान अध्यक्ष अरविंद सक्सेना की जगह लेंगे। यूपीएससी के नए अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल 12 मई, 2021 तक रहेगा। वह इससे पहले छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग दोनों के अध्यक्ष थे और मई 2015 में यूपीएससी में सदस्य के रूप में शामिल हुए थे।उनकी नियुक्ति पर पर कूटा यानी कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है, तथा इसे उत्तराखंड का सम्मान बताया है। कूटा अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी ने बताया कि प्रो. जोशी मूल रूप से अल्मोड़ा के जोशीखोला के रहने वाले हैं। उनके पिता स्व. कैलाश चंद्र जोशी सेना में रहे। उनकी शिक्षा पिता के रहते हुए कानपुर से हुई है। उन्होंने रुहेलखंड विश्वविद्यालय से अपना कॅरियर प्रारम्भ किया और जबलपुर विश्वविद्यालय में भी रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : अब डोभाल को मिली देश की यह सबसे बड़ी जिम्मेदारीनई दिल्ली, 9 अक्तूबर 2018: पीएम मोदी ने 2014 में सत्ता में आते ही जो देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा काम किया था वो ये कि अजीत डोभाल को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार’ नियुक्त किया था. अजीत डोभाल 7 साल तक पाकिस्तान के लाहौर में भेष बदलकर देश की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहे थे. वे भारत के ऐसे एकमात्र नागरिक हैं जिन्हें शांतिकाल में दिया जाने वाले दूसरे सबसे बड़े पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है. जब भारतीय सेना पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक कर रही थी तब पीएम मोदी के साथ NSA अजीत डोभाल भी रात भर जागे थे और हालात पर नज़र बनाये हुए थे।लेकिन अब 2019 से पहले पीएम मोदी ने NSA अजीत डोभाल को लेकर बहुत बड़ा कदम उठाया है जिसके बाद देश के अंदर और बाहर बैठे दुश्मनों का अंत निश्चित है।2019 से NSA अजित डोभाल को लेकर मोदी ने किया बड़ा फैसलाअभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को एक नई जिम्मेदारी दी गई है.मोदी सरकार ने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार’ (NSA(National Security Advisor))अजीत डोवाल का कद बढ़ाते हुए उन्हें “स्ट्रैटेजिक पॉलिसी ग्रुप” (SPG) का चीफ नियुक्त कर दिया है. इस नई जिम्मेदारी के साथ वो अब सबसे ज़्यादा शक्तिशाली नौकरशाह बन गए हैं.सबसे ताकतवर नौकरशाह बने NSA अजीत डोवालगौरतलब है कि अभी तक एसपीजी के चीफ का पद ‘कैबिनेट सेक्रेटरी’ के पास होता था, लेकिन मोदी सरकार ने बीते दिनों नियमों में बदलाव करते हुए एसपीजी का चीफ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को बनाने का फैसला किया था। अब सरकार का यह फैसला लागू हो गया है और ‘एनएसए अजीत डोवाल’ ने कैबिनेट सेक्रेटरी को रिप्लेश करते हुए एसपीजी चीफ का पद संभाल लिया है.बता दें कि स्ट्रैटेजिक पॉलिसी ग्रुप का गठन अप्रैल, 1999 में किया गया था। एसपीजी का काम ‘नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ (National Security Council) के साथ मिलकर देश की आंतरिक, बाहरी और आर्थिक सुरक्षा को लेकर रणनीति बनाना है. SPG के अन्य सदस्य, थल सेना अध्यक्ष, नेवी चीफ, वायु सेना अध्यक्ष, आरबीआई गवर्नर, विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, डिफेंस प्रॉडक्शन, रेवेन्यू, ऑटोमिक एनर्जी, स्पेस डिपार्टमेंट और नैशनल सिक्यॉरिटी काउंसिल सेक्रट्रिएट के सेक्रटरीज के अलावा रक्षा मंत्री के साइंटफिक अडवाइजर, कैबिनेट सैक्रट्रिएट के सेक्रटरी और इंटेलिजेंस ब्यूरो चीफ हैं.SPG के पुनर्गठन ने NSA को राष्ट्रीय सुरक्षा के रणनीतिक ढांचे में सबसे ऊपर ला दिया है। सरकार ने NSA की अगुआई में नए थिंक टैंक ‘डिफेंस प्लानिंग कमिटी’ की भी घोषणा की है जो नैशनल मिलिट्री और सिक्यॉरिटी स्ट्रैटिजी और विदेशों से होने वाले रक्षा सौदों को लेकर रणनीति तैयार करेगा।डोभाल से क्यों डरता है पाकिस्तान?डाभोल कई ऐसे खतरनाक कारनामों को अंजाम दे चुके हैं जिन्हें सुनकर जेम्स बांड के किस्से भी फीके लगते हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर आसीन अजीत कुमार डाभोल से बड़े-बड़े मंत्री भी सहमे रहते हैं।भारतीय सेना के एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार के दौरान उन्होंने एक गुप्तचर की भूमिका निभाई और भारतीय सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई जिसकी मदद से सैन्य ऑपरेशन सफल हो सका। इस दौरान उनकी भूमिका एक ऐसे पाकिस्तानी जासूस की थी, जिसने खालिस्तानियों का विश्वास जीत लिया था और उनकी तैयारियों की जानकारी मुहैया करवाई थी।जब 1999 में इंडियन एयरलाइंस की उड़ान आईसी-814 को काठमांडू से हाईजैक कर लिया गया था तब उन्हें भारत की ओर से मुख्य वार्ताकार बनाया गया था। बाद में, इस फ्लाइट को कंधार ले जाया गया था और यात्रियों को बंधक बना लिया गया था।कश्मीर में भी जो आज आतंकवादियों का तेज़ी से सफाया हो रहा है उसके पीछे भी अजित डोभाल ने उल्लेखनीय काम किया है. उन्हें पाकिस्तान और कश्मीर में आतंकवाद के कई राज़ पता हैं. उन्होंने उग्रवादियों को ही शांतिरक्षक बनाकर उग्रवाद की धारा को मोड़ दिया था. उन्होंने एक प्रमुख भारत-विरोधी उग्रवादी कूका पारे को अपना सबसे बड़ा भेदिया बना लिया था। इन्ही डोभाल ने वर्ष 1991 में खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट द्वारा अपहरण किए गए रोमानियाई राजनयिक लिविउ राडू को बचाने की सफल योजना बनाई थी।यह भी पढ़ें : दो बच्चों की मां का भतीजे ने चुराया दिल, प्रेम विवाह कर दोनों घर चलाने बन गए 'बंटी-बबली' जैसे चोर और….डोभाल ने पूर्वोत्तर भारत में सेना पर हुए हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाई और भारतीय सेना ने सीमा पार म्यांमार में कार्रवाई कर उग्रवादियों को मार गिराया। भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना और एनएससीएन खाप्लांग गुट के बागियों सहयोग से ऑपरेशन चलाया, जिसमें करीब 30 उग्रवादी मारे गए हैं।डोभाल ने पाकिस्तान और ब्रिटेन में राजनयिक जिम्मेदारियां भी संभालीं और फिर करीब एक दशक तक खुफिया ब्यूरो की ऑपरेशन शाखा का लीड किया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड मूल के ओपी रावत बने देश के सीईसीबुधवार 23 जनवरी 2018 को देश के मुख्य चुनाव आयुक्त पद का दायित्व संभालने जा रहे ओम प्रकाश रावत भी मूलतः उत्तराखंड के हैं। हालांकि वे कभी भी यहां नहीं रहे हैं, और उनका जन्म 2 दिसंबर 1953 में झांसी में हुआ था। लेकिन उनके दादा-परदादा उत्तराखंड के चिन्यालीचौड़ के मूल निवासी रहे हैं। 1977 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आइएएस अधिकारी ओपी रावत को अगस्त 2015 में चुनाव आयोग में नियुक्त किया गया था। वे 1986 से 1988 तक इंदौर के कलेक्टर रह चुके हैं, और उनके चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में बिहार, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, गोवा, उत्तर प्रदेश, गुजरात और हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों के चुनाव हुए हैं। वे मई 1994 में संयुक्त राष्ट्र के चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में दक्षिण अफ्रीका में कार्य कर चुके हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।खरोला होंगे एयर इंडिया के नए सीएमडीउत्तराखंड की प्रतिभाओं का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में देश के शीर्ष पदों पर पहुंचने का सिलसिला जारी है। थल सेनाध्यक्ष विपिन रावत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, रॉ चीफ अनिल धस्माना और सेंसर बोर्ड अध्यक्ष प्रसून जोशी के बाद उत्तराखण्ड के एक और लाल-भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1985 बैच के वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप सिंह खरोला को सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी एयर इंडिया का नया चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है। Pradeep Singh Kharola to be the new Chairman and Managing Director of Air India. pic.twitter.com/D7MsYVEOsB— ANI (@ANI) November 28, 2017कर्नाटक काडर के अधिकारी खरोला कंपनी में पिछले तीन महीने से अंतरिम चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक के तौर पर काम कर रहे राजीव बंसल का स्थान लेंगे। बता दें कि सरकार ने एयर इंडिया के प्रमुख (उत्तराखंड के ही) अश्विनी लोहनी को इस पद से हटाकर रेलवे बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया था, इसके बाद उनकी जगह पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजीव बंसल को तीन महीने के लिये एयर इंडिया का चेयरमैन और प्रबंध निदेशक सीएमडी बनाया गया था। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि खरोला को एयर इंडिया का नया चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है। अभी वह बेंगलुरु मेट्रो रेल निगम के प्रबंध निदेशक हैं। एयर इंडिया में शीर्ष पद पर यह बदलाव ऐसे समय किया गया है जबकि सरकार राष्ट्रीय विमानन कंपनी के रणनीतिक विनिवेश के तौर तरीकों को अंतिम रूप दे रही है। प्रदीप खरोला देहरादून के रहने वाले हैं। उनका जन्म 1961 में देहरादून में हुआ। उनके पिता बीबीएस खरोला आर्मी से ऑर्नरी लेफ्टिनेंट कर्नल के पद से रिटायर हुए। उन्होंने कैंब्रियन हॉल स्कूल से कुछ सालों तक पढ़ाई करने के बाद हायर सेकेंडरी महू से किया, और वर्ष 1977 में इंदौर से बीटेक व दिल्ली से एमटेक किया। इसी दौरान उनका अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन हुआ। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।एडमिरल जोशी ने आगे बढ़ाई बीडी पांडे व विनोद पांडे की परम्परा-मानेकशा, सोमनाथ शर्मा की परंपरा के वाहक भी रहे जोशी नवीन जोशी, नैनीताल। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के मनोनीत राज्यपाल डीके जोशी ने इससे पूर्व देश के 21वें नौ सेनाध्यक्ष बनने के दौरान देश के पहले सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल एसएचएफजे मानेकशा, प्रथम परमवीर चक्र विजेता सोमनाथ शर्मा, पूर्व सेनाध्यक्ष डीएन शर्मा, ले. जनरल एसएन शर्मा, सैय्यद अता हसन और विक्रमजीत सिंह रावत की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए नैनीताल का नाम रोशन किया था। ये सभी सैन्य अधिकारी नैनीताल से किसी न किसी रूप में ताल्लुक रखते हैं। वहीं एडमिरल जोशी की सफलता उनसे अधिक महत्वपूर्ण इसलिए हो जाती है, क्योंकि वे सरकारी स्कूल से पढ़े हैं, जबकि उनके अन्य पूर्व नगर के शेरवुड, सेंट जोसफ कॉलेज व अन्य अंग्रेजी स्कूलों से पढ़े थे। जोशी की सफलता ने इस बात को भी पुख्ता कर दिया है कि व्यक्ति में पढ़ने और अपने लक्ष्य को पाने की ललक व लक्ष्य के प्रति स्पष्ट सोच हो तो फिर शिक्षा का माध्यम कोई मायने नहीं रखता। ज्ञात हो कि जोशी ने एक दुर्घटना होने पर नैतिकता के आधार पर देश के थल सेनाध्यक्ष पद से समय पूर्व इस्तीफा देने का बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया था। देश के पूर्व नौ सेना प्रमुख एडमिरल डीके जोशी अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के राज्यपाल बनने जा रहे हैं। राज्यपाल बनते हुए वे उत्तराखंड से राज्यपाल बने पूर्व आईसीएस अधिकारी भैरव दत्त पांडे व विनोद पांडे के बाद तीसरे व्यक्ति हैं। यह संयोग है कि तीनों ही व्यक्ति कुमाऊं व अल्मोड़ा जनपद के निवासी रहे हैं। इनके अतिरिक्त उत्तराखंड के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एमएम लखेड़ा भी मिजोरम के राज्यपाल रहे हैं। एडमिरल जोशी मूलत: अल्मोड़ा जनपद के दौलाघट के निकट ग्राम लक्ष्मीपुर के निवासी हैं। उनके पिता हीराबल्लभ जोशी उस दौर में कुमाऊं के मुख्य वन संरक्षक के पद पर थे। पिता की विभिन्न पदों व स्थानों पर तैनाती के साथ देवेंद्र की प्राथमिक शिक्षा पीलीभीत व लखनऊ में हुई। लेकिन 1969 में सातवीं कक्षा से उन्होंने नैनीताल के राइंका में प्रवेश लिया और यहीं से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण किया, जो वर्तमान में यहीं के इंटरमीडिएट में छात्र रहे करगिल शहीद महावीर पुरस्कार प्राप्त मेजर राजेश अधिकारी के नाम पर जाना जाता है। तब जीआईसी की हाईस्कूल तक की कक्षाएं ही वर्तमान गोरखा लाइन स्थित परिसर में जबकि इंटर की कक्षाएं वर्तमान डीएसबी परिसर (तत्कालीन डिग्री कालेज) में चलती थीं। डिग्री कालेज के प्रधानाचार्य ही जीआईसी की इंटर कक्षाओं का संचालन भी देखते थे। इस प्रकार जोशी सातवीं से 12वीं कक्षा तक नैनीताल के राजकीय इंटर कालेज के छात्र रहे और उनका शिक्षानगरी कहे जाने वाले नैनीताल से गहरा संबंध रहा है। देवेंद्र हमेशा अपनी कक्षा में प्रथम आते थे और शुरू से मेधावी थे। बेहद सरल स्वभाव के वाइस एडमिरल जोशी अक्सर नैनीताल आते रहते हैं। उनके साले हरीश चंद्र पांडे यहां हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं जबकि साली नीमा बिष्ट भवाली की नगर पालिका अध्यक्ष हैं। इधर 28 फरवरी 2015 को वे राइंका में पूर्व छात्रों के मिलन समारोह में भाग लेने के लिए नैनीताल आए थे। इस दौरान वे अपने साले श्री पांडे के घर ही सादगी से रहे तथा डीएसबी परिसर के वर्तमान वनस्पति विज्ञान विभाग के बगल के उस कमरे को देखने भी गए, जहां उन्होंने जीआईसी के रूप में इंटर की शिक्षा ग्रहण की थी। बातचीत में उन्होंने कहा कि जीआईसी से उन्हें शिक्षा के साथ ही सादगी का गुण भी प्राप्त हुआ। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार में राजनीति पर प्रशासनिक दक्षता पड़ी भारीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में आखिरी अथवा द्वितीय आखिरी बताये जा रहे विस्तार में राजनीति पर प्रशासनिक दक्षता पहली बार भारी पड़ती दिखाई दी है। मंत्रिमंडल विस्तार में प्रधानमंत्री मोदी का 4-पी (पैशन, प्रोफिशिएंसी, प्रोफेशनलिज्म तथा पॉलिटिकल अक्यूमन फॉर प्रोग्रेस) यानी अपने कार्य का जुनून, प्रवीणता तथा प्रगति के लिये व्यवसायिक व राजनीतिक कौशल पर फोकस बताया गया है। मंत्रिमंडल एक आईएफएस-हरदीप सिंह पुरी (संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व राजदूत) व एक आईएएस अल्फोंस कन्नाथनम को बिना संसद के किसी भी सदन का सदस्य होने के बावजूद सदस्य बनाया गया है। वहीं नये बनाये गये नौ मंत्रियों में से चार पूर्व आईएफएस, आईएएस व आईपीएस अधिकारी (मुंबई, पुणे व नागपुर के पुलिस कमिश्नर रहे डा. सत्यपाल सिंह, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह) भी शामिल हैं।यहां क्लिक कर के देखें केंद्रीय मंत्रिमंडल के मंत्रियों के विभागों का विवरण‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे 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रेलवे बोर्ड का नया चेयरमैनपहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, फिर सेनाध्यक्ष, फिर रॉ प्रमुख और फिर डीजीएमओ के बाद अब देश के एक और जिम्मेदार पद पर उत्तराखंडी की तैनाती हो गयी है। अल्मोड़ा के नजदीक ताकुला में स्थित सात गांव के समूह सतराली के मूल निवासी अश्विनी लोहनी को रेलवे बोर्ड का नया चेयरमैन बनाया गया है। मूलतः रेलवे के ही अधिकारी और अब तक एयर इंडिया के चेयरमैन पद पर कार्यरत रहे लोहनी अपने दायित्वों में हमेशा ही करामात कर डालने के कारण दोस्तों के बीच ‘मिस्टर टर्नअराउंड’ के नाम से चर्चित रहे हैं। उनके नाम मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल व इलेक्ट्रानिक्स यानी सभी चार ट्रेड की इंजीनियरिंग डिग्रियां हासिल होने के कारण ‘लिम्का बुक रिकॉर्ड’ भी दर्ज है।यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में नई समस्या बने नीले ड्रम, ‘देशी गीजर’ बनाकर हो रही बिजली चोरी, रुड़की ऊर्जा निगम की कार्रवाई में 148 नीले ड्रम बरामद...साथ ही उनके नाम 1998 में ‘फेयरी क्वीन’ का परिचालन फिर से शुरु करा कर गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने, नेशनल रेल म्यूजीयम के डारेक्टर के तौर पर काम करते हुए 1999 में दार्जीलिंग रेलवे का नाम विश्व धरोहर की श्रेणी में दर्ज कराने और आईटीडीसी के सीएमडी के पद पर रहने के दौरान 2002 में बोधगया के बोधि मंदिर को विश्व धरोहर में शामिल कराने जैसी उपलब्धियां भी दर्ज हैं। यूपीए सरकार के दौर में जब कामनवेल्थ घोटाले में लगभग सभी केंद्रीय विभागों पर कैग ने सवाल उठाए थे, तब रेलवे में डिविजनल मैनेजर रहे लोहनी ही इकलौते अफसर थे, कैग ने जिनकी पीठ थपथपाई थी।हालांकि पहाड़वासियों की यह भी नियति अथवा पीड़ा है कि ‘पलायन’ के लिए अभिशप्त यहां के प्रवासी बाहर तो बहुत नाम कमाते हैं, पर अपने घर की और लौटने, वहां के लिए कुछ करना दूर, नाम भी लेने में संकोच करते हैं। जबकि पहाड़ के लोग उन पर गर्व करने का लोभ संवरण नहीं कर पाते। बहरहाल, शाहखर्ची रोकने में पहले खुद की नजीर पेश करने वाले लोहनी इंडियन टूरिज्म डेवलपमेंट कारपोरेशन यानी आईटीडीसी के मुखिया भी रहे हैं। उन्हें घाटे में चल रहे आईटीडीसी को मुनाफे में पहुंचाने का श्रेय भी दिया जाता है। रेलवे में डिविजनल मैनेजर रहते हुए लोहनी ने नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और हजरत निजामुद्दीमन स्टेशन पर व्यापक सुधार कार्य किए। इस उपलव्ब्धि पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें अपने खस्ताहाल मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम का प्रबंध निदेशक बना कर इसे उबारने का जिम्मा सोंपा।इस कार्य में लोहनी शिवराज की अपेक्षाओं से कहीं ज्यादा खरे उतरे। गलत नीतियों से मरने की कगार पर पहुंच चुका पर्यटन विकास निगम पूरी तरह जिंदा हो गया। इसकी खबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कानों तक पहुंची, तो उन्होंने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए इंडियन रेलवे इंजीनियरिंग सर्विस के इस अफसर को यूपीए राज में कंगाल हुए एयर इंडिया को संकट से उबारने की जिम्मेदारी एयर इंडिया का सीएमडी बना कर सोंपी। आमतौर पर एयर इंडिया का मुखिया यानी सीएमडी किसी सीनियर आईएएस को ही बनाया जाता रहा है। भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग सेवा के 1980 बैच के अफसर अश्वनी को हवाई सेवाओं का कोई अनुभव भी नहीं था। लेकिन उनमें ईमानदारी कूट-कूट कर भरी थी।इसी बल पर उन्होंने इस जिम्मेदारी को चुनौती के रूप में लेते हुए दो हजार करोड़ से ज्यादा के घाटे में चल रही इस सरकारी नागर विमान सेवा कंपनी को 105 करोड़ के मुनाफे में पहुंचाकर जहां सबको हैरान किया वहीं प्रधानमंत्री मोदी का भरोसा जीतने में सफल रहे। इस दौरान वेे 23 मार्च को सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ पर एक कर्मी से मारपीट करने पर 15 दिन का प्रतिबंध लगाने जैसा फैसला लेने के कारण भी चर्चा में रहे थे। दिलचस्प बात है कि एयर इंडिया का सीएमडी रहते भी वे एयर इंडिया के आलीशान बंगला छोड़कर सरदार पटेल मार्ग स्थित रेलवे कालोनी के मकान में ही निवास करते रहे। उन्हांेने अपने सामने की टेबल पर रिचर्ड बैंसन की लाइन फ्रेम कराकर रखी है-क्लाइंड डोंट कम फर्स्ट, इम्प्लाइज कम फर्स्ट। आज जबकि वे अपने मूल विभाग रेलवे में आ गये हैं, तो उम्मीद करनी होगी कि अपनी अव्यवस्थाओं से इन दिनों दुर्भाग्यशाली नजर आ रही रेलवे को उबारने में भी वे सफल होंगे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।लोहनी से पहले 1954 में कुमाऊँ के घनानंद पाण्डे भी रह चुके हैं रेलवे बोर्ड के चेयरमैन घनानंद पाण्डे चम्पानौला अल्मोड़ा के रहने वाले थे, उनके छोटे भाई श्री भैरव दत्त पाण्डे (आइसीएस अधिकारी) कैबिनेट सेक्रेटरी और बंगाल व पंजाब के राज्यपाल रहे। श्री घनानंद पाण्डे थौम्पसन इन्जीनियरिंग कालेज (जो बाद में रुड़की यूनिवर्सिटी और आइआइटी रुड़की कहलाई) के प्रथम बैच के सिविल इन्जीनियरिंग डिग्रीधारक थे । उनको बिहार में गंगा नदी पर मौकामा रेलवे पुल बनाने का श्रेय दिया जाता है, क्योंकि इस पुल को अंग्रेज इन्जीनियर भी नही बना पाये थे । यह पुल उनकी तकनीकी योग्यता का उदाहरण माना जाता है। वे रेलवे बोर्ड के चैयरमैन पद के बाद स्टील अथौरिटी आफ इण्डिया के चेयरमैन भी रहे । उको पद्मविभूषण से भी विभूषित किया गया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।उत्तराखंडी ‘बांडों’ के कन्धों पर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी-देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सचिव नैनीताल निवासी भास्कर खुल्बे और कोस्टगार्ड के महानिदेशक राजेंद्र सिंह भी उत्तराखंड के हैं-अब चाहें तो ये अधिकारी स्थानीय लोकभाषाओं में भी ‘कोडवर्ड’ की तरह बात करके दुश्मन को दाल सकते हैं मुश्किल में नवीन जोशी, नैनीताल। देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिये हमेशा से अपना सर्वाेच्च बलिदान देने के लिये प्रसिद्ध ‘देश के मस्तक’ कहे जाने वाले छोटे से राज्य उत्तराखंड के लोग हालाँकि हमेशा से अनेक क्षेत्रों में शीर्ष पदों पर रहते रहे हैं, किन्तु इधर उत्तराखंड वासियों के लिए गर्व से ‘सर ऊंचा’ और ‘सीना चौड़ा’ होने के अनेक कारण एक साथ आ गए हैं। उत्तराखंड के तीन सपूतों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार में एकमुश्त देश के तीन सर्वाेच्च पदों के जरिये देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी सोंपी गयी है। देश के ‘जेम्स बांड’ कहे जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बाद अब लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत, लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट और आईपीएस अधिकारी अनिल धस्माना ‘टीम मोदी’ में भारतीय सेना के शीर्ष पदों पर नियुक्त किये गये हैं। इससे उत्तराखंड में हर्ष होना स्वाभाविक ही है।लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को उनसे दो वरिष्ठ अधिकारियों पर वरीयता देते हुए देश का थल सेना प्रमुख बनाने की घोषणा हुई है। वे आगामी 31 दिसंबर को दोपहर बाद इस पद को ग्रहण करेंगे। मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले के द्वारीखाल विकास खंड के ग्राम सैणा निवासी लेफ्टिनेंट जनरल रावत को आईएमए देहरादून से ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ सम्मान मिला था। उल्लेखनीय है कि उन्होंने यह पद अपने पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत से ‘दो कदम आगे’ बढ़ते हुए प्राप्त किया है, जो भारतीय सेना से उप थल सेनाध्यक्ष के पद से रिटायर हुए थे। यह संयोग ही है कि उनसे पूर्व उन्हीं के नाम के लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन चंद्र जोशी को ही उत्तराखंड से भारतीय थल सेना अध्यक्ष पद तक पहुंचने का गौरव हासिल हुआ था। इनके अलावा उत्तराखंड के एडमिरल डीके जोशी देश के नौ सेना प्रमुख बने थे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : इतिहास के झरोखे से कुछ महान उत्तराखंडियों के नाम-उपनाम व एतिहासिक घटनायेंवहीं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की तरह ही एक और ‘बांड’ कहे जाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट को डीजीएमओ यानी डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन पद पर नियुक्ति दी गई है। मेजर जनरल के रूप में अति विशिष्ट सेवा मैडल प्राप्त, उत्तराखंड के टिहरी जिले के कीर्तिनगर विकास खंड के ग्राम खतवाड़ निवासी भट्ट की पाक अधिकृत कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा पांच जगहों पर सर्जिकल स्ट्राइक यानी लक्षित हमले किये जाने में उल्लेखनीय भूमिका रही है। वर्तमान में उनका परिवार मसूरी में रहता है। उनके पिता सत्यप्रसाद भट्ट ने भी फौज में रह देश की सेवा की है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।इनके अलावा केन्द्र सरकार ने उत्तराखंड के एक और लाल अनिल धस्माना को रॉ यानी रिसर्च एंड एनैलिसिस विंग के प्रमुख की जिम्मेदारी सोंपी है। उत्तराखंड के पौड़ी जिले के कोटद्वार के निकट तोली गांव निवासी धस्माना अब तक रॉ में नंबर दो की हैसियत रखते हैं, और उन्हें बलूचिस्तान और आतंकवाद निरोधी अभियानों का लंबा अनुभव है। अपने गांव से पढ़ाई करने वाले मध्य प्रदेश कैडर के 1981 बैच के आईपीएस अधिकारी धस्माना की पहचान भी एक ‘बांड’ के रूप में रही है। वे अजीत डोभाल के करीबी व विश्वासपात्र भी हैं। माना जा रहा है कि अब इन दोनों की जुगलबंदी फिर कोई नया गुल खिला सकती है। उन्हें पाकिस्तान और अफगानिस्तानाक के साथ ही लंदन सार्क में काम करने का भी लंबा अनुभव है। बताया जाता है कि अपनी पहली नियुक्ति में ही एक दबंग एसपी के रूप में उन्होंने माफिया राज के लिये लिये कुख्यात मध्य प्रदेश के इंदौर की बंबई बजार में, जहां पुलिस घुस भी नहीं पाती थी, केवल 20 मिनट की कार्रवाई कर पुलिस का इकबाल बुलंद किया था, और बंबई बाजार को एक ‘पिकनिक स्पॉट’ में तब्दील कर दिया।इस बारे में करगिल युद्ध के दौरान डिप्टी डीजीएमओ व भारतीय सेना के प्रवक्ता रहे लेफ्टिनेंट जनरल मोहन सिंह भंडारी ने कहा कि उत्तराखंड के इन तीन सैन्य अधिकारियों के शीर्ष पर पहुंचने से उत्तराखंड का मान बढ़ा है, साथ ही हर उत्तराखंडी का सिर गर्व से ऊंचा और सीना चौड़ा हो गया है। इससे साबित हो गया है कि उत्तराखंड देश का मस्तक और मस्तिष्क है। 13 लाख सैनिकों वाली विश्व की सबसे बड़ी भारतीय सेना के बल पर ही देश सुरक्षित है, और उत्तराखंड के वीरों के हाथों में देश की सेना के शीर्ष पद आ रहे हैं, इससे हम कह सकते हैं कि देश की सीमाएं और राष्ट्रीय सुरक्षा सुरक्षित हाथों में हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।अब रक्षा मंत्रालय के वार रूम (गोपनीय कक्ष जहां योजना बनती है) मे high level meetings काल्पनिक तौर पर गढवाली मे ऐसे हो सकती हैं :डीजीएमओ भट्ट : भैजी ब्याली उ कमिना नवाज शरीफ’न 25 आदिम भेजया छया बोडर पर, आतंकवाद फैलाण का वास्ता।एनएसए डोभाल : यार भुला तू भी न, चुप किलै रै तू ये तरफा बे गोली बारूद चलाण छा तुमून पिछनै बे लात्ती की यन चोट मान्न छै कि वैकु बुबा याद रखदु।रॉ के प्रमुख धस्माना : अरे भैजी हमारू आदिम बताणू छ कराचि बटिन, कि यों सुंगरूं कु बडू ट्रैनिग सैंटर खोलयू च बोडर पार, बडू हमला कन चाणा च मिल्यौम्यरा खूब जासूस लगाया छन वख, मुशर्रफ का मामाक्वोट मा भी 9 आदिम भेज्यां छन म्येरा ।थल सेनाध्यक्ष जनरल रावत : भैजि अब मि भि ऐ ग्यौं, कारगिल अर 71 मा यन भंजोड्या छया मिन इ पाकिस्तानी कि यों ते अपड़ु बुबा याद एगि छो…एनएसए डोभाल : अर सुण भुला रावत, पाकिस्तान मा एक बटैलियन गढवाल रैफल का खुफिया जवान भेजी कि वख नरसिंग भैरों भी थोपी द्येण, पूरी पाकिस्तान फौज पर छौल लगे द्यौण । अर ऊं जु दाणी दाणी 3 -3 फुट का चीनी छन ऊं का भी घुण्डा फोड़ द्येण अबेरी दौं हमून।रक्षा मंत्री परिकर जी : ??? 🤔प्रधानमंत्री मोदी जी : 😯 खंडूरी जी, आ सू बोले छे ??भारत की रक्षा समिति के अध्यक्ष खंडूरी जी : भुला इन च, तुम लोग अपडू काम करा, मौक़ा मिल्यू च देश सेवा करा, अर भुला विपिन जादा सोचण नी, सिदा टमकै द्येण जखिमु दिख्यंदा ई कुकूरा ग बच्चा। मोदी – परिकर तैं मि समझै ल्येलू।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सचिव खुल्बे, भारतीय कोस्टगार्ड के डीजी राजेंद्र और एयरक्राफ्ट के डीजी भी उत्तराखंड केनैनीताल। छोटे से राज्य उत्तराखंड के लिये यह भी गर्व की बात है कि तीन सैन्य अधिकारियों के शीर्ष पदों पर सुशोभित होने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सचिव नैनीताल निवासी भास्कर खुल्बे और कोस्टगार्ड के महानिदेशक राजेंद्र सिंह भी उत्तराखंड के हैं। वहीँ उत्तराखंड के एक ‘कुलदीप’, उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के सुल्तानपुर पट्टी के करीब ग्राम पिपलिया निवासी एयर मार्शल कुलदीप शर्मा अपने नाम के अनुरूप अपने परिवार और देश-प्रदेश के कुलदीपक साबित हुए हैं। उन्हें दो जनवरी 2017 को भारतीय वायुसेना में एयरक्राफ्ट का डायरेक्टर जनरल बनाया गया है। सुल्तानपुर पट्टी के राइंका से हाइस्कूल, काशीपुर के उदयराज हिंदू इंटर कॉलेज से इंटर और पंतनगर विश्वविद्यालय से बीटेक कर 1981 में वायुसेना में कमीशन प्राप्त करने वाले कुलदीप को विशिष्ट सेवा मेडल और अति विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजा जा चुका है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : एम्स ऋषिकेश में चमोली के दंपति ने नौ दिन के मृत नवजात का देहदान किया, चिकित्सा शोध को मिला मानवता का बड़ा योगदानअल्मोड़ा के खज़ान पांडे बने भारतीय तटरक्षक बल के एडीजीभारतीय समुद्री सीमाओं की कमान देवभूमि उत्तराखंड के जांबाजों के हाथ में है। अल्मोड़ा निवासी खज़ान चन्द्र पांडे को भारतीय तटरक्षक बल (आइसीजी) के अतिरिक्त महानिदेशक (पूर्व) के रूप में नियुक्त किया गया है। पिछले वर्ष देहरादून जिले के चकराता निवासी राजेंद्र सिंह भारतीय तटरक्षक बल (इंडियन कोस्ट गार्ड) के महानिदेशक (डीजी) बने थे। राजेंद्र सिंह के डीजी बनने के बाद पिथौरागढ़ निवासी डीआइजी सुरेंद्र सिंह डसीला को देश के सबसे आधुनिक पोत आइएनएस सूर की कमान दी गई। अब अल्मोड़ा के केसी पांडे को भारतीय तटरक्षक बल (आइसीजी) के अतिरिक्त महानिदेशक (पूर्व) के रूप में नियुक्त किया गया है। चेन्नई में क्षेत्रीय मुख्यालय (पूर्व) और कोलकाता में क्षेत्रीय मुख्यालय (उत्तर-पूर्व) के तटीय-पूर्वी समुद्र तट की कमान उनके पास रहेगी। उन्होंने अपना पदभार संभाल लिया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।ऋषभ पंत बने भारतीय टी-20 क्रिकेट टीम का हिस्सानैनीताल। इधर पांच जनवरी 2017 को (स्वयं को कभी भी उत्तराखंड का बताने से परहेज करने वाले) महेंद्र सिंह धौनी ने सीमित ओवरों की भारतीय क्रिकेट टीम से इस्तीफा दिया, वहीं अगले दि नही उत्तराखंड का एक और लाल-हरिद्वार में जन्मे ऋषभ पंत भारतीय टी-20 क्रिकेट टीम का हिस्सा बन गये। 1997 में जन्मे ऋषभ के खाते में 2005 में अपने क्रिकेट कैरियर की शुरुआत करते ही दिल्ली की ओर से नेपाल के विरुद्ध रिकार्ड सबसे तेज अर्धशतक, फिर नामीबिया के खिलाफ शतक, आगे आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स द्वारा 10 लाख आधारमूल्य के बावजूद 1.9 करोड़ रुपये में खरीदे जाने, इधर हाल में रणजी ट्राफी मैच में महाराष्ट्र के खिलाफ 308 रनों की पारी खेलकर तिहरा शतक बनाने वाले सबसे युवा और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में ऐसा करने वाले देश के चौथे क्रिकेटर बनने के अलावा नवंबर 2016 में रणजी में झारखंड के खिलाफ 48 गैंदों पर रणजी के इतिहास का सबसे तेज शतक जड़ने जैसी अनेक उपलब्धियां दर्ज हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : भारतीय टीम में ओपनर की भूमिका तलाश रहे उन्मुक्त ने नैनीताल में गोल्फ स्टिक से उड़ाये छक्केउल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के बल्लेबाज मनीष पांडे पहले ही श्रीलंका के खिलाफ देश के लिये टी-20 मैच खेल चुके हैं। वहीं पिथौरागढ़ के उन्मुक्त चंद कप्तानी करते हुए देश को अंडर-19 विश्व कप-2012 का खिताब दिला चुके हैं। इनके अलावा रानीखेत के निवासी पवन नेगी भी देश के लिये टी-20 मैच खेल चुके हैं। यह तब है, जबकि उत्तराखंड में प्रथम श्रेणी क्रिकेट ही नहीं खेला जाता है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।योगी आदित्यनाथ के उत्तराखंड के अजय सिंह से योगी बनने की रोचक कहानीयूपी के नए सीएम बने योगी आदित्यनाथ किसी परिचय के मोहताज नहीं, बहुत कम उम्र में ही उन्होंने जो उपलब्धियां हासिल की हैं वो बेमिसाल हैं।मूल रूप से उत्तराखंड के राजपूत परिवार में जन्मे आदित्यनाथ का असली नाम अजय सिंह बिष्ट है। योगी गोरखपुर से लगातार पांचवीं बार बीजेपी के सांसद हैं. पहली बार उन्होंने 1998 में लोकसभा का चुनाव जीता तब उनकी उम्र महज 26 साल थी। इसके बाद आदित्यनाथ 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी लगातार सांसद चुने जाते रहे। वे गोरखपुर के गोरखनाथ मठ के महंत हैं। योगी आदित्यनाथ का एक धार्मिक संगठन भी है-हिंदू युवावाहिनी जिसका पूर्वी उत्तर प्रदेश में खासा दबदबा है।5 जून 1972 उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश) के पौड़ी जिला स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचूर गांव के राजपूत परिवार में योगी आदित्यनाथ का जन्म हुआ था। 1977 में टिहरी जिले के गजा स्कूल से स्कूल में पढ़ाई शुरू की, और 1987 में यहीं से दसवीं की परीक्षा पास की। 1990 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई करते हुए एबीवीपी से जुड़े। उन्होंने गढ़वाल विश्विद्यालय से गणित में बीएससी किया है। पढ़ाई के बाद वो गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ (संभवतया उनके मामा) के संपर्क में आए। मंहत ने दीक्षा देकर अजय को योगी आदित्यनाथ का नाम दिया। अवैद्यनाथ ने 1998 में राजनीति से संन्यास लिया तो योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।नैनीताल की बेटी अभिलाषा जोशी बनी वैंकुवर में भारतीय दूतावास जनरलनवीन जोशी, नैनीताल। केंद्र में मोदी सरकार से एक और उत्तराखंडी को शीर्ष पद मिला है। नैनीताल की बेटी अभिलाषा जोशी को भारत सरकार ने कनाडा के वैंकुवर स्थित भारतीय दूतावास में काउनसलेट जर्नल ऑफ इंडिया के पद पर तैनात किया है।उल्लेखनीय है कि अभिलाषा का बचपन नैनीताल में बीता है। उनके पिता गोविंद टम्टा यहां श्रम विभाग में कार्यरत थे, और परिवार माल रोड में इंडिया होटल के समीप आनंद निवास में रहता था। इसलिये उनकी प्रारंभिक शिक्षा नैनीताल के सैंट मेरीज कॉन्वेंट कॉलेज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज से हुई, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली के लेडी श्रीराम महिला कॉलेज से आगे की शिक्षा ग्रहण की। वह सेंट मेरीज कान्वेंट कॉलेज में कक्षा एक से पढ़ीं और १९८७ में यहीं से दसवीं और १९८९ में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज से इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की।आगे उन्होंने दिल्ली के लेडी श्रीराम महिला कॉलेज से स्नातक तथा दिल्ली विश्वविध्यालय से मनोविद्यान विषय में स्नातकोत्तर किया। १९९५ में उन्होंने भारतीय विदेश सेवा की कठिन परीक्षा पास करके सबको चौंका दिया था। इसके बाद भारतीय विदेश सेवा में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों के बाद अभिलाषा को एक मई २०१४ को ब्राजील के साओ पोलो स्थित भारतीय दूतावास में काउंसल जनरल-कॉमर्श बनाकर भेजा गया था । इस कार्यकाल में उन्होंने ब्राजील ओलम्पिक में भारत की भागीदारी में अहम भूमिका निभाई थी। माना जा रहा है कि इसी भूमिका के फलस्वरूप उन्हें कनाडा के वैंकुवर में काउनसलेट जर्नल ऑफ इंडिया जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है, जहां वह वरिष्ठ काउनसलेट जर्नल दिनेश भाटिया के साथ कार्य करेंगी। इससे पूर्व वे श्रीलंकाउल्लेखनीय है कि अभिलाषा का विवाह नौसेना अधिकारी नितिन जोशी से हुआ, जिनसे उनकी एक पुत्री व एक पुत्र है। उनके बड़े भाई संजय टम्टा अमेरिका में इंजीनियर और उनकी बड़ी बहन रश्मि श्रीवास्तव बैंक अधिकारी रही हैं, और अब अपनी माता हीरा रानी के साथ रहती हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।उत्तराखंडी व्यक्तित्वों पर यह आलेख भी क्लिक करके पढ़ें :देश ही नहीं दुनिया के पर्यटन के इनसाइक्लोपीडिया हैं विजय मोहन सिंह खातीनहीं रहे 11 गोरखा रेजीमेंट के संस्थापक सदस्य मेजर जीआई पुनवानी15 अगस्त को ‘स्वदेशी’ का नया विश्व कीर्तिमान बनाकर देश का ‘गौरव’ बढ़ाया नैनीताल के गौरव ने !पहाड़ से ऊंचा तो आसमान ही हैः क्षमताउत्तराखंड के लिए प्रधानमंत्री मोदी के सीएम कैंडीडेट के तौर पर पसंद हो सकते हैं पूर्व नौकरशाह सूर्यप्रताप सिंहदिलीप कुमार की वजह से प्रधानमंत्री नहीं बन पाए थे एनडी, और किस्मत से बन गए थे नरसिम्हा रावकैंची धाम से निकली थी एप्पल और फेसबुक की तरक्की और ओबामा की जीत की राहजितने सवाल-उतने जवाब थे अपने फक्कड़दा-गिर्दाबड़े परदे की हालत खस्ता, छोटे परदे पर भारी शोषण : तिवारीअब उत्तराखंड सरकार के मुरीद हुए सिने अभिनेता हेमंत पांडे‘पथरीली पगडंडियों पर’ अपने साथ दुनिया के इतिहास की सैर भी कराते हैं वल्दियानैनीताल जनपद में एक साथ बने सर्वाधिक उम्र तक जीवित रहने के पांच विश्व रिकार्ड !नहीं रहे 11 गोरखा रेजीमेंट के संस्थापक सदस्य मेजर जीआई पुनवानीनैनीताल से ही नरेंद्र बना था शिकागो का राजर्षि विवेकानंदफिर कानूनी प्रक्रिया में फंसते दिख रहे हैं डीजीपी बीएस सिद्धूपंजाब में आतंकवाद खत्म करने व तहलका जांच सहित अनेक उपलब्धियां जुड़ी हैं उत्तराखण्ड के मनोनीत राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पॉल के नाम15 अगस्त को ‘स्वदेशी’ का नया विश्व कीर्तिमान बनाकर देश का ‘गौरव’ बढ़ाया नैनीताल के गौरव ने !पहाड़ से ऊंचा तो आसमान ही हैः क्षमतानैनीताल की लतिका ने 12वें दक्षिण एशियाई खेलों में जीता स्वर्ण पदकअपने मरीजों ही नहीं, दुनिया को बचाने चला है यह डॉक्टरअब मोदी की बारी है…. अब मोदी की बारी है….संबंधित पोस्टः 2009 में ही नैनीताल में दिखाई दे गई थी मोदी में ‘पीएम इन फ्यूचर’ की छविनैनीताल के बच्चों ने एपीजे से बनाया था ‘काका कलाम’ का रिश्ताकौन हैं अन्ना हजारे ? क्या है जन लोकपाल विधेयक ?राहुल की ‘साफगोई’ के मायनेआम आदमी की नहीं, जाति, धर्म व पंथीय राजनीति का कॉकटेल है ‘आप’ की जीतसंबंधित पोस्टः क्या देश को भी दिल्ली की तरह मध्यावधि चुनावों में धकेलेंगेकेजरीवाल !इस झाड़ू ने तो गंदगी ही अधिक फैला दी…एनडी तिवारी के बहानेसंबंधित पोस्टः एनडी-उज्जवला के विवाह को शास्त्र सम्मत नहीं मानते विद्वानडीएनए जांच में चूक को लेकर एनडी का तर्क सिरे से खारिजजितने सवाल-उतने जवाब थे गिर्दा, जितने सवाल-उतने जवाब थे अपने फक्कड़दा-गिर्दासंबंधित पोस्टः जनकवि ‘गिर्दा’ की दो एक्सक्लूसिव कविताएंआखिर सच साबित हो गई गिर्दा की गैरसैंण के जीआईसी में राज्य की विधान सभा की कल्पनाकौन और क्या हैं हरीश रावत ?संबंधित पोस्टः क्या अपना बोया काटने से बच पाएंगे हरीश रावत ?नेहरू के बहाने: सोनिया-राहुल से भी आगे निकलने की कोशिश में हरीश रावतओलंपियन राजेंद्र रावतः दर्द से कहीं बड़ी होती है देश को जिताने की खुशीपहाड़ की बेटी ने छुवा आसमान, मनस्वी बनी ‘मिस इंडिया वर्ल्ड’‘एक्सन जैक्सन’ से रुपहले पर्दे पर पदार्पण करेगी पहाड़ की बेटी ‘मनस्वी‘‘पथरीली पगडंडियों पर’ अपने साथ दुनिया के इतिहास की सैर भी कराते हैंवल्दियाअटल व तिवारी के सहारे सियासी कद बढ़ाने की कोशिष में निशंकसत्याग्रह की जिद पर गांधी जी को भी झुका दिया था डुंगर नेवो भी क्या थे…. द्वितीय विश्व युद्ध के सेनानी स्वर्गीय देवी दत्त जोशीनिर्मल पांडे का जानागोविंद बल्लभ पंतः हिमालय सा व्यक्तित्व और दिल में बसता था पहाड़अब तो बस यह देखिए कि बहुगुणा के लिए 13 का अंक शुभ साबित होता है या नहीं…संबंधित पोस्टः 10 जनपथ की नाकामी अधिक है बहुगुणा की वापसीतरुण विजय ने पूरा किया कुमाऊं विवि में नैनो साइंस एवं नैनो तकनीकी केंद्र का सपना‘आस्कर पिस्टोरियस’ की राह पर दून का लोकेशबड़े परदे की हालत खस्ता, छोटे परदे पर भारी शोषण : ललित तिवारीअब उत्तराखंड सरकार के मुरीद हुए सिने अभिनेता हेमंत पांडेउत्तराखंड से पहले मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने न्यायमूर्ति प्रफुल्ल चंद्र पंतराजीव मेहता: ग्लास्गो में ‘कैच’ हुआ नैनीताल का एक ‘सिक्सर किंग’‘यादों का इडियट बॉक्स’ वाले नीलेश ने खोला अपने ‘याद शहर’ का राजदुश्यंत’ के बाद गजल का मतलब हैं ‘बल्ली’भारत के सच्चे मुस्लिम नहीं करते गौ-हत्या, बाबर भी था गौरक्षक : कुरैशीशाही इमाम ने मोदी नहीं 125 करोड़ देशवासियों का किया है अपमान: कुरैशीएरीज में रिकार्ड 16 वर्ष लंबी सल्तनत रही है विवादित निदेशक प्रो. राम सागर कीShare this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading...Related Post navigationफोटो फीचर: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की दो हरीशों की सबसे चर्चित वायरल तस्वीर निर्मल पांडे की आज 12वीं पुण्यतिथि पर विशेष : बड़े शौक से तुम्हें सुन रहा था ज़माना, तुम ही सो गए दास्तां कहते-कहते…
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