नवीन समाचार, देहरादून, 15 जनवरी 2026 (Transparent Advertising Policy)। उत्तराखंड में सरकारी विज्ञापन, प्रचार सामग्री और इवेंट के नाम पर सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग को लेकर बहस तेज हो गई है। वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व संपादक गिरीश गुरुरानी (Girish Gururani) ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि राज्य में सरकारी प्रचार के लिए होने वाले व्यय को “न्यायोचित, स्पष्ट और पारदर्शी” बनाने के लिए नई विज्ञापन एवं प्रचार नीति (Advertisement & Publicity Policy) तैयार की जाए।
पत्र में पिछले चार-पांच वर्षों में सरकारी प्रचार पर लगभग एक हजार करोड़ रुपये खर्च होने संबंधी मीडिया रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए आशंका जताई गई है कि इस राशि का बड़ा हिस्सा ऐसे मीडिया संस्थानों, अखबारों और डिजिटल मंचों (Digital Platforms) को गया, जिन्हें राज्य की जनता जानती तक नहीं और जिनके पास प्रचार की वास्तविक क्षमता भी नहीं है।
पत्र के अनुसार, यदि प्रचार में खर्च की गई राशि का एक हिस्सा भी विकास कार्यों में लगाया जाता तो शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) जैसे क्षेत्रों में ठोस सुधार संभव हो सकता था। पत्र में यह भी कहा गया है कि सरकार को अपने कार्यों का प्रचार करने का अधिकार है, लेकिन जब राज्य की बुनियादी व्यवस्थाएं दबाव में हों, तब इतनी बड़ी राशि केवल प्रचार पर खर्च होना नैतिक और नीतिगत स्तर पर प्रश्न खड़े करता है।
प्रचार व्यय की तुलनात्मक जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
पत्र में मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि सरकारी विज्ञापन बंटवारे, प्रचार सामग्री, वीडियो रील (Video Reels), कॉफी टेबल बुक (Coffee Table Books), होर्डिंग्स (Hoardings) और इवेंट (Events) जैसे मदों में अपनाई गई प्रक्रिया की जांच कराई जाए। इसके साथ ही इन कार्यों में खर्च की गई धनराशि की बाजार दरों (Market Rates) से तुलनात्मक समीक्षा कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की बात कही गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी खजाने का कितना उपयोग वास्तविक जरूरत के अनुसार हो रहा है और कहां अनावश्यक व्यय हो रहा है।
पत्र में यह चिंता भी जताई गई है कि प्रचार के कुछ कार्य “छद्म तरीके” से किए जा रहे हैं, जिसमें कथित रूप से पसंदीदा संस्थानों को करोड़ों रुपये दिए जाते हैं और बदले में होटलों के बंद कमरों में सीमित उपस्थिति वाले आयोजन कराए जाते हैं। लेखक के अनुसार यह प्रक्रिया खुली प्रतिस्पर्धा (Open Competition) की भावना के विपरीत है और इसे टेंडर प्रक्रिया (Tender Process) के जरिए पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
इवेंट और प्रचार सामग्री के लिए खुली निविदा आमंत्रित करने की मांग
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक इवेंट के लिए सरकार को खुली निविदा आमंत्रित कर प्रतिस्पर्धी दरें (Competitive Rates) तय करनी चाहिए, ताकि “पिछले दरवाजे” से अघोषित ठेकों का आरोप समाप्त हो और व्यय पर नियंत्रण हो। साथ ही प्रचार सामग्री, छपाई, वीडियो निर्माण और अन्य डिजिटल प्रचार कार्यों में वास्तविक खर्च की तुलना में कई गुना भुगतान किए जाने के आरोपों पर भी चिंता व्यक्त की गई है।
पत्र के अनुसार, यदि प्रचार कार्यों के लिए दरों और मानकों का मानकीकरण (Standardization) किया जाए तो सरकारी बजट में बड़ी बचत संभव है, जिसका उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, ग्रामीण विकास और रोजगार (Employment) जैसी प्राथमिकताओं पर हो सकता है।
“फर्जी संस्थाओं” को विज्ञापन देने पर सवाल, स्थानीय मीडिया को प्राथमिकता का सुझाव
पत्र में एक बड़ा मुद्दा यह भी उठाया गया है कि भारी विज्ञापन राशि के कारण कई बाहरी मीडिया संस्थान बिना पर्याप्त ढांचा विकसित किए केवल विज्ञापन प्राप्त करने के उद्देश्य से देहरादून (Dehradun) की ओर आकर्षित हुए हैं। लेखक के अनुसार इनमें से अनेक संस्थानों को उत्तराखंड की जनता “मीडिया हाउस” के रूप में जानती तक नहीं, जिससे यह प्रश्न खड़ा होता है कि सरकारी प्रचार का वास्तविक लाभ जनता तक पहुंच रहा है या नहीं।
पत्र में सुझाव दिया गया है कि सरकार को प्रभावहीन या सांकेतिक संस्थाओं के बजाय उत्तराखंड के प्रभावी स्थानीय समाचार पत्रों, समाचार चैनलों और डिजिटल मंचों (Local Newspapers, TV Channels & Digital Media) को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि प्रचार का वास्तविक परिणाम भी मिले और स्थानीय मीडिया का आर्थिक आधार भी मजबूत हो।
विज्ञापन राजस्व से पत्रकारों के वेतन जोड़ने का प्रस्ताव
पत्र में स्थानीय पत्रकारिता (Local Journalism) के आर्थिक संकट का भी उल्लेख है। लेखक के अनुसार राज्य के अनेक पत्रकारों और मीडियाकर्मियों की आजीविका छोटे समाचार पत्रों और डिजिटल पोर्टलों पर निर्भर है, लेकिन विज्ञापन नीति में इनकी उपेक्षा होती है।
इसी संदर्भ में पत्र में यह प्रस्ताव भी दिया गया है कि सरकार जिस अनुपात में मीडिया संस्थानों का विज्ञापन राजस्व बढ़ाए, उसी अनुपात में संबंधित संस्थान अपने उत्तराखंड में कार्यरत पत्रकारों/मीडियाकर्मियों का वेतन भी बढ़ाएं। इससे प्रचार बजट का लाभ स्थानीय रोजगार (Media Employment) और श्रम सुरक्षा से भी जुड़ सकेगा।
विज्ञापन सीधे जारी करने से बचत की बात
पत्र में कहा गया है कि विज्ञापन एजेंसियों (Advertising Agencies) या मध्यस्थों के बजाय सीधे मीडिया संस्थानों को विज्ञापन जारी किए जा सकते हैं, जिससे सरकारी व्यय का बड़ा हिस्सा बचाया जा सकेगा।
“न्यूनतम बजट, अधिकतम प्रभाव” की नीति बनाने का आग्रह
पत्रकार गिरीश गुरुरानी ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि उत्तराखंड के करदाताओं (Taxpayers) के धन को खैरात की तरह नहीं बांटा जा सकता। इसलिए राज्य को “न्यूनतम बजट, अधिकतम प्रभाव” (Minimum Budget, Maximum Impact) के सिद्धांत पर आधारित स्पष्ट, न्यायोचित और पारदर्शी नई विज्ञापन एवं प्रचार नीति लागू करनी चाहिए।
पत्र के सामने आने के बाद यह विषय राज्य की वित्तीय पारदर्शिता, सरकारी व्यय की प्राथमिकताएं और मीडिया प्रबंधन नीति से जुड़ी बड़ी चर्चा का आधार बनता दिख रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पत्र में उठाई गई मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या प्रचार-प्रसार व्यय की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कोई ठोस व्यवस्था लागू की जाती है।
पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट यहाँ क्लिक करके पढ़ी जा सकती है। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचारों के लिए यहाँ👉, अल्मोड़ा के समाचारों के लिए यहाँ👉, बागेश्वर के समाचारों के लिए यहाँ👉, चंपावत के समाचारों के लिए यहाँ👉, ऊधमसिंह नगर के समाचारों के लिए यहाँ👉, देहरादून के समाचारों के लिए यहाँ👉, उत्तरकाशी के समाचारों के लिए यहाँ👉, पौड़ी के समाचारों के लिए यहाँ👉, टिहरी जनपद के समाचारों के लिए यहाँ👉, चमोली के समाचारों के लिए यहाँ👉, रुद्रप्रयाग के समाचारों के लिए यहाँ👉, हरिद्वार के समाचारों के लिए यहाँ👉और उत्तराखंडसे संबंधित अन्य समाचार पढ़ने के लिये यहां👉 क्लिक करें।
आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे उत्तराखंड के नवीनतम अपडेट्स-‘नवीन समाचार’ पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यहां क्लिक कर हमारे व्हाट्सएप चैनल से, फेसबुक ग्रुप से, गूगल न्यूज से यहाँ, एक्स से, थ्रेड्स चैनल से, टेलीग्राम से, कुटुंब एप से और डेलीहंट से जुड़ें। अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें यहाँ क्लिक करके सहयोग करें..।
Tags (Transparent Advertising Policy) :
Transparent Advertising Policy, Uttarakhand government advertisement policy transparency demand, Dehradun government publicity spending one thousand crore, Uttarakhand media advertisement distribution controversy 2026, Open tender system for government events Uttarakhand, Public money misuse allegations in Uttarakhand publicity, Transparency in government advertising budget Uttarakhand, Local media priority in Uttarakhand government ads, Government advertisement audit market rate comparison, Accountability in Uttarakhand publicity material spending, Minimum budget maximum impact publicity policy Uttarakhand, Journalist letter to CM Dhami on ad policy, Uttarakhand tax payer money advertisement spending issue, #Hashtags (English): #UttarakhandNews #DehradunNews #GovernmentAdvertising #PublicMoney #TransparencyPolicy #AdvertisementPolicy #MediaFunding #EventManagement #TenderProcess #TaxpayerMoney #LocalMedia #Accountability










3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं।