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नवीन समाचार, देहरादून, 13 जनवरी 2026 (Provision in RTI for Judges)। सूचना का अधिकार अधिनियम (Right to Information Act—RTI) के तहत उत्तराखंड सूचना आयोग (Uttarakhand Information Commission) ने एक बड़ा-महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आदेश पारित किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अधीनस्थ (निचली) न्यायपालिका के न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध दर्ज शिकायतों की संख्या, उन शिकायतों पर हुई अनुशासनात्मक प्रक्रिया और कार्रवाई से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक हित में आरटीआई के माध्यम से उपलब्ध कराई जानी चाहिए। हालांकि आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसी न्यायाधीश या अधिकारी की पहचान, नाम या व्यक्तिगत विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की दिशा में बड़ा संकेत मिलता है। 

सूचना आयोग का आदेश, सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बाद देना होगा विवरण

(Provision in RTI for Judges)बड़ी खबरः वरिष्ठ नौकरशाह राधा रतूड़ी होगी उत्तराखण्ड की नई मुख्य सचिव -  Dastavej - Uttarakhand Local News Portalयह आदेश मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी (Chief Information Commissioner Radha Raturi) की अध्यक्षता में पारित किया गया। आयोग ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) के संयुक्त रजिस्ट्रार (Joint Registrar) को निर्देश दिए हैं कि सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) से अनुमति प्राप्त कर शिकायतों से संबंधित आवश्यक सूचना उपलब्ध कराई जाए। आयोग ने यह भी कहा कि सूचना देने में “गोपनीयता” का सामान्य तर्क पर्याप्त नहीं है, जब विषय सार्वजनिक हित और संस्थागत पारदर्शिता से जुड़ा हो।

मामला किससे जुड़ा, आईएफएस अधिकारी की आरटीआई से शुरू हुआ विवाद

यह प्रकरण भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service—IFS) के वरिष्ठ अधिकारी संजीव चतुर्वेदी (Sanjeev Chaturvedi) से जुड़ा है, जो वर्तमान में हल्द्वानी (Haldwani) में तैनात बताए गये हैं। उन्होंने 14 मई 2025 को आरटीआई के तहत आवेदन देकर अधीनस्थ न्यायपालिका के सेवा नियम (Service Rules), आचरण नियम (Conduct Rules) और अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया (Disciplinary Action Procedure) की जानकारी मांगी थी।

इसके साथ ही उन्होंने 1 जनवरी 2020 से 15 अप्रैल 2025 के बीच अधीनस्थ न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध दर्ज शिकायतों की संख्या और उन पर हुई कार्रवाई का विवरण भी मांगा था।

किन्तु नैनीताल स्थित उच्च न्यायालय के लोक सूचना अधिकारी (Public Information Officer—PIO) ने यह कहकर सूचना देने से इनकार कर दिया था कि यह सूचना गोपनीय है और तीसरे पक्ष (Third Party) से संबंधित है। इसके बाद संजीव चतुर्वेदी ने पहले विभागीय अपील (Departmental Appeal) और फिर आयोग में द्वितीय अपील (Second Appeal) दाखिल की थी।

“गोपनीय” कह देने से सूचना नहीं रोकी जा सकती

सूचना आयोग में हुई सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि शिकायतों की संख्या और कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक हित से जुड़ा विषय है, क्योंकि इससे न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है। दूसरी ओर लोक सूचना अधिकारी ने इसे संवेदनशील बताते हुए दोबारा गोपनीयता का हवाला दिया।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने स्पष्ट टिप्पणी की कि केवल “गोपनीय” शब्द का प्रयोग कर सूचना रोकी नहीं जा सकती। आयोग के अनुसार शिकायतों की संख्या और उन पर अपनाई गई प्रक्रिया पारदर्शिता के दायरे में आती है। आयोग ने निर्देश दिया कि सक्षम प्राधिकारी से अनुमति मिलने के बाद एक महीने के भीतर यह सूचना अपीलकर्ता को उपलब्ध कराई जाए।

न्यायिक पारदर्शिता पर असर, भविष्य में नजीर बनने की संभावना

जानकारों के अनुसार यह आदेश न्यायिक व्यवस्था में उत्तरदायित्व तय करने और संस्थागत विश्वास मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह फैसला आने वाले समय में आरटीआई के तहत न्यायिक संस्थाओं से जुड़ी सूचनाओं के मामलों में एक नजीर (Precedent) बन सकता है।

यह भी पढ़ें :  उत्तराखंड के बागेश्वर में सुबह 7:25 बजे 3.5 तीव्रता का भूकंप, झटके हरिद्वार-ऋषिकेश तक महसूस, नुकसान की सूचना नहीं

यह भी उल्लेखनीय है कि आयोग ने सूचना देने के साथ-साथ न्यायाधीशों/अधिकारियों की पहचान छिपाने की शर्त रखकर निजता (Privacy) और सार्वजनिक हित (Public Interest) के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। इससे नागरिकों को यह भरोसा मिलेगा कि व्यवस्था में पारदर्शिता भी होगी और अनावश्यक व्यक्तिगत सार्वजनिकता से बचाव भी किया जाएगा।

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By डॉ.नवीन जोशी

डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, 'कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन 'नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड' के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।

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