कुमाऊं मंडल का अद्भुद ‘पाताल लोक’, जहां होते हैं 33 कोटि देवताओं के दर्शन, यहीं रखा गया था भगवान गणेश का सिर कटने के बाद धड़….

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नवीन समाचार, पाताल भुवनेश्वर से, 5 नवंबर 2023 (Destination Kumaon)। नवीन समाचार में आज हम आपको पाताल भुवनेश्वर की गुफा के दर्शन कराने जा रहे हैं। यह स्थान उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में पिथौरागढ़ जनपद में काली माता के प्रसिद्ध मंदिर हाट कालिका यानी गंगोलीहाट और अंग्रेजी दौर में प्रसिद्ध रही बेरीनाग-चौकोड़ी की चाय के स्थान के बीच में स्थित है। कहते हैं इस गुफा की खोज त्रेता युग में सूर्य वंश के अयोध्या के राजा ऋतुपर्णा ने की थी। देखें वीडिओ :

Destination Kumaon पाताल भुवनेश्वर गुफा के हैरान कर देने वाले रहस्य | Patal Bhuvaneshwar Cave  Temple - YouTubeस्कंद पुराण के अनुसार राजा ऋतुपर्ण जब एक जंगली हिरण का पीछा करते हुए इस गुफा में प्रविष्ट हुए तो उन्होंने इस गुफा के भीतर महादेव शिव सहित 33 कोटि देवताओं के साक्षात दर्शन किये थे। स्कंद पुराण में वर्णन है कि स्वयं महादेव शिव पाताल भुवनेश्वर में विराजमान रहते हैं और अन्य देवी देवता उनकी स्तुति करने यहां आते हैं।

जगदगुरु आदि शंकराचार्य का 819 ईसवी के आसपास यहाँ आए (Destination Kumaon)

द्वापर युग में पाण्डवों ने यहां चौपड़ खेला और कलयुग में जगदगुरु आदि शंकराचार्य का 819 ईसवी के आसपास इस गुफा से साक्षात्कार हुआ तो उन्होंने यहां तांबे का एक शिवलिंग स्थापित कर इस स्थान को कीलित किया। पत्थरों से बनी हुई इस गुफा के अंदर जाने के लिए बेहद संकरे रास्ते से लोहे की जंजीरों का सहारा लेकर करीब 150 फिट धरती के अंदर जाना पड़ता है, जहां बड़े आकार की खुली जगह एवं जल कुंड तथा 33 कोटि देवताओं की मूर्तियां लिंग स्वरूप में मौजूद है।

गुफा में शेष नाग द्वारा अपने फन पर उठायी गई पृथ्वी, धर्म एवं मोक्ष के द्वार, ऐरावत हाथी के सहस्त्र पैर, सात जल कुंड एवं उनकी रक्षा न कर पाने के कारण उल्टी गर्दन वाला ब्रह्मा जी का हंस, वासुकी नाग, तक्षक नाग, राजा भगीरथ, एक ही लिंग में भगवान ब्रह्मा, लेटे हुये विष्णु एवं महादेव शिव, कामधेनु गाय, भगवान शिव का कमंडल व मृगछाला, सहस्त्र दल कमल, आदि मौजूद हैं।

इसके अलावा यहां सतयुग, द्वापर, त्रेता व कलयुग लिंग स्वरूप में हैं। कहते हैं कि कलयुग की लंबाई लगातार बढ़ रही है। जब यह अपने ऊपर स्थित दीवार को छू लेगी तो कलयुग या सृष्टि का अंत हो जायेगा। कुछ मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने क्रोध के आवेश में अपने पुत्र गणेश का जो मस्तक शरीर से अलग किया था, उसे उन्होंने इस गुफा में रखा था। गुफा के अंदर एक हवन कुंड भी है। इस कुंड के बारे में कहा जाता है कि इसमें जनमेजय ने नाग यज्ञ किया था जिसमें सभी सांप जलकर भस्म हो गए थे। (Destination Kumaon)

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