नवीन समाचार, देहरादून, 6 फरवरी 2026 (Lakhpati Didi Yojna)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) से महिला सशक्तिकरण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाली पहल सामने आई है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) से जुड़ी महिलाओं के लिए लखपति दीदी योजना (Lakhpati Didi Yojna) राज्य में वास्तविक अर्थों में गेम चेंजर (Game Changer) साबित हो रही है।
योजना के अंतर्गत अब तक ढाई लाख से अधिक महिलाएं सालाना एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। यह उपलब्धि इसलिए अहम है क्योंकि इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना को भी स्थायित्व मिला है।
सरकार ने इस योजना के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अगले दो वर्षों में पांच लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट और समयबद्ध निर्देश जारी किए गए हैं ताकि योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र महिलाओं तक पहुंचे।
स्वयं सहायता समूहों से आय सृजन का मजबूत मॉडल
उत्तराखंड के गठन के बाद से ही राज्य के विकास में महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण रही है। इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए केंद्र और राज्य सरकार की आजीविका मिशन योजनाओं के अंतर्गत वर्तमान में राज्य में 68 हजार से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। ये समूह स्थानीय संसाधनों पर आधारित कृषि, उद्यानिकी, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद निर्माण, सिलाई-कढ़ाई और अन्य लघु उद्यमों के माध्यम से आय अर्जन कर रहे हैं। इससे महिलाओं को घर के पास ही रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और पलायन की समस्या पर भी प्रभाव पड़ा है।
लखपति दीदी योजना की शुरुआत और प्रभाव
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में वर्ष 2022 में लखपति दीदी योजना की शुरुआत की गई थी। योजना के तहत महिलाओं को कृषि-उद्यान गतिविधियों, स्थानीय उत्पादों के विपणन, रसोई गैस वितरण, प्रारंभिक पशु चिकित्सा सेवाओं, बीमा योजनाओं और डिजिटल लेनदेन का प्रशिक्षण देकर आजीविका से जोड़ा गया। सरकार का जोर केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
योजना की शुरुआत से दिसंबर 2025 तक राज्य में 2.54 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 1.20 लाख के लक्ष्य के सापेक्ष 91,445 महिलाएं यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं, जो योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
सशक्त बहना उत्सव योजना से अतिरिक्त संबल
महिला समूहों की आय बढ़ाने के लिए अगस्त 2023 से मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना भी लागू की गई। वर्तमान में इस योजना से 35 हजार से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं और अब तक महिला समूहों द्वारा 9.11 करोड़ रुपये का कारोबार किया जा चुका है। यह पहल महिलाओं को बाजार से जोड़ने और उनके उत्पादों को पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध हो रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है और गांवों में पेयजल आपूर्ति जैसी व्यवस्थाओं में भी महिला समूहों की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। क्या यह मॉडल आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बनेगा। यह प्रश्न नीति और प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
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उत्तराखंड में ‘लखपति दीदी’ योजना का उद्देश्य एवं महत्वपूर्ण जानकारियाँ
उत्तराखंड में ‘लखपति दीदी’ योजना का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास के जरिए आत्मनिर्भर बनाकर उनकी सालाना आय कम से कम 1 लाख रुपये करना है। दिसंबर 2025 तक राज्य में 2.54 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, और अब इसे 5 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य है। महिला उद्यमियों को 5 लाख तक ब्याज-मुक्त ऋण भी प्रदान किया जा रहा है।
लखपति दीदी योजना की प्रमुख जानकारी (अपडेट 2026):
- उद्देश्य: ग्रामीण महिलाओं की सालाना आय को वर्ष 2025 तक बढ़ाकर कम से कम 1 लाख रुपये (प्रति माह ₹8,500 से अधिक) करना, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
- कार्यक्षेत्र: कृषि, जैविक खेती, पशुपालन, बागवानी, सिलाई-कढ़ाई, हस्तशिल्प और मशरूम उत्पादन जैसे विभिन्न आजीविका गतिविधियों का प्रशिक्षण।
- नवीनतम अपडेट (फरवरी-मार्च 2026):
- फरवरी 2026 तक 1.68 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
- 2026-27 के लिए ₹677.75 करोड़ की कार्ययोजना को मंजूरी दी गई है।
- उत्पादों के विपणन के लिए ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमी उत्पाद विपणन योजना’ (SHE-MART) को मजबूत किया जा रहा है।
- रीप (REAP) परियोजना के माध्यम से 2.5 लाख महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य है।
- आवेदन पात्रता और प्रक्रिया:
- आवेदनकर्ता महिला को स्वयं सहायता समूह का हिस्सा होना चाहिए।
- स्थायी निवासी उत्तराखंड की होनी चाहिए।
- आवेदन ग्रामीण विकास मंत्रालय की वेबसाइट के माध्यम से या नजदीकी स्वयं सहायता समूह/बैंक के माध्यम से कर सकते हैं।
- आवश्यक दस्तावेज: आधार कार्ड, बैंक पासबुक, पैन कार्ड, मोबाइल नंबर।
- यह योजना उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल है।
कैसे बनें ‘लखपति दीदी’: स्वयं सहायता समूह से आत्मनिर्भर उद्यमिता तक का मार्ग
भारत में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण यात्रा को नई दिशा देने के लिए “लखपति दीदी” पहल एक महत्वपूर्ण अभियान के रूप में उभरी है। इसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups – SHGs) से जुड़ी महिलाओं को स्थायी आजीविका, उद्यमिता और आय-वृद्धि के माध्यम से प्रति वर्ष एक लाख रुपये या उससे अधिक की आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है। यह पहल ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए संचालित दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (Deendayal Antyodaya Yojana – National Rural Livelihood Mission, DAY-NRLM) के अंतर्गत संचालित है।
लखपति दीदी कौन है?
‘लखपति दीदी’ वह महिला है जो स्वयं सहायता समूह की सदस्य होते हुए विविध आय-स्रोतों के माध्यम से वार्षिक न्यूनतम एक लाख रुपये की सतत आय अर्जित करती है। यह केवल आय का लक्ष्य नहीं, बल्कि वित्तीय साक्षरता, उद्यमिता और सामाजिक नेतृत्व का प्रतीक है।
लखपति दीदी बनने के लिए उठाए गए प्रमुख कदम
आजीविका विविधीकरण – कृषि, पशुपालन, सूक्ष्म उद्यम, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प आदि क्षेत्रों में आय के अवसर।
वित्तीय समावेशन – बैंक लिंकेज, ऋण सुविधा और सामुदायिक निवेश कोष।
कौशल विकास – उद्यम प्रबंधन, लेखांकन, विपणन और गुणवत्ता नियंत्रण पर प्रशिक्षण।
मार्गदर्शन प्रणाली – कम्यूनिटी रिसोर्स पर्सन (Community Resource Person – CRP) के माध्यम से स्थानीय स्तर पर सहयोग।
संभावित लखपति दीदियों की पहचान के मानदंड
सक्रिय स्वयं सहायता समूह सदस्यता।
नियमित बचत और बैंकिंग व्यवहार।
उद्यम स्थापित करने की इच्छा और क्षमता।
बहु-आय स्रोत विकसित करने की संभावना।
प्रशिक्षण तंत्र और मास्टर ट्रेनर
लखपति दीदी पहल के लिए मास्टर ट्रेनर वे विशेषज्ञ होते हैं जिन्हें राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (State Rural Livelihood Mission – SRLM) द्वारा चयनित किया जाता है। ये मास्टर ट्रेनर कम्यूनिटी रिसोर्स पर्सन्स को प्रशिक्षित करते हैं।
कम्यूनिटी रिसोर्स पर्सन्स को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी SRLM और DAY-NRLM की अधिकृत प्रशिक्षण इकाइयों की होती है।
प्रशिक्षण में शामिल मुख्य विषय
उद्यम योजना निर्माण
लागत और लाभ विश्लेषण
बाजार से जुड़ाव
वित्तीय प्रबंधन
जोखिम प्रबंधन
समूह सुदृढ़ीकरण
प्रशिक्षण मॉड्यूल आधिकारिक पोर्टल और राज्य मिशन कार्यालयों से प्राप्त किया जा सकता है।
कैस्केडिंग प्रशिक्षण योजना क्या है?
यह बहु-स्तरीय प्रशिक्षण मॉडल है जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर राज्य स्तर के प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करते हैं, और वे आगे जिला व ग्राम स्तर के CRP को प्रशिक्षित करते हैं। इससे ज्ञान का व्यापक प्रसार सुनिश्चित होता है।
सरकार की प्रमुख रणनीति
महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन
सामूहिक उत्पादन और विपणन
क्लस्टर आधारित विकास
तकनीकी उन्नयन और नवाचार
बाजार से सीधा जुड़ाव
DAY-NRLM के अंतर्गत सहायक कार्यक्रम
1. उत्पादक समूह (Producer Groups)
ये समान गतिविधियों से जुड़े सदस्यों के समूह हैं। सामूहिक क्रय-विक्रय से लागत घटती है और लाभ बढ़ता है।
2. स्टार्ट अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (Start-Up Village Entrepreneurship Programme – SVEP)
ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने हेतु तकनीकी और वित्तीय सहायता।
3. वन स्टॉप सुविधा
महिला उद्यमियों को पंजीकरण, लाइसेंस, विपणन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग आदि में एकीकृत सहायता।
4. माइक्रो एंटरप्राइज़ डेवलपमेंट कार्यक्रम
व्यवसाय विस्तार, गुणवत्ता सुधार और मूल्य संवर्धन के लिए समर्थन।
5. क्लस्टर मध्यस्थता
दो प्रकार के क्लस्टर विकसित किए जाते हैं:
कारीगर क्लस्टर (हथकरघा, हस्तशिल्प)
क्षेत्रीय क्लस्टर (खाद्य सेवा, पर्यटन, पोषण आदि)
हल्के हस्तक्षेप: डिजाइन विकास, गुणवत्ता आश्वासन, बाजार विकास।
कठोर हस्तक्षेप: सामूहिक उद्यम, सामान्य सुविधा केंद्र (Common Facility Center – CFC) और सामान्य उत्पादन केंद्र (Common Production Center – CPC) की स्थापना।
प्रत्येक क्लस्टर में कम से कम 100 सूक्ष्म उद्यम शामिल किए जा सकते हैं।
वित्तीय प्रावधान
प्रति क्लस्टर 5 करोड़ रुपये का प्रावधान।
पारंपरिक उद्योगों के उत्थान के लिए निधि योजना (Scheme of Fund for Regeneration of Traditional Industries – SFURTI) से अतिरिक्त सहयोग।
विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) और विकास आयुक्त (हथकरघा) की योजनाओं से समन्वय।
वित्तीय सहायता की उपलब्धता
स्वयं सहायता समूहों को बैंक ऋण, सामुदायिक निवेश कोष, ब्याज अनुदान और विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध है।
‘लखपति दीदी’ केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन का आंदोलन है। स्वयं सहायता समूहों की शक्ति, कौशल विकास, वित्तीय समर्थन और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से महिलाएँ न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि अपने परिवार और समुदाय के विकास की धुरी बन रही हैं।
यदि आप स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं या ग्रामीण महिला उद्यमिता में रुचि रखती हैं, तो यह पहल आपके लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त अवसर प्रदान करती है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
