नवीन समाचार, नई दिल्ली, 28 फरवरी 2026 (CBSEs New language Policy)। उत्तराखंड (Uttarakhand) सहित देशभर के सीबीएसई (CBSE) यानी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) के विद्यालयों में स्कूली शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। सीबीएसई ने नई तृतीय भाषा नीति (CBSE Third Language Policy 2026) लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसके तहत विद्यार्थियों को कक्षा 6 से दो भारतीय भाषाओं के साथ एक विदेशी भाषा पढ़ना अनिवार्य होगा। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बहुभाषी दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कब से लागू होगी नई नीति
सीबीएसई के अनुसार यह नीति शैक्षणिक सत्र 2027-28 से चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। सबसे पहले कक्षा 6 के विद्यार्थियों पर यह व्यवस्था लागू होगी और वही बैच आगे की कक्षाओं में इसी ढांचे के साथ आगे बढ़ेगा। योजना के अनुसार वर्ष 2031 में कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा भी इसी भाषा प्रारूप के आधार पर करायी जा सकती है।
विद्यार्थियों को क्या पढ़ना होगा
विद्यार्थी विदेशी भाषा के रूप में अंग्रेजी (English), फ्रेंच (French), जर्मन (German) आदि में से चयन कर सकेंगे। वहीं भारतीय भाषाओं के रूप में तमिल (Tamil), तेलुगु (Telugu), मलयालम (Malayalam), कन्नड़ (Kannada), गुजराती (Gujarati) और बांग्ला (Bangla) सहित अन्य भाषाएं चुनी जा सकेंगी।
क्यों लाया जा रहा है यह बदलाव
बोर्ड का उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय भाषाओं की समझ मजबूत करना और बहुभाषी क्षमता विकसित करना है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा मिलेगा और विद्यार्थियों की भाषाई दक्षता भी बढ़ेगी।
क्या विद्यालयों में भाषा शिक्षकों और संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था हो पाएगी? यह प्रश्न अब शिक्षा संस्थानों के सामने महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में उभर रहा है।
पाठ्यपुस्तकें और परीक्षा पैटर्न भी बदलेंगे
सीबीएसई ने संकेत दिया है कि नई नीति के अनुरूप नई पाठ्यपुस्तकें तैयार करायी जाएंगी। साथ ही भविष्य की बोर्ड परीक्षाओं का प्रारूप भी इस बहुभाषी ढांचे के अनुरूप समायोजित किया जाएगा। कहा जा रहा है कि यह बदलाव स्कूली शिक्षा, प्रतियोगी तैयारी और भाषा सीखने की प्रवृत्ति—तीनों पर प्रभाव डाल सकता है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
