EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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बात यह है कि इस चुनाव में बसपा आदि कुछ दलों को छोड़कर सभी दलों के लिये खुश होने का मौका है, लेकिन खुश कोई नहीं है। सुबह से दोपहर और इसके बाद अपराह्न का समय आ जाने यानी तीन पहर बीत जाने के बाद भी शायद ही किसी दल की ओर से मिठाई बंटी है, या पटाखे छूटे हैं। (Quick response on Lok Sabha Election Results2024)जबकि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के बाद भाजपा के नेतृत्व में तीसरी बार एनडीए यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बन रही है। उड़ीसा में भाजपा की और इसके अलावा आंध्र प्रदेश में उसके सहयोगी दल तेलगू देशम की सरकार बन रही है। उत्तराखंड, हिमांचल व मध्य प्रदेश में वह ‘मोदी मैजिक’ के बरकरार रहने के साथ ‘क्लीन स्वीप’ करती नजर आ रही है। लेकिन चूंकि उन्होंने भाजपा के लिये 370 और एनडीए के लिये ‘अबकी बार 400 पार’ के नारे लगाये थे, इसलिये वह भी अपेक्षित सफलता न प्राप्त कर पाने की वजह से अपेक्षित खुश नजर नहीं आ रहे हैं।यही स्थिति कांग्रेस व इंडिया गठबंधन के खेमे में भी नजर आ रही है। वहां कांग्रेस 100 के पास और इंडिया गठबंधन 230-240 के पास आता नजर आ रहा है लेकिन चूंकि वह फिलहाल बिना किसी चमत्कार या राजनीतिक दांव-पेंच खेले, दलों को इधर से उधर किये सरकार बनाते नजर नहीं आ रहे हैं, इसलिये यह कसक वहां भी साफ नजर आ रही है। और शायद इसी का प्रभाव है कि चुनाव परिणाम के दिन के तीन पहर बीत जाने के बावजूद किसी राजनीतिक दल में न मिठाई बंटती नजर आ रही है और न ही कहीं पटाखे ही तोड़े गये हैं। (Quick response on Lok Sabha Election Results2024)नेता एक-दूसरे को बधाई भी देते नजर नहीं आ रहे हैं, हां जोड़-तोड़ जरूर शुरू हो गयी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार एनडीए के नितीश कुमार व चंद्रबाबू नायडू पर इंडिया गठबंधन की ओर से उप प्रधानमंत्री बनाने व राज्य को विशेष दर्जा देने के प्रलोभन देने का दौर भी शुरू हो गया है। यह देश का एक बार फिर बिना बहुमत वाली गठबंधन सरकारों की खींचतान का दौर लौटने का संकेत भी है। अलबत्ता यह भी है कि इस चुनाव के साथ उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस व आंध्र प्रदेश में तेलगू देशम आदि क्षेत्रीय दल अधिक मजबूत हुऐ हैं। (Quick response on Lok Sabha Election Results2024) आज मिले जनादेश में यह भी साफ दिख रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी का ‘अबकी बार-400 पार’ का नारा उनकी पार्टी व गठबंधन पर भारी पड़ा है। इस कारण एक ओर भाजपा के अति आत्मविश्वास व दंभ की झलक दिखी, इस कारण भी विपक्ष जनता में यह संदेश देने में भी सफल हो पाया कि मोदी संविधान को बदलने के लिये इतना बड़ा जनादेश मांग रहे हैं। वहीं भाजपा के मतदाता भी इस कारण ही मतदान करने नहीं गये, क्योंकि उन्हें लगा कि पार्टी तो जीत ही रही है। उनके मतदान न करने से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसका प्रभाव कम मतदान के रूप में भी देखा गया। (Quick response on Lok Sabha Election Results2024)भाजपा नेताओं के लिए सबक लेने का मौकानैनीताल। लोक सभा चुनाव में जिस तरह का चुनाव परिणाम आया है वह सत्तारूढ़ दल के खासकर उन लोगों के लिए बड़ा सबक है, जो मान बैठे थे कि चाहे वह कोई कार्य न करें, जनता की उपेक्षा करें, आम लोगों को कुछ न समझें, फिर भी वह चुनाव में जीत जाएंगे, अब ऐसा होने वाला नहीं है। उन्हें आगे के चुनावों के लिये जनता के बीच जाना होगा। जनता की सुननी होगी। उनकी समस्याओं का समाधान करना होगा। उन्हें महत्व देना होगा। क्योंकि इस चुनाव से जनता ने स्पष्ट तौर पर दिखा दिया है कि लोक तंत्र में वह ही सर्वोपरि है। वह 400 पार के बड़े लक्ष्य को लेकर चल रहे, यानी स्वयं को इतिहास में सबसे बड़ा जनादेश लेने के योग्य मान रही पार्टी को जमीन दिखाने जैसा है। यह सबक सत्तारूढ़ दल के लोग जितना जल्दी ले लें, उतना ही उनके लिये और देश के लिये अच्छा होगा। यह भी है कि इस बार भले भाजपा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बना ले लेकिन वह उतने उन्मुक्त तरीके से सरकार नहीं चला पाएंगे, और सरकार अधिक जनोन्मुखी हो सकती है। यानी सरकार पर जिस तरह के हिटलर शाही के आरोप लगते हैं, वैसे आरोप लगाने की जरूरत शायद आगे न पड़े। यह भी होगा कि इस बार संसद में विपक्ष अधिक मजबूत होगा और सत्तारूढ़ दल के लिए बड़े फैसले करना आसान नहीं होगा। (Quick response on Lok Sabha Election Results2024)आरोपों की ही बात करें तो शायद इस चुनाव के बाद विपक्ष चुनाव आयोग पर और सरकार पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को अपने इशारों पर चलाने के तथा ईवीएम के दुरुपयोग के जैसे आरोप लगाते रहे हैं, शायद अब वैसे आरोप न लगा पाएंगे। (Quick response on Lok Sabha Election Results2024)‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया 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