‘लो-कार्ब या लो-फैट’ नहीं, दिल की सेहत का असली आधार निकली भोजन की गुणवत्ता

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नवीन समाचार, नई दिल्ली, 2 मार्च 2026 (Food Quality Imp-No Low-Carb-Low-Fat)। मनुष्य के शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग हृदय के स्वास्थ्य (Heart Health) पर एक महत्वपूर्ण शोध सामने आया है, जिसने ‘लो-कार्ब (Low Carb) बनाम लो-फैट (Low Fat)’ यानी कम कार्बोहाइड्रेट और कम वसा की पुरानी बहस को नई दिशा दे दी है। लगभग दो लाख लोगों पर तीन दशक तक चले अध्ययन के आधार पर बताया गया है कि दिल को स्वस्थ रखने में कार्बोहाइड्रेट या वसा कम करना उतना निर्णायक नहीं है, जितना भोजन की गुणवत्ता। इस निष्कर्ष का बड़ा प्रभाव आम लोगों की खानपान आदतों और स्वास्थ्य नीतियों पर पड़ सकता है।

शोध ने क्या बताया

(Food Quality Imp-No Low-Carb-Low-Fat दिल की सेहत का असली राज, न लो-कार्ब, न लो-फैट… बल्कि ये है असली गेम-चेंजर!  स्टडी में हुआ खुलासा | Heart Health Hack: Forget Low-Carb and Low-Fat, This  One Thing is theअमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय (Harvard University) के सार्वजनिक स्वास्थ्य शोधकर्ताओं ने यह दीर्घकालिक अध्ययन किया है, और इसे जर्नल ऑफ अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (Journal of the American College of Cardiology) में प्रकाशित किया गया है।

इस अध्ययन में लगभग दो लाख स्वास्थ्य पेशेवरों के खानपान और स्वास्थ्य का लगभग 30 वर्षों तक विश्लेषण किया गया है और यह शोध 52 लाख से अधिक व्यक्ति-वर्ष (Person-Years) के आंकड़ों पर आधारित है। शोधकर्ताओं ने पाया कि सभी ‘लो-कार्ब या लो-फैट’ आहार समान रूप से लाभकारी नहीं होते। वरन परिणाम मुख्यतः भोजन की गुणवत्ता पर निर्भर करते हैं।

खराब गुणवत्ता वाले आहार का असर

अध्ययन में सामने आया है कि जिन लोगों के भोजन में—

  • प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (Processed Food)

  • अधिक लाल मांस (Red Meat)

  • परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट (Refined Carbs)

  • ट्रांस वसा (Trans Fat)
    अधिक थे, उनमें हृदय रोग का जोखिम अधिक पाया गया, भले ही उनका आहार लो-कार्ब या लो-फैट श्रेणी में क्यों न रखा गया हो।

अच्छी गुणवत्ता वाला भोजन कैसा

शोध के अनुसार संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेने वालों में—

  • एचडीएल (HDL) अर्थात अच्छा कोलेस्ट्रॉल अधिक

  • सूजन के संकेतक कम

  • कोरोनरी हृदय रोग (Coronary Heart Disease) का जोखिम कम

अच्छे आहार में मुख्य रूप से शामिल पाए गये:

  • हरी सब्जियां

  • मौसमी फल

  • साबुत अनाज जैसे ओट्स और ब्राउन राइस

  • स्वास्थ्यकर वसा जैसे मेवे, बीज और ऑलिव ऑयल

  • पर्याप्त प्रोटीन

क्या सभी कार्बोहाइड्रेट और वसा हानिकारक हैं

अध्ययन स्पष्ट करता है कि सभी कार्बोहाइड्रेट हानिकारक नहीं होते। मैदा और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थ नुकसानदेह हो सकते हैं, जबकि फाइबर युक्त साबुत अनाज उपयोगी हैं।
इसी प्रकार ट्रांस वसा और अत्यधिक संतृप्त वसा हानिकारक हैं, जबकि बादाम, अखरोट, मूंगफली और अलसी जैसे स्रोतों से मिलने वाली वसा हृदय के लिए लाभकारी मानी गई।

विशेषज्ञों की राय

अध्ययन का नेतृत्व करने वाले महामारी विशेषज्ञ झीयुआन वू (Ziyuan Wu) ने कहा कि भोजन की गुणवत्ता का डयन रखे बिना केवल पोषक तत्वों की मात्रा पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है।
जर्नल के संपादक और येल विश्वविद्यालय (Yale University) के हृदय रोग विशेषज्ञ हार्लन क्रमहोल्ज़ (Harlan Krumholz) ने भी माना कि यह शोध लो-कार्ब बनाम लो-फैट की बहस से आगे बढ़कर गुणवत्तापूर्ण भोजन पर जोर देता है।

भारतीय संदर्भ में क्या बदलना चाहिए

विशेषज्ञों के अनुसार भारत में अक्सर या तो घी-तेल पूरी तरह बंद कर दिया जाता है या चावल-रोटी को दोषी ठहरा दिया जाता है। जबकि संतुलित दृष्टिकोण अधिक उपयोगी है।
उदाहरण के तौर पर—

  • सफेद चावल के स्थान पर समय-समय पर ब्राउन राइस

  • मैदे के बजाय बहु-अनाज आटा

  • तली चीजों के स्थान पर भाप या पानी में उबली सब्जियां

  • प्रतिदिन सलाद का सेवन

क्यों महत्वपूर्ण है यह अध्ययन

चूंकि हृदय रोग भारत सहित विश्व में मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। ऐसे में यह शोध बताता है कि कठोर डाइटिंग के बजाय समझदारी से भोजन चुनना अधिक प्रभावी रणनीति हो सकती है। क्या हमारी थाली में विविधता और प्राकृतिक भोजन बढ़ाना अब नई स्वास्थ्य नीति का आधार बनेगा। इस पर विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की नजर बनी हुई है। उल्लेखनीय व दिलचस्प बात है कि उत्तराखंड सहित देश का परंपरागत-मोटे अनाज का भोजन इस कसौटी पर सटीक बैठता है। 

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