EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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Information Commission) ने एक बड़ा-महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आदेश पारित किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अधीनस्थ (निचली) न्यायपालिका के न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध दर्ज शिकायतों की संख्या, उन शिकायतों पर हुई अनुशासनात्मक प्रक्रिया और कार्रवाई से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक हित में आरटीआई के माध्यम से उपलब्ध कराई जानी चाहिए। हालांकि आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसी न्यायाधीश या अधिकारी की पहचान, नाम या व्यक्तिगत विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।यह भी पढ़ें : भीमताल–हल्द्वानी मार्ग पर टेंपो ट्रैवलर खाई में गिरा, दिल्ली से आए छात्रों सहित 24–25 लोग थे सवार, कई घायल यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की दिशा में बड़ा संकेत मिलता है। यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleसूचना आयोग का आदेश, सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बाद देना होगा विवरणमामला किससे जुड़ा, आईएफएस अधिकारी की आरटीआई से शुरू हुआ विवाद“गोपनीय” कह देने से सूचना नहीं रोकी जा सकतीन्यायिक पारदर्शिता पर असर, भविष्य में नजीर बनने की संभावनाTags (Provision in RTI for Judges) :Like this:Relatedसूचना आयोग का आदेश, सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बाद देना होगा विवरणयह आदेश मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी (Chief Information Commissioner Radha Raturi) की अध्यक्षता में पारित किया गया। आयोग ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) के संयुक्त रजिस्ट्रार (Joint Registrar) को निर्देश दिए हैं कि सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) से अनुमति प्राप्त कर शिकायतों से संबंधित आवश्यक सूचना उपलब्ध कराई जाए। आयोग ने यह भी कहा कि सूचना देने में “गोपनीयता” का सामान्य तर्क पर्याप्त नहीं है, जब विषय सार्वजनिक हित और संस्थागत पारदर्शिता से जुड़ा हो।मामला किससे जुड़ा, आईएफएस अधिकारी की आरटीआई से शुरू हुआ विवादयह प्रकरण भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service—IFS) के वरिष्ठ अधिकारी संजीव चतुर्वेदी (Sanjeev Chaturvedi) से जुड़ा है, जो वर्तमान में हल्द्वानी (Haldwani) में तैनात बताए गये हैं। उन्होंने 14 मई 2025 को आरटीआई के तहत आवेदन देकर अधीनस्थ न्यायपालिका के सेवा नियम (Service Rules), आचरण नियम (Conduct Rules) और अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया (Disciplinary Action Procedure) की जानकारी मांगी थी। इसके साथ ही उन्होंने 1 जनवरी 2020 से 15 अप्रैल 2025 के बीच अधीनस्थ न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध दर्ज शिकायतों की संख्या और उन पर हुई कार्रवाई का विवरण भी मांगा था।किन्तु नैनीताल स्थित उच्च न्यायालय के लोक सूचना अधिकारी (Public Information Officer—PIO) ने यह कहकर सूचना देने से इनकार कर दिया था कि यह सूचना गोपनीय है और तीसरे पक्ष (Third Party) से संबंधित है। इसके बाद संजीव चतुर्वेदी ने पहले विभागीय अपील (Departmental Appeal) और फिर आयोग में द्वितीय अपील (Second Appeal) दाखिल की थी।“गोपनीय” कह देने से सूचना नहीं रोकी जा सकतीसूचना आयोग में हुई सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि शिकायतों की संख्या और कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक हित से जुड़ा विषय है, क्योंकि इससे न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है। दूसरी ओर लोक सूचना अधिकारी ने इसे संवेदनशील बताते हुए दोबारा गोपनीयता का हवाला दिया।यह भी पढ़ें : दो बच्चों की मां का भतीजे ने चुराया दिल, प्रेम विवाह कर दोनों घर चलाने बन गए 'बंटी-बबली' जैसे चोर और….‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया विज्ञापन न केवल आपके व्यवसाय या संस्थान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाएगा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता को भी सशक्त बनाएगा। अग्रिम धन्यवाद। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने स्पष्ट टिप्पणी की कि केवल “गोपनीय” शब्द का प्रयोग कर सूचना रोकी नहीं जा सकती। आयोग के अनुसार शिकायतों की संख्या और उन पर अपनाई गई प्रक्रिया पारदर्शिता के दायरे में आती है। आयोग ने निर्देश दिया कि सक्षम प्राधिकारी से अनुमति मिलने के बाद एक महीने के भीतर यह सूचना अपीलकर्ता को उपलब्ध कराई जाए।न्यायिक पारदर्शिता पर असर, भविष्य में नजीर बनने की संभावनाजानकारों के अनुसार यह आदेश न्यायिक व्यवस्था में उत्तरदायित्व तय करने और संस्थागत विश्वास मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह फैसला आने वाले समय में आरटीआई के तहत न्यायिक संस्थाओं से जुड़ी सूचनाओं के मामलों में एक नजीर (Precedent) बन सकता है।यह भी पढ़ें : उत्तराखंड के बागेश्वर में सुबह 7:25 बजे 3.5 तीव्रता का भूकंप, झटके हरिद्वार-ऋषिकेश तक महसूस, नुकसान की सूचना नहींयह भी उल्लेखनीय है कि आयोग ने सूचना देने के साथ-साथ न्यायाधीशों/अधिकारियों की पहचान छिपाने की शर्त रखकर निजता (Privacy) और सार्वजनिक हित (Public Interest) के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। इससे नागरिकों को यह भरोसा मिलेगा कि व्यवस्था में पारदर्शिता भी होगी और अनावश्यक व्यक्तिगत सार्वजनिकता से बचाव भी किया जाएगा।पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट यहाँ क्लिक करके पढ़ी जा सकती है। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचारों के लिए यहाँ👉, अल्मोड़ा के समाचारों के लिए यहाँ👉, बागेश्वर के समाचारों के लिए यहाँ👉, चंपावत के समाचारों के लिए यहाँ👉, ऊधमसिंह नगर के समाचारों के लिए यहाँ👉, देहरादून के समाचारों के लिए यहाँ👉, उत्तरकाशी के समाचारों के लिए यहाँ👉, पौड़ी के समाचारों के लिए यहाँ👉, टिहरी जनपद के समाचारों के लिए यहाँ👉, चमोली के समाचारों के लिए यहाँ👉, रुद्रप्रयाग के समाचारों के लिए यहाँ👉, हरिद्वार के समाचारों के लिए यहाँ👉और उत्तराखंडसे संबंधित अन्य समाचार पढ़ने 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