EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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(मुस्तांग) धाम की सीधी यात्रा कर पाएंग। नगर की प्रसिद्ध पर्यटन व्यवसायी विजय मोहन सिंह खाती अपनी संस्था वाईटीडीओ के माध्यम से पहली बार इस वर्ष आगामी 6 से 13 जून और 1 से 8 नवंबर के बीच मुक्तिनाथ तीर्थ की यात्रा आयोजित कर रहे हैं।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleयह भी पढ़ें : मुक्तिनाथ धाम पहुंचे मोदी, जानें क्यों खास है यह मंदिरयह भी पढ़ें : वाईटीडीओ कराएगा नेपाल के मुक्तिधाम तीर्थ की यात्रायह भी पढ़ें : जिम कॉर्बेट पार्क के पास में है एक और वन्य जीवों का सुंदर संसार, वाईटीडीओ करा रहा है यात्रा…यह भी पढ़ें : अब केवल 9 दिनों में कीजिए कैलाश मानसरोवर यात्रा9 दिन में कैलाश यात्रा के बारे में यहाँ क्लिक करके विस्तार से जानें : कैलाश मानसरोवर यात्रा 2018यह भी पढ़ें : देश ही नहीं दुनिया के पर्यटन के इनसाइक्लोपीडिया हैं विजय मोहन सिंह खातीयह भी पढ़ें : इन सर्दियों में कीजिए पूर्व, मध्य, दक्षिण व पूर्वाेत्तर भारत तथा नेपाल व यूरोप के दर्शनLike this:Relatedयह भी पढ़ें : मुक्तिनाथ धाम पहुंचे मोदी, जानें क्यों खास है यह मंदिरविजय मोहन सिंह खातीश्री खाती ने बताया कि मुक्तिनाथ वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह तीर्थ भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है, जो कि वास्तव में हिंदू धर्म में पूजनीय एक पवित्र पत्थर होता है और नेपाल में बहने वाली काली गण्डकी नदी में पाया जाता है। वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार शालीग्राम हिमालय के स्थान पर प्रागैतिहासिक काल में मौजूद रहे टेथिस सागर में मौजूद कीट-पतंगों के जीवाश्म से बनता है। वहीं हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां लोगों को मुक्ति या मोक्ष प्राप्त होता है, जो कि हिंदुओं के लिए परमपद की तरह है।पौराणिक कथाओं के अनुसार अपनी पत्नी वृंदा के सतीत्व के बल पर विश्वविजयी हुए जालंधर नामक असुर से जब भगवान शिव युद्ध नहीं जीत पा रहे थे तो भगवान विष्णु ने उनकी मदद करने के लिए छल स्वयं जालंधर बनकर उसकी पत्नी वृंदा का तप भंग किया था। इस पर वृंदा से मिले श्राप से भगवान विष्णु का शालीग्राम शिलारूप अस्तित्व में आया था। इसके अलावा मुक्तिनाथ बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसी स्थान से होकर उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र के महान बौद्ध भिक्षु पद्मसंभव बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए तिब्बत गए थे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंयह भी पढ़ें : उत्तराखंड में नई समस्या बने नीले ड्रम, ‘देशी गीजर’ बनाकर हो रही बिजली चोरी, रुड़की ऊर्जा निगम की कार्रवाई में 148 नीले ड्रम बरामद...यह भी पढ़ें : वाईटीडीओ कराएगा नेपाल के मुक्तिधाम तीर्थ की यात्रायह भी पढ़ें : जिम कॉर्बेट पार्क के पास में है एक और वन्य जीवों का सुंदर संसार, वाईटीडीओ करा रहा है यात्रा… डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 25 अप्रैल 2022। नैनीताल जनपद के विश्व प्रसिद्ध जिम कार्बेट नेशनल पार्क की तरह ही पड़ोस में ही वन्य जीवों का एक और बड़ा संसार मौजूद है, किंतु कम लोग ही इसके बारे में जानते हैं। अब नैनीताल की प्रसिद्ध पर्यटन संस्था-वाईटीडीओ तीन दिवसीय यानी दो रात व तीन दिन के टूर पर नेपाल बर्ल्ड लाइफ एक्सपीरिएंस पैकेज टूर के जरिए नेपाल में भारतीय सीमा से लगे शुक्ला फांटा नेशनल पार्क घुमाने जा रही है।वाईटीडीओ के संचालक विजय मोहन सिंह खाती ने बताया कि उत्तराखंड के चंपावत जिले में बनबसा से लगे नेपाल का शुक्लाफांटा नेशनल पार्क महेंद्रनगर से महज चार से पांच किमी दूर है। भारत के उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश की सीमाओं से लगे हुए, वर्ष 1969 से अस्तित्व में आये इस खूबसूरत वन्य जीव पार्क को एशिया के दूसरे सबसे बड़े ग्रास लेंड यानी घास के मैदान के रूप में भी जाना जाता है।यह पार्क जहां लगभग 305 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है वहीं इसमें 60 किलोमीटर की परिधि में घास के मैदान इसकी शान बढ़ाते हैं। यहां घास के मैदानों में हिरन व बारहसिंघों के विशाल झुंडों के साथ ही बाघ, गुलदार, एक सींघ वाले गेंडे, मगरमच्छ, अजगर, जंगली सुकर सहित व हजारों प्रजातियों की खूबसूरत चिड़ियों के दीदार होते है।‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया विज्ञापन न केवल आपके व्यवसाय या संस्थान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाएगा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता को भी सशक्त बनाएगा। अग्रिम धन्यवाद। साथ ही यहां आने वाले यात्री नेपाल के सुंदर शहर महेन्द्रनगर में कैसिनो व डांस बार का भी अनुभव व आनंद ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि सैलानियों की अत्यधिक भीड़ होने के कारण अधिकांश पर्यटक नैनीताल के रामनगर कार्बेट नेशनल पार्क में वन्य जीवों के दीदार से वंचित रह जाते हैं। ऐसे यात्रियों के लिए शुक्लाफांटा बेहतर विकल्प हो सकता है। इस पार्क की सुरक्षा का जिम्मा आज भी नेपाल की शाही सेना उठाती है। जो कि इस पार्क के अंदर ही तैनात है।महेंद्र नगर की पुराने हवाई पट्टी के पास स्थित इस नेशनल पार्क के पास कॉटेज भी बने है जहां रहने-खाने की पूर्ण सुविधा वाजिब दामों में मिल जाती है। महेंद्रनगर से मात्र 60 किलोमीटर दूर धनगढ़ी एयरपोर्ट में हवाई मार्ग से यहां पहुँचा जा सकता है। शुक्लाफांटा की यात्रा पर जाने के लिए यात्री वाईटीडीओ नैनीताल के नंबरों 05942.235557, 9412085088, 9411197085 तथा माहित टूर प्राइवेट लिमिटेट महेन्द्रनगर नेपाल के 977-9858750070 पर संपर्क कर सकते हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंयह भी पढ़ें : अब केवल 9 दिनों में कीजिए कैलाश मानसरोवर यात्रा-2012 से की जा रही है यात्रा, हेलीकॉप्टर व हवाई जहाज से नेपाल के रास्ते सुगम तरीके से होगी यात्रा डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 6 सितम्बर 2017। पृथ्वी पर शिव के सबसे बड़े धाम कहे जाने वाले 18 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित कैलाश मानसरोवर की लंबी अवधि की यात्रा के हालांकि कई विकल्प हैं, लेकिन यदि आप के पास समय की कमी है तो नैनीताल से केवल नौ दिन में कैलाश मानसरोवर की यात्रा का विकल्प आजमाया जा सकता है। यह भी पढ़ें : 25 वर्षीय आईएएस अंशुल भट्ट ने ग्राहक बनकर पकड़ा बिना पंजीकरण के चल रहा होटल और किया सील, प्रश्न-जनपद मुख्यालय में प्रशासन ऐसी ही स्थितियों में मौन क्यों...?सरोवरनगरी ही नहीं प्रदेश की अग्रणी व देश-दुनिया की सैर कराने वाली अपनी तरह की अनूठी पर्यटन संस्था-यूथ टूरिज्म डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन यानी वाईटीडीओ टूर एंड ट्रेवल्स एक बार फिर केवल 9 दिनों में कैलाश मानसरोवर की यात्रा का कार्यक्रम लेकर आयी है। हवाई जहाज व हेलीकॉप्टर तथा अत्याधुनिक वाहनों के जरिये नेपाल के रास्ते बेहद सुगम, कम पैदल मार्ग के जरिये होने जा रही यह यात्रा आगामी 5 जून से शुरू होगी और 13 जून को वापस लौट जाएगी। यात्रा के लिए बुकिंग प्रारंभ हो गयी हैं। यात्रा में कैलाश मानसरोवर के साथ कई अन्य धार्मिक व दर्शनीय स्थलों का भी आकर्षण निहित है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें9 दिन में कैलाश यात्रा के बारे में यहाँ क्लिक करके विस्तार से जानें : कैलाश मानसरोवर यात्रा 2018वाईटीडीओ के प्रमुख एवं अपने आप में विश्व पर्यटन के इन्साइक्लोपीडिया विजय मोहन सिंह खाती ने बताया कि 2012 से कराई जा रही इस यात्रा का इस वर्ष 7वां संस्करण होगा। 5 जून को यात्रा हल्द्वानी से महेंद्र नगर होते हुए नेपालगंज पहुंचेगी। आगे 6 जून को यात्री हवाई जहाज से 45 मिनट की उड़ान भरकर सिमीकोट पहुचेंगे और वहां दोपहर में शिव मंदिर के दर्शन करेंगे। 7 जून को सिमीकोट से हेलीकॉप्टर से 30 मिनट की हवाई उड़ान हिल्सा पहुंचाएगी, जहां से यात्री पश्चिमी तिब्बत के एक ऐतिहासिक स्थल पुरांग पहुंचेंगे। 8 को बस से यात्री मानसरोवर झील पहुंचकर झील की परिक्रमा करेंगे तथा वहीं रात्रि विश्राम करेंगे। 9 को यात्री मानसरोवर झील में स्नान एवं पूजा करेंगे और शाम तक कैलाश के आधार शिविर दारचेन पहुंचेंगे। इसी तरह 10 को यमद्वार तक बस से जाकर कैलाश पर्वत की डेराफुक तक परिक्रमा कर वहीं रात्रि विश्राम करेंगे। 11 को यात्रा डेराफुक से डोल्मा पास होते हुए गौरी कुंड होते हुए झुथुलपूक और 12 को पुरांग होते हुए हिल्सा और 13 को हेलीकॉप्टर से सिमीकोट व हवाई जहाज से नेपालगंज आकर शाम तक हल्द्वानी लौट आएंगे। यात्रा का किराया 1.65 लाख रुपए प्रति व्यक्ति रखा गया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंयह भी पढ़ें : देश ही नहीं दुनिया के पर्यटन के इनसाइक्लोपीडिया हैं विजय मोहन सिंह खातीनवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, पर्यटन नगरी सरोवरनगरी नैनीताल की पर्यटन संस्था वाईटीडीओ (यूथ टूरिज्म डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन) के स्वामी श्री विजय मोहन सिंह खाती को यदि देश ही नहीं दुनिया के पर्यटन का इनसाइक्लोपीडिया या जीता जागता ज्ञानकोष कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगा। देश-दुनिया के किस शहर में क्या-क्या दर्शनीय है, के साथ ही वहां के दर्शनीय स्थल सप्ताह में किस दिन बंद रहते हैं, और वहां प्रवेश का क्या शुल्क है, यह उन्हें मुंह जुबानी याद रहता है। साथ ही वह बस, टैक्सी या हवाई जहाज से उस स्थान की भौगोलिक परिस्थिति के अनुसार किसी दूरी को तय करने में लगने वाले समय की भी सटीक जानकारी दे सकते हैं।श्री खाती का ऐसा जीवंत इनसाइक्लोपीडिया बनना किसी दैवीय शक्ति से नहीं वरन उनकी मेहनत से संभव हुआ है। अपने जमाने की राजकपूर अभिनीत सुपर हिट फिल्म ‘अराउंड द वल्र्ड इन एट डॉलर्स” की तर्ज पर ही 1976 में एक 23 वर्षीय नौजवान विजय अपनी घुमक्कड़ी के जुनूनी शौक की तर्ज पर कुछ सौ रुपए लेकर दुनिया की सैर पर निकल गया था, और विभिन्न देशों में कहीं लिफ्ट लेते हुए तो कहीं, वहीं नौकरी कर जुटाए पैंसों से वह करीब आठ-नौ माह में अफगानिस्तान, ईरान, तुर्की, सीरिया, जॉर्डन, रोम, इटली, यूगोस्लाविया व बुल्गारिया आदि 10 देशों की यात्रा कर लौट आए थे। उन दिनों को याद करते हुए श्री खाती बताते हैं कि इस यात्रा से पहले उन्होंने नगर के स्नोभ्यू में सैलानियों की फोटोग्राफी कर खुद पैंसे जुटाए थे। अप्रैल 1976 में वह दिल्ली से 1,200 रुपए में अफगानिस्तान का आने-जाने का हवाई जहाज का टिकट व वीजा लेकर विश्व यात्रा पर निकले थे। इस दौरान तेहरान व जॉर्डन में उन्होंने कुछ दिन के लिए छोटी-बड़ी नौकरियां भी करनी पडीं।यह भी पढ़ें : खुशखबरी ! अब घर बैठे मिलेगी सत्यापित खतौनी, छह राजस्व पोर्टल शुरूवापस लौटे तो पिता ने वकालत करने के लिए दबाव बनाया, और अहमदाबाद भेजकर एलएलबी करवा दी, और नैनीताल के जिला न्यायालय में वकालत भी शुरू करवा दी। लेकिन घुमक्कड़ी के जुनूनी विजय के कदम यहां एक-डेढ़ वर्ष ही थम पाए। 1982 में उन्होंने कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर नैनीताल से पर्यटन में डिप्लोमा कर लिया, और इसके तत्काल बाद नगर में ट्रेवल एजेंसी खोल दी। तब नगर में केवल चार-पांच ही ट्रेवल एजेंसी थीं और उनकी भूमिका केवल रानीखेत और कौसानी के टूर कराने तक सीमित थी। विजय ने अपनी ट्रेवल एजेंसी में पहली बार गाइड रखने की शुरुआत की, जो सैलानियों को घुमाने के साथ ही आसपास के अन्य पर्यटक स्थलों की जानकारी भी देते थे। विजय को ही नगर की आसपास की सुंदर भीमताल, सातताल, नौकुचियाताल व खुर्पाताल आदि झीलों के लिए ‘लेक टूर’ शुरू करने का श्रेय भी जाता है। नैनीताल के लिए दिल्ली से सैलानियों को अधिक लाने के लिए बसें लगवाने की शुरुआत भी उनके दौर में ही हुई। इस प्रकार वह पर्यटन व्यवसाय में हमेशा तत्कालीन परिस्थितियों के अनुरूप नए-नए प्रयोग करते हुए स्वयं को दौड़ में हमेशा अलग एवं आगे बनाए रहे और नए प्रतिमान स्थापित करते रहे।इधर हालिया वर्षों में ट्रेवल एजेंसियों का नगर में काम चौपट होने के दौर में उन्होंने स्वयं को देश-दुनिया के टूर आयोजित करने की ओर मोड़ा है। हालांकि इसकी शुरुआत वह 1983 में ही 25 दिन का ‘भारत भ्रमण” टूर से कर चुके थे। अब वह कमोबेश हर माह कोई बड़ा टूर आयोजित करते हैं। बीते वर्ष उन्होंने हिंदुओं के पवित्र और सबसे बड़े तीर्थ कैलाश-मानसरोवर के लिए भारत के कठिन व लंबी पैदल यात्रा की जगह नेपाल की ओर से बेहद सरल यात्रा की शुरुआत की है, साथ ही हर वर्ष कम से कम एक विदेशी टूर भी आयोजित कर रहे हैं। और आगे उनकी योजना विदेशी यात्राओं को बढ़ावा देने की है।श्री खाती बताते हैं अनुभव के जरिए प्राप्त इस सफलता का लाभ वह अपने साथी यात्रियों को सस्ती यात्रा के रूप में दे पाते हैं। उनकी यात्राओं की खाशियत यह भी है कि यह केवल एक बस, टैक्सी, ट्रेन या हवाई जहाज से नहीं वरन इन सभी के समन्वय से होती हैं। वह यात्रा की परिस्थितियों को देखते हुए पहले से तय यात्रा माध्यम वाहन का प्रयोग करते हैं, और साथ ही यात्रियों को कम खर्च के बावजूद अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। शायद इसी लिए उनकी पूरी तरह नियोजित यात्राएं अपने मूल खर्च से आधी धनराशि में ही संपन्न हो जाती हैं, और यात्रियों को बेहद सस्ती पड़ती हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंयह भी पढ़ें : इन सर्दियों में कीजिए पूर्व, मध्य, दक्षिण व पूर्वाेत्तर भारत तथा नेपाल व यूरोप के दर्शन-नगर में इस तरह की यात्राएं कराने वाली इकलौती संस्था है वाईटीडीओ नैनीताल। सरोवरनगरी की अग्रणी पर्यटन संस्था यूथ टूरिज्म डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन यानी वाईटीडीओ आगामी सर्दियों के महीनों में भारत दर्शन श्रृंखला की यात्राएं कराने जा रही है। उल्लेखनीय है कि वाईटीडीओ नगर से इस तरह की यात्राएं कराने वाली इकलौती संस्था है। वाईटीडीओ संस्था के प्रमुख देश-दुनिया के पर्यटन के इनसाइक्लोपीडिया कहे जाने वाले विजय मोहन सिंह खाती ने बुधवार को बताया कि आगामी नवंबर माह से कई यात्राएं आयोजित की जाएंगी।इनमें 12 से 23 नवंबर के बीच 12 दिवसीय दार्जिलिंग, गंगटोक, मां कामाख्या देवी मंदिर गुवाहाटी तथा शिलांग आदि पूर्वाेत्तर भारत की यात्रा, 26 दिसंबर से 10 जनवरी और 16 जनवरी से 31 जनवरी के बीच 16 दिवसीय कोचीन, समुद्री सैरगाज कोवलम, केरला की राजधानी तिरुअनंतपुरम, देश के आखिरी छोर कन्याकुमारी, रामेश्वरमधाम, मीनाक्षी मंदिर, मदुरई, मैसूर, तिरुपति बालाजी, मद्रास व महाबलीपुरम की दक्षिण भारत की यात्राएं, 30 दिसंबर से नौ जनवरी 2018 के बीच शिव ज्योर्तिलिंग काशी विश्वनाथ, वाराणसी, श्री जगन्नाथ धाम, गया, गंगासागर, कोलकाता व भुवनेश्वर की 12 दिवसीय पूर्वी भारत की यात्रा और 17 जनवरी 2018 से दो फरवरी के बीच हैदराबाद, शिव ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर, त्रयम्बकेश्वर एवं भीमाशंकर, ऐलोरा, शिरडी, नासिक, मुंबई व गावा की मध्य भारत की यात्राएं आयोजित की जा रही हैं। इसके लावा आगे आठ से 16 फरवरी 2018 के बीच नौ दिवसीय नेपाल यात्रा और अपै्रल 2018 में यूरोप के फ्रांस, स्विटजरलेंड, लाइटेंटेन, आस्ट्रिया व इटली की 10 दिवसीय यात्राएं भी कराई जाएंगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंShare this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading...Related Post navigationनैनीताल को ‘कमजोर’ नगर बताना कितना सही ? वी-मार्ट हल्द्वानी पर कैरी बैग का अतिरिक्त शुल्क वसूलने परर सवा लाख का जुर्माना
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